कविता राज हर कोई करना है जग चह रहा ! September 11, 2019 / September 11, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment राज हर कोई करना है जग चह रहा, राज उनके समझना कहाँ वश रहा; राज उनके कहाँ वो है रहना चहा, साज उनके बजा वह कहाँ पा रहा ! ढ़पली अपनी पै कोई राग हर गा रहा, भाव जैसा है उर सुर वो दे पा रहा; ताब आके सुनाए कोई जा रहा, सुनके सृष्टा सुमन मात्र मुसका रहा ! पद के पंकिल अहं कोई फँसा जा रहा, उनके पद का मर्म कब वो लख पा रहा; बाल बन खेल लखते मुरारी रहे, दुष्टता की वे सारी बयारें सहे ! सृष्टि सारी इशारे से जिनके चले, सहज होके वे जगती पै क्रीड़ा करे; जीव गति जान कर तारे उनको चले, कर विनष्टि वे आत्मा में अमृत ढ़ले ! हर निमिष कर्म करके वे प्रतिपालते, धर्म अपना धरे वे प्रकृति साधते; ‘मधु’ है उनका समझ कोई कब पा रहा, अपनी जिह्वा से चख स्वाद बतला रहा ! ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » राज हर कोई करना है जग चह रहा !
कविता शिक्षक कौन है ? September 6, 2019 / September 6, 2019 by राकेश कुमार पटेल | Leave a Comment शिक्षक कौन है ? राही सा मन को, राह दिखा दे जिसे चलना न आये, उसे चलना सिखा दे जिसे हँसना न आये , उसे हँसाना सिखा दे जिसे रोना न आये , उसे रोना सिखा दे जिसे खो कर पाना न आये, उसे पाना सिखा दे भूले भटके को , घर का पता बता […] Read more »
कविता शिक्षक ने शिक्षा पा ली September 3, 2019 / September 3, 2019 by डॉ कविता कपूर | Leave a Comment समाज बोला तू तो शिक्षक है,भविष्य निर्माता है, देश के कर्णधार का, तू ही तो भाग्य विधाता है। नव निर्माण का लिए संकल्प, निकल पड़ा वह निर्विकल्प, राह में टकराई संचार क्रांति, बलखाती- इठलाती बोली, “मैं हूं ज्ञान का भंडार, खोल दिए हैं मैंने सफलता के सभी द्वार, तू तो है बालक नादान, पा न […] Read more » Education शिक्षक शिक्षक ने शिक्षा पा ली शिक्षा
कविता कब छलकि जाय मन की गगरी ! September 2, 2019 / September 2, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment कब छलकि जाय मन की गगरी, कौन जानता; वो डाल डाल पात पात, हमको नचाता !सम्बंध गाढ़े और हलके, समय ढ़ालता; अनुभव कराके नये नये, चित्त रचाता ! भोजन का भेद आत्मशोध, विचारों को शुध; दो व्यक्तियों को विलग करा, वो ही मिलाता !क्या होगा वक़्त बाद, कहाँ इंसान जानता; संस्कार भोग हमरे करा, हमको […] Read more » कब छलकि जाय मन की गगरी !
