श्रीराम तिवारी

लेखक जनवादी साहित्यकार, ट्रेड यूनियन संगठक एवं वामपंथी कार्यकर्ता हैं। पता: १४- डी /एस-४, स्कीम -७८, {अरण्य} विजयनगर, इंदौर, एम. पी.

जब योग का कहीं कोई विरोध है ही नहीं तो उसे करवाने की आक्रामक नाटकीयता क्यों ?

  आजकल शुद्ध  सरकारी और उसका पिछलग्गू व्यभिचारी प्रचार तंत्र नाटकीय ढंग से योगाभ्यास के बरक्स  आक्रामक और असहिष्णु

मैग्नाकार्टा ‘संधि की 800वीं सालगिरह पर लोकशाही को नमन।

 -श्रीराम तिवारी- विगत रविवार को ब्रिटेन के कुछ लोकतंत्रवादियों ने ८०० वाँ ‘मैग्नाकार्टा संधि दिवस’ मनाया। इस मैग्नाकार्टा संधि के

रुद्राक्ष की माला, त्रिशूल, कमंडल व योग क्रिया ही शुद्ध देशी! बाकी सब विदेशी है !

-श्रीराम तिवारी- मैं बचपन  से ही योग -अभ्यास और शारीरिक व्यायाम करता आ रहा हूँ। इक्कीस

राज्य सत्ता के व्यक्तिवादी निरंकुश निजाम में तीन प्रकार के ‘स्टेक होल्डर्स’ हुआ करते हैं

-श्रीराम तिवारी- यदि ईमानदार पड़ताल की जाए तो स्पष्ट परिलक्षित होगा कि शासन प्रणाली  चाहे

जब मोदी जी ने भारत के अतीत को शर्मिंदगी भरा बताया तो भाई जी खपा क्यों हो गए ?

-श्रीराम तिवारी- मेरे एक पुराने सहपाठी हुआ करते थे । विश्व विद्यालयीन जीवन में ही वे अपने ‘जनसंघी ‘पिता के प्रभाव में ‘शाखाओं ‘

पुरवा गाती रहे, पछुआ गुन-गुन करे, मानसून की सदा मेहरवानी हो !

-श्रीराम तिवारी- भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी  ने  जब चीन समेत अधिकांस पूर्व ‘एशियन टाइगर्स’

अम्बानी की जांच का आदेश देने वाला अभी तक सही सलामत है, यही क्या कम है ?

-श्रीराम तिवारी- भले ही कांग्रेस और भाजपा दोनों की विफलता से कोई तात्कालिक पूंजीवादी राजनैतिक विकल्प