कविता बैठक है वीरान !! November 19, 2020 / November 19, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment चूस रहे मजलूम को, मिलकर पुलिस-वकील !हाकिम भी सुनते नहीं, सच की सही अपील !! जर्जर कश्ती हो गई, अंधे खेवनहार !खतरे में सौरभ दिखे, जाना सागर पार !! थोड़ा-सा जो कद बढ़ा, भूल गए वो जात !झुग्गी कहती महल से, तेरी क्या औकात !! बूढ़े घर में कैद हैं, पूछ रहे न हाल !बचा-खुचा […] Read more » बैठक है वीरान
कविता प्रकृति व् पर्यावरण November 19, 2020 / November 19, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जब पल पल पेड़ कटते जायेंगे ,तब सब जंगल मैदान बन जायेंगे |मानव तब बार बार पछतायेगा ,जब सारे वे मरुस्थल बन जायेगे || जब पौधे सिमट गए हो गमलो में ,प्रकृति सिमट गयी हो बंगलो में |जब उजाड़ जायेगे घौसले पेड़ो से,तब बन्द हो जायगे पक्षी पिंजरों में || जब गांव बस रहे हो […] Read more » Nature and environment प्रकृति व् पर्यावरण
कविता आओ शहीदों को दीप जलाए November 16, 2020 / November 16, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आओ शहीदों को दीप जलाएजो अपने घर लौट कर न आए।केवल तिरंगे को ओढ कर आए,उन सबका हम सम्मान बढ़ाए ।। जो सीमा की कर रहे थे रखवालीमना नहीं पाए घर पर दीपावली ।आओ हम सबको शीश झुकाए,श्रद्धा से उनको हम दीप जलाए।। जिनके घर पर शोक है पसरा,मन में उनके दुख है बस रहा।उन […] Read more »
कविता हमें ज्ञात नही उस पार का संसार November 13, 2020 / November 13, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकप्रकृति का नियम पुरानाआनेवाले को आना होताजानेवाले को जाना होताफिर क्यों शोक मनाना! आनेवाला बहुत ही रोता हैजानेवाला चुप होके जातारोनेवाले को जग हंसाता हैचुप हुए को क्यों रुलाना? हमें ज्ञात नहीं हो पाता हैआनेवाला क्योंकर रोता हैजानेवाला क्यों चुप रहतायह रहस्य है अनजाना! शायद जिनको छोड़ आताउन अपनों के पास जाताफिर हमसे […] Read more » We do not know the world beyond हमें ज्ञात नही उस पार का संसार
कविता अबकी बार दीए ऐसे जलाना November 12, 2020 / November 12, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अबकी बार दीए ऐसे जलाना,जिससे देश में खुशहाली हो। मिट्टी के दीए तुम जलना सबइससे गरीब परिवार पलते है।कीट पतंग मच्छर आदि सभी,तेल के दीए से ही जलते हैं।मत लाना तुम चाइना के दीए,इससे देश का धन बाहर जाता है।वोकल से तुम लोकल बनना,इससे ही देश में आनंद आता है।यह देश तुम्हारा बगीचा हैं,तुम इस […] Read more » अबकी बार दीए ऐसे जलाना
कविता आज कितनी कल्पनाएँ! November 12, 2020 / November 12, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment आज कितनी कल्पनाएँ, और अगणित ज्योत्सनाएँ; मुझे मग दिखला रहीं हैं, गगन भास्वर कर रहीं हैं! कल्प की मीमांसाएँ, अल्प की उर अल्पनाएँ; अभीप्साएँ शाँत की हैं, प्रदीप्तित प्राणों को की हैं! प्रश्रयों में बिन पले वे, अश्रुओं को सुर दिईं हैं; आत्म की हर ओज धारा, धवलता ले कर बढ़ी है! ध्यान की हर […] Read more » आज कितनी कल्पनाएँ!
कविता दीपावली : अभिनन्दन गीत November 12, 2020 / November 12, 2020 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment Read more » Deepawali: Greetings Lyrics दीपावली
कविता मग से पड़ा मगध महाजनपद का नाम November 12, 2020 / November 12, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमग से पड़ा मगध महाजनपद का नाम,गंगा के दक्षिण-पश्चिम तटपर अवस्थितच्यवन,दधिचि ,दीर्घतमा,बृहद्रथ, जरासंध,निषाद एकलव्य, बिम्बिसार, अजातशत्रु,उदायिन,चन्द्रगुप्त मौर्य, अशोक की भूमि,चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य का जन्म स्थान! ये पुष्यमित्रशुंग, वसुदेवकण्व का ब्राह्मणी,मौखरी और पालवंशी का बौद्ध राज था!यही से जग ने ली कौटिल्य की कूटनीतिऔ खगोलज्ञ आर्यभट्ट का अंक सिद्धांत!यही महावीर का पुण्यक्षेत्र और गौतम केधर्मचक्र […] Read more » Magadha Mahajanapad got its name from Magh मगध महाजनपद
कविता झूठ है जाति अहं को पालना November 11, 2020 / November 11, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकक्यों जाति धर्म के झगड़े हैंक्यों रंग, वर्ण पर इतराना!सब मानव की एक है जातिसबको मानव ही बने रहना! कुछ नहीं शाश्वत यहां परभगवान भी रंग बदलते हैंकभी गौर, कभी श्याम हुएतो इंसानों का क्या कहना! गोरे थे आर्य,शक,हूण,मंगोलभगवान क्यों होते हैं काले?इसको समझो एशिया वालेऔर जरा हमको समझाना! सब धर्म जहां उदित […] Read more » झूठ है जाति अहं को पालना
कविता चक्रव्यूह में फंसता अर्जुन का बेटा November 11, 2020 / November 11, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकतुम जलाओ विचारदहन करो संपादक के पुतलेकिन्तु मरेगी नहींअभिव्यक्ति की स्वतंत्रतामालूम है रावण नहींराम के भी जलने लगे हैं पुतलेबड़ी भीड़ भी होगी तुम्हारे साथकि सदा-सदा से रावण के होतेसवा लाख नाती/सवा लाख पोतेकौरव सौ-सौ के सैशे में!जानता हूंनारायणी सेना भी है तुम्हारे साथकिन्तु कूच कर गए खुदा तुम्हारे घर सेईश्वर और खुदा […] Read more » Arjuns son gets trapped in Chakravyuh अर्जुन का बेटा चक्रव्यूह
कविता रस लो प्रिये इस जगत में! November 11, 2020 / November 11, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment रस लो प्रिये इस जगत में,रह तटस्थित अवतरण में;सब चल रहे मग प्रकृति में,उस पुरुष की ही देह में! रीते कहाँ वे हैं बसे,वे ही लसे वे ही रसे;उर में वे ही नर्तन किए,वे कीर्तन लेते हिये! वे ही परे जाते कभी,वे ही उरे आते कभी;चलवा वे ही हमको रहे,जाने की वे कब कह रहे! […] Read more » रस लो प्रिये इस जगत में!
कविता बिहार का हाल परिणाम के बाद November 11, 2020 / November 11, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बुझ गई है लालटेन,अब बिहार में,चिराग भी टिमटिमा रहा बिहार मै फिर से सत्ता आ गई नीतीश के हाथ में,लालू परिवार रो रहा है,अपने ही बिहार मे। कैसे करें विश्वास,चुनाव सर्वो का बिहार में,गलत निकल गए,सभी सर्वे अब बिहार में। कोई काम नहीं है लालटेन का बिहार में,चिराग भी बुझ चुका है अब बिहार में। […] Read more » बिहार का हाल परिणाम के बाद