आर्थिकी लेख भारत में आय में हो रही वृद्धि के चलते महंगाई का तुलनात्मक रूप से कम होता असर May 1, 2022 / May 1, 2022 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment महंगाई (मुद्रा स्फीति) का तेजी से बढ़ना, समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेष रूप से समाज के गरीब एवं निचले तबके तथा मध्यम वर्ग के लोगों को आर्थिक दृष्टि से अत्यधिक विपरीत रूप में प्रभावित करता है। क्योंकि, इस वर्ग की आय, जो कि एक निश्चित सीमा में ही रहती है, का एक बहुत बड़ा भाग […] Read more » Due to the increase in income in India the effect of inflation is comparatively less. आय वृद्धि के चलते महंगाई का तुलनात्मक रूप से कम असर
लेख समाज की अकर्मण्यता व जिहादी चरण चुंबन मानवता हेतु विषकारी होगा May 1, 2022 / May 1, 2022 by दिव्य अग्रवाल | Leave a Comment – दिव्य अग्रवाल एक तरफ पूरा विश्व जिहादी कटटरपंथियो की अमानवीयता व् उपद्रवी सोच से पीड़ित है परन्तु भारत के सेक्युलर राजनेता इस उपद्रवी मजहबी सोच को रोकने , प्रतिबंधित या सुधारने के स्थान पर सत्ता की लोलुपता के कारण नित कुछ न कुछ प्रपंच कर वर्तमान में स्वम सुख भोग कर , भारत के सभ्य […] Read more » The indolence of the society and kissing the jihadi feet will be toxic for humanity.
कविता छीन लिए है जब हक़ सारे तुमने May 1, 2022 / May 1, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment छीन लिए है जब हक़ सारे तुमने,फिर बार बार क्यों तुम आते हो।दरवाजे सारे बंद हो चुके है अब,फिर बार बार क्यों खटकाते हो।। होता है प्रेम जिंदगी में एक बार,ये बार बार जिंदगी में न होता है।प्रेम कोई गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीये जिंदगी में मुश्किल से होता है।। मांग भर दी जब तुमने […] Read more » छीन लिए है जब हक़ सारे तुमने
कविता चाहे किसी धर्म की हो माता सबकी मुखाकृति मां श्रद्धा सरीखी April 29, 2022 / April 29, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजीवों का जन्म माता से होता,पिता बीजों का विसर्जन करता,मां से मैं को अस्तित्व मिलता,जीवों को पहचान देता है पिता! माता से ममत्व का संज्ञान होता,पिता जीव को जातीय नाम देता,पिता से ही अहम का भान होता,माता भूमि उगाती बीज पिता का,मां से मिले मम में होती ममता! पितृत्व अहम से अहंकार में […] Read more » चाहे किसी धर्म की हो माता सबकी मुखाकृति मां श्रद्धा सरीखी
गजल जवानी में तो तुमने भी गज़ब ढाया होगा। April 29, 2022 / April 29, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जवानी में तो तुमने भी गज़ब ढाया होगा।एक से नही,दासियों से इश्क लड़ाया होगा।। चेहरे पर गेसू फैलाकर,सबको बहकाया होगा।अपने खूबसूरत चेहरे को जरूर छिपाया होगा।। जब तुमने सोलहवां जन्म दिन मनाया होगा।हर कोई तेरे लिये उपहार भी लाया होगा।। चले तो होगे तेरे प्यार के चर्चे सबको पता होगा।पर तूने सहेलियों से कुछ भी […] Read more » जवानी में तो तुमने भी गज़ब ढाया होगा।
लेख नृत्य है अपूर्व शांति का माध्यम April 29, 2022 / April 29, 2022 by ललित गर्ग | Leave a Comment विश्व नृत्य दिवस- 29 अप्रैल 2022-ललित गर्ग – अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस पूरे विश्व में 29 अप्रैल मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस की शुरुआत 29 अप्रैल 1982 से हुई। ‘बैले के शेक्सपियर’ की उपाधि से सम्मानित एक महान् रिफॉर्मर एवं लेखक जीन जार्ज नावेरे के जन्म दिवस की स्मृति में यूनेस्को के अंतर्राष्ट्रीय थिएटर इंस्टीट्यूट […] Read more » Dance is the medium of unparalleled peace नृत्य है अपूर्व शांति नृत्य है अपूर्व शांति का माध्यम विश्व नृत्य दिवस
