कविता दोषी ना प्राणी कोई जग होता ! August 17, 2019 / August 17, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment (मधुगीति १९०८१० सकारा) दोषी ना प्राणी कोई जग होता, सृष्टि परवश है वह पला होता; कहाँ वश उसके सब रहा होता, लिया गुण- धर्म परिस्थिति होता ! बोध कब बालपन रहा होता, खिलाता जो कोई है खा लेता; बताता जैसा कोई वह करता, धर्म जो सिखाता वो अपनाता ! विवेक अपना पनप जब जाता, समझ कुछ तत्व विश्व में पाता; ज्ञान सापेक्ष जितना हो पाता, बदल वह स्वयं को है कुछ लेता ! कहाँ सम्भव है बदलना फुरना, कहाँ आसान है प्रकृति पुनि रचना; कहाँ जीवन की राह सब मिलता, कहाँ जाती है ग्लानि सकुचाना ! साधना समर्पण है जब होता, मुक्ति रस पान प्रचुर जब होता; ‘मधु’ को प्रभु का भान तब होता, फिर कहाँ भेद दृष्टि रह पाता ! ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » creatures in the world no guilty
कविता खा रहे हो नमक,ऐसे मत दगा दीजिये August 16, 2019 / August 16, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी खा रहे हो नमक,ऐसे मत दगा दीजिये | मुल्क का फर्ज कुछ तो अदा कीजिये || खाते हो किसी का,गुण गाते किसी का | ऐसे तो इस मुल्क को न दगा दीजिये || महफूज हो यहाँ पर,फिर भी डरने लगे | फितरत दिमाग की,जरा कम कर लीजिये || खा कर भी गुर्रा […] Read more » salt
कविता दहेज दानव August 16, 2019 / August 16, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment विनोद सिल्ला ये दहेज दानव हजारों कन्याएं खा गया। ये बदलता माहौल भी रंग दिखा गया।। हर रोज अखबारों में ये समाचार है, ससुराल जाने से कन्या का इंकार है, क्यों नवविवाहितों को स्टोव जला गया।। बिकने को तैयार लङके हर तरह से, मांगें मोटर कार अङके हर तरह से, हर नौजवान अपना मोल लिखा […] Read more » dowry dowry monster poem poetry
कविता लाल किले से मोदी जी का सन्देश August 16, 2019 / August 16, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी लाल किले की प्राचीर से,मोदी जी ने दिया ये सन्देश |एक ध्वज हो,एक कानून हो,सबका समान हो ये देश || मिले सबको समान अधिकार,किसी के साथ न हो द्वेष |तभी भारत फल फूलेगा,आगे बढ़ता रहेगा ये हमारा देश || बढ़ रहा है जनसँख्या का बोझ,कैसे उठा पायेगा ये देश |सीमित साधन,असीमित आवश्यकता […] Read more » lal kila Modi
कविता मर्द August 16, 2019 / August 17, 2019 by डा.सतीश कुमार | Leave a Comment मर्द हो मर्द बनो । कुछ खा लो , कुछ पी लो , दो चार कश भी लगा लो, अरे क्या बिगड़ता है, थोड़े में , यार ! चख कर तो देखो। अरे !तुम तो अभी बच्चे हो? मां बाप की आज्ञाएं, ही ढोते रहते हो । तुम्हारा जीवन अपना है। अपने निर्णय खुद लो […] Read more » be a man Man
कविता स्वतन्त्रता दिवस और रक्षा बन्धन August 16, 2019 / August 16, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment लाया है स्वतन्त्रता दिवस साथ में,राखी का त्यौहार |जिसने फहराया है देश में आज,भाई बहन का प्यार || आजादी के रंग में रंगे है,सभी भाई बहन सब संग |भाई ने रक्षा का वादा किया,लगवा टीका रोली संग || राखी के धागे कच्चे मत समझो,जुडा है पक्का विश्वास |एक वर्ष के बाद ये दोनों आते,लगाये रहते […] Read more » independance day Raksha Bandhan
