कविता पागल लड़की April 12, 2021 / April 12, 2021 by मंजुल सिंह | Leave a Comment तुम चीजों कोढूंढ़ने के लिए रोशनी काइस्तेमाल करती होऔर वो गाँव की पागल लड़कीचिट्ठी कावो लिपती हैनीले आसमान कोऔर बिछा लेती हैधूप को जमीन पर वो अक्सर चाँद को सजा देती हैरात भर जागने कीवो बनावटी मुस्कान लिए,नाचती हैजब धानुक बजा रहे होते है मृदंग वो निकालती है कुतिया का दूधइतनी शांति से की बुद्ध […] Read more » पागल लड़की
कविता वो उतना ही पढ़ना जानती थी? April 12, 2021 / April 12, 2021 by मंजुल सिंह | Leave a Comment वो उतना ही पढ़ना जानती थी?जितना अपना नाम लिख सकेस्कूल उसको मजदूरो के कामकरने की जगह लगती थी!जहां वे माचिस की डिब्बियोंकी तरह बनाते थे कमरे,तीलियों से उतनी ही बड़ी खिड़कियांजितनी जहां से कोईजरुरत से ज्यादा साँस न ले सके!पता नहीं क्यों?एक खाली जगह और छोड़ी गयी थी!जिसका कोई उद्देश्य नहीं,इसलिए उसका उपयोगहम अंदर बहार […] Read more » वो उतना ही पढ़ना जानती थी?
व्यंग्य “खेला होबे “ April 11, 2021 / April 11, 2021 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment पूर्वी भारत से हमारे राम जय बाबू पधारे । मैंने उनको रोसगुल्ला देकर कहा- “राम राम राम जय बाबू “।जय राम बाबू चिहुंक उठे ,पसीना -पसीना हो उठे और बोले -“शत्रु से मैं खुद निबटना जनता हूँमित्र से पर ,देव!तुम रक्षा करो ” कविवर दिनकर ने ये लाइनें तुम्हारे जैसे मित्र-शत्रु के लिये ही कहीं होंगी। सही बात […] Read more » khela hobe
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म लेख वर्ष प्रतिपदा ही भारत का नव वर्ष April 11, 2021 / April 11, 2021 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिन्दुस्थानीवर्तमान भारत में जिस प्रकार से सांस्कृतिक मूल्यों का क्षरण हुआ है, उसके चलते हमारी परंपराओं पर भी गहरा आघात हुआ है। यह सब भारतीय संस्कृति के प्रति कुटिल मानसिकता के चलते ही किया गया। आज भारत के कई लोग इस तथ्य से अवगत नहीं हैं कि भारतीय संस्कृति क्या है, हमारे संस्कार क्या […] Read more » varsh pratipada भारतीय संस्कृति वर्ष प्रतिपदा वर्ष प्रतिपदा ही भारत का नव वर्ष
कविता कलाइयों पर ज़ोर देकर ? April 11, 2021 / April 11, 2021 by मंजुल सिंह | Leave a Comment लोगइतने सारे लोगजैसे लगा होलोगो का बाजारजहां ख़रीदे और बेचेजाते है लोगकुछ बेबस,कुछ लाचारलेकिन सब हैहिंसक, जो चीखना चाहते हैज़ोर से, लेकिनभींच लेते है अपनीमुट्ठियां कलाइयों पर ज़ोर देकरताकि कोईदेख न सकेबस मेहसूस कर सकेहिंसा कोजो चल रही हैलोगो कीलोगो के बीच, मेंलोगो से? एक हिंसा तय हैलोगो के बीचजो खत्म कर रही हैकिसी तंत्र […] Read more » कलाइयों पर ज़ोर देकर ?
