कहानी नाम गुम जाएगा November 23, 2018 / November 26, 2018 by डॉ कविता कपूर | Leave a Comment डॉ. कविता कपूर अक्तूबर का महिना था, दिल्ली में अभी ठण्ड ने दस्तक दी ही थी, पर पठानकोट से जब मैं ट्रेन में चढ़ी, पठानकोट की ठण्ड ने मुझे कोट की याद दिला दी | सुबह के पाँच बज रहे थे, समय बिताने के लिए मैं खिड़की से बहार देखने लगी | मेरे डिब्बे में […] Read more » शिवदास सिंह नाम गुम जाएगा फौजी दिल्ली राजस्थान
कहानी चौर्यकला का नूतन अध्याय November 19, 2018 / November 19, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार भारत एक कलाधर्मी देश है। कला के गाना, बजाना, चित्रकला, मूर्तिकला, लेखन आदि 64 प्रकार हैं। इनमें एक ‘चौर्यकला’ भी है। इसका प्राथमिक ज्ञान तो हमें बचपन में ही हो जाता है। मां जब पिताजी से छिपाकर कुछ पैसे रख लेती है। बच्चे बाजार से सामान लाते समय दो-चार रु. बचा लेते हैं। […] Read more » चौर्यकला का नूतन अध्याय तकिये तौलिये
कविता मग रहे कितने सुगम जगती में ! November 15, 2018 / November 15, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’ मग रहे कितने सुगम जगती में, पंचभूतों की प्रत्येक व्याप्ति में; सुषुप्ति जागृति विरक्ति में, मुक्ति अभिव्यक्ति और भुक्ति में ! काया हर क्या न क्या है कर चहती, माया में कहाँ कहाँ है भ्रमती; करती मृगया तो कभी मृग होती, कभी सब छोड़ कहीं चल देती ! सोचते ही है […] Read more » अभिव्यक्ति गहराइयाँ त्रिलोक मग रहे कितने सुगम जगती में !
व्यंग्य मोलभाव के उस्ताद November 14, 2018 / November 14, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार, आप चाहे मानें या नहीं; पर हम भारत वालों को मोलभाव में बहुत मजा आता है। हमारे शर्मा जी की मैडम तो इसमें इतनी माहिर हैं कि पड़ोसिनें जिद करके उन्हें अपने साथ खरीदारी के लिए ले जाती हैं। वे भी इसके लिए हमेशा तैयार रहती हैं, क्योकि आॅटो और चाट-पकौड़ी का खर्च […] Read more » मोलभाव के उस्ताद
कविता दीप का दिवाली पर सन्देश November 8, 2018 / November 8, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment खुद जल जाओ,न जलाओ किसी को तुम दीप का सन्देश है जरा इसको सुनो तुम मेरे नीचे अँधेरा है,सबको उजाला देता हूँ खुद जल कर मै,सबको प्रकाश देता हूँ बना हूँ मिट्टी का,कुम्हार मुझको बनाता है तपा कर अग्नि में मुझको तुम्हे पहुचाता है बेच कर मुझे ,अपनी रोटी रोजी चलाता है मेरे बिकने पर […] Read more » खुद जल जाओ दीप का दिवाली पर सन्देश न जलाओ किसी को तुम
कविता दिवाली की दौलत November 5, 2018 / November 5, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | 1 Comment on दिवाली की दौलत तारकेश कुमार ओझा ———— चंद फुलझड़ियां , कुछ अनार जान पड़ते दौलत अपार … क्या जलाए , क्या बचाएं धुन यही दिवाली यादगार बनाएं दीपावली की खुशियां सब पर भारी लेकिन छठ, एकदशी के लिए पटाखे बचाना भी तो है जरूरी आई रोशनाई, छू मंतर हुई उदासी पूरी रात भागमभाग , लेकिन गायब उबासी जमीन […] Read more » क्या जलाए क्या बचाएं दिवाली की दौलत
