पर्यावरण पर्यावरण: संरक्षण और प्रदूषण की समस्या एक चुनौती June 5, 2015 by बी.आर.कौंडल | Leave a Comment -बी.आर.कौंडल- प्रकृति ने हमें स्वच्छ वायु, धरा व स्वच्छ आकाश से नवाजा है | अत: प्रकृति के इन अनमोल तोहफों को संजो कर रखना हर व्यक्ति का कर्तव्य ही नही अपितु धर्म है | भारतीय संविधान में इसी सोच से नागरिकों की कर्तव्य सूची में पर्यावरण की रक्षा करना हर व्यक्ति का दायित्व बनाया गया […] Read more » Featured पर्यावरण संरक्षण पर्यावरण: संरक्षण और प्रदूषण की समस्या एक चुनौती प्रदूषण
पर्यावरण पर्यावारण शिक्षा को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता June 5, 2015 by निर्भय कर्ण | Leave a Comment -निर्भय कर्ण- पर्यावरण शिक्षा के बिना पर्यावरण संरक्षण की कल्पना नहीं की जा सकती। पर्यावरण शिक्षा से न केवल इसके संरक्षण के बारे में विशेष ज्ञान प्राप्त होता है बल्कि इससे संबंधित अनेक पहलूओं के बारे में भी जानकारीमिलती है। जिस प्रकार वातावरण में प्रदूषण विकराल रूप धारण करता जा रहा है उस हिसाब से पर्यावरण शिक्षा अतिआवश्यक और महत्वपूर्ण होती जा रही है। पिछले साल अमेरिका की राष्ट्रीय महासागर और वायुमंडलप्रशासन और स्क्रिप्स इंस्टीट्यूट आफ ओसिएनोग्राफी द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया कि वायुमंडल में कार्बनडाईआक्साइड का स्तर 400 पीपीएम (कण प्रति दस लाख) के स्तर पर पहुंच गया है। जबकि 1750 में औद्योगिकक्रांति के शुरुआत में यह स्तर 280 कण प्रति दस लाख थी। इन आंकड़ों से हम यह सहज ही समझ सकते हैं कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए किस कदर काम करने की जरूरत है और पर्यावरण शिक्षा को आगेबढ़ाने की भी। पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से इसके और प्रदूषण के बीच बढ़ती नजदीकियां के बारे में न केवल हम वाकिफ होते हैं बल्कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से कैसे बचाया जाए, इसे प्रभावित करने वाले कारक संबंधी तमामजानकारी भी हासिल होती है जिससे हम मानव इसके प्रति जागरूक एवं संवेदनशील होते है। यह जगजाहिर है कि पर्यावरण एवं प्रदूषण के बीच अन्योन्याश्रय संबंध होता है जिसमें वनों की भूमिका उल्लेखनीय है और यहीसंबंध वन और जल के बीच है। वन पर्यावरण को बचाने के लिए जितना उत्तरदायी है उतना ही प्रदूषण के लिए भी। वनों के सिमटने से पर्यावरण को खतरा तो पहुंच ही रहा है साथ ही हमारे अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगाहै। इसके कारण जीवन के लिए आवश्यक हर तत्व एक-दूसरे को प्रभावित करते हुए जीवों के अस्तित्व को ललकार रहे हैं। दिन-प्रति-दिन तापमान में लगातार असमानता चिंतनीय विषय बन चुका है जिसके लिए मानवगतिविधियां जिम्मेदार है। वनों का सृजन, प्रबंधन, उपयोग एवं संरक्षण की विधा को वानिकी कहा जाता है। वानिकी के सिमटने का मुख्य कारण है जनसंख्या वृद्धि। आबादी को आवास, भोजन के साथ तमाम बुनियादी चीजों की आवश्यकताहोती है। भोजन एवं अन्य चीजों की जरूरत के लिए उद्योगों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है और उद्योग के लिए जमीन सहित सभी संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है। इन