व्यंग्य पहले वाले की दूसरी शादी December 15, 2018 / December 15, 2018 by अभिलेख यादव | 1 Comment on पहले वाले की दूसरी शादी पहले वाले की दूसरी शादी प्रियंका चोपड़ा का दूसरा विवाह भी मीडिया में कवरेज नहीं पा रहा है उनकी पीआर एजेंसी इस बात से बहुत दुखी है ,प्रियंका और निक जोनस दोनों के मैनेजर बहुत परेशन हैं कि विवाह नाम के इस जॉइंट वेंचर को इतना फीका रिस्पांस क्यों मिल रहा है जबकि भारत में […] Read more » Amitabh Bacchan अक्षय कुमार पहले वाले की दूसरी शादी शाहिद कपूर
गजल मचलती तमन्नाओं ने December 14, 2018 / December 14, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ मचलती तमन्नाओं ने आज़माया भी होगा बदलती रुत में ये अक्स शरमाया भी होगा पलट के मिलेंगे अब भी रूठ जाने के बाद लड़ते रहे पर प्यार कहीं छुपाया भी होगा अंजाम-ए-वफ़ा हसीं हो यही दुआ माँगी थी इन जज़्बातों ने एहसास जगाया भी होगा सोचना बेकार जाता रहा बेवजह के शोर में तुम […] Read more » मचलती तमन्नाओं ने
व्यंग्य ओल्ड इज आलवेज गोल्ड December 11, 2018 / December 11, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment दिलीप कुमार सिंह किम जोंग द्वारा अमेरिका से सुलह कर लेने के बाद भारत टीवी चैनल के कर्ता-धर्ता बहुत परेशान थे कि अब कौन सा देश उनसे युध्दनीति की सूचनाएं साझा करेगा और वो अपनी दुनिया को बचाने की योजनाओं पर काम कैसे करेंगे लेकिन भला हो हिंदी फिल्म की तारिकाओं का ,जिन्होंने टीवी चैंनलों […] Read more » अर्थशास्त्र ओल्ड इज आलवेज गोल्ड लेखकवा सुष्मिता
कविता आज का आदमी December 10, 2018 / December 10, 2018 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on आज का आदमी आज का आदमी,आदमी कहाँ रह गया है वह तो आज की,चकाचोंध में बह गया हैअगर आज, आदमी,आदमी होता तो वह आज की चकाचोंध में न बहता आज के आदमी में,आदमियत निकल चुकी है वह तो आज स्वार्थ के हाथो बिक चुकी है अगर आज आदमी में स्वार्थ न होता तो वह आज आदमियत से बंधा होता आज आदमी,आदमी से […] Read more » आज का आदमी इर्ष्या घर्णा स्वार्थ
साहित्य बनारसी गुरु और बांसुरी : जिनका सिर्फ इतना परिचय ही काफी है December 10, 2018 / December 10, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप अगर कोई आपसे कहे कि रन-मशीन को एक शब्द में परिभाषित करें तो आप तुरंत कहेंगे सचिन तेंडुलकर। ऐसे ही अगर कोई कहे सुरों की देवी तो आप कहेंगे लता मंगेशकर, कोई कहे सदी के महानायक तो आप कहेंगे अमिताभ बच्चन। किस्सागोई में आज एक ऐसे कलाकार की कहानी जिसे प्यार से बनारसी […] Read more » बनारसी गुरु और बांसुरी : जिनका सिर्फ इतना परिचय ही काफी है हरिप्रसाद चौरसिया
साहित्य अहम सवाल December 6, 2018 / December 6, 2018 by गंगानन्द झा | Leave a Comment गंगानन्द झा एक किताब मिली। The Vital Question. Why life is the way it is. लेखक हैं Nick Lane । (अहम सवाल, जिन्दगी जैसी है वैसी क्यों है। ) मैं जीव-विज्ञान का छात्र रहा हूँ।मैंने सीखा है कि प्रोटोप्लाज्म जीवन का भौतिक आधार है। मैंने सीखा कि पदार्थ के एक विशेष स्वरूप एवम् स्तर तक […] Read more » अहम सवाल
साहित्य राम-जन्मभूमि मन्दिर अयोध्या की प्राचीनता December 6, 2018 / December 8, 2018 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment बिपिन किशोर सिंहा प्रो. दीनबन्धु पाण्डेय अद्भुत प्रतिभा धनी के इतिहासकार हैं। वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला इतिहास एवं पर्यटन प्रबन्धन विभाग के अध्यक्ष रहे हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उनके शोध और कार्यक्षेत्र का और विस्तृत विकास हुआ। उनकी सबसे बड़ी विशेषता है कि बिना पुष्ट प्रमाण के वे एक वाक्य भी नहीं लिखते […] Read more » राम-जन्मभूमि मन्दिर अयोध्या की प्राचीनता
कविता राम लला का मंदिर December 6, 2018 / December 6, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मन ही मन सब मांग रहे है राम लला के मंदिर को कोई भी पहल न कर रहा है अयोध्या में इस मंदिर को मोदी जी भी मौन हुए है जो मन की बात करते है वोटो के चक्कर में नेता कुछ मजहबियो से डरते है कब तक राम लला रहेगे बांसों के बने इस […] Read more » मोदी जी राम लला का मंदिर
कविता जब तक पूर्ण नहीं हो पाते ! November 30, 2018 / November 30, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | 1 Comment on जब तक पूर्ण नहीं हो पाते ! (मधुगीति १८११२८ ब) जब तक पूर्ण नहीं हो पाते, सृष्टि समझ कहाँ हम पाते; अपना बोध मात्र छितराते, उनका भाव कहाँ लख पाते ! हर कण सुन्दरता ना लखते, उनके गुण पर ग़ौर न करते; संग आनन्द लिए ना नचते, उनको उनका कहाँ समझते ! हैं गण शिव के गौण लखाते, शून्य हिये बिन ब्रह्म […] Read more » जब तक पूर्ण नहीं हो पाते ! दोष द्रष्टि शिव
कविता आत्म मंथन कर आपने जो करना है कीजिए ! November 28, 2018 / November 28, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment (मधुगीति १८११२८ अ) आत्म मंथन कर आपने जो करना है कीजिए, अपने मन की बात औरों को बिना पूछे यों ही न बताइए; अपनी अधिक सलाह देकर और आत्माओं को कम मत आँकिए, स्वयं के ईशत्व में समा संसार को अपना स्वरूप समझ देखिए! अपनी सामाजिक संतति को बेबकूफ़ी करते हुए भी पकने दीजिए, आदर्श […] Read more » आत्म मंथन कर आपने जो करना है कीजिए !
