कविता पूर्वोत्तर भारत की गौरव गाथा व्यथा October 4, 2020 / October 4, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकपूर्वोत्तर भारत की सत बहनाअरुणाचल, मिजोरम, मणिपुर,मेघालय,नागालैण्ड,त्रिपुरा औरसिक्किम की माता असम कानाम कभी था प्राग्ज्योतिषपुर! महाभारत युद्ध का युद्ध वीरभगदत्त का पिता था नरकासुरएक राजा असम का अत्याचारीजिसका कृष्ण से बध होने परभगदत्त बना प्राग्ज्योतिषपुरेश्वर! भगदत्त था पीत किरात मंगोलहिन्दचीनी मंगोल बर्मी रक्त काचीन था शक्तिहीन एक तटस्थकबिलाई, हुआ नहीं था शामिलमहाभारत के […] Read more » Pride saga of Northeast India पूर्वोत्तर भारत की गौरव गाथा
कविता उड़े छतों से कपड़े लत्ते October 3, 2020 / October 3, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment आये शाम को आज अचानक,काले- काले बदल नभ में। बूँद पड़ी तो बुद्धू मेंढक,मिट्टी के भीतर से झाँका।ओला गिरा एक सिर पर तो,जोरों से टर्राकर भागा।तभी मेंढकी उचकी, बोली,ओले करें इकट्ठे टब में। आवारा काले मेघों ने,धूम धड़ाका शोर मचाया।चमकी बिजली तो वन सारा,स्वर्ण नीर में मचल नहाया।बूढ़ा बरगद लगा नाचनेंजो अब तक था खड़ा […] Read more » Hanging clothes from rooftops उड़े छतों से कपड़े लत्ते
कविता घर-घर दुःशासन खड़े October 3, 2020 / October 3, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment चीरहरण को देख कर,दरबारी सब मौन !प्रश्न करे अँधराज पर,विदुर बने वो कौन !!★★★राम राज के नाम पर,कैसे हुए सुधार !घर-घर दुःशासन खड़े,रावण है हर द्वार !!★★★कदम-कदम पर हैं खड़े,लपलप करे सियार !जाये तो जाये कहाँ,हर बेटी लाचार !!★★★बची कहाँ है आजकल,लाज-धर्म की डोर !पल-पल लुटती बेटियां,कैसा कलयुग घोर !!★★★वक्त बदलता दे रहा,कैसे- कैसे घाव […] Read more » घर-घर दुःशासन खड़े
कविता गुदड़ी के लाल : लाल बहादुर शास्त्री October 1, 2020 / September 30, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment छोटा कद पर सोच बड़ी थी,तेज सूर्य सा चमके था भाल।भारत मां के गौरव वे थे,कहलाए वे गुदड़ी के लाल।। देश के प्रति थी पूरी निष्ठा,कोई काम न करते थे टाल |जन जन के वे प्यारे थे,कहलाए वे सादगी के लाल।। जन्म हुआ था उनके भारत मैपर मृत्यु हुई थी रूस में।विधि ने छीना उन्हें […] Read more » लाल बहादुर शास्त्री
कविता बेटियों पर अत्याचार ! October 1, 2020 / October 1, 2020 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment करें जितनी निंदा ।पड़ते शब्द कम ।।बेटियां पर अत्याचार ।होतीं आंखें नम ।।जा चुका है गर्त में ।अपना ये समाज ।।है व्यभिचार अनवरत ।तज कर लोक लाज ।।मर गयी संवेदना ।बना मानव दानव ।।राम राज्य कालखंड ।है पतन की लव ?करती रूदन आत्मा ।विलख रहा मन ।।चली प्रगति बात ।रहे पर विपन्न ।। कृष्णेन्द्र राय Read more » Daughters tortured
कविता लोकतंत्री भाषा से दूरी क्यों करते October 1, 2020 / October 1, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमत भेदभाव करो स्वभाषा के नाम पेभाषा बदल जाती इंसान बदलता नहींनाम बदल जाता ईमान बदलता नहींस्थान बदल जाता किंतु भगवान नहींमत उमेठो कान कानून की भाषा से! देश बहुत बड़ा है भाषा बहुत हो गईदेश बहुत बड़ा है आशा बहुत हो गईदेश बहुत बड़ा, आस्था बहुत हो गईभाषा, आशा,आस्था मानवीय चीज हैमानवता […] Read more » Why do democrats distance themselves from language लोकतंत्री भाषा से दूरी