सब वजहों से एक तरफ तो वन सिमट रहा है तो दूसरीतरफ इससे हो रहा प्रदूषण विकराल रूप धारण करता जा रहा है चाहे वह वन प्रदूषण हो या फिर जल प्रदूषण या फिर भूमि प्रदूषण आदि। विकास के नाम पर पर्यावरण को अंधाधुंध क्षति पहुंचायी जा रही है। भारत में ही विगतनौ वर्षों में 2.79 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र विकास की भेंट चढ़ गये जबकि 25 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रत्येक साल घट रहा है। यहां यह उल्लेख करना दिलचस्प है कि भारत में ही अभी 27.5 करोड़ लोग वनों से होने वाली आय परनिर्भर हैं। वहीं वनों पर आश्रित पानी की बात करें तो बढ़ती जरूरतें और घटता पानी भारत ही नहीं संपूर्ण दुनिया की समस्या बन चुकी है। भारत में दुनिया की 18 फीसदी आबादी है और जल स्त्रोत केवल चार फीसद। एकअध्ययन के मुताबिक, 2050 में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता वर्तमान के लगभग 1500 घनमीटर प्रति साल से घटकर 1140 घनमीटर प्रति साल रह जाएगी। इन आंकड़ों से हम सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि वनों केसिमटने से हमारे जीवन पर कितना असर पड़ रहा है और आने वाले समय में और इसका कितना व्यापक असर पड़ेगा। उपरोक्त संकटों को देखते हुए पर्यावरण शिक्षा को स्कूलों, विश्वविद्यालयों आदि जगहों में शामिल कराना दुनिया के एजेंडे में 1992 में ही आ गया था। 2005 में यूनेस्को ने अगले 10 सालों के लिए पर्यावरण के टिकाऊविकास हेतु शिक्षा नाम से नया अभियान भी शुरू किया लेकिन कुछ विशेष सफलता अब तक हाथ नहीं लगी है। यूनेस्को के टिकाऊ विकास कार्यक्रम के लिए जर्मनी की राष्ट्रीय समिति के प्रमुख गेरहार्ड डे हान का कहना था किहालांकि यह सब मुख्य रूप से स्वैच्छिक रूप से ही हो रहा है और यह शिक्षकों-स्कूलों पर निर्भर है। ये विषय स्कूलों के अधिकारिक पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए। यह साफ है कि पर्यावरण शिक्षा को दुनियाभर के स्कूलों मेंअनिवार्य करना ही एक विकल्प रह गया है तभी जाकर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। पर्यावरण संरक्षण का कार्य विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा लंबे समय से किया जाता रहा है लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। इसी क्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पर्यावरणविद एम सी मेहता ने भारत केसमस्त विद्यालयों, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में पर्यावरण का अनिवार्य पाठ्यक्रम लागू करने के लिए एक याचिका उच्चतम न्यायालय में दाखिल की थी ताकि बचपन से ही विद्यार्थियों केमन में पर्यावरण संरक्षण की सोच विकसित हो सके। अंततः उच्चतम न्यायालय ने 18 दिसंबर 2003 में इस याचिका पर ऐतिहासिक निर्णय सुनाया जिसके अन्तर्गत एआईसीटीई, एनसीईआरटी, यूजीसी को पर्यावरण काअनिवार्य पेपर 2004-05 सत्र से लागू करने का आदेश दिया और पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही। लेकिन इन आदेशों का हश्र क्या है, यह सभी जानते हैं वरना प्रदूषण बढ़ने के बजाए दिन-प्रति-दिनघटता ही जाता। पर्यावरण शिक्षा से संबंधित कई कोर्सेज भी उपलब्ध हैं। इन