कविता सू्र्यदेव का स्वागत February 1, 2013 / February 1, 2013 by बीनू भटनागर | 1 Comment on सू्र्यदेव का स्वागत सू्र्यदेव का स्वागत मै बाँहें फैला कर करता हूँ, आग़ोश मे लेलूँ सूरज को, महसूस कभी ये करता हूँ। उदित भास्कर की किरणे, जब मेरे तन पर पड़ती हैं, स्फूर्ति सी तन मे आती है, जब सूर्य नमन मै करता हूँ। स्वर्णिम आरुषि मे नहाकर मै, भानु को जल-अर्घ भी देता हूँ, फिर […] Read more »
गजल आंखों में उजालों को मैंने अब बसाया है…. January 31, 2013 / January 31, 2013 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी बर्क़ ने मेरा जब भी आशियां जलाया है, अज़्म की सदाक़त को और भी बढ़ाया है। हादसा कोई जब भी पेश राह में आया, सो चुके ज़मीरों को मैंने फिर जगाया है। दूर तक अंधेरों की फ़िक्र मैं नहीं करता, आंखों में उजालों को मैंने अब बसाया है। उस चिराग़ […] Read more »
व्यंग्य तुम्हारा नाम क्या है ? January 31, 2013 / January 31, 2013 by बीनू भटनागर | 6 Comments on तुम्हारा नाम क्या है ? नाम की बड़ी महिमा है, नाम पहचान है, ज़िन्दगी भर साथ रहता है। लोग शर्त तक लगा लेते हैं कि ‘’भई, ऐसा न हुआ या वैसा न हुआ तो मेरा नाम बदल देना।‘’ कहने का मतलब यही है कि नाम मे क्या रक्खा है, कहना सही नहीं होगा । नाम बडी अभूतपूर्व चीज़ है। उसके […] Read more »
व्यंग्य बड़े आदमी की पोती होने का फ़ायदा. January 31, 2013 / January 31, 2013 by अरुण कान्त शुक्ला | 6 Comments on बड़े आदमी की पोती होने का फ़ायदा. वैसे तो बड़े आदमी का कुछ भी होने का बड़ा फ़ायदा होता है। जैसे की, बड़े आदमी का बीबी होने का फ़ायदा। बड़े आदमी का माँ होने का फ़ायदा| बाप होने का फ़ायदा। दोस्त होने का फ़ायदा| सबसे बड़ा दामाद होने का या चमचा होने का फायदा| पर, बड़े आदमी की पोती होने का भी […] Read more »
व्यंग्य गायब हुआ गण का सुकून,तंत्र हथिया रखा है तांत्रिकों ने January 27, 2013 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य आज के दिन हर कहीं, हर बार मचता है शोर, और दो-चार दिन की धमाल के बाद फिर खो जाता है, बिना पेड़ों वाली पहाड़ियों के पार। आजादी के इतने सालों बाद भी गण को जिस तंत्र की तलाश थी उसका गर्भाधान तक नहीं हो सका अब तक, या कि लाख प्रयासों […] Read more »
कविता कविताएं-सौरभ राय ‘भगीरथ’ January 26, 2013 / January 27, 2013 by सौरभ राय 'भगीरथ' | Leave a Comment संतुलन मेरे नगर में मर रहे हैं पूर्वज ख़त्म हो रही हैं स्मृतियाँ अदृश्य सम्वाद ! किसी की नहीं याद – हम ग़ुलाम अच्छे थे या आज़ाद ? बहुत ऊँचाई से गिरो और लगातार गिरते रहो तो उड़ने जैसा लगता है एक अजीब सा समन्वय है डायनमिक इक्वीलिब्रियम ! अपने उत्त्थान की चमक […] Read more »
कविता संदेश January 26, 2013 by श्यामल सुमन | Leave a Comment संदेश भारत है वीरों की धरती, अगणित हुए नरेश। मीरा, तुलसी, सूर, कबीरा, योगी और दरवेश। एक हमारी राष्ट्र की भाषा, एक रहेगा देश। कागा! ले जा यह संदेश, घर-घर दे जा यह संदेश।। सोच की धरती भले अलग हों, राष्ट्र की धारा एक। जैसे गंगा में मिल नदियाँ, हो जातीं हैं नेक। रीति-नीति […] Read more »
व्यंग्य प्रोफेशनल बहू चाहिए January 26, 2013 / January 26, 2013 by एम. अफसर खां सागर | Leave a Comment एम. अफसर खां सागर मेरे बेहद करीबी मित्र हैं मिश्रा जी, शालीन व सहज, स्वभाव में उनका कोई सानी नहीं। खानदानी हैं मगर वसूल के पक्के। एक ही चिंता उन्हे खाये जा रही है किसी तरह बेटी के हाथ पीले हो जावे। जिसके घर जवान बेटी हो भला उसे दिन में चैन व रात में […] Read more »
कविता कविता – गर्म होता समय और हम January 22, 2013 / January 22, 2013 by मोतीलाल | Leave a Comment अभी समय के भंडार में ब्लैकहोल होने की बात सुगबुगाहट तक सिमित नहीं है और ना ही बची है कोई ओजोन समय के गर्भ मेँ । आज समय का नाप-तौल मापने की सारी शक्ति उदारवाद के चमकते फर्श पर सिसकने को विवश है और कामना के हर कदम पर बिछने को आतुर वे सारी […] Read more »
लेख साहित्य महाराणा का अपमान अब भी जारी है January 22, 2013 / January 22, 2013 by राकेश कुमार आर्य | 11 Comments on महाराणा का अपमान अब भी जारी है भारत के जीवंत इतिहास के जिन उज्ज्वल पृष्ठों को छल प्रपंचों का पाला मार गया उनमें महाराणा प्रताप का गौरवमयी व्यक्तित्व सर्वाधिक आहत हुआ है। मैथिलीशरण गुप्त ने कभी लिखा था- जिसको न निज गौरव न निज देश का अभिमान है, वह नर नही नर पशु निरा है और मृतक समान है। जब ये पंक्तियां लिखी […] Read more »
व्यंग्य श्री साहेब जी January 22, 2013 / January 22, 2013 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment एल आर गाँधी ‘श्री’ भारतीय सभ्यता का बहुत ही पौराणिक आदर सूचक शब्द है …श्री शब्द का प्रयोग किसी बहुत ही आदरणीय महापुरुष के नाम के पूर्व प्रयोग किया जाता है . इसके अतिरिक्त ‘श्री’ अलंकार को देवी ,लक्ष्मी, विष्णु व् श्री गणेश -समृद्धि और विघ्न हरने वाले विघ्नेश्वर आदि के लिए भी प्रयोग में […] Read more »
गजल बदनाम सड़क , ,। January 22, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment कामिनी कामायनी भटकते राह मे बर्बादिओ के सुर्ख किस्से हैं , जकड़ लेगा तुम्हें मत जाओ उन बदनाम सड़कों पर । जहां पर जुल्म ढाए थे दरिंदे आशिकों की जात , अभी तक रो रही है आह बन बदनाम सड़कों पर । सिमटती है बहाने से बिलखती सूनी ये गलियां डराता है किसी का दर्द […] Read more »