कविता कुणाल तुम्हारी सुन्दर आंखें हो गई काल March 2, 2021 / March 2, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककुणाल! तुम महारानी पद्मावतीव मगध सम्राट अशोक के लाल!तुम्हारी दो आंखें थी खंजन जैसीसुन्दर, हो गई थी तुम्हारा काल! कुणाल नयनाभिराम थे इतने किविमाता; तिष्य हो गई थी बेहाल!जैसे एक पूर्वजा उर्वशी अर्जुन कोदेखकर मोहित हुई थी पूर्व काल! कुणाल धर्मविवर्द्धन! तुम्हारी थीविमाता के प्रति मर्यादा बेमिसाल!विमाता तिष्यरक्षिता ने खेली थी,तुम्हें दंड देने […] Read more » कुणाल तुम्हारी सुन्दर आंखें हो गई काल चन्द्रगुप्त प्रपौत्र बिन्दुसार पौत्र अशोक सुपुत्र मैं युवराज कुणाल!
कविता कुछ अच्छा सा काम करो हे मन March 2, 2021 / March 2, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककुछ अच्छा सा काम करो हे मन!जाने क्यों असमय छूट जाता तन! हमारे नहीं, हमारे परिजन के प्राण,जिनके बिना दुखद होता ये जीवन!जिनके निधन से लोग होते निर्धन!जिनके दम पे सफल था ये जन्म! जिन नाते-रिश्ते पर इतराते थे हम,जिनके होने से मिलता था दम-खम,जिनके ना होने से जगत मिथ्या-भ्रम,जिनके बाद ना न्यारा […] Read more » Do some good work कुछ अच्छा सा काम करो हे मन
कविता भारत की आंखें March 1, 2021 / March 1, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकभारत की आंखेंबड़ी ही खूबसूरत होती हैभारत की आंखों मेंईश्वर की मोहिनी मूरत होती हैभारत की आंखों नेदेखी दिखाई दुनिया कोराम कृष्ण बुद्ध महावीर बनकरभारत की आंखेंगुरु नानक,गोविंद,प्रताप,शिवाजी जैसीभारत की आंखें त्रिनेत्र होतीभारत की आंखेंभूत, भविष्य, वर्तमान एक साथ देखती हैभारत की आंखें राम जैसीराजीव नयन नयनाभिराम होती हैभारत की आंखें घनश्याम जैसीखेल-खेल […] Read more » Eyes of india
कविता मैं पागल हूं, रहने दो।। March 1, 2021 / March 1, 2021 by अजय एहसास | Leave a Comment कुछ कहता हूँ कहने दो , मैं पागल हूं, रहने दोआँसू देख तेरे आंखों में मेरे अश्क भी बहने दोवो कहती है मैं पागल , मैं पागल हूँ रहने दो। उसकी कद्र मैं करता हूं, पीर मैं उसके समझता हूँउसको अपना मानता हूँ, मन की बातें जानता हूँराज खुले तो मैं पागल, मैं पागल हूँ […] Read more » I'm crazy
कविता कोयल तुम बोलती हो अपनी बोली February 25, 2021 / February 25, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककोयल तुम बोलती हो अपनी बोली,इसलिए तू आजाद हो नीलगगन में! कोयल तुम्हारी कूक अपने दिल की,इसलिए तुम बसी हो सबके मन में! कोयल तुम नहीं कूकती पराई वाणी,इसलिए तू कैद नहीं किसी बंधन में! कोयल तुम्हारी भाषा नहीं नकल की,इसलिए तू रहती हो अपने चमन में! कोयल तू तोते सा नहीं हो […] Read more » Cuckoo you speak your dialect कोयल तुम बोलती हो अपनी बोली
कविता समय का पहिया February 25, 2021 / February 25, 2021 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment मानो तो मोती ,अनमोल है समयनहीं तो मिट्टी के मोल है समयकभी पाषाण सी कठोरता सा है समयकभी एकान्त नीरसता सा है समयसमय किसी को नहीं छोड़ताकिसी के आंसुओं से नहीं पिघलतासमय का पहिया चलता हैचरैवेति क्रम कहता हैस्वर्ण महल में रहने वालेतेरा मरघट से नाता हैसारे ठौर ठिकाने तजकरमानव इसी ठिकाने आता है ||भूले […] Read more » समय का पहिया
