लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-57 February 15, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज अन्य देवोपासक और भक्तिमार्गी पीछे हम कह रहे थे कि गीता बहुदेवतावाद की विरोधी है और एकेश्वरवाद की समर्थक है। यहां पुन: उसी बात को श्रीकृष्ण जी दोहरा रहे हैं, पर शब्द कुछ दूसरे हैं। जिन्हें सुनकर लगता है कि वे बहुदेवतावाद को […] Read more »  गीता का आठवां अध्याय Featured geeta karmayoga of geeta todays world आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का नौवां अध्याय विश्व समाज
गजल साहित्य जब मैं तुम्हारे संग हूँ ! February 13, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment जब मैं तुम्हारे संग हूँ, तब भी मैं कहाँ तुम्हारे साथ हूँ; तुम्हारी संस्थागत सत्ता में रहते हुए भी, मैं विश्व व्यापी व्यवस्था का परिद्रष्टा हूँ ! मेरे प्राण की फुहार केवल तुम तक नहीं रहती, वह हर पल शून्य के गह्वर में विचर कर आती है; तुम्हारे ढिंग सोया भी, मैं उसकी गोद में […] Read more » जब मैं तुम्हारे संग हूँ !
गजल साहित्य वत्स ! क्या अब तुम वह नहीं, जो पहले थे ! February 13, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment वत्स ! क्या अब तुम वह नहीं, जो पहले थे? निर्गुण की पहेली, अहसास की अठखेली; गुणों का धीरे धीरे प्रविष्ट होना सुमिष्ट लगना, पल पल की चादर में निखर सज सँवर कर आना ! महत- तत्व से जैसे प्रकट होता सगुण का आविर्भाव, हर सत्ता का रिश्ता रख आत्मीय अवलोकन; पूर्व जन्मों के भावों […] Read more »
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-56 February 12, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज इस प्रकार ईश्वर को एक देशीय न मानना स्वयं अपने बौद्घिक विकास के लिए भी आवश्यक है। आज का मनुष्य धर्म में भी व्यापार करता है। इसलिए हम उसे व्यापार में मुनाफे का एक सौदा बता रहे हैं कि वह ईश्वर को सर्वव्यापक […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का नौवां अध्याय विश्व समाज
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-55 February 12, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज इससे अगले श्लोक में श्रीकृष्णजी कहते हैं कि इस संसार में लोग किसी को ब्राह्मïण, किसी को बड़ा, किसी को चाण्डाल तो किसी को छोटा कहते हैं। जबकि सभी मनुष्यों में ‘मैं’ ही समाया होता हूं। इसका भाव यह है कि आत्मा को […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का नौवां अध्याय विश्व समाज
कविता अब मैं आता हूँ मात्र ! February 12, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment अब मैं आता हूँ मात्र, अपनी विश्व वाटिका को झाँकने; अतीत में आयोजित रोपित कल्पित, भाव की डालियों की भंगिमा देखने ! उनके स्वरूपों की छटा निहारने, कलियों के आत्मीय अट्टहास की झलक पाने; प्राप्ति के आयामों से परे तरने, स्वप्निल वादियों की वहारों में विहरने ! अपना कोई उद्देश्य ध्येय अब कहाँ बचा, आत्म संतति की उमंगें तरंगें देखना; उनके वर्तमान की वेलों की लहर ताकना, कुछ न कहना चाहना पाना द्रष्टा बन रहना ! मेरे मन का जग जगमग हुए मग बन जाता है, जीवित रह जिजीविषा जाग्रत रखता है; पल पल बिखरता निखरता सँभलता चलता है, श्वाँस की भाँति काया में मेहमान बन रहता है ! मेरी सृष्टि मेरी द्रष्टि का अहसास लगती है, और मैं अपने सुमधुर सृष्टा का आश्वास; दोनों ‘मधु’ सम्बंधों में जकड़े, आत्म-अंक में मिले सिहरे समर्पण में सने ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » मैं
