राजनीति मप्र में कांग्रेस का संकट July 25, 2019 / July 25, 2019 | Leave a Comment डॉ अजय खेमरिया सिंधिया को घर मे ही घेरने का संदेश है मप्र में पहली राजनीतिक नियुक्ति! *मप्र कांग्रेस में दिग्विजय कमलनाथ की युगलबंदी फिलहाल सिंधिया पर भारी (डॉ अजय खेमरिया) सरकार ने अपनी पहली राजनीतिक नियुक्ति काँग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के घर ग्वालियर से की है ।ग्वालियर निवासी मप्र कांग्रेस के उपाध्यक्ष […] Read more » Congress congress crisis in MP madhyapradesh
साहित्य नवगीत July 25, 2019 / July 25, 2019 | Leave a Comment अविनाश ब्यौहार रोई आँगन में बरसात। भीगी बिल्ली सी रात डरी। पावस की बातें हरी हरी।। अंदेशों मे जागी प्रात। बारिश का कहर हुआ तड़के। मेघा गरजे बिजली कड़के।। बूंदों की बाँटे खैरात। अविनाश ब्यौहार रायल एस्टेट कटंगी रोड जबलपुर Read more » hindi form navgeet new song
गजल हिंदी गजल July 25, 2019 / July 25, 2019 | Leave a Comment अविनाश ब्यौहार देश का नहीं उनका विकास है। जिनके तन पर महँगा लिबास है।। रहजनी रात के अंधेरे में, दिन में उनकी इज्जत झकास है। वे बैठे मिले तनहाईयों में, क्यों लगा कि कोई आस पास है। दफ्तर ज्यों पीपल का पेड़ हुआ, देव नहीं बल्कि जिन का वास है। आज वक्त इस तरह बदला […] Read more » gazal hindi hindi gazal
लेख कश्मीर मसले पर झूठ बोलकर डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से किया विश्वासघात July 24, 2019 / July 24, 2019 | Leave a Comment हस्तक्षेप / दीपक कुमार त्यागी एडवोकेट स्वतंत्र पत्रकार व स्तंभकार अपने झूठ बोलने व बड़बोलेपन की आदत के लिए विश्व में प्रसिद्ध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जुलाई को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से अमेरिका में मुलाकात के दौरान इमरान खान को खुश करने के लिए कश्मीर मसले पर मध्यस्थता करने का बेहद विवादास्पद बयान […] Read more » donald trumph kashmir
महत्वपूर्ण लेख भाषाई समरूपता से अखण्डित राष्ट्र की परिकल्प July 24, 2019 / July 24, 2019 | Leave a Comment डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’ माँ, माटी और मातृभाषा की अनिवार्यता और यथोचित सम्मान की चाह होना हर भारतवंशी का कर्तव्य भी है और नैतिक जिम्मेदारी भी। राष्ट्र केवल लोग नहीं बल्कि वहाँ का समाज, संस्कृति, लोगों के अंदर की भावनाएं, वहाँ की भाषा, वहाँ की जिम्मेदारव्यवस्था मिल कर बनाते है। और राष्ट्र के सम्पूर्ण तत्व की व्याख्या उस राष्ट्र का उपलब्ध ज्ञान भंडार ही कर सकता है, वहाँ की शिक्षा व्यवस्था से उसकी प्रासंगिकता प्रचारित होती है। उस राष्ट्र की आंतरिक अखण्डता और उसे एक सूत्र में बंधे रहने कीआवश्यकता का एकमात्र समाधान भाषाई समरूपता है, यानी ‘एक देश-एक जनभाषा’ की अनिवार्यता होने से सम्पूर्ण राष्ट्र में सामान्य लोक व्यवहार का सहज और सरल हो जाना निहित है।ऐसा इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि विभिन्न भाषा-भाषियों के मध्यआपसी सामंजस्य स्थापित करने के लिए किसी एक बिंदु का एक जैसा होना जरूरी है। किंतु जहाँ बात संवाद की आती है वहाँ संवाद का प्रथम सूत्र ही भाषा का एक होना है। वर्तमान में हिंदुस्तान में लगभग 500 से अधिक बोलियाँ व 22 भाषाएँ उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में जब तमिलनाडु से व्यवहार करना हो तो व्यक्ति को तमिल सीखना होगी और जब पंजाबी से व्यवहार करना हो तो पंजाबी। ऐसे में सामान्य बोलचाल की भाषाएक जैसी