कविता पाक को चेतावनी September 2, 2019 / September 2, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जितनी है पाक औकात तेरी,उतनी कर अब तू बात |तीन युद्ध हार चुका है,कितनी खायेगा अब तू मात || बना है तू सेना की कठपुतली,तेरे नहीं कोई साथ |ले देके एक चीन बचा है,जिससे मिलाया तूने हाथ || देता है न्यूकिल्यर की धमकी,तू उसको भी छुटा कर देख |बचेगा न तेरा कोई बन्दा,खुद गिरेबान में […] Read more » warning to pakistan पाक को चेतावनी
कविता साहित्य तुम जलाते रहे,मै जलती रही August 30, 2019 / August 30, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी तुम जलाते रहे,मै जलती रही | बिन आग के ही,मै जलती रही || तुम यकीन देते रहे,मै करती रही | धोखा खाया तो,हाथ मलती रही || वादा मुझसे किया,शादी और से की | ये बात जिन्दगी में,मुझे खलती रही || तुम वादा करते रहे,और मुकरते रहे | धीरे धीरे पैरो की जमीं […] Read more » fire of love suffering
कविता एक अनुभव August 28, 2019 / August 28, 2019 by राकेश कुमार पटेल | Leave a Comment माँ तुम बिन सब अधूरी है जीना तो चाहता नहीं , मगर तेरे सपनों के लिये जीना जरुरी है माँ तुम बिन सब अधूरी है | ओ चाँद जिसे तुम ने मामा बताया उस मामा और मेरे बीच जाने कितने मीलों की दुरी है माँ तुम बिन सब अधूरी है | लौटता हूँ घर को […] Read more » Hindi Poem poem poem on experience
कविता हिन्दी- महिमा August 28, 2019 / August 28, 2019 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment भारत में जो रची बसी है , वह जनभाषा है हिन्दी। भारतमाँ के माथे की है , वह प्यारी सी बिन्दी ।। * उत्तरदिशि केदारनाथ में , गूँज रही है ये हिन्दी। दक्षिण में रामेश्वरम तक, व्याप रही अपनी हिन्दी।। * पूर्वदिशा में जगन्नाथपुरि , में भी तो छाई हिन्दी। पश्चिम में है बसी द्वारिका,वहाँ […] Read more » hindi glory Hindi Poem poem
कविता रात के ख्वाब जो दिन में देखने लगे है August 26, 2019 / August 26, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment रात के ख्वाब जो दिन में देखने लगे |उन्ही को दिन में अब तारे दिखने लगे || खता करके पूछती हो,ऐसा मैंने क्या किया ?नयनो से तीर चलाये थे,आशिक मरने लगे || तुम्हारा चेहरा आईने में कैसे दिखाई देता ?चेहरा देखते ही,आयने के अंग फडकने लगे || हटाये जो गेसू,उसने अपने खूबसूरत चेहरे से |लगा […] Read more » night night dreams poem poetry
कविता सागर August 26, 2019 / August 26, 2019 by बीनू भटनागर | Leave a Comment सागर मौला मस्त सा ख़ुद से ही अंजान, वाष्प बना उड़ता गया बादल बन बरस गया। कौन तूफ़ानों में घिरा, कब सुनामी आई, वो तो मौला मस्त सा वहीं का वहीं रहा। सागर सारे जुडे हुए हैं, सागर को पता नहीं, कहीं कोई सीमा नहीं। कहाँ प्रशांत ख़त्म हुआ, और हिंद शुरू हुआ। सागर तट […] Read more » Hindi Poem poetry
कविता सफ़र लम्बा है | August 26, 2019 / August 26, 2019 by राकेश कुमार पटेल | Leave a Comment सफ़र लम्बा है मगर जाना तो पड़ेगा | टूटी है चप्पल , मगर पांव को पहनना तो पड़ेगा | भूख है जोरो की और चावल बासी है , मगर खाना तो पड़ेगा | धुप है तेज और फटी है पोषक , मगर काया को पहनना तो पड़ेगा | नींद है जोरों की कुछ पाना है […] Read more » Hindi Poem path
कविता अच्छी बात नहीं। August 26, 2019 / August 26, 2019 by डा.सतीश कुमार | Leave a Comment औरों के घर में हो अंधेरा, तुम्हारे घर में हो उजाला, यह तो अच्छी बात नहीं। हमारे हो महल दुमहले, और तरसे झोपड़े को भी, यह तो अच्छी बात नहीं। जो चाहा हमने वह हमें मिले औरों को जो मिला, वह भी हम छीन लें, यह तो अच्छी बात नहीं। मेरी हर बात सच्ची बात, […] Read more » not a good thing