कोर्सों को करके पर्यावरण में विशेषज्ञता हासिल करके इसमें एक उज्जवल करिअर का स्कोप है जिसे बस भूनाने की आवश्यकता है। इस हेतु युवाओं कोमागदर्शन कर प्रशिक्षण देकर पर्यावरण की बेहतरी के लिए तैयार करना होगा। समय इस बात की ओर इंगित करती है कि पर्यावरण शिक्षा को सख्ती और अनिवार्य रूप से लागू किया जाए और जीवनदायिनी पर्यावरण कोसमय रहते बचा लिया जाए। इससे न केवल पर्यावरण और प्रदूषण के बीच संतुलन कायम होगा बल्कि हमारा अस्तित्व भी बरकरार रह सकेगा। Read more » Featured पर्यावरण दिवस पर्यावारण पर्यावारण शिक्षा को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता
पर्यावरण धर्म सीखाता है पर्यावरण की रक्षा करना June 2, 2015 / June 2, 2015 by अभिषेक कांत पांडेय | Leave a Comment -अभिषेक कांत पाण्डेय- -पर्यावरण दिवस पर विशेष- धरती कभी आग का गोला था, पर्यावरण ने इसे रहने लायक बनाया और प्रकृति ने मुनष्यों सहित सारे जीवों, पेड़-पौधों का क्रमिक विकास किया। प्रकृति और जीव एक दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति सत्य है, जो धर्म को धारण करती है, इसीलिए ब्रह्माण्ड में केवल धरती पर ही […] Read more » Featured धर्म सीखाता है पर्यावरण की रक्षा करना पर्यावरण पर्यावरण की रक्षा
पर्यावरण पर्यावरण संरक्षण और भारत April 8, 2015 / April 11, 2015 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के प्रति यह सरकार कितनी इमानदार और गंभीर है इसका एक सुन्दर दृश्य देश भर के पर्यावरण मंत्रियों के सम्मलेन में प्रधानमंत्री अपनी बात रखते हुये देखने को मिला .जहाँ हमारे प्रधानमंत्री ने दादी नानी की कहानियों के माध्यम से यह याद दिलाया की वर्तमान के गंभीर पर्यावरणीय संकटों के बीच […] Read more » Featured पर्यावरण संरक्षण और भारत प्रभांशु ओझा वायु-प्रदूषण और भारत
आर्थिकी जरूर पढ़ें पर्यावरण महत्वपूर्ण लेख राजनीति दूषित जल पिलाने की तैयारी March 23, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment औद्योगिक विकास और बढ़ते शहरीकरण ने आखिरकार अमेरिका समेत पूरी दुनिया में ऐसे हालात पैदा कर दिए है कि मल-मूत्र का शुद्धिकरण करके बोतलबंद पेयजल के निर्माण का धंधा षुरू हो गया है। दिग्गज कंप्युटर कंपनी माइक्रोसाप्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स ने इस पानी को पीकर इसके शुद्ध होने की पुश्टि की है। इस […] Read more » dirty water water related disease दूषित जल दूषित जल पिलाने की तैयारी
जन-जागरण पर्यावरण घटती धरती घटता जल, नदियां हैं अमर-अचल February 10, 2015 / February 10, 2015 by सत्यव्रत त्रिपाठी | Leave a Comment > नदी स्वच्छता कार्यक्रम के लिए धन जुटाने की व्यवस्था में पिछले कई वर्षों के दौरान कई बदलाव हुए हैं। गंगा कार्य योजना (जीएपी), जो 1985 में शुरू हुई थी, शत प्रतिशत केंद्र पोषित योजना थी। जीएपी के दूसरे चरण में 1993 में आधी राशि केद्र सरकार और आधी राशि संबंधित राज्य सरकारों द्वारा जुटाए […] Read more » river conservation घटती धरती घटता जल नदियां हैं अमर-अचल