कविता बेटी बचाओ -बेटी पढाओ November 2, 2018 / November 2, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अभी अभी एक घटना घटी बात बिलकुल सच्ची है पर अटपटी अभी अभी एक व्यक्ति का फोन आया उसने मझे डॉक्टर कह कर बुलाया क्या आप डॉक्टर अनिता बोल रही है ? हाँ,मै डॉक्टर अनिता ही बोल रही हूँ कहिये,मै आपकी क्या सेवा कर सकती हूँ ? क्या बीमारी है,क्या समझ सकती हूँ ? दूसरी […] Read more »
कहानी क्या भगवान है ? November 1, 2018 / November 1, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आरके रस्तोगी एक मेजर के नेतृत्व में 15 जवानो की एक टुकड़ी हिमालय पर्वत में अपने रास्ते पर थी उन्हें ऊपर कही तीन महीने के लिए दूसरी टुकड़ी के लिए तैनात होना था . दुर्गम स्थान,ठण्ड और बर्फवारी ने चढ़ाई की कठिनाई और बढ़ा थी|बेतहासा ठण्ड में मेजर ने सोचा कि अगर उन्हें यहाँ एक […] Read more » अंगीठी क्या भगवान है ? मेजर साहब
कविता कहाँ ये वादियाँ सदा होंगी ! November 1, 2018 / November 1, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment (मधुगीति १८१०३० अ) कहाँ ये वादियाँ सदा होंगी, कहाँ आबादियाँ दर्श देंगी; कहाँ मिलने को कोई आएँगे, कहाँ हँस चीख़ चहक पाएँगे ! करेंगे इंतज़ार कौन वहाँ, टकटकी लगा कौन देखेंगे; आने वाले न वैसे सुर होंगे, तरंग और वे रहे होंगे ! भाव धाराएँ अलहदा होंगी, थकावट उड़ानों की मन होगी; तरावट हवाओं की […] Read more » आंखों उड़ानों कहाँ ये वादियाँ सदा होंगी ! नेत्रों
कविता मेरे प्यार की कश्ती को तुम यूही पार लगा देना October 31, 2018 / October 31, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मेरे प्यार की कश्ती को ,तुम यूही पार लगा देना जब आये कोई तूफान,मेरे प्यार को यूही बचा लेना जिंदगी मे आते रहेगे, तूफान हर मोड पर मुझे कही छोड़ न देना किसी टेढ़े मोड पर मैने पकड़ा है हाथ तुम्हारा जिंदगी भर के लिए कही छुडा न देना मेरा हाथ किसी और के लिए […] Read more » मेरे प्यार की किस्ती को तुम यूही पार लगा देना
कविता इस रस्म की शुरुआत बस मेरे बाद कीजिए October 31, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment इस रस्म की शुरुआत बस मेरे बाद कीजिए जिनसे रौशन है हुश्न, उन्हीं को बर्बाद कीजिए गर पूरी होती हो यूँ ही आपके ख़्वाबों की ताबीरें तो खुद को बुलबुल और मुझे सैय्याद कीजिए ये कि क्या हुज़्ज़त है आपके नूर-ए-नज़र होने की दिल की बस्तियाँ लुट जाएँ,और फिर हमें याद कीजिए जो थे सितमगर,सबको […] Read more » इस रस्म की शुरुआत बस मेरे बाद कीजिए
कविता जन्म जन्म हु साथ निभाये,तुम ऐसे बंधन में बंध जाये October 30, 2018 / October 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जन्म जन्म हम साथ निभाये,तुम ऐसे बंधन में बंध जाओ बन जाता हूँ दिल तुम्हारा,तुम दिल की धड़कन बन जाओ कभी लड़े भिड़े न जीवन में,ऐसा तुम दर्पण बन जाओ हंसी-ख़ुशी जीवन बिताये,तुम जीवन की आशा बन जाओ मै बन जाऊ साँस तुम्हारी,तुम जीवन की आस बन जाओ मै बन जाऊ चाहत तेरी,तुम मेरे दिल […] Read more » जन्म जन्म हु साथ निभाये तुम ऐसे बंधन में बंध जाये बिजली तुम्हारी