कविता बच्चों का पन्ना नहीं भला होता लड़ने से May 25, 2021 / May 25, 2021 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment Read more » नहीं भला होता लड़ने से
कविता कोरोना से अब लड़ना है May 25, 2021 / May 25, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कोरोना से अब लड़ना है,इसका मुंह काला करना है। दो गज की दूरी रखनी है,मुंह पर मास्क लगाना है।घर से नहीं अब निकलना,घर से ही काम करना है।कोरोना से अब लड़ना है,इसका मुंह काला करना है। किसी के घर नहीं जाना है,किसी को नहीं बुलाना है।वैक्सीन सबको लगवानी है,अपने आप सुरक्षा करनी है।सबको ही विश्वास […] Read more » कोरोना से अब लड़ना है
कविता बोली व गोली एक जाति की होती May 25, 2021 / May 25, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकबोली व गोली एक जाति की होती,बोली गोली से अधिक प्रभावी होती!गोली एकबार प्रहार कर मिट जाती,बोली की चोट आजीवन तक रहती! मधुर बोली मुहावरे जैसी प्रिय होती,मुंह वरे जिसे वह मुहावरे की बोली!बोली घायल करती, मरहम लगाती,बोली हमेशा गोली से, घातक होती! बोली से किसी को घात नहीं पहुंचे,बोली का दुःख, वाचिक […] Read more » words and Bullet words and Bullet of a caste
कविता आरक्षण रक्षण है मानवों का May 25, 2021 / May 25, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment आरक्षण रक्षण है मानवों काआरक्षण रक्षण करता हैमानवीय समानता का! आरक्षण नाश करता हैपिछड़े जन की विषमता का! आरक्षण हितरक्षक हैहक वंचित दलित आदिवासी का! आरक्षण रक्षण हैअसुरक्षित नारियों के जीवन का! आरक्षण दर्शन हैअवसर विहीनता से दलित, पिछड़े,असहाय बच्चे,महिला जीवन को बचाने का! आरक्षण संरक्षक हैहर जाति धर्म के मेधावी छात्र-छात्राओं का! आरम्भ से […] Read more » Reservation is the protection of humans आरक्षण आरक्षण रक्षण है मानवों का
कविता धर्म और संस्कृति अलग-अलग चीज है May 24, 2021 / May 24, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकधर्म और संस्कृति अलग-अलग चीज है,दो व्यक्ति का धर्म परिस्थितिवश एक हो सकता है,लेकिन संस्कृति एक नही हो सकती है! हो सकता है कोई व्यक्तिवादी धर्म ग्रहण के पूर्वतुम्हें या तुम्हारे पूर्वजों को भयंकर यातना दी गई होतुम्हारी संस्कृति को बहुत दबाई-सताई गई हो! बहुत दबाए सताए जाने के बाद मजबूरी वश हीतुम्हारे […] Read more » Religion and culture are different धर्म और संस्कृति
कविता चन्द्रवंशी आर्य ययाति थे आर्य, द्रविड़,तुर्क,भोज,म्लेच्छ जाति के पिता May 24, 2021 / May 24, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआर्य, द्रविड़, तुर्क, भोज, म्लेच्छ के पिता थे,आत्रेय चन्द्रपुत्र बुध-इला के प्रपौत्र ययाति!बुध-इलापुत्र पुरुरवा से आयु, आयु से नहुष,इन्द्रपदाभिषिक्त नहुष पिता थे ययाति के! ययाति पति थे दानव गुरु शुक्राचार्य कन्यादेवयानी और दानव वृषपर्वापुत्री शर्मिष्ठा के,देवयानी ने शिकायत की ब्राह्मण पिता से,पति ययाति की शर्मिष्ठा में एकनिष्ठा की! शुक्र अन्य नाम काव्या उसना […] Read more » चन्द्रवंशी आर्य
कविता चलाचल-चलाचल जिंदगी के सफर में…. May 24, 2021 / May 24, 2021 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment डॉ. शंकर सुवन सिंह जिंदगी घिरी,शैलाभों और चट्टानों से|ऐ जिंदगी फिर डरना क्या,आँधियों और तूफानों से||विचार शून्य हो,भाव भक्ति का हो|तो भगवान् हम सफर है,भक्त के सफर में||चलाचल-चलाचल जिंदगी के सफर में,हम सफर है तो सफर से क्या डरना||खंजर की क्या मजाल कि तेरे अरमानो को कुचल दे|.अरमान ही क्या करे कि तू खुद खंजर […] Read more » चलाचल-चलाचल जिंदगी के सफर में….
