लेख शिक्षा के नाम पर निजी स्कूलों की मनमानी June 22, 2023 / June 22, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment हरीश कुमारपुंछ, जम्मू हाल के समय में समाज में एक धारणा तेज़ी से प्रचलित हुई है कि सरकारी स्कूलों के बजाय निजी स्कूलों में शिक्षा का स्तर थोड़ा ऊंचा है. इसी कारण माता पिता अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना बेहतर समझते हैं. हालांकि आज के समय में सरकारी स्कूलों में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा […] Read more » Arbitrariness of private schools in the name of education
लेख जातीय हिंसा में झुलसते ‘मणिपुर’ में शांति बहाली के लिए गृहमंत्री ‘अमित शाह’ के प्रयास June 22, 2023 / June 22, 2023 by दीपक कुमार त्यागी | Leave a Comment दीपक कुमार त्यागी देश व दुनिया में सांस्कृतिक विविधता, जैव विविधता, भौगोलिक, सामरिक, राजनीतिक व दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के प्रवेश द्वार के रूप से अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर का जातीय हिंसा में अशांत होना किसी भी दृष्टिकोण से देश के लिए उचित नहीं है। मणिपुर की राज्य सरकार व केन्द्र सरकार […] Read more » जातीय हिंसा में झुलसते 'मणिपुर'
लेख हिंदी दिवस हिन्दी से हिंग्लिश का सफर June 22, 2023 / June 22, 2023 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment Read more » Journey from Hindi to Hinglish
लेख समाज टेक्नो फ्रेंडली संवाद से स्वच्छता June 22, 2023 / June 22, 2023 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमारदेश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में जब इंदौर का बार-बार जिक्र करते हैं तो मध्यप्रदेश को अपने आप पर गर्व होता है, मध्यप्रदेश के कई शहर, छोटे जिलों को भी स्वच्छ भारत मिशन के लिए केन्द्र सरकार सम्मानित कर रही है. साल 2022 में मध्यप्रदेश ने देश के सबसे स्वच्छ राज्य का […] Read more » Cleanliness with techno friendly dialogue टेक्नो फ्रेंडली संवाद
महिला-जगत लेख आर्थिक कठिनाइयों का सामना करती विधवाएं June 22, 2023 / June 22, 2023 by देवेंद्रराज सुथार | Leave a Comment अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस (23 जून) पर विशेष देवेन्द्रराज सुथारजालोर, राजस्थान आज़ादी के सात दशकों बाद भी देश में कुछ जातियां, समुदाय और वर्ग ऐसे हैं जो आज भी गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हैं. जिन्हें आज भी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जो समाज के मुख्यधारा से कटे हुए हैं. लेकिन विधवाओं […] Read more » अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस
लेख शख्सियत स्वाभिमान एवं शौर्य की प्रतीक थी दुर्गावती June 22, 2023 / June 22, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस- 24 जून, 2023-ः ललित गर्ग:-भारत का इतिहास महिला वीरांगनाओं के शौर्य, शक्ति, बलिदान, स्वाभिमान एवं प्रभावी शासन व्यवस्था के लिये दुनिया में चर्चित है। इन वीरांगणाओं ने जहां हिंदू धर्म, संस्कृति एवं विरासत को प्रभावित किया, वहीं इन्होंने संस्कृति, समाज और सभ्यता को नया मोड़ दिया है। अपने युद्ध कौशल […] Read more » Durgavati was a symbol of self-respect and bravery
लेख समाज धर्म परिवर्तन, अश्लीलता और वैश्यावृत्ति का अड्डा बना इंस्टाग्राम June 21, 2023 / June 21, 2023 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | Leave a Comment मुंबई में रहने वाली बिहार की शालिनी (परिवर्तित नाम) अच्छे जीवनसाथी की कामना से पिछले वर्ष छठ पूजा के लिए अपने गांव गई थी। पूजा करने से लेकर नाक से मांग तक का सिंदूर लगाए अपनी फोटो उसने इंस्टाग्राम पर लगाईं। ठीक एक साल बाद अब शालिनी; शाजिया बनकर माशाल्लाह कहती नजर आती है। इकबाल […] Read more » अश्लीलता और वैश्यावृत्ति का अड्डा बना इंस्टाग्राम धर्म परिवर्तन