कविता आज क्रांति फिर लाना है August 14, 2019 / August 14, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment आज सभी आज़ाद हो गए, फिर ये कैसी आज़ादीवक्त और अधिकार मिले, फिर ये कैसी बर्बादीसंविधान में दिए हक़ों से, परिचय हमें करना है, भारत को खुशहाल बनाने, आज क्रांति फिर लाना है… जहाँ शिवा, राणा, लक्ष्मी ने, देशभक्ति का मार्ग बतायाजहाँ राम, मनु, हरिश्चन्द्र ने, प्रजाभक्ति का सबक सिखायावहीं पुनः उनके पथगामी, बनकर हमें दिखना […] Read more » brought again Revolution
कविता आओ बच्चो तुम्हे बताये,हिस्ट्री इस्लामबाद की August 13, 2019 / August 13, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आओ बच्चो तुम्हे बताये,हिस्ट्री इस्लामाबाद की |जिस धरती में पैदा होता,केवल आंतकवाद ही || भुट्टो को भी यहाँ इसने,फाँसी पर लटकाया था |भुट्टो के बेटी बेनजीर को इसने ही मरवाया था ||सत्ता में आते ही,उसका तख्ता पलट दिया जाता है |फौजी उसका अपने आप ही मालिक बन जाता हे || ये छोटी सी एग्जाम्पिल दी,केवल इस्लामाबाद […] Read more » come children islamabaad
कविता पाक सहमा हुआ है अपने आप August 12, 2019 / August 12, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment देखकर 370 की छाप,पाक को हुआ है संताप,सहमा सहमा हुआ है अपने आप |१| समझौता एक्सप्रेस करके बंद,व्यापार को भी करके बंद,नुक्सान कर रहा है अपने आप |२| देकर गीदड़ की भपकी,जंग करने की धमकी,पाक डर रहा है अपने आप |३| घर में नहीं है दाने,अम्मा चली है भुनाने,पाक भुन रहा है अपने आप |४| […] Read more » scared itself
कविता पैसों से रिश्ते August 9, 2019 / August 9, 2019 by राकेश कुमार पटेल | Leave a Comment आज रिश्ते खिलौने हुऐ है, और इसके बाजार लगते है पैसे वाले इसके व्यापारी, और हम खरीदार लगते है। पैसा पैसे का रिश्तेदार लगता है पैसे से चाचा चाची ,मामा मामी, नाना नानी , मौसा मौसी आज पैसा पैसे का प्यार लगता है। आज रिश्ते खिलौने हुऐ है, और इसके बाजार लगते है पैसो से […] Read more » Money money with relation
कविता श्रद्धांजलि !! August 9, 2019 / August 9, 2019 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment श्रीमती सुषमा स्वराज जी की पुण्य-स्मृति में सादर समर्पित श्रद्धासुमन— ॐ मुग्ध करती हमें प्रतिपल,सौम्य सी मुस्कान। वैदुष्य की थीं नित्य ही वे,अप्रतिम उपमान।। * गरिमामयी, महिमामयी, स्नेह की प्रतिमूर्ति। विश्व में सर्वत्र फैली, है तुम्हारी सुकीर्ति ।। * भारतीय-नारी की थीं, आदर्श सी प्रतिमान। तुमने दिलाया जगत में,निज देश को सम्मान।। * वक्तृत्व का […] Read more » pay homage Sushma Swaraj
कविता 9 अगस्त सन 42 को,क्रांतिकारियों ने बिगुल बजाया था | August 9, 2019 / August 9, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment 9 अगस्त सन 42 को,क्रांतिकारियों ने बिगुल बजाया था | “अंग्रेजो भारत छोडो” ये पूरे भारत में नारा लगाया था || आज नई परिस्थितयो में,एक नया नारा हमे लगाना है |पाक,अधिकृत कश्मीर छोडो,ये उसको हमने जताना है || भले आज सुभाष गाँधी नहीं,नये सुभाष गाँधी बनाना है |पाक के नापाक पंजो से,अब पूरा कश्मीर हमे छुडाना […] Read more »