कविता करता हूँ नमन कोटि कोटि कारगिल के अमर शहीदों को July 27, 2018 / July 27, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment करता हूँ नमन कोटि कोटि कारगिल के अमर शहीदों को देश के खातिर जिन्होंने परवाह नहीं की अपने वजिदो को किसी ने माँ की गोद सूनी की किसी ने पत्नि की माँग को किसी ने बहन की राखी को,किसी ने माँ-बाप के प्यार को ऐसे थे वीर बलिदानी,जिन्होंने न्योछावर कर दिया जान को आओ हम […] Read more » अमर शहीदों कारगिल कुर्बानियों जवान मां
व्यंग्य संयुक्त प्रधानमंत्री योजना July 27, 2018 / July 27, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment – विजय कुमार इन दिनों भारत में चातुर्मास चल रहे हैं। देवी-देवता निद्रा में हैं। चातुर्मास में साधु-संत भी अपना प्रवास स्थगित कर एक ही जगह रहते हैं। इस दौरान वे अपना अधिकांश समय अध्ययन, चिंतन, पूजा और प्रवचन में बिताते हैं। पर चातुर्मास में असुर क्या करते हैं, इस पर शास्त्र मौन हैं। शर्मा […] Read more » Featured अध्ययन कांग्रेस चिंतन पूजा और प्रवचन राहुल संयुक्त प्रधानमंत्री योजना
कविता रक्तिम – भँवर July 24, 2018 / July 24, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment रक्तिम – भँवर आलोक पाण्डेय भर – भर आँसू से आँखें , क्या सोच रहे मधुप ह्रदय स्पर्श , क्या सोच रहे काँटों का काठिन्य , या किसी स्फूट कलियों का हर्ष ? मन्द हसित , स्वर्ण पराग सी , विरह में प्रिय का प्रिय आह्वान , या सोच रहे किस- क्रुर प्रहार से छुटा […] Read more » उर निकुंज कुंकुम कुसुम - कलेवर घुँघरू प्रणय के आस बिन्दी रक्तिम - भँवर रोली विलुलित आँचल सब कुछ डूब भँवर जाने दो ; सान्ध्य-रश्मियों का विहार
कविता पर्यावरण को कैसे स्वच्छ बनाये July 23, 2018 / July 23, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी आओ सब मिलकर पेड़ लगाये इस पर्यावरण को स्वच्छ बनाये वाहन जो सडक पर डीजल से चलते अपने मुहं से जो धुआं उगलते यही धुआँ वायु को दूषित करता सब को साँस लेने में मुश्किल करता और पर्यावरण को करता अपंग कैसे इससे छुटकारा पाये हम इन सब वाहनों पर बैन लगाये […] Read more » कारखानों गंदगी शहर पर्यावरण को कैसे स्वच्छ बनाये पेड़ लगाये बिजली
कविता पल्लवित प्रफुल्लित बगिया ! July 23, 2018 / July 23, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment रचनाकार: गोपाल बघेल ‘मधु’ (मधुगीति १८०७१६ स) पल्लवित प्रफुल्लित बगिया, प्रभु की सदा ही रहती; पुष्प कंटक प्रचुर होते, दनुजता मनुजता होती ! हुए विकसित सभी चलते, प्रकाशित प्रकृति में रहते; विकृति अपनी मिटा पाते, वही करने यहाँ आते ! बिगड़ भी राह कुछ जाते, समय पर पर सुधर जाते; अधर जो कोई रह जाते, धरा पर लौट कर आते ! प्रवाहित समाहित होते, कभी वे समाधित होते; ऊर्ध्व गति अनेकों चलते, नज़र पर कहाँ वे आते ! प्रतीकों के परे दुनियाँ, कभी है सामने आती; ‘मधु’ भव माधुरी चखते, माधवी सृष्टि लख जाती ! Read more » ‘मधु’ भव माधुरी दनुजता मनुजता पल्लवित प्रफुल्लित बगिया ! पुष्प कंटक
कविता साहित्य गीतों का कारवाँ गुजर गया July 20, 2018 / July 20, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी आज गीतकार नीरज नहीं रहे और हम खड़े खड़े देखते रहे गीतों का कारवाँ गुजर गया और हम गुब्बार देखते रहे उसके गीतों में एक दर्द था उसके प्यार में एक मर्द था वह कभी राह में रुका नहीं वह कभी किसी से झुका नहीं वह गीतों की दुनिया में बढ़ता रहा […] Read more » Featured गीतों का कारवाँ गुजर गया
