लेख शख्सियत खलनायकत्व के आवरण में लिपटा एक प्यारा इंसान January 2, 2012 / January 2, 2012 by राम कृष्ण | 3 Comments on खलनायकत्व के आवरण में लिपटा एक प्यारा इंसान रामकृष्ण ख़त-किताबत के ज़रिए तो मैंको एक लम्बे अरसे से जानता रहा हूं, लेकिन रू-बरू उनसे मेरी मुलाक़ात कुल दो बार हो पायी – और वह भी बम्बई में नहीं बल्कि लखनऊ में. यह एक अजीब आश्चर्य है कि अपने बरसों लम्बे बम्बई प्रवास में, जिसमें मैं वहां के लगभग सभी फ़िल्मकारों के निकटतम सम्पर्क […] Read more » PRAN Pran the villain villain of the Indian movies खलनायकत्व के आवरण में लिपटा एक प्यारा इंसान प्राण-खलनायकत्व के आवरण में लिपटा
लेख नववर्ष शुभ कहने से ही शुभ कैसे हो सकता है ? January 2, 2012 / January 2, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 3 Comments on नववर्ष शुभ कहने से ही शुभ कैसे हो सकता है ? इक़बाल हिंदुस्तानी जिसके प्रति शुभकामनायें व्यक्त करें उसके लिये काम भी करें ! ‘नववर्ष शुभ हो’ ‘नया साल मुबारक’ और ‘हेप्पी न्यू इयर’ मात्र ये कुछ जुमले हैं जो हर साल हर आदमी एक दूसरे से 31 दिसंबर से लेकर 1 जनवरी तक बेसाख़्ता बेसबब और बेमतलब बोलता है। इसका एक ताज़ा उदाहरण है कांग्रेस […] Read more » new year wishes नववर्ष शुभ कहने से ही शुभ कैसे हो सकता है
लेख खतरे के मोबाइल January 2, 2012 / January 2, 2012 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on खतरे के मोबाइल पारूल भार्गव मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल को भारत में आधुनिक हो जाने के पर्याय के रूप में देखा जा रहा है। इस कारण मोबाइल के नवीनतम मॉडलों का उपयोग दिखावे के रूप में भी हो रहा है। लेकिन मोबाइल पर मनुष्य की निर्भरता और इससे फैलने वाला विकिरण कितना खतरनाक है, यह ताजा शोधों से […] Read more » illeffects of mobile on honeybee mobile radiations खतरे के मोबाइल
लेख लाचार सरकार और दवा परीक्षण January 2, 2012 / January 2, 2012 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव यह कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि मानवीयता और नैतिकता के सभी तकाजों को ताक पर रखकर म.प्र. में दवा परीक्षण के लिए मरीजों के जिस्म को कच्चा माल मानते हुए प्रयोगशाला बनाया जा रहा है। हाल ही में म.प्र. के मंख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधान सभा में यह तो स्वीकार कर लिया […] Read more » drug test M.P.hospitals लाचार सरकार और दवा परीक्षण
लेख नव तिथि स्वागत, अतिथि स्वागत January 2, 2012 / January 2, 2012 by राजेश करमहे | Leave a Comment राजेश करमहे वर्ष, मास, दिन का नामकरण : किस्सा है कि Xells D’Olibi नाम का एक समुद्री लुटेरा हुआ करता था| जो उसकी बातें नहीं सुनते थे वह उसके कान [ear] काट दिया करता था और चिल्लाता था, “another year gone”| कहते हैं कि अपने जीवन काल में उसने 200 ईयर काटे| सचमुच जो समय […] Read more » how dates were named how monthe were named अतिथि स्वागत नव तिथि स्वागत
लेख बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध ले January 2, 2012 / January 2, 2012 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | Leave a Comment और वर्षों की तरह यह वर्ष भी बीत गया| हर बार की तरह ही मैं इस बहस में उलझा हुआ हूँ कि हमने क्या खोया-क्या पाया? काफी सोचने के बाद भी मैं किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पा रहा हूँ| मैं इतना दिग्भ्रमित हूँ कि समझ नहीं आ रहा कि बीते वर्ष को यादगार कहूँ, […] Read more » forget the past wecome new year आगे की सुध ले बीती ताहि बिसार दे
