कविता अहिंसा की हिंसा February 7, 2021 / February 7, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअहिंसक का हिंसा का शिकार हो जाना है,अहिंसा का हिंसा के प्रति अहिंसक हो जाना! हिंसा एक कुप्रथा है, अहिंसा धर्म से पोषित,ईसा अहिंसक थे इतना कि हिंसकों के लिएउनके दिल से आखिरी उद्गार निकला क्षमा! ईसापूर्व अशोक शोकग्रस्त तब हुए,जब हिंसा केविरुद्ध युद्ध विरत हो अहिंसक बौद्ध हो गए,हिंसकों का सबसे बड़ा […] Read more » अहिंसा की हिंसा
कविता एक धर्म निरपेक्ष कविता February 6, 2021 / February 6, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकमैं चाहता हूंएक ऐसी कविता लिखनाजिसमें परम्परा गान न होकिसी संस्कृति पुरुष का नाम न होजो पूरी तरह से हो सेकुलरऔर समकालीन भी! मैं चाहता हूंएक वैसी कविता लिखनाजिसमें चिंता हो आज केवृद्ध-उपेक्षित-सेवानिवृत्त माता-पिता कीजिसे पढ़ूंगा उस सेमिनार मेंकि कितना जरूरी/कितना त्याज्य हैआज के वरिष्ठ नागरिक! मैं लिखूंगा नहींमातृ देवो भव:/पितृ देवो भव: […] Read more » एक धर्म निरपेक्ष कविता
कविता अमृत और विष अपने हिय में होता है February 6, 2021 / February 6, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअमृत और विष अपने हिय में होता है,अमृत के नाम से चहक उठता मानव,विष के नाम पर वह व्यर्थ ही रोता है!अमृत और विष अपने हिय में होता है! विकसित करो आत्म बल को, दूर करोसारे हतबल को,छल को,मन के मल को,डर कर मानव यूं ही क्यों कर सोता है!अमृत और विष अपने […] Read more » अमृत और विष अमृत और विष अपने हिय में होता है
कविता धर्माधिकारी February 5, 2021 / February 5, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकचाहे तुम बदल लो नाम जाति उपाधियहां तक कि धर्म भीपर तुम्हारी जाति उपाधि वंशावलीखोज ही लेंगे धर्माधिकारीतुम्हें अकुलीन/वर्णसंकर के बजायअपनी बराबरी का दर्जा देकरगले लगाएंगे नहीं धर्माधिकारी! कृष्ण बुद्ध महावीर शिवाजी तक कीजन्म कुंडली में वृषलत्व को ढूंढ लिया गया थाऔर वंचित किया गया था कृष्ण को अग्रपूजन सेऔर शिवाजी को तिलक […] Read more » धर्माधिकारी
कविता मजबूर February 4, 2021 / February 4, 2021 by आलोक कौशिक | 1 Comment on मजबूर कोई भी इंसानजब मजबूर होता हैखुद से वहबहुत दूर होता है जानकर भी राज़ सारेदिखता है अनजानबनकर रह जाता हैहालातों का ग़ुलाम ऐसा भी होता हैचाहता है जब सारा ज़मानाअपनों के लिएतब इंसान होता है बेगाना कोई भी इंसानजब हो जाता है लाचारसमझ से परेहोता है उसका व्यवहार Read more » मजबूर
कविता एकतरफ़ा मोहब्बत February 3, 2021 / February 3, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment वैसे लोग जोएकतरफ़ा प्यार में होते हैंये ना समझसब-के-सब बीमार होते हैं कुछ लोग इश्क़ऐसा भी कर जाते हैंमोहब्बत की ख़ातिरखुशी से मर जाते हैं प्रेम को कहते परमेश्वरइनके भगवान नहीं होतेदिलबर की गुस्ताख़ियों सेकभी परेशान नहीं होते तक़लीफ़ देती है ज़िंदगीलेकिन फिर भी मुस्कुराते हैंहोती है मोहब्बत एकतरफ़ावो एकतरफ़ा ही निभाते हैं Read more » One sided love एकतरफ़ा मोहब्बत
