कविता मिले न जब मन का मीत,मनमीत तुम किसे बनाओगी ? May 18, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment मिले न जब मन का मीत,मनमीत तुम किसे बनाओगी ? मै मीरा बनकर अपने मनमोहन को मनमीत बनाऊँगी जब तोड़ दे कोई ह्रदय तुम्हारा,फिर किसके द्वार तुम जाओगी ? जब तोड़ेगा कोई ह्रदय मेरा,अपने द्वारकाधीश के द्वार जाऊंगी जब मिले न कोई संग-साथ,फिर किसको संगीत सुनाओगी ? जब मिलेगा न कोई संग-साथ,मीरा बनकर भजन सुनाऊंगी […] Read more » अंतिम संस्कार कराओगी ? आंसू बहाओगी मन का मीत मिले न जब विष का प्याला
व्यंग्य लूट सके तो लूट May 16, 2018 by विजय कुमार | 1 Comment on लूट सके तो लूट बचपन में हम लोग प्रायः अंत्याक्षरी खेला करते थे। इसकी शुरुआत कुछ ऐसे होती थी – समय बिताने के लिए करना है कुछ काम शुरू करो अंत्याक्षरी लेकर हरि का नाम। अंत्याक्षरी से कई लाभ थे। जहां एक ओर गर्मी में भीषण लू से बचत होती थी, वहां मनोरंजन और दिमागी कसरत […] Read more » Featured अंत्याक्षरी खाने चाराप्रेमी लालू जी तेजप्रताप रौद्र रूप लूट
कविता माँ ने पूछा,मै आई किसके हिस्से में ? May 15, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सन्नाटा छा गया बटवारे के किस्से में माँ ने पूछा,मै आई किसके हिस्से में ? कहते है सभी लोग आज माँ का दिन है मै कहता हूँ,कौन सा दिन माँ के बिन है एक अच्छी माँ होती है सभी के पास होती नहीं अच्छी औलाद सभी के पास माँ तो एक सबसे बड़ी नियामत हे […] Read more » औलाद ज़िन्दगी नियामत बहन भाई मां
कहानी साहित्य साहित्य, राजनीति और पत्रकारिता के एक सूर्य का अस्त होना May 14, 2018 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार मन आज व्याकुल है। ऐसा लग रहा है कि एक बुर्जुग का साया मेरे सिर से उठ गया है। मेरे जीवन में दो लोग हैं। एक दादा बैरागी और एक मेरे घर से जिनका नाम इस वक्त नहीं लेना चाहूंगा। दोनों की विशेषता यह है कि उनसे मेरा संवाद नहीं होता है लेकिन […] Read more » ‘समागम’ Featured आंखों आंसुओं पत्रकारिता राजनीति साहित्य साहित्यकार डॉ. सरोज कुमार सूर्य अस्त
व्यंग्य जूते के प्रयोग की संभावनाएं May 14, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment यों तो जूता ऐसी चीज है, जिसके बिना काम नहीं चलता। चप्पल, सैंडल, खड़ाऊं आदि इसके ही बिरादर भाई और बहिन हैं। जूते के कई उपयोग हैं। घर के अंदर एक, बाहर दूसरा तो नहाने-धोने के लिए तीसरा। आजकल तो सब गडमगड हो गया है; पर 25-30 साल पहले तक क्या मजाल कोई बिना जूते-चप्पल […] Read more » Benjamin Netanyahu Featured Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu may have insulted Japanese Prime Minister Shinzo with shoe-shaped desert dishes Shinzo जूता चाकलेट जूते के प्रयोग
कविता ‘फिर जुल्फ लहराए’ May 14, 2018 by कुलदीप प्रजापति | Leave a Comment ‘फिर जुल्फ लहराए’ फिजा ठंडी हैं कुछ पल बाद ये माहौल गरमाए। कहीं चालाकियाँ ये इश्क में भारी न पड़ जाए। ज़रा सी गुफ्तगू कर लें, बड़े दिन बाद लौटे हो, नज़ाकत हुस्न वालों के ज़रा हालात फरमाए। अहा! क्या खूबसूरत आपने यह रंग पाया हैं, निशा का चाँद गर देखे तो खुद में ही […] Read more » इश्क खूबसूरत ज़ियारत बद्दुआएँ सजदा
