पर्यावरण निर्धारित हों अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मापदं September 24, 2012 / September 24, 2012 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री वर्तमान कठिन दौर में जबकि लगभग सारा संसार अपने जीविकोपार्जन हेतु संघर्षरत है,दुनिया में मंहगाई,बेरोज़गारी तथा कुपोषण बढ़ता जा रहा है। उधर प्रकृति भी तथाकथित मानवीय विकास से नाराज़ नज़र आ रही है तथा पृथ्वी पर प्रलयरूपी कोई न कोई तांडव समय-समय पर करती रहती है। दुनिया के मौसम तेज़ी से परिवर्तित हो […] Read more » अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
पर्यावरण हिमालय की दुर्दशा से पर्यावरण संकट में September 21, 2012 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment दिनेश पंत इस वर्ष देश में उम्मीद से कम और अनियमित वर्षा ने ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरे की चिंता को बढ़ा दिया है। विकास और उन्नति के नाम पर औद्योगिकीकरण ने पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। निवेश के बढ़ते अवसर ने गांव को भी तरक्की के नक्षे पर मजबूती से उकेरा है। […] Read more » हिमालय
पर्यावरण तबाही की पूर्व सूचना है नलकूप क्रांति September 21, 2012 / September 21, 2012 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव हमारे देश में बीते चौसठ सालों के भीतर जिस तेजी से कृत्रिम, भौतिक और उपभोक्तावादी संस्कृति को बढावा देने वाली वस्तुओं का उत्पादन बढ़ा है उतनी ही तेजी से प्राकृतिक संसाधनों का या तो क्षरण हुआ है या उनकी उपलब्धता घटी है। ऐसे प्राकृतिक संसाधनों में से एक है ”पानी। ‘जल ही जीवन […] Read more » नलकूप क्रांति
पर्यावरण सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और गुजरात August 30, 2012 / August 30, 2012 by विपिन किशोर सिन्हा | 5 Comments on सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और गुजरात विपिन किशोर सिन्हा हिन्दू धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि ऐसा कोई अक्षर नहीं, जिससे कोई मन्त्र न बना हो और ऐसा कोई दिन नहीं, जिसमें शुभ घड़ी न हो। इसी प्रकार अब यह कहा जा सकता है कि पृथ्वी पर ऐसा कोई स्थान नहीं जहां प्राकृतिक संपदा उपकब्ध न हो। अपने देश के गुजरात […] Read more » solar energy wind energy गुजरात पवन ऊर्जा सौर ऊर्जा
पर्यावरण गहरा रिश्ता है मनु-हरित कुल का August 24, 2012 / August 24, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य गहरा रिश्ता है मनु-हरित कुल का परंपरागत प्रजातियों का संरक्षण जरूरी प्रकृति और मनुष्य के बीच सनातन रिश्ता सदियों पुराना और गहरा है। यों कहा जाए कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं तब भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जैसी प्रकृति होगी, जिस तरह का परिवेश होगा, उसी प्रकार की स्थानीय सृष्टि का […] Read more » human and nature परंपरागत प्रजातियों का संरक्षण
पर्यावरण संकट में है उत्तराखंड के वन्य प्राणियों का अस्तित्व August 19, 2012 / August 20, 2012 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment दिनेश पंत प्रकृति का कहर एक बार फिर उत्तराखंड पर टूटा है। बादल फटने की घटना ने राज्य को भारी क्षति पहुंचाई है। राज्य के कई हिस्सों में भारी तबाही हुई है। जिसमें कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। प्राकृतिक तबाही का असर केवल आम जनजीवन पर ही नहीं पड़ता है बल्कि जीव जंतु […] Read more » वन्य प्राणी
