आर्थिकी खेत-खलिहान प्राकृतिक आपदा से संकट में खेती-किसानी March 14, 2015 / March 14, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव मध्यप्रदेश समेत पूरे देश में बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से खेती-किसानी जबरदस्त संकट में हैं। इस संकट को भ्रष्ट प्रषासनिक व्यवस्था और राजनीतिक लापरवाही ने किसान को बेहद मायूस कर दिया है। किसान को जहां खरीफ फसल की बोनी के दौरान सूखे ने परेशानी में डाला वहीं इस ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात ने […] Read more » agriculture disaster agriculture problem indian agricultural problems Indian farmer
आर्थिकी एक कार्पोरेटी बजट March 5, 2015 by संजय पराते | Leave a Comment -संजय पराते आर्थिक सर्वे के जरिये विकास का जो गुब्बारा फुलाया गया था, दूसरे दिन ही फूट गया। वर्ष 2004-05 के आधार वर्ष पर देश में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की जो विकास दर 4.7 प्रतिशत बैठती थी, उसने वर्ष 2011-12 के आधार पर 7.4 प्रतिशत की दर पर छलांग लगा ली। लेकिन पूरी दुनिया […] Read more » कार्पोरेटी बजट
आर्थिकी बजट में दिखी अच्छे दिनों की आशा March 3, 2015 / March 5, 2015 by सुरेश हिन्दुस्थानी | 1 Comment on बजट में दिखी अच्छे दिनों की आशा सुरेश हिन्दुस्थानी मात्र नौ मास पुरानी मोदी सरकार का बहुप्रतीक्षित आर्थिक बजट देश में वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा 28 फरवरी को देश की महा पंचायत लोकसभा में प्रस्तुत कर दिया गया। यदि हम बजट के मूल रूप का आकलन करें तो हम यह पाएंगे कि देश के वित्त मंत्री ने ध्वंस अर्थव्यवस्था के भग्नावशेषों […] Read more » अच्छे दिनों की आशा बजट
आर्थिकी आम बजट में खेती-किसानी March 2, 2015 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on आम बजट में खेती-किसानी प्रमोद भार्गव आम बजट को ऊपरी तौर से देखने पर ऐसा आभास हो रहा है कि यह बजट खेती-किसानी से जुड़े लोगों की चिंता करने वाला है। इस वर्ग की चिंता इसलिए भी जरूरी थी,क्योंकि 2014 के राष्ट्रिय नमूना सर्वेक्षण संगठन द्वारा पेष आंकड़ों के मुताबिक कृषि पर निर्भर लोगों की आमदनी प्रति व्यक्ति महज […] Read more » आम बजट खेती किसानी
आर्थिकी जन-जागरण टॉप स्टोरी आम बजट में आम आदमी के लिये क्या है ? March 1, 2015 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on आम बजट में आम आदमी के लिये क्या है ? इक़बाल हिंदुस्तानी किसानों के बाद मीडियम क्लास भी ठगा से महसूस कर रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था में जीडीपी के हिसाब से देखा जाये तो सर्विस सैक्टर से 57 प्रतिशत योगदान के साथ 27 प्रतिशत रोज़गार आता है। मैन्युफैक्चरिंग का सकल घरेलू उत्पाद में 18-4 प्रतिशत का योगदान है जबकि रोज़गार में उसका हिस्सा 24-3 […] Read more » आम बजट में आम आदमी
आर्थिकी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी): टैक्स सुधारों के माध्यम से विकास का एक इंजन February 23, 2015 / February 23, 2015 by सत्यव्रत त्रिपाठी | 1 Comment on वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी): टैक्स सुधारों के माध्यम से विकास का एक इंजन सत्यव्रत त्रिपाठी भारत में सबसे बडे कराधान सुधारों में से एक – वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) – सभी राज्य अर्थव्यवस्थाओं को एकीकृत और समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार है। जीएसटी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एक एकल, एकीकृत भारतीय बाजार बनाएगा। जीएसटी 2016/01/04 से लागू किया जाना निर्धारित है। केंद्र […] Read more » Goods and Sales tax gst जीएसटी