कविता हे राम… April 11, 2021 / April 11, 2021 by मंजुल सिंह | Leave a Comment राम तुम वन में रहो!राम तुम कौशल्या की कोख़ में रहो!राम तुम पिता के स्वभिमान में रहो!राम तुम सीता के तन-मन में रहो!राम तुम लक्ष्मण के अभिमान में रहो!राम तुम हनुमान के हृदय में रहो!राम तुम रावण के प्रतिशोध में रहो!राम तुम वानरो के दल में रहो!हे राम तुम “रामायण” में रहो!हे राम तुम “राम […] Read more » हे राम
लेख शख्सियत समाज ज्योतिबा का संवाद संदेश एवं कर्म दीपशिखा बने April 11, 2021 / April 11, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment महात्मा ज्योतिबा फुले जन्म जयन्ती- 11 अप्रैल, 2021 ललित गर्ग- ‘मनुष्य जाति एक है’ इस आदर्श को आचरण तक लाने एवं अस्पृश्यता के संस्कारों को स्वस्थता देने में जिन महापुरुषों ने अनूठे उपक्रम किये, उनमें महात्मा ज्योतिबा फूले का अविस्मरणीय योगदान है। वे 19वीं सदी के महान समाज सुधारक, विचारक, दार्शनिक और लेखक थे। उन्होंने […] Read more » ज्योतिबा का संवाद संदेश महात्मा ज्योतिबा फुले जन्म जयन्ती महात्मा ज्योतिबा फुले जन्म जयन्ती- 11 अप्रैल
लेख स्वास्थ्य-योग दूसरी लहर के हमले की बढ़ती रफ्तार की चिन्ता April 9, 2021 / April 9, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग- देश में कोरोना की दूसरी लहर से जुड़ी डराने वाली खबरों के बावजूद केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकारें गहरी नींद में हैं, पिछली बार इस तरह के आंकड़ों के बीच सख्त पाबंदियां लगा दी गयी थी, पूरा देश लाकडाउन की स्थिति में था, प्रश्न है कि इस बार सरकारें उदासीन क्यों है? वे […] Read more » corona second wave dangerous Worried about the increasing speed of second wave attack कोरोना कोविड-19 की दूसरी लहर
कविता डॉक्टर और साहित्यकार April 9, 2021 / April 9, 2021 by मंजुल सिंह | 1 Comment on डॉक्टर और साहित्यकार सब बीमारियांअलसा कर बूढी हो गयी हैसब दवाईयाँ स्वर्ग चली गयी हैऔरकुछ डॉक्टरसाहित्यकार बन गए हैवो बीमारियों की किताब से चुराते हैअलंकारिक शब्दऔरमरी हुई कविता का करते हैपोस्टमार्टमऔर अपने शब्दों का भूसाभर कर के रिपोर्ट बना देते है औरकुछ साहित्यकारडॉक्टर बन गए हैजो अपनी प्रेम कविताओं से करते हैमौत का इलाजजरुरत के हिसाब से शरीर […] Read more » Doctor and litterateur डॉक्टर और साहित्यकार
कविता मानव सभ्यताएं April 9, 2021 / April 9, 2021 by मंजुल सिंह | Leave a Comment उसकी आँखे खुली थी या बंदये कह पाना मुश्किल सा ही थाक्योकि उसकी आँखो के बाहरबड़ी बड़ी तख्तियां लटक रही थीजिस पर लिखा था मानव सभ्यताएंउसकी नाक के नथुने इतने बड़े थेकी पूरी पृथ्वी समां जायेउसका मुँह ऐसा थाजैसे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की सभ्यताओंको यही से निगला गया होआप उसकी गर्दन को लम्बा कहेंगेतो आपको नर्क […] Read more » मानव सभ्यताएं
लेख मजहब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना, जब तोड़ा गया था मथुरा के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर को April 9, 2021 / April 9, 2021 by राकेश कुमार आर्य | 1 Comment on मजहब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना, जब तोड़ा गया था मथुरा के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर को मथुरा के प्रसिद्ध मन्दिर को तोड़ा गया औरंगजेब को यह भली प्रकार जानकारी थी कि उसके पूर्वज बाबर ने किस प्रकार 1528 ई0 में भारतीय इतिहास के महानायक श्री रामचन्द्र जी के मन्दिर को अयोध्या में तुड़वाया था । अब उसे भी मुस्लिमों के बीच लोकप्रिय होने के लिए मथुरा में श्री कृष्ण के भव्य […] Read more » Religion teaches hatred among themselves when the famous Krishna temple in Mathura was demolished. मजहब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना
कविता जिन्दगी क्या है April 8, 2021 / April 8, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment हर रात सुलझा कर सिरहाने रखते है जिंदगी।सुबह उठते ही उलझी पड़ी मिलती है जिंदगी।। सुलझा सुलझा कर थक जाते हैं हम ये जिंदगी।थकती नहीं ये जिंदगी,सुला देती हमें ये जिंदगी।। बेवफ़ा हम नहीं,बेवफ़ा हो जाती है ये जिंदगी।भरोसा इस पर कैसे करे,बे भरोसे है ये जिंदगी।। रंक से राजा बनाए राजा से रंक बनाती […] Read more » जिन्दगी क्या है