लेख समाज बैडरूम में सौतन और संतानोत्पति में बाधक बनते मोबाइल और लैपटॉप May 5, 2022 / May 5, 2022 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment -प्रियंका ‘सौरभ’ बैडरूम में देर रात तक मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप पर कार्य करने से पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ रहें है. आधुनिक युग के दम्पति साइको सेक्स डिसऑर्डर के शिकार हो रहें है. शरीर में डाई हाइड्रोक्सी इथाइल अमाइन नामक रसायन का स्तर तेजी से घट रहा है. जिसकी वजह से पुरुष व महिला […] Read more » Mobile and laptop becoming a hindrance in the birth of child in the bedroom संतानोत्पति में बाधक बनते मोबाइल और लैपटॉप
कविता बुढ़ापे का दर्द May 5, 2022 / May 5, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आज अपने ही घर से,बे घर हो गए।जो कभी अपने थे,वे पराए हो गए।। अपना घर होते हुए,वृद्धाश्रम चले गए।कोई नही पूछता,वे वृद्ध कहां चले गए।। जो जिगर के टुकड़े थे,वे दुश्मन हो गए।पता नही वे आज ऐसे क्यों हो गए।। हम मजबूत थे,आज मजबूर हो गए।कभी असरदार थे,आज बेअसर हो गए।। सुनता नही कोई […] Read more » old age pain बुढ़ापे का दर्द
कविता आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए। May 4, 2022 / May 4, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए।दुनिया में आप,कभी बे असूल न बनिए।। अच्छा रास्ता,सभी को दिखाओ तुम।किसी के रास्ते का,तुम सूल न बनिए।। निमटा लो हर बात को ,तुम ख़ुद ही।किसी बात के लिए,तुम तूल न बनिए।। रक्खे याद तुम्हे,ये दुनिया अब सारी।किसी के लिए भी,तुम भूल न बनिए।। रोको किसी को मत,जो कही […] Read more » आप तो गुलाब है कभी बबूल न बनिए।
कविता सच में खुदा का सौवां नाम है नेक इंसान May 4, 2022 / May 4, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकनहीं हिन्दू बनो ना हीं मुसलमान बनो,ना किसी अनदेखे परखे को खुदा कहो! न राम को खोजो मंदिर के भगवान में,तुमसे अच्छा कोई राम हो सकता नहीं! खुदा अगर कोई है, तो खुद तुम ही हो,तुमसे अच्छा कोई खुदा हो सकता नहीं! अगर कोई राम हो सकता है तो बंधुओं,तुमसे अच्छा राम बन […] Read more » Truly the hundredth name of God is a noble person सच में खुदा का सौवां नाम है नेक इंसान
कविता ईद का चांद तो तुम्हे दिखाना ही पड़ेगा। May 3, 2022 / May 3, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ईद का चांद तो तुम्हे दिखाना ही पड़ेगा।आस्मां को ज़मीं पर तो झुकाना पड़ेगा।। कब तक रखोगे तुम दो दिलो को अलग।कभी न कभी तो उनको मिलाना पड़ेगा।। कब तक रखोगे खूबसूरत चेहरा छिपाकर।कभी न कभी तो उसको दिखाना पड़ेगा।। ईद आई है तो उसे गले लगाना ही होगा।कुछ न कुछ तो उसे हमे दिलाना […] Read more » You will have to show the moon of Eid. ईद का चांद तो तुम्हे दिखाना ही पड़ेगा।
कविता भारत की गुलामी का कारण क्षत्रिय के सिवा सभी थे रणछोड़ May 3, 2022 / May 3, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकभारत में वर्ण व्यवस्था बंद घेरा,बंद घेरे से निकल पाने में फेरा!वर्ण और वर्ग में बहुत हीं अंतर,वर्ग में वर्ग परिवर्तन के अवसर! आज का गरीब कल होता अमीरअमीरी गरीबी में बदलाव निरंतर!प्रयत्न कर्म सश्रम के बलबूते पर,वर्ग बदलना,नहीं भाग्य पे निर्भर! वर्ण में कोई बदलाव चुनाव नहीं,वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य, शूद्र […] Read more » भारत की गुलामी का कारण क्षत्रिय के सिवा सभी थे रणछोड़
