कविता महादेवी जी की मन की भावना September 26, 2020 / September 26, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment इच्छाएं मेरी अनेक अनंत थीउनका मैंने अब त्याग कियाइच्छाएं ही दुख की कारण थीउनका नहीं मैंने स्मरण किया साथी मेरा अब चला गयाउसका शोक अब क्या करनाजीवन की बची है पगडंडियांउन पर चल जीवन पूरा करना भू की न प्यास बुझा पाईउसकी भी मै न कुछ दे पाईप्रयत्न किए थे बहुत कुछ मैंनेपर अंत समय […] Read more » महादेवी जी
कविता हे भगवन!मुझे आत्मज्ञान दें September 25, 2020 / September 25, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकहे भगवन!मुझे आत्मज्ञान दें!मैं मंत्रवेत्ता;चतुर्वेद/पंचमवेद/वेदों का वेदकल्पसूत्र-निरुक्त-शास्त्र-गणित-विज्ञान का ज्ञाता!किन्तु दुर्बलचित्/कर्मवित्/मंत्रवित्शोकाकुल रहता हूंअस्तु;आत्मवेत्ता नहीं हूं!हे भगवन!मैं शब्दज्ञानी/अभिधानी/नाम का ज्ञानीसिर्फ नाम गिना सकता हूंअस्तु;आत्मवेत्ता नहीं हूं!हे भगवन!मुझे आत्मज्ञान की नौका सेशोक सागर पार करा दें!‘नाम वा ऋग्वेदो यजुर्वेद–ऋग्वेद,यजुर्वेदादि नाम ही हैब्रह्मबुद्धि में प्रतिमा सी-यह ब्रह्म हैअस्तु नाम की उपासना करो!यदि नाम की उपासना करता हूं!सिर्फ […] Read more »
कविता पीड़ा के दो छोर September 24, 2020 / September 24, 2020 by बीनू भटनागर | Leave a Comment १ज़िंदगी समय मेंघुलती जा रही है।समय में घुलने कीअनंत पीड़ा है।पीड़ा से बचने के लिये,शब्दों और सुर तालका सहारा है।संगीत में डूब जाऊं याकाव्य में बिखर जाऊँ,घुलने के कष्ट कोथोड़ा सा बिसराऊँफिर उठकर पीड़ा कोथोड़ा सा सहलाऊँ,फिर अपनी जीत परयूँ मुस्किराऊं…जानती हूँवो दरवाज़े की ओट मेेेंखड़ी हैअभी ज़राकिसी दवा से डरी हैअब तो ये लड़ाईजीवन […] Read more » the two ends of pain पीड़ा के दो छोर
कविता हे ईश्वर यदि तुम एक हो September 23, 2020 / September 23, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे ईश्वर! यदि तुम एक हो,मानव-मन में एकता भर दे!असिधर को मसीधर कर दे!मसीधर में सद्विवेक भर दे! हे ईश्वर! यदि तुम नेक हो,अपने अंधभक्तों के चक्षु मेंज्ञान की ज्योति को भर दे!उनके तम कलुष को हर ले! हे ईश्वर! यदि तुम ईश्वर हो,भक्तों को सब्जबाग ना दिखाअप्सरा, हूर, परी जन्नत वालीजन्नत,दोजख से […] Read more » हे ईश्वर यदि तुम एक हो
कविता जब अपने सृष्टा कवियों से दुखी हो कविताओं ने की सामूहिक आत्महत्या September 23, 2020 / September 23, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव विश्व के तमाम देश के कवि अपना दिमाग लगाकर जितनी कविताए एक साल में लिखते है, उतनी कविताए भारत देश के तथाकथित कविगण एक सप्ताह में लिख लेते है। या कहिए भारत एकमात्र देश है जिसके हर शहर, मोहल्ले, गली ओर हर गाँव में एक से एक धुरंधर कवि मिल जाएँगे। या […] Read more » When poets are saddened by their creation poems commit mass suicide कविताओं ने की सामूहिक आत्महत्या
कविता मेरे मन के भाव September 22, 2020 / September 22, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कुछ स्वप्न थे मेरे धुंधलेे से,कुछ चाहत मेरी उजली थी।कोई आहट थी धीमी सी ,उनके लिए मै पगली सी थी।। कुछ मन में भाव अजीब से थे ,दिल में मिलने कुछ चाहत थी ।।न मै मिल सकी न तुम मिल सके,दोनों के दिल में घबराहट थी।। कुछ पगडंडी टेढ़ी सी थी,दिल में कुछ झुंझलाहट थी […] Read more » मेरे मन के भाव
