कविता मेरे जाने के बाद May 7, 2021 / May 7, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment मैं जानता हूँमेरे जाने के बादकौन किस तरह सेकरेगा मुझे याद कोई मन-ही-मन मुस्कुराएगाकोई ठहाके भी लगाएगाकुछ को अफ़सोस होगातो कोई बहुत पछताएगा कोई ढूँढ़ेगा मुझे मेरी ग़ज़लों मेंकोई प्रेम के पर्यायवाची शब्दों मेंपढ़ने मेरी एक और किताबरब से करेगा कोई फ़रियाद मैं जानता हूँमेरे जाने के बादकौन किस तरह सेकरेगा मुझे याद कुछ कहेंगे […] Read more » मेरे जाने के बाद
कविता कलचुरी: हैहय यदुवंशी क्षत्रियों की ऐतिहासिक गाथा May 6, 2021 / May 6, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकये ऐतिहासिक गाथा,कलचुरी हैहय यदुवंशी क्षत्रियों की,चन्द्र, बुध,पुरुरवा,आयु, नहुष,ययाति, यदु, हैहयवंश की,सोम शीतलम्,बुद्ध पूर्व,आयुष्मान,ययातिवंशी यादों की! ये सच है कि इस भू की जो चीजें धरा में उपलब्ध है,उसकी नाश कभी नहीं होती, चाहे वो धन हो या वंश,न जाने कितनी बार यहां आए राम-रावण, कृष्ण-कंश! जमाना लाख बुरा चाहे,किसी का यहां बुरा […] Read more » Kalachuri: Historical Saga of Haihay Yaduvanshi Kshatriyas
कविता सृष्टि के नियम May 5, 2021 / May 5, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment किये है जो कर्म हमने,उन्हीं का फल पा रहे हैं,बोए है जो पेड़ हमने,उन्हीं के फल खा रहे है।चला आ रहा है यह नियम सृष्टि का सदियों से,उसी को सब लोग संसार में निभाते जा रहे है।। आवागमन का नियम सृष्टि का चला आ रहा है,जो आया है यहां वह यहां से चला जा रहा […] Read more » सृष्टि के नियम
कविता हिन्दी उर्दू एक सिर दो धड़ है May 5, 2021 / May 5, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजवाहरलाल नेहरू का कहना है,हिन्दी उर्दू एक सिर दो धड़ है! इससे सटीक परिभाषा हो नहींसकती हिन्दी व उर्दू भाषा की! हिन्दी वाक्य रचना में संस्कृत,औ’कुछ देशी-विदेशी शब्द होते! इन विदेशी शब्दों में अरबी एवंफारसी सायास मिलाई जाती है! उर्दू जबतक विदेशी लिपी में है,तब तक जनता नहीं चाहती है! नस्तालीक उर्दू की […] Read more » हिन्दी उर्दू
कविता कोरोना त्रासदी(अपनों को खोने का गम ) May 4, 2021 / May 4, 2021 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment अंधेरे में डूबा है यादों का गुलशनकहीं टूट जाता है जैसे कोई दर्पणकई दर्द सीने में अब जग रहे हैंहमारे अपने ,हमसे बिछड़ रहे हैंन जाने ये कैसी हवा बह रही हैज़िन्दगी भी थोड़ी सहम सी गई हैहवाओं में आजकल ,कुछ तल्खियां हैंराहों में आजकल ,कुछ पाबंदियां लग गई हैं ||आंखों का है धोखा या […] Read more » कोरोना त्रासदी
कविता मिथक से यथार्थ बनी ययाति कन्या माधवी की गाथा May 4, 2021 / May 4, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकहे माधवी!जिन आठ सौ अश्वमेधी/श्यामकर्णीश्वेतवर्णी घोड़े के लिए तुम बेच दी गईचार-चार पुरुषों के हाथों में,वे महज घोड़े नहीं औकात के पैमाने थेएक कुंवारी कन्या के पिता के,चक्रवर्ती-महादानी होने के मिथ्या दंभ के! जो सहस्त्रों गौ-हाथी-घोड़े दान करकेरिक्त हस्त हो चुके चतुर्थाश्रमवासी ययाति थेजो समय रहते एकमात्र कन्या तुझ माधवी कोब्याहने से चूके […] Read more » Yayati Kanya Madhavi's saga made from myth ययाति कन्या माधवी