व्यंग्य साहित्य साथी हाथ छुड़ाना रे। February 10, 2018 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अमित शर्मा (CA) हर कार्यालय की लय,वहाँ कार्य से फ़र्ज़ी एनकाउंटर करने वाले कर्मचारियों की कुशलता में लीन रहकर अंततोगत्वा अपने प्रारब्ध में ही विलीन हो जाती है। कार्यालय में कार्य करने वाले आपके सहकर्मी, कार्यस्थल को घटनास्थल बनाने के लिए दिल और जान को उचित मात्रा में मिलाकर मास्टरशेफ के रूप में अपनी महत्वपूर्ण […] Read more » साथी
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-54 February 8, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज गुरू अद्भुत दर्शनीय मिले अर्जुन हुआ निहाल। अतुलित ज्ञान गाम्भीर्य व्यक्तित्व बड़ा विशाल।। ऐसे अद्भुत दर्शनीय गुरू श्रीकृष्ण जी अपने शिष्य अर्जुन को बताने लगे कि अर्जुन! अब मैं तुझे पवित्रतम और अति उत्तम प्रत्यक्ष फल देने वाली, धर्म के सर्वथा अनुकूल और साधन करने […] Read more » Featured karmayoga of geeta आज का विश्व ईश्वर विषयक भ्रम गीता गीता का आठवां अध्याय गीता का कर्मयोग गीता का नौवां अध्याय गीता का सातवां अध्याय मोक्ष कब तक मिला रहता है विश्व समाज
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-53 February 7, 2018 / February 8, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य गीता का आठवां अध्याय और विश्व समाज उत्तरायण प्रकाश है दक्षिणायन अंधकार। शुक्लपक्ष प्रकाश है कृष्णपक्ष अंधकार।। उत्तरायण प्रकाशकाल है तो दक्षिणायन अंधकारकाल है। इन दोनों प्रकार के मार्गों को जीवन पर लाकर तोलते समय ध्यान देना चाहिए कि शुक्ल पक्ष और उत्तरायण काल का अर्थ प्रकाशमान से है। अत: जिसका जीवन […] Read more » Featured karmayoga of geeta आज का विश्व ईश्वर विषयक भ्रम गीता गीता का आठवां अध्याय गीता का कर्मयोग गीता का सातवां अध्याय मोक्ष कब तक मिला रहता है विश्व समाज
कहानी साहित्य एक थी माया ………….!!! February 7, 2018 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment :: १ ::: मैं सर झुका कर उस वक़्त बिक्री का हिसाब लिख रहा था कि उसकी धीमी आवाज सुनाई दी, “अभय, खाना खा लो” ,मैंने सर उठा कर उसकी तरफ देखा, मैंने उससे कहा ,” माया , मै आज डिब्बा नहीं लाया हूं ।” दरअसल सच तो यही था कि मेरे घर में उस दिन खाना नहीं बना था । गरीबी का वो ऐसा दौर था कि […] Read more » Featured माया
कविता साहित्य आँखे February 5, 2018 by राकेश कुमार सिंह | Leave a Comment बड़ी ख़ूबसूरत है तुम्हारी आँखे ! मेरी जिंदगी है तुम्हारी आँखे ! ये झुके तो जश्ने बहार मचल जाये ! खुदा की नेमत है तुम्हारी आँखे ! पलकों के झपकने का सबब मालूम नहीं ! मेरी राजदार है तुम्हारी आँखे ! ये उठे तो ज़माने को झुका दे ! बड़ी आफरीन है ! मंदिर और […] Read more » “आँखे
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-52 February 5, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य गीता का आठवां अध्याय और विश्व समाज मोक्ष कब तक मिला रहता है अब हम इस विषय पर विचार करते हैं कि मनुष्य को मोक्ष कब मिलता है? गीता के आठवें अध्याय में ही इस पर प्रकाश डालते हुए योगीराज श्रीकृष्णजी ने स्पष्ट किया कि ब्रह्म का एक दिन मानव के एक […] Read more »  गीता का आठवां अध्याय Featured geeta karmayoga of geeta todays world आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग विश्व समाज