कविता आग की लपटें November 28, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment मैं आज सुबह उठा और देखा रात की बूंदाबांदी से जम गई थी धूल वायुमंडल में व्याप्त रहने वाले धूलकण भी थे नदारद मन हुआ खुश देखकर यह सब कुछ देर बाद उठाकर देखा अख़बार तो जल रहा था वतन साम्प्रदायिकता व जातिवाद की आग में यह बरसात नहीं कर पाई कम इस आग को […] Read more » आग की लपटें जातिवाद वायुमंडल
साहित्य ग़ज़ल की दुनिया का मुकम्मल शेर है अज़ीज़ अंसारी November 28, 2018 / November 28, 2018 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment – डॉ अर्पण जैन ‘अविचल‘ जैसा नाम वैसा ही स्वभाव, वैसी ही आत्मीयता, वैसा ही निश्छल स्नेह, वैसी ही शांति और सरलता की प्रतिमूर्ति और सबसे बड़ी बात तो यह की ग़ज़ल के मायने जब तो समझाते है तो लगता है खुद ग़ज़ल बोल रही है कि मुझे इस मीटर में, इस बहर में, इस रदीफ़ और इस काफिये के साथ लिखो। हम बात कर रहे है इंदौर के खान बहादूर कम्पाउंड में रहने वाले अज़ीज़ अंसारी साहब की जो वर्ष २००२ की मार्च में आकाशवाणी इंदौर से केंद्र निदेशक के दायित्व से सेवानिवृत हुए हैं पर उसके बाद भी अनथक, अनवरत और अबाध गति से साहित्य साधना में रत हैं। हिंदी-उर्दू की महफ़िल और अदब की एक शाम कहूँ यदि अंसारी जी को तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। लगभग १० से अधिक किताब और सैकड़ों सम्मान जिनके खाते में हो, कई वामन तो कई विराट कद को सहज स्वीकार करते, नवाचार के पक्षधर, अनम्य को सिरे से ख़ारिज करने के उपरांत हर दिन होते नव प्रयोगों को सार्थकता से अपनी ग़ज़ल, अपनी जबान और अपने लहजे में उसी तरह शामिल करते हैं जैसे पानी में नमक या शक्कर। ७ मार्च १९४२ को मालवा की धरती इंदौर में पिता श्री ईदू अंसारी जी के घर जन्मे अज़ीज़ अंसारी जी वैसे तो एमएससी (कृषि), डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एन्ड रूरल जर्नलिस्म तक अध्ययन कर चुके हैं और बचपन से उर्दू-हिन्दी साहित्य में रूचि रखते हैं। सन १९६४ से साहित्य की जमीन पर गोष्ठियों के माध्यम से सक्रियता की इबारत रच रहे हैं। जहाँ साहित्य के झंडाबरदार साहित्य के गलीचे को जनता के पांव के नीचे से खसकाने वाले बन रहे है और अस्ताचल की तरफ बढ़वाना चाह रहे है पर ऐसे ही दौर में अंसारी जी नए जोश और उमंग के साथ नवाचार का स्वागत करते हैं। साफगोई और किस्सों की एक किताब जो बच्चों को भी उसी ढंग से हौसला देते हैं जैसे तजुर्बेदारों या कहूँ विधा के झंडाबरदारों को टोकते हैं उनकी गलती पर। बात जब हाइकु की हुई तो अंसारी जी कहते है कि ‘सलासी’ जानते हो? उर्दू में सलासी भी तीन लाइन में लिखे शेर हैं जिसमें रदीफ़ भी होता है और काफिया भी मिलता है। बहुत से किस्से और कहानियों के बीच हिन्दी के उत्थान की बात आई तो पेट की भाषा बनाने के लिए उनकी भी चिंता साथ मिल गई। और यही कहा की साथ हूँ, जब चाहो, जैसे चाहो बताना जरूर। एक स्कूल में जगह है अपने पास चाहो तो यहाँ भी कुछ संचालित कर सकते हो। शहर की साहित्यिक जमात में अदावत का एक नाम जो इसलिए भी मशहूर है क्योंकि आकाशवाणी पर कई रचनाकारों को मंच देकर तराशा भी और हीरा भी बनाया। आपके सुपुत्र सईद अंसारी जी जो वर्तमान में आजतक के मशहूर न्यूज एंकर है। इन सब के अतिरिक्त अंसारी जी के पास सैकड़ों किस्से हैं, जिनमे शामिल है शहर की विरासत और ग़ज़ल की बज्म। बहर और मीटर में अपनी बात कहने वाले अज़ीज़ अंसारी जी जीवन में भी मीटर में ही रहते हुए मुकम्मल शेर बनकर जिंदगी की ग़ज़ल गुनगुना रहे हैं। Read more » ग़ज़ल की दुनिया का मुकम्मल शेर है अज़ीज़ अंसारी