कविता सफ़र लम्बा है | August 26, 2019 / August 26, 2019 by राकेश कुमार पटेल | Leave a Comment सफ़र लम्बा है मगर जाना तो पड़ेगा | टूटी है चप्पल , मगर पांव को पहनना तो पड़ेगा | भूख है जोरो की और चावल बासी है , मगर खाना तो पड़ेगा | धुप है तेज और फटी है पोषक , मगर काया को पहनना तो पड़ेगा | नींद है जोरों की कुछ पाना है […] Read more » Hindi Poem path
कविता अच्छी बात नहीं। August 26, 2019 / August 26, 2019 by डा.सतीश कुमार | Leave a Comment औरों के घर में हो अंधेरा, तुम्हारे घर में हो उजाला, यह तो अच्छी बात नहीं। हमारे हो महल दुमहले, और तरसे झोपड़े को भी, यह तो अच्छी बात नहीं। जो चाहा हमने वह हमें मिले औरों को जो मिला, वह भी हम छीन लें, यह तो अच्छी बात नहीं। मेरी हर बात सच्ची बात, […] Read more » not a good thing
कविता मैया ,मोहे दाऊ आज बहुत चिढायो August 26, 2019 / August 26, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी मैया,मोहे दाऊ आज बहुत चिढायो |मोसो कहत तू मोल को लीन्हो,इसलिए तुझे मोबाइल न दिलायो ||ग्वाल-बाल सबके पास है मोबाइल |मोहे तूने अभी तक क्यों न दिलायो ?गैया चरावत नही जाऊँगा तब तक ,जब तक मोबाइल मेरे पास न आयो ||भले ही तू माखन मिश्री न दियो मोहे ,पर मोबाइल मुझे तुरन्त […] Read more » tease a lot today
कविता दिल को भी करार तुम्हे आने लगेगा August 23, 2019 / August 23, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment दिल को भी करार तुम्हे आने लगेगा |जब कोई प्यार से तुम्हे बुलाने लगेगा || दिल की दवा भी तुम्हे मिल जायेगी |जब कोई दर्द तुम्हारा समझने लगेगा || भेज दो ऐसी खबर उसके घर पर तुम |तुम्हारा दिल,उनके दिल को सताने लगेगा || जब लगी है आग दिल में दोनों तरफ से |फिर तुममें […] Read more » poem poetry
कविता टेंशन की दवा August 21, 2019 / August 21, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment आर के रस्तोगी इसको बोलो हैलो,उसको बोलो तुम हाय |हर टेंशन की दवा है,तुलसी वाली चाय ||तुलसी वाली चाय,सब साथ पिया करो |रोग कोई न होगा,लम्बी उम्र जिया करो ||कह रस्तोगी कविराय,बांटो ये दवा सबको |टेंशन कभी नहीं रहेगी,जो पियेगा इसको || आर के रस्तोगी गुरुग्राम Read more » tension tension medicine
कविता बसे है दिन रात जो दिल में मेरे August 21, 2019 / August 21, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बसे है दिन रात जो दिल में मेरे | उनका नाम अब बताऊं मै कैसे || जो बिल्कुल बोलते नहीं है |उनसे बात बताऊँ मै कैसे || चुरा ली नींद है रातो की जिसने |उनका ख्वाब अब दिखाऊं मै कैसे || तडफा कर चल दिए मुझको |उन्हें याद अब दिलाऊं मै कैसे || छोड़ कर चले […] Read more » day night what in my heart
कविता बैसाखी August 21, 2019 / August 21, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अवधेश सिंह विरासत में मिली है मुझे सोने के फ्रेम में मढ़ी वंचित – निषिद्ध तमाम अमानुषिक पीड़ाओं और जख्मों से कराहती , आज भी भय से थरथराती … टूटे सपनों , लुटे अरमानों व आसुओं की एक तस्वीर जिसमें हमारे पूर्वज रोज माला देते हैं विरासत में मिली हैं कुछ किताबें जो बताती हैं पता हमारे शत्रुओं […] Read more » baishakhi poetry
कविता उत्ताल ताल आकाश में आच्छादित है ! August 21, 2019 / August 21, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment (मधुगीति १९०८१९ बग्रसा) उत्ताल ताल आकाश में आच्छादित है, मधुर वायु अधर का स्पर्श लिये आई है; अग्नि त्रिकोणीय आभा ले दीप्तिमान हुई है, जल हर जलज की प्राण-प्रतिष्ठा में लगा है ! धरा पर सब उनके साये में धाये हैं, अपने तन मन को आत्मयोग में डुबाये हैं; बुद्धि की हर तरंग पै तरजे […] Read more » Sky
कविता आज उस में सब समा गया है ! August 21, 2019 / August 21, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment (मधुगीति १९०८१९ अग्रसु) आज उस में सब समा गया है, आज रब उस में रम गया है; आज रव अविरत हो गया है, आज रवि रमणीक लग रहा है ! क्षण हर कणिका से मिल गया है, अणु हर कलिका में खिल गया है; तृण तल्लीनता में खो गया है, अरुण चिर चेतनता से भर […] Read more » Hindi Poem poem
कविता तन्हाइयां August 19, 2019 / August 19, 2019 by अजय एहसास | Leave a Comment चाहूं मैं तुम साथ हो, जब पास हो तन्हाइयां कोई भी न साथ दे तब साथ हो तन्हाइयां मेरी हस्ती देख करके सब बिषैले हो गये हम जहां पहुंचे वहां कितने झमेले हो गये दुनिया के मेले मे देखो हम अकेले हो गये पल में ही मिट जाती चाहें कितनी हों अच्छाइयां चाहूं मैं तुम […] Read more » Hindi Poem poem poetry
कविता आधे-अधूरे हम August 18, 2019 / August 18, 2019 by डा.सतीश कुमार | Leave a Comment एक वे हैं जो केवल , अधिकारों की हमेशा करते हैं मांग। अधिकारों के शोर में, भूल जाते है कर्तव्यों को । एक वे हैं, जिनका कर्तव्य पर ही , सदैव रहता ध्यान। अधिकार तो मिल ही जाएंगे, यदि हम, मनसा-वाचा-कर्मणा, अपने कर्तव्य को निभाएंगे। किसी के लेने -देने से, कुछ नहीं मिलता कभी। अगर […] Read more » hindi poem
कविता व्यर्थ ही चिन्ता किए क्यों जाते ! August 17, 2019 / August 17, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment (मधुगीति १९०८११ अकासा) व्यर्थ ही चिन्ता किए क्यों जाते, छोड़ क्यों उनके लिए ना देते; करने कुछ उनको क्यों नहीं देते, समर्पण करके क्यों न ख़ुश होते ! कहाँ हर प्राण सहज गति है रहा, जटिलता भरा विश्व विचरा किया; ज़रूरी उनसे योग उसका है, समर्पित उसको उन्हें करना है ! कार्य जो कर सको उसे कर लो, शेष सब उनके हवाले कर दो; उचित विधि उसको लिए जावेंगे, क्षीण संस्कार करा भेजेंगे ! किए रचना जगत में धाया करो, सोच ना विचित्रों को लाया करो; चित्र जो बन रहे बना लो तुम, इत्र उनको भी कुछ छिड़कने दो ! पाएँगे कर वे कुछ ज्यों छोड़ोगे, किसी रस और में वे बोरेंगे; ‘मधु’ कुछ छोड़ भी जगत देते, प्रभु औ प्रकृति द्युति लखे चलते ! ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » in vain why worry