लेख स्वास्थ्य-योग योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, जीवन हेल्दी और खुशहाल बनाएं June 21, 2023 / June 21, 2023 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment व्यस्तता के बीच हमारी जिंदगी में तनाव बढ़ता जा रहा है जो हमारे ब्रेनऔर बॉडी दोनों पर नकारात्मक असर डाल रहा है। ऐसे में शरीर को हेल्दी रखनेऔर तनाव दूर करने के लिए योग बेहद जरूरी है। योग शरीर में ऊर्जा का संचारकरता है और इसे स्वस्थ रखने में मदद करता है। शारीरिक और मानसिकस्वास्थ्य […] Read more » make life healthy and happy Make yoga a part of routine
पर्यावरण लेख प्रकृति से खिलवाड़ का परिणाम ही हैं प्राकृतिक आपदाएं June 21, 2023 / June 21, 2023 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment इन दिनों बिपरजॉय को लेकर देश में काफी चर्चा है। यह एक चक्रवात है। वैसे तो बिपरजॉय का अर्थ होता है ‘बहुत खुशी’। लेकिन यह खुशी लेकर नहीं आया है और इन दिनों यह एक बहुत बड़ी मुसीबत बनकर भारत के कई समुद्री इलाकों पर मंडरा रहा है। विशेषकर बिपरजॉय का असर भारत के गुजरात, […] Read more »
लेख ग्रामीण महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव June 21, 2023 / June 21, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment वंदना कुमारीमुजफ्फरपुर, बिहार स्वस्थ मातृत्व और स्वस्थ शिशु ही समाज और राष्ट्र के लिए मानव संसाधन को पूरा कर सकते हैं. तभी देश का चहुंमुखी विकास संभव है. खराब पोषण और पौष्टिक आहार के अभाव में मातृत्व और बच्चों का संपूर्ण पोषण व जनन प्रभावित होता है. जिससे बच्चे कुपोषित, कमजोर, अल्पबुद्धि, रोग ग्रस्त व […] Read more » Lack of health awareness among rural women
लेख स्वास्थ्य-योग योग भारतीय प्राचीन संस्कृति की परम्पराओं को समाहित करता है June 21, 2023 / June 21, 2023 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (‘‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’’ 21 जून 2023 पर विशेष) हर साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है। इस साल पूरे विश्व में नौवां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। भारत देश में योग दिवस का एक अपना ही अलग महत्व है। योग भारतीय प्राचीन संस्कृति की परम्पराओं को समाहित करता है। भारत देश में योग का प्राचीन समय से ही अहम स्थान है। पतंजलि योग दर्शन में कहा गया है कि- योगश्चित्तवृत्त निरोधः अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो ह्रदय की प्रकृति का संरक्षण ही योग है। जो मनुष्य को समरसता की और ले जाता है। योग मनुष्य की समता और ममता को मजबूती प्रदान करता है। यह एक प्रकार का शारारिक व्यायाम ही नहीं है बल्कि जीवात्मा का परमात्मा से पूर्णतया मिलन है। योग शरीर को तो स्वस्थ रखता है ही इसके साथ-साथ मन और दिमाग को भी एकाग्र रखने में अपना योगदान देता है। योग मनुष्य में नये-नये सकारात्मक विचारों की उत्पत्ति करता है। जो कि मनुष्य को गलत प्रवृत्ति में जाने से रोकते हैं। योग मन और दिमाग की अशुद्धता को बाहर निकालकर फेंक देता है। साथ-साथ योग से मनुष्य के अन्दर की नकारात्मकता खत्म होती है। योग व्यक्तिगत चेतना को मजबूती प्रदान करता है। योग मानसिक नियंत्रण का भी माध्यम है। हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म में योग को आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाता है। योग मन और दिमाग को तो एकाग्र रखता है ही साथ ही साथ योग हमारी आत्मा को भी शुद्ध करता है। योग मनुष्य को अनेक बीमारियों से बचाता है और योग से हम कई बीमारियों का इलाज भी कर सकते हैं। असल में कहा जाते तो योग जीवन जीने का माध्यम है। श्रीमद्भागवत गीता में कई प्रकार के योगों का उल्लेख किया गया है। भगवद गीता का पूरा छठा अध्याय योग को समर्पित है। इस मे योग के तीन प्रमुख प्रकारों के बारे में बताया गया है। इसमें प्रमुख रूप से कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग का उल्लेख किया गया है। कर्म योग- कार्य करने का योग है। इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है। भक्ति योग- भक्ति का योग। भगवान् के प्रति भक्ति । इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है। और ज्ञान योग- ज्ञान का योग अर्थात ज्ञान अर्जित करने का योग। भगवत गीता के छठे अध्याय में बताये गए सभी योग जीवन का आधार हैं। इनके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। भगवद्गीता में योग के बारे में बताया गया है कि – सिद्दध्यसिद्दध्यो समोभूत्वा समत्वंयोग उच्चते। अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है। दुसरे शब्दों में कहा जाए तो योग मनुष्य को सुख-दुःख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि परिस्थितियों में सामान आचरण की शक्ति प्रदान करता है। भगवान् श्रीकृष्ण ने गीता में एक स्थल पर कहा है ‘योगः कर्मसु कौशलम’ अर्थात योग से कर्मो में कुशलता आती हैं। वास्तव में जो मनुष्य योग करता है उसका शरीर, मन और दिमाग तरोताजा रहता है। और मनुष्य प्रत्येक काम मन लगाकर करता है। 