कविता आज मुर्दे भी बोल रहे हैं May 22, 2021 / May 22, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आज मुर्दे भी मुख खोल रहे हैं,अपने मन की पीड़ा खोल रहे हैं।हुआ है उनके साथ बहुत अन्याय,सबकी वे अब पोल खोल रहे हैं।। मिली नहीं अस्तपतालो में जगह,आक्सीजन के लिए भटक रहे थे।हो रही थी दवाओं की काला बाजारी,दवाओ के लिए हम तड़फ रहे थे।। मिला नहीं चार कंधो का सहारा,एम्बुलेंस की राह हम […] Read more »
कविता आर्य कोई जाति नहीं यह एक समाज रहा है May 22, 2021 / May 22, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआर्य कोई जाति नहींयह एक समाज रहा है प्रारंभ से हीं! जैसे कि आज भी दयानंद स्थापितआर्य जाति नहीं कोई, एक आर्य समाज रहा है! आर्य,द्रविड़,तुर्क,भोज,म्लेच्छ हैं संतति,आर्य चन्द्रवंशी क्षत्रिय पुरुरवा प्रपौत्र ययाति की! मूल आर्य समाज के संस्थापक,अदिति-कश्यप संतति आदित्य विवश्वान सूर्य के पुत्रवैवस्वत मनु और उनके बेटी-जमाता इला और बुध थे! […] Read more » arya is a society Arya is not a caste आर्य एक समाज रहा है
कविता जिंदगी May 22, 2021 / May 22, 2021 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment डॉ. शंकर सुवन सिंह सुबह होती है रात होती है|हर दिन यूँ ही खुली किताब होती है|किताब के हर पन्ने पे,वही अध्याय होता है|हर अध्याय में,वही दैनिक दिनचर्या होती है|सुबह होती है,रात होती है|हर दिन यूँ ही खुली किताब होती है|वक़्त न जाने किस मोड़ पे,किताब की जगह कॉपी दे दे|सारे कर्मों का लेखा जोखा […] Read more » जिंदगी सुबह होती है रात होती है हर दिन यूँ ही खुली किताब होती है……
कविता मुर्दे सवाल करते हैं…! May 19, 2021 / May 19, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल मुर्दे सवाल करते हैं… ?वे कहते हैंबेमतलब बवाल करते हैंइंसानों हम तो मुर्दे हैंक्योंकि…हमारे जिस्म में साँसे हैं न आशेंलेकिन…इंसानों, तुम तो मुर्दे भी नहीं बन पाएक्योंकि…जिंदा होकर भी तुम मर गएमैंने तुमसे क्या माँगा था…?सिर्फ साँसे और अस्पतालतुम वह भी नहीं दे पाएहमने तो तुमसेसिर्फ चार कंधे मांगे…?तुम वह भी नहीं दे […] Read more » मुर्दे सवाल करते हैं
कविता गंगा मैया की पुकार May 19, 2021 / May 19, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अस्थियां प्रवाहित होती थी मुझमें,अब लाशे निरंतर बहती है मुझमें।और अब कितने पाप धोऊ सबके,ये गंगा मैया कह रही है हम सबको। जिस देश में पवित्र गंगा बहती है,अब पवित्र गंगा में लाशे बहती है।कैसा बुरा समय अब आ गया है,जब मुर्दों की बुरी गति होती है।। थक गई हूं मै पापियों के पाप धोते […] Read more » Call of Ganga maiya गंगा मैया की पुकार