कविता बच्चों का पन्ना साहित्य बचपन की कैद November 14, 2016 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment नन्हें नन्हें कांधों पर वजन उठाये कौन सी जंग लड़ रहे हैं ये ज़िन्दगी के मासूम सिपाही। क्या यही है इनके लिये ज़िन्दगी की अनमोल सौगात? कब तक यूँ ही बोझा ढोयेंगे ये नन्हें-नन्हें कोमल हाथ? क्या यही है इनके लिये ज़िन्दगी के असली मायने? या देख पाएंगे ये भी कभी बचपन के सपने सुहाने? गुड्डे-गुड़ियों का घर सजाने […] Read more » बचपन की कैद
कविता साहित्य बेसहारा बाप की व्यथा November 4, 2016 by अमन कौशिक | 1 Comment on बेसहारा बाप की व्यथा उधर भूख से बिलख रही थी नवासी मेरी.. इधर दुनिया को छोड़ चुकी थी बिटिया मेरी.. क्या करूँ, क्या पूछूँ, कुछ नहीं था सूझ रहा.. क्या वज़ह थी इसके पीछे, कुछ नहीं था दिख रहा.. Read more » "बेसहारा बाप की व्यथा" Featured
कविता साहित्य मेरा इंतजार November 3, 2016 / November 3, 2016 by लक्ष्मी जायसवाल | Leave a Comment इंतज़ार में हूं मैं कि कुछ वक़्त खुद के लिए तलाश पाऊंगी इंतज़ार में हूं मैं कि अपना हाल-ए-दिल उनसे कह पाऊंगी। इंतज़ार में हूं मैं कि उनके साथ एक हसीं शाम बिता पाऊंगी। इंतज़ार में हूं मैं कि शायद कभी अपनी पहचान जान पाऊंगी। इंतज़ार में हूं मैं कि अपने दिल के दर्द को […] Read more » मेरा इंतजार
कविता साहित्य मेरी मां की डायरी October 30, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment मेरी मां लिखा करती थी, रोज़ डायरी का इक पन्ना, ये सिलसिला कब शुरू हुआ, कैसे शुरू हुआ ये तो याद नहीं, पर तब तलक चलाता रहा.. जब तक होशो हवास थे। कितने साल तक लिखा ,क्या लिखा, ये तो पता नहीं, पर कुछ किस्से, कहानी और कविता सुना देतीं वो खुद ही कभी कभी। […] Read more » मेरी मां की डायरी
कविता साहित्य दिव्य आभा दिलों में ढाली है ! October 30, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment दिव्य आभा दिलों में ढाली है; प्रभा लेकर दिवाली आई है ! ख़ुशाली हर जगह पै छायी है; प्रमा में आत्म हर सुहायी है ! Read more » दिव्य आभा दिलों में ढाली है !
कविता साहित्य चलो, दिवाली आज मनायें October 28, 2016 by बलवन्त | Leave a Comment चलो, दिवाली आज मनायें Read more » चलो दिवाली आज मनायें
कविता साहित्य परिवारवाद October 25, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment परिवारवाद Read more » परिवारवाद
कविता साहित्य वाँशुरी ऐसी बजाई मोहन ! October 24, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment वाँशुरी ऐसी बजाई मोहन, लूटि कें लै गए वे मेरौ मन; रह्यौ कोरौ सलौनौ सूने- पन, शून्य में झाँकतौ रह्यौ जोवन ! चेतना दैकें नचायौ जीवन, वेदना दैकें वेध्यौ आपन-पन; कलेवर क्वारे लखे कोमल-पन, कुहक भरि प्रकटे विपिन बृन्दावन ! मधुवन गागरी मेरी झटके, मोह की माधुरी तनिक फुरके; पुलक-पन दै गए पलक झपके, नियति […] Read more » वाँशुरी ऐसी बजाई मोहन !
कविता साहित्य ऊर्जा October 24, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment कुछ दिन के लिये, लेखनी कभी रुक सी जाती है। कोई कविता या कहानी, जब नहीं भीतर कसमसाती है, तब कोई बन्दिश पुरानी, याद आती है, कोई सुरीली तान मन में, गुनगुनाती है। कहीं से शब्द जुड़ते हैं, कहीं पर भाव मुड़ते हैं, कोई रचना तभी, काग़ज पर उतरके आती है। कोई पढ़े या न […] Read more » ऊर्जा
कविता साहित्य अब न चुप रह पाऊंगी October 19, 2016 by लक्ष्मी जायसवाल | Leave a Comment अब न चुप रह पाऊंगी Read more » अब न चुप रह पाऊंगी
कविता साहित्य कुछ तो है हममें October 14, 2016 by लक्ष्मी जायसवाल | Leave a Comment कुछ तो है हममें जिससे यह दिल ही दिल में ख़ौफ़ खाते हैं। कुछ तो है हममें जिसे यह दुनिया वाले सदियों से झुठलाते हैं। Read more » कुछ तो है हममें
कविता साहित्य आओ वैदिक दीप जलाएं October 11, 2016 by विमलेश बंसल 'आर्या' | Leave a Comment गोवर्धन, संरक्षण, पोषण, गौ की सेवा, गौ का पालन| गौ माता के प्राण बचाएं|| Read more » आओ वैदिक दीप जलाएं