कविता ये देश है अपना September 21, 2020 / September 21, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment ये देश है अपनाहिम शिखर सिरहाने मेंकैलाश मानसरोवर उपरगंगा जमुना का कछारदेश का बिछौना! ये देश है अपनाकश्मीर बड़ी हसीन हैवादियां बड़ी रंगीन हैछोड़ो संगीन की बोलीछेड़ो राग तराना! ये देश है अपनादिल्ली देश का दिलहरियाणा की हरियालीपंजाब की गेहूँ बालीपूर्व में सतबहना! ये देश है अपनागुजरात शेर का जब्ड़ाअरावली महाबली हैविंध्याचल झुकल, मानअगस्त का […] Read more »
कविता कृष्ण के जीवन में राधा तू आई कहां से September 21, 2020 / September 21, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककृष्ण के जीवन में राधा तू आई कहां से?आत्मा से, देह से या कवि की कल्पना से! सुदर्शन चक्रधारी को प्रेम पुजारी बनाने को,राधा तू आई गोकुल बोलो किसके स्नेह से? कृष्ण के बचपन में रास रचाने आई कहां से?भक्ति या आशक्ति की ठांव बरसाने गांव से! बेड़ी बंधी कोख से बेड़ी को […] Read more » कृष्ण के जीवन में राधा
कविता एक सोच लड़की है पराया धन September 20, 2020 / September 20, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment क्यो समझते है,लड़की है पराया धनलड़का है अपना धनजबकि दोनों लेते हैएक कोख से जन्म। दोनों की जन्म मैमां को होती हैंएक सी पीड़ादोनों ही जन्म के बादकरते है एक सी क्रीड़ा।ये हैं एक प्रकृति नियमफिर भी समझते हैलड़की है पराया धनलड़का है अपना धन।। दोनों का एक घरदोनों का एक आंगनदोनों का एक मालीदोनों […] Read more » लड़की है पराया धन
कविता आलिंगन September 19, 2020 / September 19, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment पृथक् थी प्रकृति हमारीभिन्न था एक-दूसरे से श्रमईंट के जैसी सख़्त थी वोऔर मैं था सीमेंट-सा नरम भूख थी उसको केवल भावों कीमैं था जन्मों-से प्रेम का प्यासाजगत् बोले जाति-धर्म की बोलीहम समझते थे प्यार की भाषा प्रेम अपार था हम दोनों में मगरना जाने क्यों नहीं होता था हमारा मिलनपड़ा प्रेम का जल ज्यों […] Read more » आलिंगन
कविता खाते हो जिस थाली में September 19, 2020 / September 19, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment खाते हो जिस थाली में,उसी में तुम छेद करते हो।दिया है फिल्म इंडस्ट्री ने सब,उसी से मन भेद रखते हो।। ये थाली तुमने अकेले नहीं,सबने मिलकर ही बनाई है।सबने छप्पन भोग बनाकर,ये थाली सबने सजाई है।। अब तो छाज तो छाज़,छलनी भी बोलने लगी है।जिसमे बहात्तर छेद है पहले,थाली में भी छेद करने लगी है […] Read more » खाते हो जिस थाली में
कविता बलात्कार September 17, 2020 / September 17, 2020 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अदम गोंडवी की कविता आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप कोमैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको जिस गली में भुखमरी की यातना से ऊब करमर गई फुलिया बिचारी एक कुएँ में डूब कर है सधी सिर पर बिनौली कंडियों की टोकरीआ रही है सामने से हरखुआ की छोकरी चल रही है छंद के […] Read more » बलात्कार