लेख गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है April 28, 2022 / April 28, 2022 by चरखा फिचर्स | 1 Comment on गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है कुमारी प्रेमालमचूला, गरुड़उत्तराखंड आज़ादी के बाद हमारे देश ने कई मुद्दों पर तेज़ी से तरक्की किया है. कम समय में हम जहां अनाज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन गए वहीं बड़े बड़े बांध और आधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल का निर्माण कर हमने विश्व में अपनी काबलियत का लोहा मनवाया है. लेकिन विकास की इस […] Read more » The target of making the village open defecation free has not been met गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य
गजल आदमी अगर दुःखी है तो स्वविचार व मन से April 28, 2022 / April 28, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकभारत में जातिवाद का जहर भरा है,अपनी जाति का दुष्ट व अत्याचारी भी प्यारा है,मगर ये भी सोलहों आने है सहीस्वजाति विरादरी से ज्यादा बुरा पराया होता नहीं! पराया अपरिचित हो या सुपरिचित होपराया आपसे निरपेक्ष या आपका सापेक्ष होता है,पराए में परायापन है, तो विरोध भी कम है,पराए को अपना बनालो तो […] Read more » If a man is sad then by self thought and mind
गजल बेवफाओ के शहर में कुछ वफ़ा कर जाऊं। April 28, 2022 / April 28, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment वेवफाओ के शहर में कुछ वफ़ा कर जाऊं।जो दिल में है रंजीशे,उन्हे बाहर कर जाऊं।। मिलता नही कोई ठिकाना,जहा आकर बताऊं।अपने आप में ही घुलता हूं,किसे क्या सुनाऊं।। काटी है जिंदगी गरीबी में अब कहां मैं जाऊं।चोरी करनी बसकी नही,दौलत कहां से लाऊं।। ज़ख्म बहुत है दिल में,किस किस को मैं दिखाऊं।जख़्मों पर नमक छिड़क […] Read more » Let me do something in the city of unfaithful people. बेवफाओ के शहर में कुछ वफ़ा कर जाऊं।
राजनीति लेख अगर सशक्त विपक्ष की भूमिका निभा ले कांग्रेस तो लौट सकता है कांग्रेस का पुराना वैभव April 28, 2022 / April 28, 2022 by लिमटी खरे | 1 Comment on अगर सशक्त विपक्ष की भूमिका निभा ले कांग्रेस तो लौट सकता है कांग्रेस का पुराना वैभव लिमटी खरे यह पहली बार ही हुआ है जबकि कांग्रेस लंबे समय से न केवल केंद्र में सत्ता से बाहर है वरन सूबों में भी कांग्रेस अब सिमटती दिख रही है। कांग्रेस में आला नेताओं का जी 23 भी अंदर ही अंदर तलवार पजाते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस का वैभव रातों रात नहीं समाप्त […] Read more » लौट सकता है कांग्रेस का पुराना वैभव
लेख पुस्तकें हर आंधी में टीकी रहेगी April 27, 2022 / April 27, 2022 by ललित गर्ग | Leave a Comment विश्व पुस्तक दिवस-23 अप्रैल, 2022-ललित गर्ग – हर साल 23 अप्रैल को दुनियाभर में विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसे कॉपीराइट डे भी कहा जाता है। इस दिवस को किताबें पढ़ने, प्रकाशन और कॉपीराइट के लाभ को पहचानने और बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिन कई विश्वप्रसिद्ध लेखकांे […] Read more » विश्व पुस्तक दिवस-23 अप्रैल
लेख खतरे की घंटी ही दिख रही देश में बढ़ते कोविड के केस! April 27, 2022 / April 27, 2022 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे कोरोना अभी गया नहीं है, यह बात लंबे समय से प्रधानमंत्री के द्वारा कही जा रही है। कुछ माहों तक कोरोना के आंकड़े कम होने के बाद अप्रैल माह के दूसरे पखवाड़े में एक बार फिर कोविड के आंकड़े बढ़ते हुए दिख रहे हैं। इन आंकड़ों में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अर्थात दिल्ली […] Read more » Rising Kovid cases in the country are seeing alarm bells! खतरे की घंटी ही दिख रही देश में बढ़ते कोविड के केस!