कविता न मै बीजेपी का प्रवक्ता April 5, 2018 / April 6, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment न मै बीजेपी का प्रवक्ता न मै कांग्रेस का प्रवक्ता मै तो बिलकुल निष्पक्ष हूँ सही बात को हमेशा लिखता न मै सत्ता का भूखा न मै कुर्सी का भूखा मै तो केवल एक कवि हूँ जो केवल तालियों का भूखा जो मेरे मस्तिष्क में आता उसे सच्चाई से मै कहता कलम मेरी बनी है […] Read more » Featured कवि कांग्रेस चमचा तालियों देश बीजेपी भक्ति
कविता माया अखिलेश का सत्ता के लिए मिलन April 5, 2018 by आर के रस्तोगी | 3 Comments on माया अखिलेश का सत्ता के लिए मिलन आर के रस्तोगी जो कभी दुश्मन थे,आज सत्ता के लिए मिलन हो रहा आज अखिलेश माया का चुनाव के लिए मिलन हो रहा क्या ये दोनों का मिलन भविष्य में,क्या कोई गुल खिलायेगा ? सन २०१९ का आने वाला चुनाव क्या इनको सत्ता दिलायेगा ? जो कभी परछाई के दुश्मन थे,आज एक दूजे के गले […] Read more » Featured अखिलेश यादव जनता दलित दुश्मनी भारत बंद मामता मायावती सुप्रीम कोर्ट सोनिया
कविता सत्तर साल का आरक्षण हो गया,कब तक इसे गोद खिलाओगे ? April 4, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी आरक्षण को अब बंद करो,कब तक इसे और आगे बढाओगे ? सत्तर साल का आरक्षण हो गया,कब तक इसे गोद खिलाओगे ? जाति का आधार है ये क्यों,गरीबी का आधार क्यों नहीं ? सवर्ण जाति जो गरीब है,उसको आरक्षण मिलता क्यों नहीं ? प्रतिभाओं का हनन हो रहा,सरकार उसकी जिम्मेदार क्यों नहीं […] Read more » featuerd आन्दोलन आरक्षण गरीबी गुंडा-गर्दी सत्तर साल सुप्रीम कोर्ट
व्यंग्य मार्किट ददाति मोटिवेशन April 4, 2018 by अमित शर्मा | Leave a Comment अमित शर्मा (CA) इस मीन (स्वार्थी) दुनिया में विटामिन की बहुत कमी पाई जाती है जिसके कारण बहुत सी बीमारियां बिना किसी क्लिक और एंटर के स्वतः ही डाऊनलोड हो जाती है। विटामिन सी औऱ विटामिन डी के अलावा विटामिन एम अर्थात मोटिवेशन की कमी भी पिछले काफ़ी समय से सामाजिकता के रैंप पर कैटवॉक […] Read more » Featured बाजार मोटिवेशन मोटिवेशनल स्पीकर्स रिश्ते
कविता साहित्य प्रतिभाओ को मत काटो, आरक्षण की तलवारो से April 3, 2018 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on प्रतिभाओ को मत काटो, आरक्षण की तलवारो से राजपूत भी मचल उठेंगे,भुजबल के हथियारों से प्रतिभाओ को काटो आरक्षण की तलवारो से निर्धन ब्राह्मण वंश,एक दिन परशुराम बन जायेगा अपने घर के दीपक से,अपना घर ही जल जायेगा भडक उठा अगर गृह युद्ध,भूकम्प भयानक आयेगा आरक्षण वादी नेताओ का,सर्वस्व मिटाके जायेगा अभी सभंल जाओ मित्रो,इस स्वार्थ भरे प्यार से प्रतिभाओ को मत काटो,आरक्षण […] Read more » Featured आरक्षण की तलवार प्रतिभाओ से मत काटो
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-82 April 3, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य    गीता का सोलहवां अध्याय गीता के 15वें अध्याय में प्रकृति, जीव तथा परमेश्वर का वर्णन किया गया है तो 16वें अध्याय में अब श्रीकृष्णजी मनुष्यों में पाई जाने वाली दैवी और आसुरी प्रकृतियों का वर्णन करने लगे हैं। इन प्रकृतियों के आधार पर मानव समाज को दैवीय मानव समाज […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-81 April 3, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  गीता का पन्द्रहवां अध्याय गीता में ईश्वर का वर्णन गीता का मत है कि सूर्य में जो हमें तेज दिखायी देता है वह ईश्वर का ही तेज है। ‘गीताकार’ का कथन है कि जो तेज चन्द्रमा में और अग्नि में विद्यमान है, वह मेरा ही तेज है, ऐसा जान। किसी कवि […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग
लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-80 March 31, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का पंद्रहवां अध्याय और विश्व समाज जो लोग अपनी ज्ञान रूपी खडग़ से या तलवार से संसार वृक्ष की जड़ों को काट लेते हैं और विषयों के विशाल भ्रमचक्र से मुक्त हो जाते हैं- उनके लिए गीता कहती है कि ऐसे लोग अभिमान और मोह से मुक्त हो गये […] Read more » Featured karmayoga of geeta आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का पंद्रहवां अध्याय विश्व समाज
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-79 March 31, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का पंद्रहवां अध्याय और विश्व समाज यह जो प्रकृति निर्मित भौतिक संसार हमें दिखायी देता है-यह नाशवान है। इसका नाश होना निश्चित है। यही कारण है कि गीता के पन्द्रहवें अध्याय में प्रकृति को ‘क्षर’ कहा गया है। इससे जो कुछ बनता है वह क्षरण को प्राप्त होता है। […] Read more » Featured आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का पंद्रहवां अध्याय विश्व समाज
कविता साहित्य पुन्य के नाम पर ढकोसले पर असली पुन्य क्या है समझो ? March 31, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment घर में माँ-बाप को झिडकी देते फिर भी वे तुमको आशीर्वाद देते मंदिर में मूर्ति के आगे गिड़गिड़ाते मूक है वे कुछ बोल नहीं पाते मंदिर के बाहर भिखारी खड़े है मंदिर के अंदर भक्त खड़े है फर्क है केवल तुम दोनों में भिखारी तुमसे,तुम भगवान से दोनों ही माँगने के लिए खड़े है ठण्ड […] Read more » ढकोसले
कविता अनेको ग्रह इस ब्रहमांड में March 31, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अनेको ग्रह इस ब्रहमांड में,तब भी आपस में मिलकर रहते है इस पृथ्वी ग्रह के प्राणी,क्यों आपस में लड़ते झगड़ते है आपस में ये एक दूजे की परिक्रमा भी करते रहते है नहीं किसी से टकराते अपने रास्ते पर चलते रहते है नहीं शांति इस भू के प्राणी को,एटम बम बनाने में लगे हुए अपना […] Read more » ब्रहमांड
कविता साहित्य देखा नहीं अभी तक तुमको March 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment देखा नहीं अभी तक तुमको पर रोज तुमको याद करते तुम में क्या कशिश है जो रोज तुमको याद करते देखा नहीं हाथ अभी तुम्हारा पर उसकी रेखा हम पढ़ लेते स्पर्श नहीं किया बदन को पर उसकी सुगंध सूंघ लेते है कोई पूर्व जन्म का बंधन जो हम रोज ऐसा करते ये है दो […] Read more » देखा नहीं अभी तक तुमको