मनोज ज्वाला

* लेखन- वर्ष १९८७ से पत्रकारिता व साहित्य में सक्रिय, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं से सम्बद्ध । समाचार-विश्लेषण , हास्य-व्यंग्य , कविता-कहानी , एकांकी-नाटक , उपन्यास-धारावाहिक , समीक्षा-समालोचना , सम्पादन-निर्देशन आदि विविध विधाओं में सक्रिय । * सम्बन्ध-सरोकार- अखिल भारतीय साहित्य परिषद और भारत-तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य ।

सत्ता सौंपने से पहले जांच ली गई थी नेहरू की ब्रिटेन-परस्त अंग्रेज-भक्ति

मालूम हो कि ब्रिटेन को सैन्य-शक्ति के सहारे भारत से खदेड भगाने के लिए आजाद हिन्द फौज कायम कर अपनी सरकार बना लेने के पश्चात जर्मनी-जापान के सहयोग से भारत के पूर्वोत्तर सीमा-क्षेत्र में घुस इम्फाल एवं कोहिमा पर कब्जा कर लेने वाले सुभाष चन्द्र बोस ने जुलाई १९४५ में बंगाल पर आक्रमण करने की पूरी तैयारी कर ली थी और खुली धमकी दे रखी थी ।

रावण-दहन से ज्यादा जरुरी है मैकाले-दहन

मालूम हो कि ईस्ट इण्डिया कम्पनी के माध्यम से भारत पर अपना औपनिवेशिक शासन-साम्राज्य कायम कर लेने के पश्चात अंग्रेजों ने पहले तो अपने साम्राज्यवादी उपनिवेशवाद का औचित्य सिद्ध करने के लिए अपने तथाकथित विद्वानों-भाषाविदों के हाथों प्राचीन भारतीय शास्त्रों-ग्रन्थों को अपनी सुविधा-योजनानुसार अनुवाद करा कर उनमें तदनुसार तथ्यों का प्रक्षेपण कराया और फिर बाद में भारतीय शिक्षण-पद्धति

भाषा-विज्ञान में साम्राज्यवादी षड्यंत्रों से सावधान !

मनोज ज्वाला यूरोप के रंग-भेदकारी औपनिवेशिक साम्राज्यवादियों ने सम्पूर्ण विश्व, विशेष कर भारत पर अपना