पर्यावरण सावन के बीतने और भादों के आने से पहले सूखे की चर्चा: एक षड्यंत्र August 5, 2012 / August 5, 2012 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment प्रवीण गुगनानी मौसम विभाग के मंच से घोषित होती है उपभोक्ताओं को ठगने की योजना “वायदा व्यापार आयोग मूक बनकर देखता है” भारत जैसे कृषि प्रधान और विशाल देश में जहां विश्व का हर पांचवां व्यक्ति निवास कर रहा हो उसे लेकर प्रत्येक गतिविधि महत्वपूर्ण और संवेदन शील हो जाती है. मानसून आधारित कृषि इस […] Read more » drought सूखे की चर्चा
पर्यावरण सामुदायिक वन प्रबंधन से जंगलों का लौटाया जीवन August 1, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment नौशाद आलम डम-डमा-डम-डम-डम, वन की रक्षा अपनी सुरक्षा वनों का न करो नाश, जीवन हो जाएगा सत्यानाश डम-डमा-डम-डम-डम, वन की रक्षा अपनी सुरक्षा जंगल बचाने के लिए 36 वर्षीय राजेश्वर मोची का प्रचार का तरीका थोड़ा अलग है। वह अपने बाएं कंधे से लटकाए ढाक के ताल से तान मिलाकर लोगों से जंगल बचाने की […] Read more »
खेत-खलिहान पर्यावरण अलनीनो की चपेट में मौसम July 27, 2012 / July 27, 2012 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव बादलों की लुकाछुपी ने देश की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इस हाल ने हमारे मौसम विभाग द्वारा की जाने वाली भाविष्य वाणियों की वैज्ञानिक मान्यता को भी कठघरे में खड़ा किया है। अखिर क्या कारण हैं कि जब दुनिया के वैज्ञानिक जीवनदायी कण की खोज के निकट पहुंचकर गौरवान्वित हो रहे […] Read more » अलनीनो मौसम
पर्यावरण प्रशासन के समक्ष चुनौती बनती वर्षा ऋतु July 12, 2012 / July 12, 2012 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी जब सूर्यदेवता ग्रीष्म ऋतु में अपने प्रचंड तेवर दिखाते हैं उस समय जनता उनके इस प्रकोप से त्राहि- त्राहि करने लग जाती है। उस दौरान मनुष्य एक ओर जहां असहनीय भीषण गर्मी से परेशान हो उठता है वहीं धरती भी प्राय: इतनी भीषण गर्मी सहन न कर पाते हुए फट पड़ती है। परिणामस्वरूप […] Read more » problems in rainy season वर्षा ऋतु
पर्यावरण कंपनियों का पानी से कमाई का क्रूर जाल / डॉ. राजेश कपूर July 4, 2012 by डॉ. राजेश कपूर | 6 Comments on कंपनियों का पानी से कमाई का क्रूर जाल / डॉ. राजेश कपूर भारत सरकार के विचार की दिशा, कार्य और चरित्र को समझने के लिए ”राष्ट्रीय जल नीति-२०१२” एक प्रामाणिक दस्तावेज़ है. इस दस्तावेज़ से स्पष्ट रूप से समझ आ जाता है कि सरकार देश के नहीं, केवल मैगा कंपनियों और विदेशी निगमों के हित में कार्य कर रही है. देश की संपदा की असीमित लूट बड़ी […] Read more » राष्ट्रीय जल नीति
पर्यावरण पर्यावरण-जीवन का आधार June 20, 2012 by नवनीत कुमार गुप्ता | 1 Comment on पर्यावरण-जीवन का आधार नवनीत कुमार गुप्ता सूरज से तीसरा ग्रह पृथ्वी, अभी तक के ज्ञात सभी ग्रहों में इकलौता ग्रह है जिसमें जीवन अपने विभिन्न रूपों में पनपता है। यह जीवित ग्रह अंतरिक्ष से नीले रंग का दिखाई देता है। आज से लगभग 1400 करोड़ वर्ष पहले अंतरिक्ष में एक बड़ा धमाका हुआ था, जिसे ‘बिग बैंग’ सिद्धांत […] Read more » पर्यावरण