कविता बरगद की छांव ….!! September 10, 2020 / September 10, 2020 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा बुलाती है गलियों की यादें मगर ,अब अपनेपन से कोई नहीं बुलाता ।इमारतें तो बुलंद हैं अब भी लेकिन ,छत पर सोने को कोई बिस्तर नहीं लगाता ।बेरौनक नहीं है चौक – चौराहेपर अब कहां लगता है दोस्तों का जमावड़ा ।मिलते – मिलाते तो कई हैं मगरहाथ के साथ दिल भी मिले […] Read more » Banyan shade बरगद की छांव
कविता कंगना के मन की पीड़ा September 10, 2020 / September 10, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आहत है आज सारा संसार तेरी करतूतों से,पता लगेगा तुझको,जब स्वागत होगा जूतों से। वर्षों लग जाते है एक आशियाना बनाने में,तुझे चंद घंटे लगे मेरा आशियाना तुड़वाने में। क्या मिला तुझको एक नारी को करके बेदखल,पता लगे तुझको जब सत्ता से होगा तू बेदखल। बदले की भावना थी उसे तुम क्यो छिपाते हो,सत्ता से […] Read more » कंगना के मन की पीड़ा
कविता विभिन्न पत्नियों के विभिन्न वार्तालाप अपने पतियों से September 7, 2020 / September 7, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पायलट की पत्नी बोली अपने पति से,ज्यादा हवा में मत उडो,मै तुम्हे तो ही उड़ा दूंगीज्यादा तीन दो पांच मत करोतुम्हे तो मुंह से सीटी बजाकरहवा में उड़ा दूंगी। अध्यापक की पत्नी बोलीमुझे ज्यादा मत पढ़ाओ,मै तो पढ़ी पढ़ाई आईं हूंतुम जैसे मास्टरों की तोहेड मास्टरनी बनकर आई हूं। पेंटर की बीबी बोलीज्यादा रंग मत […] Read more » poem on husband and wife talks वार्तालाप
कविता शिक्षा दिवस September 5, 2020 / September 5, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment रहे न अशिक्षित भारत में कोई,ऐसी योजनाएं हमे बनाना है।घर घर शिक्षा का दीपक भी,देश के हर कोने में जलाना है।। शिक्षा दिवस भी एक पर्व है,इसे भी और पर्वो की तरह मनाना है।रहे ने कोई देश में अशिक्षित,भारत को अब महान बनाना है।। होती जा रही महंगी शिक्षा,इसको अब सस्ती करनी है।पढ़ सके हर […] Read more » शिक्षा दिवस
कविता बच्चों का पन्ना चीटा है यह September 5, 2020 / September 5, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment प्रभुदयाल श्रीवास्तव Read more »
कविता साहित्य सिर पर मेरे हाथ धर,यूं ही बढ़ाते रहना मान September 4, 2020 / September 4, 2020 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment चरण वंदन करता आज मैं, कर गुरु गुणगान, सिर पर मेरे हाथ धर,यूं ही बढ़ाते रहना मान। क्या वर्ण और क्या वर्णमाला, रह जाता मैं अनजान, ‘अ’ से अनार,’ए’ से एपल की न हो पाती पहचान। गिनती, पहाड़े, जोड़-घटा, न कभी हो पाती गुणा-भाग, एक-एक क्यों बनें अनेक, बोध न हो पाता कभी ये ज्ञान। […] Read more » poem on teachers day गुरु
कविता आओ भारत को आत्मनिर्भर बनाए September 3, 2020 / September 3, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आओ भारत को आत्मनिर्भर बनाए,हर दृष्टि से इसे शक्तिशाली बनाए,जों इसके विकास में रोड़ा अटकाए,उसे हर तरीके से हम उसे समझाए। आओ भारत को ऐसा देश बनाए,सुंदर,सजग,सशक्त व सरल बनाए,जो देखे इस देश को कुदृष्टि से,उसको सब मिलकर दृष्टिहीन बनाए। आओ हिंदी को सबकी भाषा बनाए,इसे बोलचाल की हम भाषा बनाए,जिनको नहीं आती हो हिंदी […] Read more » Come make India self-reliant आत्मनिर्भर भारत
कविता बच्चों का पन्ना पैदल मेरे साथ चलो September 2, 2020 / September 2, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment Read more » पैदल मेरे साथ चलो
कविता तीन लोग September 1, 2020 / September 1, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment तीन लोगसंसद के बाहरप्रदर्शन कर रहे थेऔर नारे लगा रहे थे एक कह रहा थाहमें मंदिर चाहिएदूसरा कह रहा थाहमें मस्जिद चाहिएऔर तीसरा कह रहा थाहमें रोटी चाहिए कुछ वर्षों के बादमंदिर वाला और मस्जिद वालासंसद के भीतर दिखने लगाऔर रोटी वालासंघर्ष करता हुआअपनी रोटी के लिए Read more » तीन लोग
कविता सुबह से शाम तक September 1, 2020 / September 1, 2020 by पंडित विनय कुमार | Leave a Comment सुबह से शाम तकसूर्य की रक्ताभ किरणेंफैली -पसरी रही धरा परजीवन का सुख- दुखहर क्षण हम आत्मसात करते रहेकेवल नहीं मिली हमें प्रेम कलिकाएं…वह प्रेमजिसको पाने के लिए भ्रमर दिन भर गुंजार करता हैचातक देखता रहता है चंद्रमा के आने की राह…वह प्रेम, जो नश्वर है सचमुचजो बिंथा है /बिंधा है स्वार्थ के सांसारिक डोर […] Read more » sunrise to sunset सुबह से शाम तक
कविता बूढा पीपल हैं कहाँ,गई कहाँ चौपाल !! August 31, 2020 / August 31, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | 1 Comment on बूढा पीपल हैं कहाँ,गई कहाँ चौपाल !! — डॉo सत्यवान सौरभ, अपने प्यारे गाँव से, बस है यही सवाल !बूढा पीपल हैं कहाँ,गई कहाँ चौपाल !! रही नहीं चौपाल में, पहले जैसी बात !नस्लें शहरी हो गई, बदल गई देहात !! जब से आई गाँव में, ये शहरी सौगात !मेड़ करें ना खेत से, आपस में अब बात !! चिठ्ठी लाई गाँव […] Read more » गई कहाँ चौपाल बूढा पीपल हैं कहाँ
कविता हे सांड़ देवता नमस्कार! August 30, 2020 / August 30, 2020 by अजय एहसास | Leave a Comment हे सांड़ देवता नमस्कार !हे सांड़ देवता नमस्कार!नित दर्शन दे करते उद्धार, हे सांड़ देवता नमस्कार! खेतों में रात भर पड़े रहे, सब लाठी लेकर खड़े रहेपत्ती सब आप ग्रास करते, भूमि में बस जड़ पड़े रहेक्यों इतना लेते हो आहार , हे सांड़ देवता नमस्कार! जब मार्ग कोई अवरुद्घ किये ,तो आप भी उसके […] Read more » सांड़ देवता