कविता आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं December 29, 2020 / December 29, 2020 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएंसुखद हो जीवन हम सबकाक्लेश पीड़ा दूर हो जाएस्वप्न हों साकार सभी केहर्ष से भरपूर हो जाएंमिलन के सुरों से बजे बांसुरीये धरती हरी भरी हो जाएहों प्रेम से रंजीत सभीऐसा कुछ करके दिखलायेंआओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं ||हम उठें व उठावें जगत कोसृजन का सुर ताल होहम सजग […] Read more » Let us all celebrate new year आओ सब मिलकर नव वर्ष मनाएं सेलिब्रेट न्यू इयर
कविता नारी तुम नारायणी नर है तुम्हारा अंश December 29, 2020 / December 29, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकनारी तुम्हारी सुंदरता है स्वर्ग से सुन्दर,नारी तुम्हारी आस्था है सृष्टि के ऊपर! नारी तुम्हारी इच्छा से ही उपजा अक्षर,कवि की लेखनी औ’ योद्धा की तलवार! नारी की प्रेरणा से सब करते चमत्कार,नारी तुम्हारे प्रेम से ही फैला ये संसार! नारी की उपेक्षा हीं है यमराज का द्वार,नारी की करुणा ही है बुद्ध […] Read more » नारी तुम नारायणी
कविता साहित्य नारी पुत्री ही नही वो माता है पिता का भी December 28, 2020 / December 28, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकनारी तुम्हारी बांहों में सोता है शिशु नर,नारी तुम्हारी बांहों में बंधा आकाशी नर! नारी तुम्हारी बांहों में रोता है मुमुक्षु नर,नारी तुम्हारी बांहों में शांति से मरता नर! नारी के प्यार में नर आता पुनः देह धर,नारी तुम्हारी गहराई को क्या नापेगा नर? नारी तुम्हारी सीमा को क्या बांधेगा नर?नारी तुम्हारा पग […] Read more » Not only a female daughter she is also a mother of a father नारी पुत्री ही नही वो माता है पिता का भी
कविता बन सौरभ तू बुद्ध !! December 27, 2020 / December 27, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment मतलबी संसार का, कैसा मुख विकराल !अपने पाँवों मारते, सौरभ आज कुदाल !! सिमटा धागा हो सही, अच्छे है कम बोल !सौरभ दोनों उलझते, अगर रखे ना तोल !! काँप रहे रिश्ते बहुत, सौरभ हैं बेचैन !बेरूखी की मार को, झेल रहें दिन-रैन !! जहर आज भी पी रहा, बनता जो सुकरात !कौन कहे है […] Read more » बन सौरभ तू बुद्ध
कविता इन दिनों।। December 27, 2020 / December 27, 2020 by अजय एहसास | Leave a Comment सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनोंकुछ की बदल गयी है देखो चाल इन दिनोंजो हाथ मिलाते थे अदब से करें आदाबअब पूछते नहीं हमारा हाल इन दिनोंसुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।। क्या बात है मचा है क्यो बवाल इन दिनोंपूंजीपती ही देखो मालामाल इन दिनोंसड़कों पे उतरते हैं […] Read more » इन दिनों
कविता नारी तुम नारायणी हो नर का सृजनहार December 27, 2020 / December 27, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकनारी के ह्रदय में अमृत, मन में प्यार,नारी तुम्हारे सामने,बौना है ये संसार! तुम असीम,अतुलनीय ईश्वरीय शक्ति,तुलना तुम्हारी नर से करना है बेकार! तुम्हीं सरस्वती-भगवती-भवानी-मानवी,तुम अक्षर-जर-शक्ति-संस्कृति आधार! तुम्हारे सिवा ईश्वर को देखा है किसने,ईश्वर-अल्ला-भगवान होते हैं निराकार! राम-कृष्ण-बुद्ध-जिन-ईसा-गुरु-पैगम्बर,पाए हैं सबने तुम्हारी कोख में आकार! हिमगिरि सा उतुंग, तुम सागर सी गहरीतुम दया-माया-ममता-करुणा की […] Read more » female Creator of male Woman you are Narayani नारी तुम नारायणी
