आलोचना असुविधाओं के बावजूद रेल सफर महंगा होगा ? October 25, 2011 / December 5, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment शादाब जफर”शादाब लगता है देश में रोज रोज बढती हुर्इ महंगार्इ से जल्द ही गरीब आदमी का पीछा छूटने वाला नही। खाध पदार्थ, पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी, दूध, बस के बढे हुए किराये से आज जहा आम आदमी की कमर टूटी हुर्इ है वही एक बार फिर यूपीए सरकार आम आदमी पर महंगार्इ का एक और […] Read more » train expenses असुविधाओ के बावजूद रेल सफर महंगा
आलोचना ”पिट कर नहीं, पीट कर आओ, लोगों को घेर कर मारो” September 29, 2011 / December 6, 2011 by गिरीश पंकज | Leave a Comment गिरीश पंकज ”पिट कर नहीं, पीट कर आओ, लोगों को घेर कर मारो” . यह ”महान” प्रेरक वाक्य किसी तानाशाह का नहीं, लोकशाही के एक प्रतिनिधि का है,. एक राज्य के गृह मंत्री का. जिस जनता के वोट से ये महोदय मंत्री बने, उसी जनता को पीटने की बात कह रहे हैं? पुलिस को पाठ […] Read more »
आलोचना सरकार गरीबी नहीं गरीबों को हटाना चाहती है! September 28, 2011 / December 6, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी पूंजीवादी नीतियों पर चलकर तो यही होना स्वाभाविक है! अगर कोई आदमी बीमार हो और उसे यही पता नहीं लगे कि उसको क्या रोग है तो वह अपना इलाज कैसे करा सकता है? ऐसा ही आलम हमारी सरकार का है। वह आज तक यही तय नहीं कर पा रही है कि गरीब किसे […] Read more » poverty गरीबी गरीबों
आलोचना मैं स्वर्ग से भगत सिंह बोल रहा हूं !!! September 27, 2011 / December 6, 2011 by रामदास सोनी | 1 Comment on मैं स्वर्ग से भगत सिंह बोल रहा हूं !!! शहीदे आजम भगत सिंह जयंती पर विशेष रामदास सोनी प्यारे भारतवासियों! मैंने तथा मेरे साथी चन्द्रशेखर, बिस्मिल और न जाने कितने अज्ञात शहीदों ने अपनी कुर्बानी देकर प्रिय भारत को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त करवाया था। हमने हमारा बलिदान इस आशा के साथ किया था कि हमारा देश भारत आजादी पाकर और फलेगा- […] Read more » Bhagat Singh भगत सिंह
आलोचना नपुंसक सरकार को दहलाते बम ब्लास्ट September 16, 2011 / December 6, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे 9/11 के बाद दुनिया के चौधरी अमेरिका पर आज तक कोई आतंकी हमला नहीं हुआ है। दुनिया के चौधरी अमेरिका ने यह साबित कर दिया है कि उसकी सरहद पूरी तरह सुरक्षित है। इतना ही नहीं मुस्लिम देशों पर आक्रमण कर वहां के तानाशाहों की सल्तनत को नेस्तनाबूत भी किया है अमेरिका ने। […] Read more » Congress Party नपुंसक सरकार बम ब्लास्ट
आलोचना असमानता की आजादी का जश्न! August 7, 2011 / December 7, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 5 Comments on असमानता की आजादी का जश्न! डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ 15 अगस्त, 2011 को हम आजादी की 65वीं सालगिरह मनाने जा रहे भारत में कौन कितना-कितना और किस-किस बात के लिये आजाद है? यह बात अब आम व्यक्ति भी समझने लगा है| इसके बावजूद भी हम बड़े फक्र से देशभर में आजादी का जश्न मनाते हैं| हर वर्ष आजादी के जश्न […] Read more » independence आजादी आजादी का जश्न
