कविता एक राशि वालों की नियति एक नहीं होती January 31, 2022 / January 31, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकएक राशि वालों की नियति एक नहीं होती,राम ने रावण को संहारा,कृष्ण ने कंस को,गोडसे ने गांधी को मारा रहस्य को समझो,राशिफल देखके क्या फायदा कर्मफल देखो! जैसी करनी वैसी भरनी कहावत कैसे बनी?गीता को छूकर सिर्फ कसम मत लो, पढ़ो,जैसा कर्म करते हैं लोग वैसा फल मिलता,कोई राम रावण, कोई गोडसे गांधी […] Read more » Destiny of same zodiac is not same एक राशि वालों की नियति एक नहीं होती
लेख नेटवर्क की समस्या भी चुनावी मुद्दा है? January 31, 2022 / January 31, 2022 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment हेमा रौलियाना, बागेश्वर उत्तराखंड देश के जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां चल रही हैं उनमें पहाड़ी राज्य उत्तराखंड भी शामिल है. जहां 14 फरवरी को वोट डाले जायेंगे. ऐसे में मतदाताओं को अपने अपने पक्ष में करने के लिए सभी पार्टियां एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रही हैं. पिछले चुनावों की तरह […] Read more » नेटवर्क की समस्या भी चुनावी मुद्दा
कविता याद मेरी,तुम्हे आती तो होगी January 31, 2022 / January 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment याद मेरी तुम्हे आती तो होगीआकर तुम्हे सताती तो होगी।। सुबह जब तुम उठती तो होगी,नींद तुम्हारी खुलती तो होगी।पास न पाती जब तुम मुझको,दिल में बैचैनी होती तो होगी।।याद मेरी,तुम्हे,,,,,,,,,,,,,,,, ठंडी हवा सुबह चलती तो होगी,मेरा संदेश तुम्हे देती तो होगी।मिलता न जब संदेश तुम्हे मेरा,दिल में तडपन होती तो होगी।।याद मेरी,तुम्हे,,,,,,,,,,,,, नहाने जब […] Read more » तुम्हे आती तो होगी याद मेरी याद मेरी तुम्हे आती तो होगी
कविता डोली व अर्थी में वार्तालाप January 31, 2022 / January 31, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment एक डोली चली, एक अर्थी चली,दोनो में इस तरह कुछ बाते चली। अर्थी बोली डोली से,तू पिया के घर चली,मै प्रभु के घर चली।तू डोली में बैठ चली,मै चार कंधो पर चली।फर्क इतना है दोनो में सखि,तू अपने जहां में चलीमै अपने जहां से चली।”एक डोली चली, एक अर्थी चली,दोनो में इस तरह कुछ बाते […] Read more » conversation between doli and earth
लेख क्या चुनाव बनाम कैराना,सियासत का पैमाना ! January 31, 2022 / January 31, 2022 by सज्जाद हैदर | Leave a Comment ,पहले चरण के चुनाव में चुनाव आयोग ने अब तक बड़ी रैलियों की अनुमति नहीं दी है। इस बीच, सभी सियासी पार्टियाँ अपनी अपनी ताकत के अनुसार सियासी मैदान में उतर आई है। सभी सियासी पार्टियों का फोकस पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर है जहां पार्टी के बड़े नेताओं का जमावड़ा लग रहा है। खास बात […] Read more »
कविता कर्ण रहे न रहे कर्ण की बची रहेगी कथा January 29, 2022 / January 29, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकवो एक कर्ण था अवांछित जाति वर्ण का,कर्ण अब नहीं पर जस की तस है व्यथा,कर्ण रहे न रहे कर्ण की बची रहेगी कथा! कर्ण मिथकीय या यथार्थ पात्र हो सकता,मगर कर्ण कथा की आज भी प्रासंगिकता,कर्ण असवर्ण,कर्ण हो सकता नहीं लापता! वो तलाश में थे एक गुरु के जो ज्ञान दे,शिष्य का […] Read more » कर्ण रहे न रहे कर्ण की बची रहेगी कथा
कविता कैसा चुनाव ? January 28, 2022 / January 29, 2022 by शिवम् श्रोत्रिय | Leave a Comment Read more » poem on election कैसा चुनाव
लेख भारत का संविधान सबको सामान अधिकार देता है January 27, 2022 / January 27, 2022 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment गणतंत्र दिवस हर वर्ष जनवरी महीने की 26 तारीख को पूरे देश में देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत होकर मनाया जाता है। भारत के लोग हर साल 26 जनवरी का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि 26 जनवरी को ही 1950 में भारतीय संविधान को एक लोकतांत्रिक प्रणाली के साथ भारत देश में लागू […] Read more » 73वें गणतंत्र दिवस
लेख समतामूलक समाज का द्योतक है गणतंत्र January 25, 2022 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment डॉ.शंकर सुवन सिंह आधुनिक स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय पर्व है-गणतंत्र दिवस। भारत में गणतंत्र दिवस की भूमिका बहुत अहम् होती है। इसी दिन संविधान की स्थापना हुई। गणतंत्र दिवस भारतीयों की भावनाओ से जुड़ा हुआ विशेष दिन है। गणतंत्र के 72 वर्ष पूरे हो गए हैं। आजादी के बाद देश को चलाने के लिए संविधान […] Read more » article on republic day गणतंत्र
लेख सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की छाया में गणतंत्र January 25, 2022 / January 25, 2022 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भः गणतंत्र दिवस 26 जनवरी पर विशेष आलेख-प्रमोद भार्गवभारतीय गणतंत्र स्वतंत्रता के 75वें अमृत महोत्सव में सांस्कृतिक-आध्यात्मिक राष्ट्रवाद की छाया में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। सनातन हिंदू संस्कृति ही अखंड भारत की सरंचना का वह मूल गुण-धर्म है, जो इसे हजारों साल से एक रूप में पिरोये हुए है। इस एकरूपता को मजबूत […] Read more » Republic under the shadow of cultural nationalism सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
कविता कृष्ण ने क्यों कहा मैं शस्त्रधारियों में राम हूं January 25, 2022 / January 25, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककृष्ण ने क्यों कहामैं शस्त्रधारियों में राम हूंइसलिए कि बिना शस्त्र बिखर जाती सत्ताबुद्ध की अहिंसा नेअशोक को किया था निहत्थाबुद्ध की अहिंसा ने आमंत्रित कियाविदेशी आक्रांताओं को भारत मेंकाश कि परवर्ती शासकों ने धम्म के बजायगीता को अहमियत दिया होतातो भारत की स्थिति कुछ अलग होतीशस्त्र धारण से पाशविकता नियंत्रित होतीपशु के […] Read more » Why did Krishna say that I am Rama among the armed forces?]
लेख भारतीय गणतंत्र के सूरज की चमक January 25, 2022 / January 25, 2022 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है, इसी दिन 26 जनवरी, 1950 को हमारी संसद ने भारतीय संविधान को पास किया। इस दिन भारत ने खुद को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। बहत्तर वर्षों में हमारा गणतंत्र कितनी ही कंटीली झाड़ियों में फँसा रहा। लेकिन अब नये भारत में इन राष्ट्रीय पर्वों को […] Read more » republic day भारतीय गणतंत्र भारतीय गणतंत्र के सूरज की चमक