कविता मां नाम है उस देवी की जो जन्म हमें देती है December 26, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमां नाम है उस देवी की, जो जन्म हमें देती है,मां सृष्टि में इकलौती है, जो सिर्फ हमें देती है! माता की ममता ऐसी है,जिसमें मन्नत होती है,मां ईश्वरीय सृष्टि में जीते जी जन्नत होती है! मां का गुणगान केवल मां शारदे कर सकती है,सारे देवी-देवता मूरत, मां देवी साक्षात होती है! सूर्य-चंद्र-तारे-धरती […] Read more » Mother is the name of the goddess who gives birth to us poem on mother पोयम ऑन मदर
कविता खुदीराम बोस ने कृष्ण की गीता को लेकर शहादत दी थी December 26, 2020 / December 26, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकयह व्यथा-कथा है तबकी जब बंगाल-बिहार-उड़ीसा एक थी,अंगिका-मैथिली-बंगला-उड़िया अलग से भाषा नहीं बनी थी! विद्यापति की पदावली अंग-बंग-कलिंग की साझी वाणी थी,ये हिन्दी आधुनिक साहित्य की भाषारुप में नहीं पनपी थी! आज की तरह हम बिहारी, बंगालियों के लिए बाहरी नहीं थे,दादी अंगिका गीत गाती थी,बाबा बंगला महाभारत पढ़ते थे! मां, सासु मां […] Read more » खुदीराम बोस
कविता उन्हें भी होगा कोविड-19 सा डर December 24, 2020 / December 24, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकचलते हैं हम मास्क लगाकरजैसे रुस का ऋक्ष और भारत केटोटमवादी वानर जामवंत, हनुमानकभी बन जाते थे ब्राह्मण औरकभी पूंछधारी लंगूर सा बन्दर! शायद उन्हें भी होगा कोविड-19 सामानव प्रजाति के विनाश का कोई डर! मानव जो भयभीत रहतेअपने अस्तित्व बचाने को लेकरतकनीकी यद्यपि थी काफी विकसित,हनुमान उड़ सकते थे सिंगल सीटरवायुयान की […] Read more » कोविड-19 सा डर
कविता श्री अनुपम मिश्र : सबसे लम्बी रात का सुपना नया December 22, 2020 / December 22, 2020 by अरुण तिवारी | Leave a Comment अरुण तिवारी सबसे लम्बी रात का सुपना नयादेह अनुपम बन उजाला कर गया।रम गया, रचता गयारमते-रमते रच गया वह कंडीलों कोदूर ठिठकी दृष्टि थी जोपता उसका लिख गयासबसे लम्बी रात का सुपना नया… रमता जोगी, बहता पानीरच गया कुछ पूर्णिमा सीकुछ हिमालय सा रचा औहैं रची कुछ रजत बूंदेंशिलालेखों में रचीं कुछ सावधानीवह खरे तालाब […] Read more » श्री अनुपम मिश्र
कविता सत्य बोलने में सदा होता है भूमा का सुख December 22, 2020 / December 22, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे भगवन!मुझे ज्ञान दो! मुझे जानना क्या? ‘सत्य जानने योग्य है, तुम सत्य को जानोऔर सत्य संभाषण करो! सच हमेशा बोलो’सत्य के सिवा सब है मिथ्या औ’ अविद्या! मिथ्या को सत्य मान कदापि नहीं बोलना! जब ज्ञान नही, तो सत्य भान कैसे होगा?सत्य से अनजान हूं,मैं सत्य कैसे बोलूंगा? ‘अस्तु सत्य जानने के […] Read more » सत्य बोल
कविता पैसा नही रचना कोई ईश्वर की December 21, 2020 / December 21, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकखत्म हुआ आदमियतसब कुछ हो गया पैसा,मिला नहीं अवैध पैसाकलतक जो अपना था,अब हो गया ऐसा-वैसा! सभी जानता पैसा अनाफना होनेवाला असासा,पास होने पर अहसासदिलाता है अच्छाई का,आदमी बुरा बिना पैसा! पैसा पाकर जैसा-तैसाआदमी समझने लगताअपने को ऐसा, मानोपैसा ही सबकुछ होता,ईश्वर से उपर है पैसा! पैसों में परख नहीं हैआदमियत इंसान का,सबकुछ […] Read more » Money is not created by any God पैसा नही रचना कोई ईश्वर की