आलोचना पुस्तक समीक्षा ‘हेलो बस्तर’ को पढ़ने की कोई आवश्यकता नहीं July 30, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कौशलेन्द्र “हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] ‘हैलो बस्तर’ की एकांगी समीक्षा की है राजीव रंजन प्रसाद ने सत्य का गला घोट दिया है राहुल पंडिता ने १- भूमकाल से माओवादी संघर्ष की तुलना नहीं की जा सकती. दोनों में ज़मीन-आसमान का फर्क है. दोनों के उद्देश्यों में फर्क है. दोनों के […] Read more » hello bastar नक्सलाद बस्तर माओवाद हेलो बस्तर
आलोचना पुस्तक समीक्षा सत्य का गला घोट दिया है राहुल पंडिता ने July 28, 2011 / December 8, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment हाल ही में बस्तर के आदिवासियों की समस्याओं और यहां चल रहे माओवादी आंदोलन पर राहुल पंडिता की पुस्तक ‘हेलो बस्तर’ प्रकाशित हुई है। राजीव रंजन प्रसाद ने इसकी समीक्षा लिखी और यह सर्वप्रथम प्रवक्ता डॉट कॉम पर प्रकाशित हुई। इस समीक्षा पर 10 टिप्पणियां आईं। सारगर्भित। एक टिप्पणीकार को छोड़कर शेष सभी ने राजीव […] Read more » Bastar बस्तर माओवाद राहुल पंडिता हेलो बस्तर
आलोचना पुस्तक समीक्षा ‘हैलो बस्तर’ की एकांगी समीक्षा की है राजीव रंजन प्रसाद ने July 28, 2011 / December 8, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on ‘हैलो बस्तर’ की एकांगी समीक्षा की है राजीव रंजन प्रसाद ने ए.के. पंकज हाल ही में बस्तर के आदिवासियों की समस्याओं और यहां चल रहे माओवादी आंदोलन पर राहुल पंडिता की पुस्तक ‘हेलो बस्तर’ प्रकाशित हुई है। राजीव रंजन प्रसाद ने इसकी समीक्षा लिखी और यह सर्वप्रथम प्रवक्ता डॉट कॉम पर प्रकाशित हुई। इस समीक्षा पर ए. के. पंकज ने टिप्पणी लिखकर इसे एकांगी करार दिया है। हम […] Read more » hello bastar हैलो बस्तर
आलोचना हिन्दी बुर्जुआ के सांस्कृतिक खेल July 24, 2011 / December 8, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on हिन्दी बुर्जुआ के सांस्कृतिक खेल जगदीश्वर चतुर्वेदी हिन्दी बुर्जुआवर्ग का हिन्दीभाषा और साहित्य से तीन-तेरह का संबंध है। हिन्दीभाषी बुर्जुआवर्ग में आत्मत्याग की भावना कम है। उसमें दौलत,शानो-शौकत और सामाजिक हैसियत का अहंकार है। वह प्रत्येक काम के लिए दूसरों पर निर्भर है।दूसरों के अनुकरण में गर्व महसूस करता है। दूसरों के अनुग्रह को सम्मान समझता है।वाक्चातुर्य से भाव-विह्वल हो […] Read more » cultural सांस्कृतिक
आलोचना हिन्दी में संवाद का अंत July 18, 2011 / December 8, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on हिन्दी में संवाद का अंत जगदीश्वर चतुर्वेदी हिन्दी के इस देश में दो रूप हैं एक संवैधानिक है जिसके तहत हिन्दी कुछ राज्यों में प्रधानभाषा है तो कुछ राज्यों अल्पसंख्यक भाषा है। जहां वह अल्पसंख्यकों की भाषा है वहां हिन्दीभाषी सांस्कृतिक अल्पसंख्यक हैं। इससे हमारे राष्ट्र-राज्य के ढ़ांचे को कोई चुनौती नहीं है। इस परिधि के बाहर दूसरी ओर हिन्दी […] Read more » hindi संवाद हिंदी
आलोचना हिन्दी की देह है फोटो, प्राण है संगीत July 18, 2011 / December 8, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment जगदीश्वर चतुर्वेदी हिन्दी भाषा में अहंकार का भाव नहीं है। नायक नहीं हैं। यह ऐसी भाषा है जो प्रकृति से उदार है। हिन्दी न तो राष्ट्रभाषा है न मातृभाषा है और न पितृभाषा बल्कि वातावरण या परिवेश की भाषा है। भारतीय समाज में संचार और संबंध की स्वाभाविक भाषा है,जीवन में इसे दूसरी प्रकृति कहते […] Read more » hindi हिंदी