लेख ग्रामीण और छोटे बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति क्यों नहीं हैं। May 2, 2022 / May 2, 2022 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment प्रियंका ‘सौरभ’ केंद्रीय विद्युत मंत्रालय देश में बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों को निर्धारित करने वाले नियम जारी करता हैं। इन नियमों में उपभोक्ताओं को विश्वसनीय सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण बिजली सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान है। बिजली एक समवर्ती सूची (सातवीं अनुसूची) का विषय है और केंद्र सरकार के पास इस पर कानून बनाने का अधिकार […] Read more » Why there is no quality supply to rural and small power consumers. ग्रामीण और छोटे बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति क्यों नहीं हैं।
लेख अपनी मेहनत व लगन पर विश्वास रखते हैं ये, किसी के सामने हाथ फैलाना पसंद नहीं May 1, 2022 / May 1, 2022 by मुरली मनोहर श्रीवास्तव | Leave a Comment मजदूर दिवस (1 मई स्पेशल) – मुरली मनोहर श्रीवास्तव मेहनत उसकी लाठी हैं, मजबूती उसकी काठी हैं। बुलंदी नहीं पर नीव हैं, यही मजदूरी जीव हैं। मजदूर का मतलब हमेशा गरीब से नहीं होता हैं, मजदूर वह ईकाई हैं, जो हर सफलता का अभिन्न अंग हैं, फिर चाहे वो ईंट-गारे में सना इन्सान हो या […] Read more » They believe in their hard work and dedication मजदूर दिवस
कविता मजदूर दिवस May 1, 2022 / May 1, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मना रहे है हर वर्ष मजदूर दिवस,फिर भी मजदूर आज भी विवश।बदल नही पाए उसकी विवशता,चाहे मना लो तुम कितने दिवस।। जो बनाता है मकान दुसरो के लिए,नही बना सका मकान खुद के लिए।वह मर रहा है आज भी देश के लिए,बताओ कौन मर रहा है उसके लिए।। कितने ही दशक आज बीत चुके है,उसका […] Read more » Labour Day मजदूर दिवस
लेख भारत में श्रम के साथ उद्यमिता का भाव जगाना भी जरूरी May 1, 2022 / May 1, 2022 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment श्रम दिवस पर विशेष किसी भी आर्थिक गतिविधि में सामान्यतः पांच घटक कार्य करते हैं – भूमि, पूंजी, श्रम, संगठन एवं साहस। हां, आजकल छठे घटक के रूप में आधुनिक तकनीकि का भी अधिक इस्तेमाल होने लगा है। परंतु पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाओं में चूंकि केवल पूंजी पर ही विशेष ध्यान दिया जाता है अतः सबसे अधिक […] Read more » It is also necessary to inculcate the spirit of entrepreneurship along with labor in India. श्रम के साथ उद्यमिता का भाव
आर्थिकी लेख भारत में आय में हो रही वृद्धि के चलते महंगाई का तुलनात्मक रूप से कम होता असर May 1, 2022 / May 1, 2022 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment महंगाई (मुद्रा स्फीति) का तेजी से बढ़ना, समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेष रूप से समाज के गरीब एवं निचले तबके तथा मध्यम वर्ग के लोगों को आर्थिक दृष्टि से अत्यधिक विपरीत रूप में प्रभावित करता है। क्योंकि, इस वर्ग की आय, जो कि एक निश्चित सीमा में ही रहती है, का एक बहुत बड़ा भाग […] Read more » Due to the increase in income in India the effect of inflation is comparatively less. आय वृद्धि के चलते महंगाई का तुलनात्मक रूप से कम असर
लेख समाज की अकर्मण्यता व जिहादी चरण चुंबन मानवता हेतु विषकारी होगा May 1, 2022 / May 1, 2022 by दिव्य अग्रवाल | Leave a Comment – दिव्य अग्रवाल एक तरफ पूरा विश्व जिहादी कटटरपंथियो की अमानवीयता व् उपद्रवी सोच से पीड़ित है परन्तु भारत के सेक्युलर राजनेता इस उपद्रवी मजहबी सोच को रोकने , प्रतिबंधित या सुधारने के स्थान पर सत्ता की लोलुपता के कारण नित कुछ न कुछ प्रपंच कर वर्तमान में स्वम सुख भोग कर , भारत के सभ्य […] Read more » The indolence of the society and kissing the jihadi feet will be toxic for humanity.