कविता मन ने तेरा व्रत लिया ! November 6, 2020 / November 6, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment ●●●●●●●●●जिनके सच्चे प्यार ने, भर दी मन की थोथ !उनके जीवन में रहा, हर दिन करवा चौथ !!●●●●●●●●●हम ये सीखें चाँद से, होता है क्या प्यार !कुछ कमियों के दाग से, टूटे न ऐतबार !!●●●●●●●●●मन ने तेरा व्रत लिया, हुई चांदनी शाम !साथी मैंने कर दिया, सब कुछ तेरे नाम !!●●●●●●●●●मन में तेरा प्यार है, […] Read more » मन ने तेरा व्रत लिया !
कविता दशमेश गुरु गोविन्द सिंह सोढ़ी November 6, 2020 / November 6, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजब देश धर्म खतरे में थाहिंदुत्व कर रहा था चीत्कारऐसे ही संकट की घड़ी मेंसोढ़ी राय गुरु गोविन्द नेराम की मर्यादा भक्ति,कृष्ण के गीता का ज्ञानसहस्त्रबाहु की ले तलवार,लिया सिंह का अवतारएक संत सिपाही बनकर,तीन पुश्त की बली देकरदेश, धर्म, जाति का कियादशमेश गुरु ने उद्धारजब कश्मीरी हिन्दुओं परऔरंगजेब का यह फरमान“छः माह […] Read more » Dashmesh Guru Govind Singh Sodhi दशमेश गुरु गोविन्द सिंह सोढ़ी
कविता अफसर की तरह November 5, 2020 / November 5, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on अफसर की तरह —–विनय कुमार विनायकविगत वर्ष से बेहतर कीउम्मीद लेकर आया था यह वर्षजो आगत को अक्षुण्ण उम्मीद काचार्ज देकर गत हो गयाउम्मीद बेहतरी कीजो विरासत में मिली थीडाक टिकटों/करेंसी रेवेन्यू की तरहहर बार गिनकरहस्तांतरित करता रहा वर्षभारमुक्त अधिकारी साबिना कमोबेश किएभारग्राही पदधारी कोउम्मीद जिसे बचाए रखना थाबचाए रखना होगाविदाई के पूर्व आगत को हूबहू सौंपनेकि खर्चने […] Read more » just like officer अफसर की तरह
कविता चाणक्य सा राजपूतों को मिला नही सलाहकार November 4, 2020 / November 4, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजब देश, धर्म खतरे में पड़ा था, भारत जातिऔर कठोर वर्ण व्यवस्था में जकड़ा-जकड़ा था,जब आक्रांता सीमा के अंदर घुस आ खड़ा था,निपट अकेला एक वर्ग राजपूत ही लड़ रहा था,ले हाथ में हथियार, कोई भी नहीं था मददगार! राजपूतों में भेद बड़ा था, कोई छोटा, कोई बड़ा था,सब एक दूसरे को मरने-मारने […] Read more » Chanakya like Rajputs did not get advisor
कविता भृगु कौन थे, विष्णु आदित्य से भार्गवों का विग्रह क्यों था? November 3, 2020 / November 3, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकभार्गवों का मूल पुरुष थे भृगु ऋषि,दैत्य-दानवों का संगठन कर्ता, असुरों का याजक,आदित्य-देव-आर्य संगठन का विरोधी! भृगु का मूल निवास एशिया माइनरस्थान था ‘गुरुद्वारम’’ संपत्ति गोर्डियम क्षेत्र है,भृगु थे ईरानी अहुर माजदा वरुण पुत्र! भृगु दैत्यराज हिरण्यकश्यप पुत्री दिव्याऔर पुलोमा दानव कन्या पौलोमी के पति थे,अदिति पुत्र विष्णु था उनका जमाता! अदिति पुत्र […] Read more » Who was Bhrigu why was the Deity of Bhargavas from Vishnu Aditya? भृगु कौन थे
कविता मगध साम्राज्य राजगृह के सम्राट November 3, 2020 / November 3, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआरंभ से मगध रहा है आर्य, अनार्य,व्रात्यजन,जैन तीर्थंकर की आदिभूमि,अथर्ववेद की प्रसव स्थली,जादू टोना,वैद्य वैदगी, आयुर्वेद, बुद्ध के दर्शन,बृहद्रथ,हर्यक,शिशुनाग,नन्द,मौर्य,शुंग,कण्व,सातवाहन, गुप्तों की शौर्यभूमि! चेदिराज उपरिचर वसुपुत्र बृहद्रथ थासंस्थापक मगध में एक राजवंश का,माता गिरि के नाम बसाया गिरिव्रज!मगधराज जरासंध था उनका आत्मज,अत्याचारी और नरमेध यज्ञ आकांक्षी,कृष्णयुक्ति से भीमसेन ने किया वध! जरासंध पुत्र सहदेव […] Read more » Emperor of Magadha Empire Rajagriha मगध साम्राज्य राजगृह के सम्राट