कविता भाई बहिन का रिश्ता February 24, 2021 / February 24, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment भाई बहिन का ये रिश्ता,कैसा अजीब है ये रिश्ता।लड़ते झगड़ते है ये आपस मे,फिर भी टूटता ना ये रिश्ता।। लड़ झगड़ कर एक हो जाते,एक दूजे के बिन रह न पाते।जब हो जाते एक दूजे से नाराज,बिन मनाएं ये रह नहीं पाते।। भाई बहिन एक खून का रिश्ता,जो बनता है दो खूनो से रिश्ता।वैसे तो […] Read more » भाई बहिन का रिश्ता
कविता कोई भी कृति राम चरित्र की पूर्णाहुति नहीं है February 23, 2021 / February 23, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककोई भी कृति राम चरित्र की पूर्णाहुति नहीं है,वाल्मीकि के पूर्व रामकथा लौकिक आस्था थी! नारद की मौलिक पत्रकारिता को वाल्मीकि नेरामायण नाम से काव्यात्मक अभिव्यक्ति की! आगे कालिदास, भवभूति, तुलसी लेखनी चली,किन्तु राम की महिमा अब भी बहुत अनकही! रामचरित्र पर एक आक्षेप है शूद्रहन्ता होने का,कितना झूठ, कितना कल्पित, कितना है […] Read more » No work is full of Ram Charitra राम चरित्र
कविता बड़ी खूबसूरत है जिंदगी February 23, 2021 / February 23, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment बड़ी खूबसूरत है ये ज़िंदगी…..इसी ने मुझे संघर्ष करना सिखायाहंसना सिखाया,रोना भी सिखायाकभी अपने को कम समझना नहीं हैंये सिलसिला भी ज़िंदगी ने सिखाया….. कठिन से कठिन को आसान बनानाये हौसला भी ज़िंदगी से ही आयाकभी हार जाओ, उदासी न लानाये मुस्कान भी ज़िंदगी से ही आया…. समझते हैं ख़ुद को बड़े ही नादानज्ञान की […] Read more » बड़ी खूबसूरत है जिंदगी
कविता ‘सर’ संबोधन का ये रिवाज मिटाना होगा February 23, 2021 / February 23, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on ‘सर’ संबोधन का ये रिवाज मिटाना होगा —विनय कुमार विनायक‘सर’ संबोधन का ये रिवाज मिटाना होगा,विदेशी गुलामी से हमें निजात पानी होगी,देशी संबोधनों को अब हमें अपनाना होगा! ‘सर’ में बड़ा अहं है, अधिकार का वहम है,‘सर’ संबोधन में सेवा भावना बहुत कम है,तनिक नहीं रहम,’सर’ अंग्रेजों सा बेरहम है! सर में डर है,डरा-डरा देश का हर जन है,सर बोलनेवाले दीन,हीन,लाचार दीखते […] Read more » ‘सर' संबोधन का ये रिवाज मिटाना होगा आर्यवर गुरुवर प्रियवर बंधुवर मान्यवर मित्रवर
कविता ओ अनजाने सहयात्री February 21, 2021 / February 21, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकओ अनजाने सहयात्री!तू बैठ जा मेरी आधी सीट परमेरी पीठ से लगकर कि यात्रा अभी बहुत लम्बी है! यह मत समझना कि यकायक तुम परमेरा प्यार उमड़ आया किसी स्वार्थ या श्रद्धा भाव से! मेरी सदाशयता है आशंका प्रसूतकि तुम्हें ईर्ष्या न हो जाए मेरे भाग्य सेजग न जाए एक शैतान तुम्हारे अंदरउग […] Read more » ओ अनजाने सहयात्री
कविता आर्य द्रविड़ को अलग जाति बताके भ्रम फैलाना ठीक नहीं February 19, 2021 / February 19, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआर्य-द्रविड़ को अलग-अलग जातिबताके भ्रम को फैलाना ठीक नहीं! ‘आर्य’ भारत में नहीं अलग जाति,यह तो एक संबोधन और उपाधि,संस्कृत भाषा-भाषियों से संबोधित,भारतीय भाषाओं द्वारा संपोषित! आज का ‘सर’ अंग्रेजी सरनेम जैसे,नाम के आगे या पीछे में लगा देते,जैसे सर सैयद अहमद, सर इकबाल,अंग्रेज नहीं, मुस्लिम हिन्दू मूल के! ज्यों मुहम्मद जिन्ना,मुहम्मद इकबाल,अरबी […] Read more » It is not right to spread illusions by calling Arya Dravid a separate caste आर्य द्रविड़