कविता पाक में मोदी के नाम पर चुनाव लड़ा जा रहा हे July 19, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अब तो पाक में भी मोदी का नाम लिया जा रहा है पाक में मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ा जा रहा है पाक के नेता मोदी के नाम का भी खौफ दिखा रहे है पाक की जनता से मोदी के नाम से वोट मांग रहे है अभी तक तो भारत में ही मोदी […] Read more » election in pakistan election in pakistan in the name of modi पाक
कविता सावन में शिव-भक्ति July 18, 2018 / July 18, 2018 by आर के रस्तोगी | 2 Comments on सावन में शिव-भक्ति सावन का है महीना,शिवे भक्तो का हैअब जोर बम बम भोले बाबा का,चारो तरफ मचा है शोर हर तरफ भंडारे लगे हुये,शिव भक्तो का है शोर शिव भक्त ऐसे नाच रहे,जैसे बन में नाचे मोर कोई लपेटे हुये है तोलिये,कोई पहने हुए हाफ पेंट केसरिया वस्त्र पहने हुए है,सब शिवे भक्तो के सैंट भक्त तांडव […] Read more » डमरू बजा भांग धतुरा शिव भक्त शिव शंकर सावन में शिव-भक्ति
व्यंग्य राजनीतिक आंसुओं का रासायनिक विश्लेषण July 17, 2018 / July 17, 2018 by विजय कुमार | 1 Comment on राजनीतिक आंसुओं का रासायनिक विश्लेषण – विजय कुमार, आंसू का साहित्य में बड़ा महत्व है। भाषा कोई भी हो, पर आंसू की खुराक के बिना उसकी गाड़ी आगे नहीं बढ़ती। न जाने कितनी कविता, शेर, गजल, कहानी और उपन्यासों के केन्द्र में आंसू ही हैं। सुमित्रानंदन पंत के शब्दों में – वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा […] Read more » Featured ऑक्सीजन और थोड़ा कैल्शियम; कुमारस्वामी राजनीतिक आंसुओं का रासायनिक विश्लेषण राष्ट्रगान सुमित्रानंदन पंत हाइड्रोजन
कविता मेरे ख्यालो में आते हो तुम July 17, 2018 / July 17, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मेरे ख्यालो में आते हो तुम मेरे ख्वाबो में आते हो तुम वो कौन सी जगह है नहीं जहा आते नहीं हो तुम मेरे दिल में बसे हो तुम मेरे प्राणों में बसे हो तुम वो कौन सा अंग है नहीं जहा बसे नहीं हो तुम हर बात है जहन में उनकी हर रात है […] Read more » न दिन कटता है न रात कटती पता नहीं वे कौन से राज है मेरे ख्यालो में आते हो तुम
कविता जो पल तेरे साथ बिताये,वे पल आज भी याद है July 16, 2018 / July 16, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी जो पल तेरे साथ बिताये,वे पल आज भी याद है बसर कर लूंगी जिन्दगी अब कोई नहीं फरियाद है भले ही तुम मेरे पास नहीं,वो पल यादो के तो मेरे पास है अब कोई गिला शिकवा न होगा अब कोई नहीं फरियाद है धीरे से आना,बदन पर हाथ फिराना सब कुछ मुझे […] Read more » आंखों आज भी मुझे सब कुछ याद है जो पल तेरे साथ बिताये तुम्हारे हाथो से खाना खिलाना वे पल आज भी याद है शहर
कविता सावन का महीना है,फिर भी मै प्यासी July 14, 2018 / July 14, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी सावन का महीना है फिर भी मै प्यासी हूँ मिलने की चाहत है,फिर भी मै उदासी हूँ नन्नी नानी बूंदे चारो तरफ बरस रही है उनके दीदार के लिए आँखे तरस रही है बिजली भी आसमान में कडक रही है उनसे मिलने की उम्मीदे भडक रही है बादल गरज गरज कर कुछ […] Read more » आसमान फिर भी मै प्यासी बादल गरज सावन का महीना है