नहीं होने से संवाद की स्थापना असंभव है, और बिना संवाद के व्यापार, विनिमय, रिश्तेदारी आदि सभी ताक में रह जाते है। अन्य प्रान्त के लोगों में संवाद की सफलता के लिए एक मध्यस्थ भाषा का होना अत्यंत आवश्यक है। इस कमी को अंग्रेजी भी पूरा कर सकती है किंतु अंग्रेजी स्वभाषा नहीं है, और भारत चूँकि ग्राम प्रधान राष्ट्र होने से आज भी अंचल में अंग्रेजी प्रासंगिक और सहज नहीं है। इसीलिए हिंदी भाषा ही जनभाषा के रूप में एकमात्र श्रेष्ठ विकल्प उपलब्ध है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने लिखा है कि- ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को शूल।’ निजभाषा का महत्व सदा से ही अपनेपन के साथ संस्कार सींचन हेतु आवश्यक माना गया है। आरंभिक दौर में प्राकृत, पाली से सजा राष्ट्र का तानाबाना देवभाषा संस्कृत के प्रचारित होने के बाद सज नहीं पाया, संस्कृत भी आज के दौर में जनभाषा नहीं हैक्योंकि उसे बोलने-समझने वाले लोग अब मुट्ठीभर शेष है। प्राकृत-पाली के साथ संस्कृत निष्ठ हिन्दी का जन्म हुआ और यह हिन्दी ने जनता के बीच क्षेत्रीय भाषाओं से अधिक स्थान प्राप्त किया। क्षेत्रीय भाषाओं का अपना एक सीमित दायरा है इसमें कोई संशय नहीं है, और आज हिंदुस्तान के 57 प्रतिशत लोगों की मातृभाषा हिंदी ही है। शेष 43 प्रतिशत लोग भी हिंदी से अपरिचित नहीं है, वे जानते-समझते है किंतु उनकी स्थानीय भाषाओं में वे ज्यादादक्ष है, ज्यादा प्रवीण है। इसीलिए जनभाषा के तौर पर हिन्दी की अस्वीकार्यता नहीं हो सकती, रही बात हिन्दी के विरोध की तो यह केवल भ्रम से उत्पन्न या कहे राजनैतिक प्रेरित विरोध के स्वर है। क्योंकि हिन्दी के प्रचारकों ने जिस तरह हिन्दी को एकसंस्कृति ही बना कर प्रस्तुत किया यह बहुत गलत है। हिन्दी एक भाषा है, न कि अकेली एक संस्कृति या धर्म। हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान की सोच से ही हिन्दी भाषा का हश्र बिगड़ा हुआ है। भाषा महज अभिव्यक्ति का माध्यम और जनसंवाद का केंद्र है। यह कदापि सत्य नहीं है कि यदि हिंदी भाषा होगी तो हिन्दूराष्ट्र बनेगा। आज चलन में अंग्रेजी भाषा का प्रभाव ज्यादा है ,तो क्या हम यह मान ले कि देश फिर इंग्लिशतान या ईसाईयत की तरफ बढ़ गया? या देश पुनः गुलाम हो चुका? भारत एक गणतांत्रिक राष्ट्र है, यहाँ प्रश्न अपनी जनभाषा के सम्मान का है न कि किसी धर्म के आधिपत्य का। भाषा किसी धर्म या पंथ की प्रतिलिपि नहीं होती, भाषा तो संवाद और संचार का माध्यम है। यहाँ बात स्वभाषा की स्थापना की है, न कि धर्म के साथजोड़ कर भाषा की हत्या की। हाल बुरा तो इसी सोच के चलते उर्दू का भी हुआ है। उर्दू के उम्दा फनकार राहत इंदौरी जी का शेर है- क़त्ल उर्दू का भी होता है और इस निस्बत से, लोग उर्दू को मुसलमान समझ लेते हैं जब हिन्दी को हिन्दू और उर्दू को मुसलमान माना जाता है तो इन्ही खोखले आधारों से भाषा के कारण युद्ध और विरोध का जन्म होता है। इसी पर तथाकथित लोगों को राजनीति करने का मौका मिल जाता है, इसे वे एक संस्कृति या धर्म को थोपना बताकरएक जनभाषा की हत्या कर देते है। भाषा मनोवैज्ञानिक प्रभाव का कारक हो सकती है पर वो कभी भी किसी धर्म की ठेकेदार नहीं होती। विखण्डनवादी सोच के चलते हिन्दुस्तान में आज सांस्कृतिक अखण्डता खतरे में है। क्योंकि हिन्दी कही थोपी नहीं जा रही, जो लोग कहते है कि आप हमारी दक्षिण भारतीय भाषा सीखिए, तो वे भी ये बताएं कि कितने प्रतिशत लोगों तक संवाद उससे सहज होगा,मात्र 8 से 10 प्रतिशत लोगों से और हिन्दी के कारण कम से कम 57प्रतिशत और अधिकतम Read more » Conceptualized nation language linguistic symmetry mother tounge