27 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में अपने पहले संबोधन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की जोरदार पैरवी की थी। इस प्रस्ताव में उन्होंने 21 जून को ‘‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’’ के रूप में मान्यता दिए जाने की बात कही थी। मोदी की इस पहल का 177 देशों ने समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में इस आशय के प्रस्ताव को लगभग सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। और 11 दिसम्बर 2014 को को संयुक्त राष्ट्र में 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को ‘‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’’ को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय है। पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया और पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया गया। इस दिन करोड़ों लोगों ने विश्व में योग किया जो कि एक रिकॉर्ड था। योग दिवस में ‘सूर्य नमस्कार’ व ‘ओम’ उच्चारण का कुछ मुस्लिम संगठन विरोध करते रहे हैं। असल में कहा जाए तो ‘ओम’ शब्द योग के साथ जुड़ा हुआ है। इसे विवाद में तब्दील करना दुर्भागयपूर्ण है। लेकिन इसे हर किसी पर थोपा भी नहीं जा सकता। इसलिए योग करते समय लोगों को ‘ओम’ उच्चारण को अपनी धार्मिक मान्यता की आजादी के अनुसार प्रयोग करना चाहिए। अगर किसी का धर्म ओम उच्चारण की आजादी नहीं देता तो उन्हें बिना ओम जाप के योग करना चाहिए। लेकिन योग को किसी एक धर्म से जोडकर विवाद पैदा नहीं करना चाहिए। आज के समय में योग को भारत के जन-जन तक योग को पहुँचाने में योग गुरु बाबा रामदेव, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर सहित अनेकों ऐसे महापुरुषों का अहम् योगदान है। इनके योग के क्षेत्र में योगदान की वजह से ही आज भारत के घर-घर में प्रतिदिन योग होता है। भगवद्गीता के अनुसार – तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम। अर्थात् कर्त्व्य कर्म बन्धक न हो, इसलिए निष्काम भावना से अनुप्रेरित होकर कर्त्तव्य करने का कौशल योग है। योग को सभी लोगों को सकारात्मक भाव से लेना चाहिए। कोई भी धर्म-सम्प्रदाय योग की मनाही नहीं करता। इसलिए लोगों को योग को विवाद में नहीं घसीटना चाहिए। योग बुध्दि कुशग्र बनाता है और संयम बरतने की शक्ति देता है। योग की जितनी धार्मिक मान्यता है। उतना ही योग स्वस्थ्य शरीर के लिए जरूरी है। योग से शरीर तो स्वस्थ्य रहता है ही साथ ही साथ योग चिंता के भाव को कम करता है। और मनोबल भी मजबूत करता है। योग मानसिक शान्ति प्रदान करता है और जीवन के प्रति उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है। योग मनुष्य में सकारात्मकता तो बढाता है ही, साथ ही साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढाता है। इसलिए लोगों को इस तनाव भरे जीवन से मुक्ति पाने के लिए योग करना चाहिए। और दूसरे लोगों को भी प्रेरित करना चाहिए। जिससे कि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके। – ब्रह्मानंद राजपूत Read more » अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’’ 21 जून
लेख अपनी मौत June 21, 2023 / June 21, 2023 by डॉ० शिबन कृष्ण रैणा | Leave a Comment बंसी निर्दोष नुक्कड़ वाला कम्पाउण्डर ज्यों ही बिना इंजेक्शन लगाए सिरिंज और सुईं को समेटकर अपने बैग में रखने लगा, सब पर जैसे बिजली-सी गिर गई । अचानक यह क्या हुआ? कुछ देर तक कोई समझ न सका । मैं जैसे गहरी नींद से जाग पड़ा । अब मैं रूई के फाहे की तरह हल्का हो चुका […] Read more »