पर्यावरण नदी संरक्षण February 9, 2015 / February 9, 2015 by कविता बालियान | Leave a Comment जब हम नदियों के संरक्षण की बात करते है तो बहुत ही अजीब सी भावना मन मे उठती है कि क्या ये सम्भव है? क्या हम नदियों का साफ सुथरा, स्वच्छ रख सकेंगे। नदियॉ इतनी दूषित ही क्यों हैं? क्या कारण है इसके पीछे? कुछ लोगों के विचार में भारत देश में व्याप्त अन्धविश्वास नदियों […] Read more » river conservation नदी संरक्षण
पर्यावरण वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती February 9, 2015 / February 9, 2015 by बी.आर.कौंडल | Leave a Comment प्रकृति ने हमें स्वच्छ वायु, धरा व स्वच्छ आकाश से नवाजा है | अत: प्रकृति के इन अनमोल तोहफों को संजो कर रखना हर व्यक्ति का कर्तव्य ही नही अपितु धर्म है | भारतीय संविधान में इसी सोच से नागरिकों की कर्तव्य सूची में पर्यावरण की रक्षा करना हर व्यक्ति का दायित्व बनाया गया है […] Read more » वायु प्रदूषण वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती
पर्यावरण “कूलन में ,केलि में, कछारन में, कुंजन में,क्यारिन में……..! January 24, 2015 / January 24, 2015 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment भारतीय महादीप को वसंत ऋतू के आगमन की सूचना देने वाले ‘ऋतुराज वसंत’ जहाँ-कहीं भी हो उनसे निवेदन है कि नव-धनाढ्य वर्ग की चालु किस्म की मॉडल्स , हालीबुड -बॉलीवुड स्थित ऐश्वर्य शालिनी फ़िल्मी नायिकाओं के हरम , अमीरों के विशाल बाग़ बगीचों और सभ्रांत लोक की पतनशील वादियों से फुर्सत मिले तो आज कुछ क्षणों के लिए […] Read more » वसंत
जन-जागरण पर्यावरण मल-मूत्र से बना पेयजल January 21, 2015 / January 21, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment मल-मूत्र से बना पेयजल प्रमोद भार्गव औद्योगिक विकास और बढ़ते शहरीकरण ने आखिरकार अमेरिका समेत पूरी दुनिया में ऐसे हालात पैदा कर दिए है कि मल-मूत्र का शुद्धिकरण करके बोतलबंद पेयजल के निर्माण का धंधा शुरू हो गया है। दिग्गज कंप्युटर कंपनी माइक्रोसाॅप्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स ने इस पानी को पीकर इसके शुद्ध […] Read more » मल-मूत्र से बना पेयजल
पर्यावरण सार्थक पहल भारत में बढ़ती बाघ आबादी के मायने January 21, 2015 / January 21, 2015 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ. मयंक चतुर्वेदी दुनिया में विलुप्त प्राय: स्थिति में पहुंचने के बाद पुन: अपने अस्तित्व को बनाने की दिशा में आगे आए बाघों ने जिस प्रकार प्रकृति के साथ तालमेल बनाते हुए अपनी जीवसंरचना के विकास में प्रगति की है, खासकर यह भारत के लिए आज खुशी की बात अवश्य है, क्योंकि पिछले कुछ सालों […] Read more » बढ़ती बाघ आबादी
पर्यावरण गहराते जलवायु संकट के बीच पृथ्वी बचाए रखने की चुनौती January 10, 2015 by मयंक चतुर्वेदी | 1 Comment on गहराते जलवायु संकट के बीच पृथ्वी बचाए रखने की चुनौती डॉ. मयंक चतुर्वेदी ब्रह्माण्ड का स्रजन और जीवन की उत्पत्ति यह लाखों वर्ष बीत जाने के बाद भी रहस्य बना हुआ है। इसे जानने के जितने भी प्रयास किए जाते हैं, खोजकर्ता उतने ही प्रकृति के रहस्य में समा जाते हैं। हर बार उनके मुख से यही शब्द निकलते हैं कि नेति नेति अर्थात न […] Read more » गहराते जलवायु संकट