गजल हिंदी गजल July 24, 2019 / July 24, 2019 | Leave a Comment अविनाश ब्यौहार नेताजी हो गए अजागर। जनतंत्र है देश का नागर।। उफना रही सरिता अगर है, ढूंढ़ो यहाँ सुरक्षित बागर। तुम सदियों की प्यास बनो तो, मै भी अब हो जाऊँ छागर। जीवन है इक नाव सरीखा, ठौर ठिकाना होता पागर। तन्हा तन्हा इस कस्बे से, चला गया सुख का सौदागर। अविनाश ब्यौहार रायल एस्टेट […] Read more » hindi hindi gazal hindi literature literature
पर्यावरण लेख खुशियां हो या गम, आओ पेड़ लगाये हम July 23, 2019 / July 23, 2019 | Leave a Comment युद्धवीर सिंह लांबा पर्यावरण संतुलन के लिए पौधरोपण बहुत ही जरूरी है। प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन व वृक्षों के अंधाधुंध कटान नहीं रुका तो मानव के अस्तित्व पर भी खतरा पड़ जाएगा। तेजी से दूषित हो रहे पर्यावरण को बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाए जाने की जरुरत है। पर्यावरण प्रदूषण आज मानव […] Read more » Environment happiness natural essential sadness tree plantation
लेख देवालय जाना हो तो ‘आजाद’ का देवालय जाइए July 23, 2019 / July 23, 2019 | Leave a Comment -मनोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार तारीखों के पन्ने में जुलाई 23 तारीख भी दर्ज है लेकिन यह तारीख पूरे भारत वर्ष के लिए गौरव की तारीख है. इस दिन धरा में एक ऐसे बच्चे की किलकारी गूंजी थी जिसने भारत वर्ष को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त करा दिया. स्वयं शहीद होकर इतिहास के पन्ने पर […] Read more » Bhagat Singh birth anniversary devayala
कविता हिंदी ग़ज़ल July 23, 2019 / July 23, 2019 | Leave a Comment कुछ भी कर लो राजनीति में। कोठी भर लो राजनीति में।। रूप अगर मोहित करता हो सीता हर लो राजनीति में। सेर पे सवा सेर हुआ है, थोड़ा डर लो राजनीति में। पाँच साल में डेरा बदले, कच्चा घर लो राजनीति में। वोटों का है खेल निराला, चमचा धर लो राजनीति में। अविनाश ब्यौहार रायल […] Read more » hindi hindi gazal hindi poetry
गजल हिंदी गजल July 22, 2019 / July 22, 2019 | Leave a Comment अपराध हुआ पर सजा नहीं। जरूरी बात पर रजा नहीं।। बन गए जो महान हस्तियाँ, उनका प्रयाण पर कजा नहीं। नृत्य देख शोख सुंदरी का, हुई बेरुखी पर मजा नहीं। गद्दी मिल गई रहनुमा को, मिलते सब सुख पर प्रजा नहीं। गर वहशत फैली तो मानो, अमन जरूरी पर गजा नहीं। अविनाश ब्यौहार जबलपुर Read more » hindi hindi gazal
व्यंग्य ऊंची नाक का सवाल (व्यंग्य) July 22, 2019 / July 22, 2019 | Leave a Comment इस दौर में जब देश में बाढ़ का प्रकोप है तो नाक से सांस लेने वाले प्राणियों में नाक एक लक्ष्मण रेखा बन गयी है ,पानी अगर नाक तक ना पहुंचा तो मनुष्य के जीवित रहने की संभावना कुछ दिनों तक बनी रहती है,बाकी फसल और घर बार उजड़ जाने के बाद आदमी कितने दिन […] Read more » Flood Satire
लेख विचारों पर अमल July 22, 2019 / July 22, 2019 | Leave a Comment इ. राजेश पाठक १९ वीं सदी के उत्तरार्ध में महाराष्ट्र में नारी-जागरण को लेकर एक संस्था नें खूब ख्याति प्राप्त करी थी, जिसका नाम था ‘शारदा-सदन’.इसकी स्थापना करने वालीं विदुषी, पंडिता रामाबाई के नाम से आगे चलकर विख्यात हुईं.अपने कार्य को करते-करते वे बंगाल पहुँचीं, और वहां उन्होंने अपनी पसंद से शादी भी कर ली. लेकिन भाग्य में वैवाहिक- […] Read more » Ideas to execute thoughts