धर्म-अध्यात्म “पुनर्जन्म का आधार ईश्वर-जीव-प्रकृति के नित्यत्व का सिद्धान्त” June 15, 2019 / June 15, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। वेदों ने विश्व को त्रैतवाद और ईश्वर-जीव-प्रकृति के नित्यत्व का सिद्धान्त दिया है। त्रैत में तीन सत्तायें ईश्वर, जीव व प्रकृति है जो अनादि व अविनाशी हैं। ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनन्त, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र होने सहित सर्वज्ञ, सृष्टि का […] Read more » नित्यत्व का सिद्धान्त पुनर्जन्म का आधार
धर्म-अध्यात्म “सत्यार्थप्रकाश पठित मनुष्य कल्पित ईश्वर की उपासना नहीं करता” June 14, 2019 / June 14, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। संसार में जितने भी आस्तिक मत हैं उनमें ईश्वर का स्वरूप भिन्न-भिन्न पाया जाता है जो कि तर्क एवं युक्तिसंगत नहीं है। इन सभी मतों के आचार्य कभी दूसरे मतों का अध्ययन करने का प्रयत्न नहीं करते। अपनी सत्य व असत्य बातों को ही स्वीकार कर उसका समर्थन व मण्डन करते […] Read more » satyarthprakash worship of god
धर्म-अध्यात्म वर्त-त्यौहार दायित्व याद दिलाता गंगा दशहरा June 13, 2019 / June 13, 2019 by अरुण तिवारी | Leave a Comment 12 जून – गंगा दशहरा विशेष लेखक: अरुण तिवारी ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, तिथि दशमी, हस्त नक्षत्र, दिन मंगलवार। बिंदुसर के तट पर राजा भगीरथ का तप सफल हुआ। पृथ्वी पर गंगा अवतरित हुई। ”ग अव्ययं गमयति इति गंगा” अर्थात जो स्वर्ग ले जाये, वह गंगा है। पृथ्वी पर आते ही सबको सुखी, समृद्व व शीतल […] Read more »
धर्म-अध्यात्म ईश्वर ने मुनष्य को विवेक बुद्धि क्यों दी है? June 13, 2019 / June 13, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा ने सृष्टि और इसमें विद्यमान सभी पदार्थों और प्राणियों को बनाया है। संसार में दो प्रकार की सत्तायें हैं जिन्हें चेतन व जड़ कहा जाता है। ईश्वर और जीवात्मा चेतन सत्तायें वा पदार्थ हैं तथा प्रकृति, सृष्टि तथा पृथिवी, अग्नि, वायु, जल और आकाश पंच-महाभूत कहलाते हैं। यह सभी पंच-महाभूत […] Read more »
धर्म-अध्यात्म देश के प्रति कर्तव्य और धर्म परस्पर पूरक हैं June 13, 2019 / June 13, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का जन्म माता-पिता से होता है जो किसी देश में निवास करते हैं। हो सकता है कि माता-पिता उस देश के नागरिक हों या प्रवासी भी हो सकते हैं। यदि नागरिक हैं तो बच्चा भी उस देश का नागरिक हो जाता है। माता-पिता और उनकी सन्तान का कर्तव्य है कि […] Read more »
धर्म-अध्यात्म सृष्टिकर्ता ईश्वर सबसे महान है, उससे महान कोई नहीं June 11, 2019 / June 11, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य बुद्धिमानों व विद्वानों में एक प्रश्न यह भी हो सकता है कि संसार में सबसे महान कौन है? इसका सभी आस्तिकों के लिये निर्विवाद रूप से एक ही उत्तर हो सकता है कि इस संसार को रचने, पालन करने, प्रलय करने, जीवात्मा को जन्म देने, उसके कर्मानुसार सुख व दुःख की […] Read more »
धर्म-अध्यात्म विश्व के सभी मनुष्य गोमाता का दुग्धपान करने से उसके ऋणी हैं June 10, 2019 / June 10, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा ने जिस प्रकार मनुष्य को जन्म दिया है उसी प्रकार से गाय आदि पशुओं को भी दिया है। मनुष्य के पास सीधा खड़े की क्षमता है। वह अपनी वाणी के द्वारा बोल सकता है तथा अपने हाथों से अनेक प्रकार के काम कर सकता है। कुछ पशु-पक्षियों और जलचरों को […] Read more » pay respect to cow गोमाता
धर्म-अध्यात्म जिसकी आय के स्रोत पवित्र होंगे ईश्वर उसी का कल्याण करेगा June 6, 2019 / June 6, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य जन्म लेने के बाद माता-पिता से पोषण प्राप्त करता है। वही उसकी शिक्षा का प्रबन्ध करते हैं और वह शैशवावस्था से युवावस्था में पहुंच जाता है। शिक्षा प्राप्त कर वह धनोपार्जन में प्रवृत्त होता है। घन जीवन निर्वाह के लिए सभी कृत्रिम साधनों में सबसे अधिक आवश्यक प्रतीत होता है। […] Read more »
धर्म-अध्यात्म “वेदों ने हमें सर्वतोमहान पुरुष ऋषि-मुनि और राम, कृष्ण, दयानन्द दिये” June 6, 2019 / June 6, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का निर्माण माता-पिता के पालन पोषण सहित उनके द्वारा दिये जाने वाले संस्कारों से होता है। माता-पिता हमें जो संस्कार देते हैं उन्हें वह विरासत में अपने माता-पिता व आचार्यों से प्राप्त होते हैं। हमारी यह सृष्टि 1.96 अरब वर्ष पुरानी है। इतने ही वर्ष पूर्व भारत वा आर्यावर्त्त के […] Read more »
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द की एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कृति पंचमहायज्ञ विधि June 6, 2019 / June 6, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य पांच हजार वर्ष पूर्व हुए महाभारत युद्ध के बाद देश-देशान्तर में वेद और वैदिक धर्म का प्रचार अवरुद्ध हो गया था। ऋषियों व वेदों के विद्वानों के न रहने के कारण वेदों के सत्यार्थों का भी प्रचलन न होने से समाज में वेदों के मिथ्या अर्थ प्रचलन में आ गये। स्वार्थी […] Read more »
चिंतन धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द अविद्या निवारणार्थ विद्या-अविद्या का प्रकाश किया May 27, 2019 / May 27, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द ने ईश्वर व मृत्यु विषयक अपनी शंकाओं के समाधान प्राप्त करने के लिये अपने माता-पिता व उनके घर को पूर्ण युवावस्था, आयु लगभग 21 वर्ष के बाद, छोड़ा था। वह देश भर में धार्मिक विद्वानों से मिले थे और उनसे अपनी शंकाओं का समाधान करने सहित ईश्वर प्राप्ति के उपाय […] Read more » Rishi Dayanand
चिंतन धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म एवं संस्कृति की रक्षा गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति के प्रचार एवं प्रसार से ही सम्भव May 27, 2019 / May 27, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य वेद ईश्वरीय ज्ञान होने के साथ धर्म और संस्कृति सहित सभी विद्याओं का आदि स्रोत भी है। वेद धर्म व संस्कृति विषयक पूर्ण ज्ञान प्रस्तुत करता है। वेदों की विद्यमानता में धर्म व संस्कृति के ज्ञान व उसके प्रचार व प्रचलन के लिये किसी अन्य ज्ञान की पुस्तक की आवश्यकता नहीं है। […] Read more » Gurukuli education system Protecting Vedic religion vedic religion