कविता इसके भी जिम्मेवार तुम्हीं हो February 3, 2021 / February 3, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकनैतिकता को ताख पर रखकर बोलते रहो झूठपार्टीबद्ध होकर करते रहो लूटघोंपते रहो सच्चाई की पीठ में छुरीजब सौ में निन्यानबे हो गए झूठ के पोषकफिर एक की आवाज कौन सुनेगा? ऐसे में नक्कार खाने मेंतूती की आवाज कौन सुनता?जिसकी लाठी उसकी भैंस, यही तो रोना हैऐसे में लट्ठधर तुम्हें होना हीं होना […] Read more » इसके भी जिम्मेवार तुम्हीं हो
कविता खुशी और ग़म February 2, 2021 / February 2, 2021 by आलोक कौशिक | 1 Comment on खुशी और ग़म नहीं लगा पाओगेइसका अनुमानकौन है जहान मेंकितना परेशान किसी के जीवन मेंहै कितनी खुशीअंदाज़ा ना लगानादेख उसकी हँसी चाहत नहीं होतीफिर भी चाहना पड़ता हैग़मों को छिपाकरमुस्कुराना पड़ता है बहते हैं उनके अश्रु भीजो सुख में जीवन जीते हैंदिखें ना आँसू जिनकेवो हर पल बहुत रोते हैं Read more » खुशी और ग़म
कविता शाक्यवीर शाक्यमुनि गौतम की पुकार February 2, 2021 / February 2, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे मार! मुझे मत मार!मैं महामाया-शुद्धोधन का उनतीस वर्षीय बेटा शाक्यवीरसिद्धार्थ,एक क्षत्रिय राजकुमार, याचना नहीं समर करने वाला,सहस्त्रार्जुन, राम, कृष्ण का वंशज, सदियों चला असि की धार!बहुत दिया गीता का युद्ध प्रवचन, बहुत किया धनुष टंकार,सदियों का अनुभव हमारा, युद्ध करना है बेकार! हे मार! मुझे मत मार!इक्कीस-इक्कीस बार हुआ युद्धप्रिय जातियों का […] Read more » Call of Shakyavir Shakyamuni Gautam शाक्यमुनि गौतम
कविता वो जश्न कोई मना न सके February 2, 2021 / February 2, 2021 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment वो जश्न कोई मना न सकेदोस्ती वो निभा न सकेआग दिल की बुझा न सकेमेरे जज्बातों से खेलकर भीवो जश्न कोई मना न सके ||कभी खामोश रहता हूँकभी मैं खुल कर मिलता हूँजमाना जो भी अब समझेज़माने की परवाहअब मैं न करता हूँवो पल कैसे भूल सकता हूँबुझाई थी नयनों की प्यास जब तुमनेवो हर […] Read more » वो जश्न कोई मना न सके
कविता उसकी मोहब्बत में February 1, 2021 / February 1, 2021 by आलोक कौशिक | 1 Comment on उसकी मोहब्बत में उसका ना हो पाया तोअपना उसे बना लूँगाबिना लिए सात फेरेमोहब्बत निभा लूँगा संभव नहीं होगा मिलनमुश्किल होगा अगर दर्शकरके अपनी आँखें बंदमैं कर लूँगा उसे स्पर्श छिन जायेगी आवाज़ मेरीखामोशियाँ उसे सुना दूँगामैं उसकी मोहब्बत मेंखुद को भी भुला दूँगा रुक जाएँगी जब साँसेदुनिया मुझे जलाएगीचिता से उठती आग भीउसकी आकृति बनाएगी ✍️ आलोक […] Read more » उसकी मोहब्बत में
कविता आत्मा पुनर्जन्म ऐसे पा लेती है February 1, 2021 / February 1, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —-विनय कुमार विनायकएको ब्रह्म दूजा नास्तिअस्तु परमात्मा एक है! अशरीरी अखण्ड परमात्मापारद सा खण्डित होतागोल बूंद सा मंडित होता! वायवीय आवरण से घिरकरआवरणों के छंट जाने सेदूरियों के घट जाने सेबूंद-बूंद अनेक बूंद होकरएक जलराशि सा हो जाता! अस्तु परमात्मा एक है!आत्मा-आत्मा भी बूंद-बूंद साएक-एक इकाई हो जाता! परमात्मा बूंद-बूंद सा बंटकरशरीर में एक नहीं […] Read more » This is how the soul reincarnates पुनर्जन्म