कविता मुगल बादशाह नसीरुद्दीन हुमायूं December 10, 2020 / December 10, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकबाबर की बीबी महीम बेगम को थाचार लाल-हुमायूं, असकरी और हिंदाल!पन्द्रह सौ तीस दिसंबर मेंहुमायूं बैठा आगरा की गद्दी परकामरान को काबुल, कांधारअसकरी को संभलऔर हिंदाल को अलवर का हिस्सायह था बाबरी उतराधिकार का किस्सा।सन् पंद्रह सौ इकतीस मेंहुमायूं ने कालिंजर को घेरासन् पंद्रह सौ बत्तीस में लगादौराहा का फेरा/दादरा का युद्धजिसमें महमूद […] Read more » नसीरुद्दीन हुमायूं मुगल बादशाह नसीरुद्दीन हुमायूं
कविता किसान आंदोलन के पीछे कौन ? December 9, 2020 / December 9, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सुना है तेरे शहर की आबोहवा शैतान बन गई,शाहीन बाग़ की लोमड़ियां अब किसान बन गई। मिली नहीं कोई जगह जब किसी शहर में उनको,दिल्ली शहर में आकर जबरदस्ती मेहमान बन गई। घुसने नहीं दिया जब किसी मंदिर मस्जिद मे उनको,किसानों के बीच बैठ कर उनकी भगवान बन गई। लगाती थी कभी वे पाकिस्तान जिंदाबाद […] Read more » किसान आंदोलन के पीछे कौन ?
कविता मुगल आक्रांता जहीरुद्दीन बाबर December 9, 2020 / December 9, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकबाबर(1526-1530ई.)चुगताई तुर्क तैमूरी पितृ वंश केमंगोल बौद्ध चंगेजी मातृ रक्त सेएक बर्बर भारत आक्रांता जन्मानाम था उसका बाबरमाता थी कुतलुगनिगारपिता उमर शेख मिर्जा था फरगना का सरदारबाबर उज़्बेकिस्तानी अति महत्वाकांक्षी थाकिन्तु शीघ्र हुआ वह बदनसीबी का शिकारजब खदेड़ दिया उसकोअपनों ने अपनी ही जमीं सेवह निस्सहाय सा खड़ा थाअर्थ धन-धान्य की कमी सेफिर […] Read more » Mughal invader Zaheeruddin Babur मुगल आक्रांता जहीरुद्दीन बाबर
कविता किसानों से निवेदन December 8, 2020 / December 8, 2020 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on किसानों से निवेदन क्यों भारत तुम बन्द करते हो,क्यों आफत तुम मोल लेते हो।अपने को भी तुम कष्ट देते हो,दूसरो को भी तुम कष्ट देते हो। तुम तो देश के अन्नदाता हो,भारत के भाग्य विधता हो।क्या मिलेगा भारत बन्द करने मे,केवल नफरत के बीज बोते हो। तुम तो हल को धारण करते हो,क्यों दूजो की बंदूक धारण करते […] Read more » किसानों से निवेदन
कविता सैय्यद वंश की दिल्ली सल्तनत December 8, 2020 / December 8, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतैमूरलंग का प्रतिनिधि शासकदिल्ली का सुल्तान खिज्रखान था(1414 से1421 ई.)चौदह सौ चौदह से इक्कीस तकखिज्र खान का शासनदिल्ली तक सिमट आया थाउसने उपाधि शाह कीकभी नहीं धारण कीपहला सैय्यद शाह कहलाया थामुबारक शाह(1421ई.)जिसने चलाया स्वनिर्मित सिक्काउसका वारिस मुहम्मद शाह(1434-1444ई.)फिर अलाउद्दीन आलम शाह(1444-1451 ई.)जो लोदियों के हाथ बिका थास्वेच्छा से गद्दी सौंपी थीबहलोल लोदी […] Read more » Delhi Sultanate of Sayyid Dynasty सैय्यद वंश की दिल्ली सल्तनत
कविता लोदी वंश की दिल्ली सल्तनत December 8, 2020 / December 8, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआलम शाह सैयद ने आराम सेबहलोल लोदी अफगान कोदिल्ली की सल्तनत सौंपी थी(1451 से 1526 ई.)सन् चौदह सौ इक्यावन मेंबहलोल लोदी एक अफगानपख्तून बना दिल्ली का सुल्तानइसके पहले सभी तुर्क थे(पहले तीन वंश गुलाम,खिलजी,तुगलक तुर्क नस्ल के चौथा सैयदतुर्क-अफगान,पाँचवाँ लोदी अफगान)प्रथम अफगानी सल्तनत काबहलोल लोदी ने किया निर्माणसन् चौदह सौ नब्बासी तकदिल्ली रही […] Read more » लोदी वंश की दिल्ली सल्तनत