आर्थिकी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ता कर्ज का बोझ February 18, 2015 / February 18, 2015 by अंकुर विजयवर्गीय | Leave a Comment जनवरी के आखिरी सप्ताह में ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम’ की दावोस में बैठक हुई और जनवरी के आखिरी सप्ताह में ही, इस बैठक से ठीक पहले ‘ऑक्सफेम’ रिपोर्ट जारी हुई। ‘फोर्ब्स’ ने भी दुनिया में 1,645 बिलेनियरों के होने की जानकारी दी। ‘ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स’ के आंकड़ों के अनुसार, ‘दुनिया के 400 सबसे धनवान लोगों की […] Read more » वैश्विक अर्थव्यवस्था
आर्थिकी जापानी कंपनियों के जरिए दुनिया में जाता भारत राग January 17, 2015 / January 17, 2015 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत का आर्थिक मोर्चे पर सफलता का राग अब विदेशी धरती पर जोर-शोर क साथ सुनाई देने लगा है। इस दिशा में जापान में जो प्रयोग हुआ और उसके जो निष्कर्ष आए हैं। आज वे भारत के लिए कई मायने रखते हैं। इन निष्कर्षों ने बता दिया है कि भारत की स्वीकार्यता […] Read more » जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बैंक जेबीआईसी
आर्थिकी हिंद स्वराज भारत को लेकर विश्वबैंक की भविष्यवाणी को समझने का दौर January 15, 2015 / January 15, 2015 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत जाग उठा है, भारत दौड़ रहा है, भारत इस वक्त वह सभी कुछ करता नजर आ रहा है, जो कि कल तक एक सपना लगता था। जिस आबादी को लेकर तरह-तरह के तंज कसे जाते थे आज वही आबादी और उसकी श्रमशक्ति भारत की ताकत बन चुकी है। कल तक जिस […] Read more » विश्वबैंक की भविष्यवाणी
आर्थिकी बेजबरुआ समिति की सिफारिशों पर केंद्र की पहल सराहनीय January 6, 2015 by मयंक चतुर्वेदी | 3 Comments on बेजबरुआ समिति की सिफारिशों पर केंद्र की पहल सराहनीय डॉ. मयंक चतुर्वेदी देश में केंद्र या राज्यों में सरकारें बदलती हैं तो प्रशासन और आम जनता की उसे देखने की दृष्टि भी बदल ही जाती है। किसी भी नई सरकार में जनप्रतिनिधि का व्यवहार इसे जितना प्रभावित करता है, उससे कहीं अधिक लोकतंत्रात्मक व्यवस्था में उस जनप्रतिनिधि की राजनैतिक पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र […] Read more » बेजबरुआ समिति बेजबरुआ समिति की सिफारिश
आर्थिकी जन-जागरण नीति आयोग पर बेवजह प्रलाप क्यों? January 4, 2015 / January 4, 2015 by सुरेश हिन्दुस्थानी | 3 Comments on नीति आयोग पर बेवजह प्रलाप क्यों? सुरेश हिन्दुस्थानी वर्तमान मोदी सरकार ने भारत को विकास की राह पर ले जाने के लिए अभूतपूर्व काम करना प्रारंभ कर दिए हैं। मोदी सरकार का जोर है कि देश के विकास के लिए सारे काम सांघिक भाव से किए जाएं तो सफलता निश्चित ही प्राप्त होगी। इसी सामूहिक भाव को निहितार्थ करता हुआ नवगठित […] Read more » नीति आयोग
आर्थिकी जन-जागरण अर्थ की चमक में खोते मूल्यपरक व्यवसाय December 22, 2014 by डा. अरविन्द कुमार सिंह | Leave a Comment डा. अरविन्द कुमार सिंह अध्यापन और सेना की नौकरी को आज भी मूल्यपरक व्यवसाय के रूप में देखा जाता है। क्या आज के दौर में युवा वर्ग अपने आप को नैतिक मूल्यो के निर्वहन में असर्मथ पा रहा है? या अर्थ के आर्कषण ने उसे नैतिक मूल्यो के व्यवसाय के प्रति विमुख कर रख्खा […] Read more » व्यवसाय