कविता आशा की किरण May 3, 2021 / May 3, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आज अंधेरा है,कल उजाला भी आयेगा,आज किसी का है,कल हमारा भी आयेगा।उम्मीद पर है दुनिया कायम ए मेरे दोस्तो,ये अंधेरा इस संसार का कल मिट जायेगा।। रखो आशा की किरण,निराशा से क्या होगा,निराश होकर कभी भी कोई काम नहीं होगा।निराशा मे ही आशा छिपी है ध्यान से देखो,कल फिर यह हमारा भविष्य उज्ज्वल होगा।। ध्वनि […] Read more » आशा की किरण
कविता हे ब्राह्मण! तुम अपना सत्कर्म करो May 3, 2021 / May 3, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे ब्राह्मण! तुम अपना सत्कर्म करोतुम्हारे ही कर्म के अनुसरण सेअन्य वर्ण अपने-अपने कर्म करते,तुम अगर बली विरोधी शाकाहारी बनोगेतो यजमान भी क्यों बली करेगा! हे ब्राह्मण तुम निर्णय करो,तुम अगर गौ-धन-रत्न दान नहीं चाहोगे,तो रत्नों का मूल्य नीचे गिर जाएगा,तुम अगर सोने को पीतल से निकृष्ट,चांदी को एल्यूमिनियम की जाति कहोगेतो दान […] Read more » Brahmin ब्राह्मण
कविता बन्द है दरवाजे,कभी तो खुलेंगे April 27, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बन्द हैं दरवाजे,कभी तो खुलेंगे,कभी तो हम अपनो से मिलेंगे।उम्मीद रखो,अच्छा वक्त आयेगा,जो बिछड़े है,वे जल्दी ही मिलेंगे।। सूरज छिपता है,तो निकलता भी है,बीज बोते है,तो पौधा उगता भी है।उम्मीद पर है ये कायम दुनिया है सारी,सोता है इंसान तो कभी जागता भी है।। ख्तम होगा गम,खुशियां लौटकर आयेगी,कभी न कभी तो चेहरों पर मुस्कान […] Read more » कभी तो खुलेंगे बन्द है दरवाजे
कविता हैहय क्षत्रिय वंश: किसी जाति को मिटाना है तो इतिहास बिगाड़ दो April 27, 2021 / April 27, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on हैहय क्षत्रिय वंश: किसी जाति को मिटाना है तो इतिहास बिगाड़ दो —विनय कुमार विनायककिसी वंश या जाति को मिटाना हैतो उसका इतिहास बिगाड़ दो! ऐसा ही किया गया है हैहयवंशी क्षत्रियों के साथ,हैहय क्षत्रिय चंद्रकुल के यदुवंश की ज्येष्ठ शाखा है,हैहयवंश की विरुदावली गाई गई है सभी पुराणों में! हैहयवंश को श्रेष्ठ मुनि महात्मा कुल कहा गयासभी पुराणों में ,अग्नि पुराण का कथन है—“हैहयानां कुला: पंच: […] Read more » हैहय क्षत्रिय वंश
कविता बामियान में बुद्ध April 27, 2021 / April 27, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकईसा पूर्व पांच सौ तिरसठ मेंलुम्बिनी वन नेपाल में जन्मे थे गौतम! ईसा पूर्व पांच सौ अठाईस मेंगया बिहार में गौतम बने थे भगवान बुद्ध!ईसा पूर्व चार सौ तिरासी में कुशीनगर,उत्तर प्रदेश में बुद्ध ने पाया महानिर्वाण! किन्तु मरे नहीं थे बुद्धअहिंसा, करुणा,क्षमा,दया की मूर्ति बनकरछा गए बुद्ध विश्व क्षितिज परसूक्ष्म और स्थूल […] Read more » बामियान में बुद्ध
कविता चाइना के कोरोना तूने कर दिया कमाल April 27, 2021 / April 27, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चाइना के कोरोंना तूने कर दिया कमाल,तूने यह कैसी चली है चाल,सारा विश्व हो गया है बेहाल,तू खुद हो गया है मालामाल। न कहीं तूने तोप तलवार चलाई,न कहीं तूने ढाल कृपाण चलाई।न कहीं तूने अपनी मिसाइल चलाई,तूने हर जगह अपनी ही चलाई।सारा विश्व हो गया है अब निढाल,चाइना के कोरोना तूने कर दिया कमाल।। […] Read more » China's corona tune did wonders for you चाइना के कोरोना तूने कर दिया कमाल