लेख सब भ्रम है, सब बना रहेगा December 31, 2011 / January 1, 2012 by अविनाश वाचस्पति | Leave a Comment अविनाश वाचस्पति जो है वह रहेगा। अनंत का तक रहेगा। गारंटी हो वारंटी हो, न हो, ठेका हो, न हो। जो आया है, वह कभी कहीं नहीं गया है। यहीं चारों ओर मंडरा रहा है। बस डरा नही रहा है। जो डरा देते हैं जरा भी, उसकी मौजूदगी आपको खूब सारी दिखाई देती है। इसलिए […] Read more » New Year सब बना रहेगा सब भ्रम है
लेख चक्रव्यूह की रचना स्वयं के लिए नहीं होती …. December 31, 2011 / December 31, 2011 by विनायक शर्मा | 2 Comments on चक्रव्यूह की रचना स्वयं के लिए नहीं होती …. विनायक शर्मा सरकार एक बार पुनः अपने स्वयं के बुने हुए मकडजाल में उलझ कर रह गई है. लोकपाल बिल पर नेत्री मुख्य विपक्षी दल सुषमा स्वराज द्वारा प्रस्तुत किये गए सभी संशोधनों को अस्वीकार करते हुए लोकसभा में अपनी संख्या के बल पर एक कमजोर, अप्रभावी और विसंगतियों से भरे भ्रष्टाचार से लड़ने वाले […] Read more » Congress Party Corruption चक्रव्यूह की रचना स्वयं के लिए नहीं होती
महत्वपूर्ण लेख लेख आरक्षण समानता और सुरक्षा के मन्त्र नहीं. December 31, 2011 / April 13, 2012 by नरेश भारतीय | 5 Comments on आरक्षण समानता और सुरक्षा के मन्त्र नहीं. नरेश भारतीय चर्चा सर्वत्र लोकपाल विधेयक को संसद में पेश करने और पारित करवाने की चल रही थी और इस बीच राजनीतिक धुरंधरों की नज़रें विधान सभा चुनावों पर जम रहीं थीं. जनता को लुभाने के लिए हर पार्टी अपने अपने धनुष की प्रत्यंचा पर तरह तरह के तीर चढ़ाती दिखाई पड़ रहीं थीं. यही […] Read more » Congress Reservation reservation not meant for uniformity आरक्षण समानता और सुरक्षा के मन्त्र नहीं
लेख महापुरुष होते तो क्या करते? December 31, 2011 / December 31, 2011 by डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 1 Comment on महापुरुष होते तो क्या करते? डॉ मनोज चतुर्वेदी मैं गांधी विचार धारा का पाक्षिक मुख-पत्र ‘सर्वोदय जगत‘ प़ढ रहा था। लेख का शीर्षक था- ‘गांधी होते तो क्या करते‘? मेरे मन में विचार आया कि उसके स्थान पर यदि यह कहा जाय कि भारतीय चिंतन परंपरा के विषयों में गर्ग, गौतम, शांडिल्य, अत्रि, भारद्वाज, पराशर, वेदव्यास से चलते हुए वर्धमान […] Read more » great personalities legends living legends of India महापुरुष होते तो क्या करते
लेख आम आदमी से दूर होती सरकार December 30, 2011 / December 30, 2011 by हर्षवर्धन पान्डे | Leave a Comment हर्षवर्धन पान्डे विदर्भ की रामकली बाई इन दिनों मायूस है…. …..यह रामकली वह है जिसका एक बच्चा अभी एक साल पहले कुपोषण के चलते मर गया….. इस बच्चे की बात करने पर आज भी वह सिहर उठती है…. पिछले कुछ वर्षो में जैसी त्रासदी विदर्भ ने देखी होगी शायद भारत के किसी कोने ने देखी […] Read more » congress and common man आम आदमी आम आदमी से दूर होती सरकार सरकार
लेख मीडिया के निशाने पर अमीर और ताक़तवर लोग क्यों नहीं आते? December 30, 2011 / December 30, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 2 Comments on मीडिया के निशाने पर अमीर और ताक़तवर लोग क्यों नहीं आते? इक़बाल हिंदुस्तानी पीएम बेईमान सरकार के मुखिया फिर भी ईमानदार बता रहा है मीडिया आज मीडिया की हालत यह है कि पीएम मनमोहन सिंह को ईमानदार का तमग़ा तब भी बराबर यही मीडिया दिये चला जा रहा है जबकि उनके नेतृत्व में चल रही सरकार अलीबाबा चालीस चोर की कहानी दोहराती नज़र आ रही है। […] Read more » bureucrats media rich persons top officials not scanned under media मीडिया के निशाने पर मीडिया के निशाने पर अमीर और ताक़तवर लोग क्यों नहीं आते