गजल कमी है परवरिश में इसलिए मनद्वार ऐसे हैं, May 14, 2018 by कुलदीप प्रजापति | Leave a Comment कमी है परवरिश में इसलिए मनद्वार ऐसे हैं, नई कलियाँ मसलते हैं, कई किरदार ऐसे हैं। नहीं जलते वहाँ चूल्हे, यहाँ पकवान हैं ताजा, हमारी भी सियासत के नए हथियार ऐसे हैं। हकीकत जान पाए ना, वहम से ही शिला तोड़ी, यहाँ अच्छे भले से लोग कुछ बीमार ऐसे हैं। सिसक होगी ज़रा सी बस […] Read more » गुलाब चाँद धर्म पुरुष कुंठा बादशाह सिकन्दर महफ़िल शक्ल
कविता आपस के रिश्ते जब से व्यापार हुए May 14, 2018 by कुलदीप प्रजापति | Leave a Comment कुलदीप विद्यार्थी आपस के रिश्ते जब से व्यापार हुए। बन्द सभी आशा वाले दरबार हुए। जिसको इज्ज़त बख्सी सिर का ताज कहा उनसे ही हम जिल्लत के हकदार हुए। मंदिर, मस्ज़िद, गुरुद्वारों में उलझे हम वो शातिर सत्ता के पहरेदार हुए। जिस-जिसने बस्ती में आग लगाई थी देखा है वो ही अगली सरकार हुए। आसान […] Read more » इज्ज़त कुत्ता बख्सी रिश्ते व्यापार सरकार
गजल आज फिर बेटी लूटी है मौत ने उसको छुआ, May 14, 2018 by कुलदीप प्रजापति | Leave a Comment कुलदीप विद्यार्थी 4.गज़ल आज फिर बेटी लूटी है मौत ने उसको छुआ, मुल्क मेरा हो चला जैसे कि, अपराधी कुँआ, जाति के झगड़े कहीं तो हैं कहीं दंगे यहाँ, मुस्कुराते देश को जैसे लगी हो बददुआ, दूर से सब देखने वालों सभी से प्रार्थना, मौत के नजदीक है यह मुल्क सब कीजे दुआ, दंश जिसको […] Read more » चूल्हा जाति झगड़े तब जले दंश बेटी लूटी मिला
कहानी संन्यासी लेखक May 14, 2018 / May 14, 2018 by गंगानन्द झा | Leave a Comment गंगानन्द झा वह शाम खास थी। राजशेखर अपने शिक्षक और गुरु रामकृष्ण महाराज के साथ हमारे घर पर आया था। वे रामकृष्ण मिशन के संन्यासी हैं और रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, देवघर में वे राजशेखर के प्रिंसिपल रह चुके थे। राजशेखर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एडवोकेट हैं.। पर अपने विद्यालय के महाराजजी से […] Read more » Featured आध्यात्मिकता कविताओं और गीतों धार्मिकता बोधगम्य शैली रवीन्द्रनाथ ठाकुर रामकृष्ण मिशन विद्वानों
कविता कर्नाटक का मतलब है,कर नाटक इस चुनाव में May 14, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कर्नाटक का मतलब है,कर नाटक इस चुनाव में इसलिए सब पार्टी कर रही है,नाटक इस चुनाव में बीजेपी हो या कांग्रेस, कर रही नाटक चुनाव में इसलिए हर वोटर कर रहा है,नाटक इस चुनाव में रंग मंच बना हुआ है, कर्नाटक,इस चुनाव मे सारे नेता नाटक के पात्र बने हुए है,चनाव में सी.एम.पद के लिए […] Read more » कन्नड़ भाषा कर्नाटक गुल खिलायेगे चुनाव बी.जे.पी. सट्टा
कविता कर्नाटक का चुनाव जिता दो May 14, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment वोटर भैया,अबकी बार कर्नाटक का चुनाव जिता दो अबकी बार,अपनी मैया बुला ली,उसकी लाज रखा दो मै तो धर्म निर्पेक्ष हूँ,मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा भी जाता मै तो कभी पंडित,कभी मौलवी कभी पादरी बन जाता कभी जनेऊ धारण करता ,कभी टोपी पहन कर आता कभी तिलक लगा कर,मंदिरों में पूजा करने भी जाता देखो ये कर्नाटक […] Read more » कर्नाटक गुरुद्वारा मंदिर मस्जिद मैया बुला वोटर भैया