कविता हे मानव अपनी दुर्गति के लिए ईश्वर को कसूरवार नहीं ठहराना August 2, 2023 / August 2, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक हे मानव अपनी दुर्गति के लिए ईश्वर खुदा रब को कसूरवार नहीं ठहराना ईश्वर ने सद्गति का पूरा सरंजाम कर दिया है! हे मानव ईश्वर को अकाल मृत्यु के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराना बदनाम नहीं करना ईश्वर ने संपूर्ण जीवन का इंतजाम कर रखा है! हे मानव ईश्वर को अपनी नुकसान के […] Read more »
कविता बटुये में दाल August 2, 2023 / August 2, 2023 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment प्रभुदयाल श्रीवास्तव दाल खदबदाएगी,खूब महक आएगी।मन मयूर नाचेगा,नाक बहक जाएगी।खुशियों से मत पूछो,क्या होगा हाल।शम्मी ने मोहन ने,रम्मी ने खाई है।अम्मा को बापू को,बहुत- बहुत भाई है।दादी के हाथों की,अमृत सी दाल।ऐसी ये दाल गरम,थाल सजा देती है।चांवल में घी के संग,बहुत मजा देती है।जैसे मिल बैठे हों,सुर के संग ताल। Read more »
कविता सोच में सुधार करो सोच से ही मानव या दानव बनता August 2, 2023 / August 2, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक सोच में सुधार करो सोच से ही मानव या दानव बनता एक सोच वह भी थी जिससे पर्सिया और गांधार में शिक्षा और शांति थी दूसरी सोच वहाँ ऐसी आई, जिसने हिंसा और तबाही मचाई टूट गया पर्सिया ईरान इराक बना,गांधार कांधार बना तक्षशिला विश्वविद्यालय मिट्टी में मिल गया बना रावलपिंडी नारी […] Read more » सोच में सुधार करो सोच से ही मानव या दानव बनता
कविता आत्माराम कौन ? July 27, 2023 / July 27, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment खुद का मुख बखान करे, कैसी है खुद की करनी रीति-प्रीति से सनी हुई, भांति अनेक खुदी ने बरनी। खुद से ही सवाल है, खुद के ही जवाब खुद ने ही दे दिया, खुद परिचय लाजबाव। खुद ने पूछा कौन तुम, बताओ श्रीमान खुद ही ने खुद कहा, आत्माराम मेरा नाम।। नाम आत्माराम है, तो […] Read more »
कविता बड़ा कठिन है किसी के दिल में थोड़ी सी जगह बना लेना July 26, 2023 / July 26, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक बड़ा कठिन है किसी के दिल में थोड़ी सी जगह बना लेना अब वक्त बदल गया है बुरे नहीं अच्छे लोगों की होती आलोचना जबतक कोई नक्कारा होता सबकी आँखों का तारा होता तबतक किसी की आँखों में नहीं खटकता जब किसी की मेहनत रंग लाती किसी को कोई मंजिल मिल जाती […] Read more »
कविता मणिपुर July 24, 2023 / July 24, 2023 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल द्रौपदी भीड़ में है नग्न हमारी ! कौरव कुल करता यह नर्तन है!! सत्ता की मौन साधना करता ! धृतराष्ट्र बांध आँखों पर पट्टी !! मध्यसभा में बिखल रहीं द्रौपदी! क्या सब गूंगे-बहरे और अंधे हैं !! कुल श्रेष्ठ पिताम्ह, आचार्य द्रोण! सब हारे हैं बेचारे बन मौन खड़े […] Read more » manipur incident
कविता बेईमान ने साधु रख लिया है नाम रे भैया July 20, 2023 / July 20, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक बेईमान ने साधु रख लिया है नाम रे भैया, खबर है कि शैतान ने बदला नाम रे भैया! आई लव माई ‘इंडिया’ प्रेमपूर्वक कहने से, अब भारत का होगा नहीं गुणगान रे भैया! भ्रष्टाचारी व भाई-भतीजा वादी नेताओं से, अब होगी देश ‘इंडिया’ की पहचान रे भैया! भारत सोने की चिड़िया बड़ा […] Read more »
कविता बच्चों का पन्ना दादाजी की मूँछें July 18, 2023 / July 18, 2023 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment Read more » poem for kids
कविता साहित्य लेकिन गुस्सा भी आता है July 17, 2023 / July 17, 2023 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment भुदयाल श्रीवास्तव छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश लेकिन गुस्सा भी आता है खड़ी हुई दर्पण के सम्मुख , लगी बहुत मैं सीधी सादी | पता नहीं क्यों अम्मा मुझको , कहती शैतानों की दादी | मैं तो बिलकुल भोली भाली , सबकी बात मानती हूँ मैं | पर झूठे आरोप लगें तो, घूँसा तभी तानती हूँ […] Read more »
कविता मैंने की दादी से बात July 17, 2023 / July 17, 2023 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment प्रभुदयाल श्रीवास्तव छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश मैंने की दादी से बात मोबाइल पर आज मजे से , मैंने की दादी से बात | मैंने दादीजी को अपने , पढ़ने का परिणाम बताया | मैंने उन्हें बताया कैसे, कक्षा में नंबर वन आया | खुशियों से दादी अम्मा के , उठे दुआओं वाले हाथ | मैंने बोला […] Read more » मैंने की दादी से बात
कविता मस्ती के स्कूल में बच्चे July 17, 2023 / July 17, 2023 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment प्रभुदयाल श्रीवास्तव मस्ती के स्कूल में बच्चे खेल रहे हैं धूल में बच्चे , भँवरे बनकर फूल में बच्चे| नंगे बदन उघाड़े हैं ये खुशियों के हरकारे हैं ये खाता कोई रोटी पुंगा चूसे कोई अंगूठा चुंगा उछल […] Read more » मस्ती के स्कूल में बच्चे
कविता श्रम सस्ता और ज्ञान महँगा है July 17, 2023 / July 17, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment –विनय कुमार विनायक श्रम सस्ता और ज्ञान महँगा है इससे ही आज देश चल रहा है एक श्रमिक आठ घंटे कठिन काम कर साढ़े तीन सौ रुपए कमाई कर लेता जिससे दो जून की रोटी मिल जाती मगर दो सौ रुपए किलो टमाटर सौ रुपए किलो मूली गाजर हरी मिर्च सब्जी कोई श्रमिक नहीं खरीद […] Read more » श्रम सस्ता और ज्ञान महँगा है