कविता तुगलक वंश की दिल्ली सल्तनत December 7, 2020 / December 7, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकगयासुद्दीन तुगलक था तुगलक वंश स्थापक(1320-1325 ई.)हिन्दू कोख से जन्मा धर्म से मुसलमान बना थासन् तेरह सौ पच्चीस में हुआ एक हादसागयासुद्दीन मरा और जौना खाँ ( उलुग खाँ )मुहम्मद बिन तुगलक नाम सेबना सल्तनत का बादशाह (1325-1351 ई.)वह छीट खोपड़ा था या जमाने से कुछ आगे बढ़ा थादिल्ली से देवगिरी/दौलताबाद,दौलताबाद/देवगिरी से दिल्लीराजधानी […] Read more » Delhi Sultanate of Tughlaq Dynasty तुगलक वंश की दिल्ली सल्तनत
कविता सौरभ तुम बेकार || December 6, 2020 / December 6, 2020 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment वक्त पड़े तो फूल हम, दीखते समझदार |कह दी सच्ची बात तो, सौरभ तुम बेकार || बस अपनी ही हांकता, करता लम्बी बात |सौरभ ऐसा आदमी, देता सबको घात || जिसने सच को त्यागकर, पाला झूठ हराम |वो रिश्तों की फसल को, कर बैठा नीलाम || दुश्मन की चालें चले, रहकर तेरे साथ |सौरभ तेरी […] Read more » सौरभ तुम बेकार
कविता खिलजी वंश की दिल्ली सल्तनत December 6, 2020 / December 6, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजलालुद्दीन फिरोज खिल्जी(1290 ई.से 1296 ई.तक)एक गैर तुर्क, सहनशील उदार दिल थाइसलिए वह शासक नाकाबिल थाअलाउद्दीन(1290 ई.से 1316 ई.तक)उसका भातृपुत्र सह जमाता मौके की ताक में थाकत्ल किया श्वसुर का उसने तत्क्षण गद्दी को पायाधन स्वर्ण बांटकर उसने हत्या का आरोप मिटायाऔर मिटाया ‘इक्तेदारी’, प्रीति भोज उत्सव बाधित थामधु का सेवन था प्रतिबंधित,ऐयारी […] Read more » Delhi Sultanate of Khilji Dynasty खिलजी वंश की दिल्ली सल्तनत
कविता गुलाम वंश की दिल्ली सल्तनत December 5, 2020 / December 5, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककुत्बुद्दीन ऐबक का उतराधिकारीपुत्र ‘आराम’ को हराम कर आया इल्लतुतमिशइल्वारी नस्ल का एक नया गुलामकुत्बुद्दीन ऐबक का जमाताजो कहलाया ‘दिल्ली का प्रथम सुल्तान’उसने चलायी इक्तेदारी प्रथा,और चलाया चांदी का टंका, पीतल का जीतलऔर बनाया चालीस गुलाम का एक दल‘तुर्कन-ई-चहलगान’अब गुलाम ही गुलाम थे,यहां-वहां-जहां कभी बैठते थेभारत के बेटे वीर पृथ्वीराज चौहान!भारत में अब […] Read more » Delhi Sultanate of Ghulam Dynasty गुलाम वंश की दिल्ली सल्तनत
कविता दिल्ली सल्तनत December 4, 2020 / December 4, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment –विनय कुमार विनायकऐ गोरी! मुहम्मद गोरी!ग्यारह सौ बेरानबे ईस्वी में‘तराईन में ‘गुल’ ‘खिला’ ‘तु’ ‘से’ ‘लो’दिल्ली में सल्तनत स्थापित कर ली(गुलाम-खिल्जी-तुगलक-सैयद-लोदी)ऐ गोरी ! मुहम्मद गोरी!पर तुम्हें कहां था कोई प्यारामाता-पिता, सुत-सुता औरबहन-भ्राता कहां किसी से नातासिवा एक कुत्बुद्दीन ऐबकतुर्की नस्ल का गुलाम तुम्हें प्रिय थावही तुम्हारा अधिकारी !दिल्ली पति पृथ्वी राज चौहान को धूल चटाकरकुत्बुद्दीन […] Read more » poem on delhi sultanate दिल्ली सल्तनत
कविता भक्त भ्रष्ट हो जाते हैं नौकरी के मिलते December 2, 2020 / December 2, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअवैध कमाते हैं जो, अहंकार में इतराते,अवैध अवैध होता वो समझ नहीं पाते! ईश्वर भक्ति है दिखावा उन कर्मियों का,जो बिन नजराने जनसेवा में टांग अड़ाते! काम के बदले मेहनताना मिले,वो अच्छा,एक काम के दो दाम हराम ही कहलाते! अवैध कमानेवालों में वैध समझौता होता,हिसाब किताब ठीक होता भातृवत रहते! उतना प्रेम शायद […] Read more » भक्त भ्रष्ट हो जाते हैं नौकरी के मिलते