कविता कोरोना की करवाचौथ November 3, 2020 / November 3, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मेरे साथ एक घटना घटी,बात बिल्कुल सच्ची है पर अटपटी |करवांचौथ का दिन था ,मेरा मन बड़ा ही खिन्न था ,दफ़्तर में काम ज्यादा था ,काम करने वाला मै ही प्यादा थामेरा पास एक मोबाइल आयामै जरा उस समय घबरायामैंने मोबाइल उठाया और बोला ,“आप कौन साहब बोल है,”दूसरी तरफ से आवाज आई,“मैं बोल रहा […] Read more » कोरोना की करवाचौथ
कविता यह गाथा है भगवान बुद्ध की November 2, 2020 / November 2, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकयह गाथा है भगवान बुद्ध की,कपिलवस्तु के इक्ष्वाकु शाक्यक्षत्रिय महाराज शुद्धोधन औरमहारानी महामाया के राजकुंवर,अहिंसा,दया, करुणा निधान की! नेपाल के लुम्बिनीवन में जन्मेई. पू. पांच सौ तिरेसठ वर्ष में,मानव के दु:ख से द्रवित होकर,गृह त्यागी शाक्य मुनि बने जोउस महात्मा के धर्म दर्शन की! नाम था उनका सिद्धार्थ गौतम,मानव के दुःख से दुःखी […] Read more » tale of lord buddha This is the story of Lord Buddha भगवान बुद्ध
कविता सीखो निषाद को भाई भीलनी को मां बनाना October 31, 2020 / October 31, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on सीखो निषाद को भाई भीलनी को मां बनाना —विनय कुमार विनायकभारत कभी नहीं हारा है, अरि की सेना से,भारत सर्वदा ही हारा है जातिवादी घृणा से! जबसे हमने जातीय श्रेष्ठता पर दंभ किया,दूसरों को तुच्छ और खुद को महंत किया! दूरियां बढ़ती ही गई भाईयों का भाईयों से,राम ने कहा सद्गुण सीखो अताताईयों से! अग्रज का धर्म नहीं है बड़प्पन पर इतराना,अग्रज का […] Read more » Learn Nishad to make brother Bhilani a mother सीखो निषाद को भाई भीलनी को मां बनाना
कविता बैठा नाक गुरूर !! October 30, 2020 / October 30, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment नई सदी ने खो दिए, जीवन के विन्यास !सांस-सांस में त्रास है, घायल है विश्वास !! रिश्तों की उपमा गई, गया मनों अनुप्रास !ईर्षित सौरभ हो गए, जीवन के उल्लास !! कहाँ हास-परिहास अब,और बातें जरूर !मिलने ना दे स्वयं से, बैठा नाक गुरूर !! बोये पूरा गाँव जब, नागफनी के खेत !कैसे सौरभ ना […] Read more » बैठा नाक गुरूर
कविता तुर्क सुबुक्तगीन और महमूद गजनवी का आक्रमण October 30, 2020 / October 30, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुर्क अब्बासी वंश के महल रक्षक और सैनिक थेजब केंद्रीय शासन की नींव हिली,प्रांतीय शासन कुछ फली फुलीतभी तुर्कों को ‘गाजी’/विजेता बनने की नव प्रेरणा मिली! तब अरबी खिलाफत से होकर खिलाफ बर्बर तुर्क करने लगे खुद हीइस्लाम का माला जाप ट्रांस-ओकि्सयाना, खुरासान और ईरान केभूभाग पर जब था गद्दीनशीन एक सामानी गुलाम […] Read more » Invasion of Turk Subuktagin and Mahmud Ghaznavi तुर्क सुबुक्तगीन महमूद गजनवी का आक्रमण
कविता अब सच कहने का दौर नही है October 30, 2020 / October 30, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअब सच कहने का दौर नही हैअच्छाई को अब ठौर नही हैअब गालियां, लानत-मलामतउनके सिर पे ठीकरा फोड़ना हैजो यहां के वासिंदे नही हैंयही सच्चे लोकतंत्र की मही हैकल के चोर अब चोर नही हैसच्चाई का अब खैर नही हैअब तो सिर्फ वादे ही वादे हैंअब अच्छे दिन सिर्फ यादें हैंवादों के पुलिंदे […] Read more » Now is not the time to tell the truth अब सच कहने का दौर नही है