कविता नारी क्या है एक दिन बन के देखो October 1, 2020 / October 1, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकनारी क्या है?एक दिन बन के देखोसुबह उठ किचन देखोनाश्ता टिफीन के साथकार्यालय विदाकर देखोजाने से उसके आनेतकप्रतीक्षा करके तो देखो! नारी क्या है?एक दिन बन के देखोमाहवारी पीड़ा की दौरगुजर करके तो देखोएक मां बन के देखोगहरी नींद से उठकरमल-मूत्र में पड़े रोतेस्व बचपन को देखो! नारी क्या है?एक दिन बनके देखोमाता-पिता […] Read more » नारी क्या है एक दिन बन के देखो
कविता मैं हाथरस की बेटी हूँ September 30, 2020 / September 30, 2020 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment कोख में मरती और , हाथरस का परिहास हूँ !जिस्म नोचते भेडियों, का मै एक अवसाद हूँ ! ! सत्ता के नारों की बस , मैं गढ़ी एक तस्वीर हूँ !अखबारों की सुर्ख़ियों की, मैं एक लकीर हूँ ! ! मैं माँ, बहन और बेटी का, बस एक इश्तहार हूँ !चौघट से बाहर घुरती , […] Read more » brutal rape case of hathras hathras rape case मैं हाथरस की बेटी हूँ
कविता बच्चों का पन्ना पेट राम ने खूब छकाया September 30, 2020 / September 30, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment इसको कहते लोग समोसा ,उसको कहते लोग कचौड़ी |लेकिन जिसमें मज़ा बहुत है ,वह कहलाती गरम पकौड़ी | गरम पकौड़ी के संग चटनी ,अहा !जीभ में पानी आया |रखी प्लेट में लाल मिर्च थी ,तभी स्वर्ग सा सुख मिल पाया | इतना खाया, इतना खाया ,ख्याल जरा भी न रख पाया |किन्तु बाद में पेट […] Read more » पेट राम ने खूब छकाया
कविता बच्चों का पन्ना करें तिरंगे की पूजा September 30, 2020 / September 30, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment थाली में है रोली कुमकुम,पीला चंदन है।करें तिरंगे की पूजा हम , शत अभिनंदन है|| Read more » करें तिरंगे की पूजा
कविता बच्चों का पन्ना आशा कैसे कर लें September 30, 2020 / September 30, 2020 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment गुड़- गुड़ हुक्का पिया शेर ने,मुंह से धुआं उड़ाया।हाथी को वन के राजा का,यह ढंग नहीं सुहा या । उसके मुंह से छीना हुक्का,कसकर डांट पिलाई।कैसे वन के राजा हो तुम,तुम्हें शरम न आई। तम्बाकू पर सारे वन में ,ही प्रतिबंध लगा है।तुमने ही आदेश निकला,तुमको नहीं पता है? नियम बनाने वाले ही जब,नियम ताक […] Read more » आशा कैसे कर लें
कविता भज ले प्रभु का नाम बन्दे September 30, 2020 / September 30, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment भज ले प्रभु का नाम बन्दे,कभी तुझे देरी न हो जाए।पता नहीं इस मौत का तुझे,कब तुझेको मरघट लेे जाए।। अनिष्चता में निश्चितता छिपी,सब लोगो को तो ये पता है।मौत सबको ही आएगी पर,कब किसको आएगी ये न पता।। करले अपने सब काम पूरे,फिर शायद समय न मिले।मिला है मनुष्य जीवन तुझे,शायद फिर ये तुझे […] Read more » Please pray to God भज ले प्रभु का नाम बन्दे