लेख साहित्य द्रोपदी ने दुर्योधन से नहीं कहा था-अंधे का अंधा September 13, 2012 / September 14, 2012 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य युधिष्ठर की सहधर्मिणी महारानी द्रोपदी पर एक आरोप यह भी है कि उन्होंने महाराज युधिष्ठर के राजसूय यज्ञ के अवसर पर दुर्योधन से अंधे का अंधा उस समय कह दिया था जब वह पाण्डवों के नवनिर्मित राजभवन में दिग्भ्रमित होकर सूखे स्थान को गीला और गीले स्थान को सूखा समझकर चल रहा […] Read more » दुर्योधन द्रोपदी
कविता हिन्दी की दशा या दुर्दषा September 13, 2012 / September 13, 2012 by बलबीर राणा | 1 Comment on हिन्दी की दशा या दुर्दषा बलबीर राणा “भैजी” राष्ट्रभाषा अपनी क्षीणतर हो चली हिन्दी का हिंग्लिस बन खिंचडी बन चली अपनो के ही ठोकर से अपने ही घर में पराई बनके रह गयी आज विदेशी भाषा अपने ही घर में घुस मालिकाना हक जता रही उसके प्यार में सब उसे सलाम बजा रहे यस नो वेलकम सी यू कहकर शिक्षित […] Read more » हिन्दी की दशा या दुर्दषा
कविता घुसपैठिए और भारतीय सेकुलर September 12, 2012 by मुकेश चन्द्र मिश्र | 2 Comments on घुसपैठिए और भारतीय सेकुलर सारे सेकुलर चुप बैठे हैं, देश जल रहा जलने दो। बंग्लादेशी वोटर अपने, असम मे इनको रहने दो॥ अरबों की आबादी अपनी, उसपर भी सीमित संसाधन। फिर भी हम खुश होकर करते, बंग्लादेशी का अभिनंदन॥ हिंदुस्तान है चारागाह, इनको भी कुछ चरने दो। सारे सेकुलर चुप………………………………………… जगह जगह ये बम फोड़ें, हर देशद्रोह का […] Read more » bangladesi migrants
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म महत्वपूर्ण लेख साहित्य 300 रामायण : कथ्य और तथ्य September 11, 2012 / September 12, 2012 by डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री | 1 Comment on 300 रामायण : कथ्य और तथ्य डॉ. रवीन्द्र अग्निहोत्री राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है , कोई कवि बन जाए सहज संभाव्य है . – राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त कुछ समय पहले अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो के प्रोफ़ेसर , ए के रामानुजन ( 1929 – 1993 ) के ‘ 300 Ramayanas ‘ शीर्षक लेख की चर्चा समाचारों में रही […] Read more » 300 ramayans 300 रामायण
व्यंग्य कमाल पिछले दरवाजे का-प्रभुदयाल श्रीवास्तव September 11, 2012 / September 25, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 2 Comments on कमाल पिछले दरवाजे का-प्रभुदयाल श्रीवास्तव एक लड़की थी गोरी नारी सुंदर गोल मटोल| यह तो नहीं मालूम उसने कितने बसंत पार किये थे किंतु वह जवान थी और कुँवारी भी|उसके बाप का मकान बीच शहर में था| लड़की यदा कदा मकान की छत पर खड़ी हो जाती और् धूप अटारी पर खड़ी खोले सिर के बाल वाली कहावत चरितार्थ करती […] Read more »
कविता कविता – पीली रोशनी September 11, 2012 / September 11, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment मोतीलाल अच्छा हुआ कि इस पीली रोशनी में चांद नहा उठा लहरें तट को छोड़ चुकी और बालों की तरह करुणा की जमीन लहरा उठी । सौदों के उस लड़ाई में उठा हुआ अंगुठा बार-बार मिमियता रहा कागज के आगे पूरी दुनिया बवंडर के जाल में अपनी पहचान खोली थी और हमारे आंगन का […] Read more » poem by motilal कविता - पीली रोशनी
गजल जो कह चूका गीत उसे भी न भूल जाओ September 11, 2012 / September 11, 2012 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment जो कह चूका गीत उसे भी न भूल जाओ तुम्हे मेरे सपनो में अब भी देखा करता हूँ कभी भी यहाँ वहाँ पहले की ही तरह अब भी भटका करता हूँ .. नहीं होते हैं चलती साँसों मैं पेंच अब उस तरह के पर हर साँस से मैं गिरते फूलो को थामा करता हूँ.. साँसों […] Read more » gazal by praveen gugnani
गजल आंख नम होगी तो लोग बचेंगे तुमसे….. September 10, 2012 / September 10, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on आंख नम होगी तो लोग बचेंगे तुमसे….. इक़बाल हिंदुस्तानी सिर्फ़ हाथों को नहीं दिल भी मिलाये रखना, वर्ना मुमकिन नहीं यारी को निभाये रखना। ये उनपे छोड़िये क्या करते हैं ज़मानेवाले, ठीक है या नहीं अहसास दिलाये रखना । हमने धोखा दिया पर हमको ना धोखा देना, मैं हूं ममता मेरी सरकार चलाये रखना। आंख नम होगी तो […] Read more » gazal by iqbal hindustani
व्यंग्य मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो September 9, 2012 / September 10, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 12 Comments on मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो राम कृष्ण खुराना मैडम मोरी मैं नहीं कोयला खायो ! विपक्षी दल सब बैर पडे हैं, बरबस मुख लिपटायो ! चिट्ठी-विट्ठी इन बैरिन ने लिखी, मोहे विदेस पठायो ! मैं बालक बुद्धि को छोटो, मोहें सुबोध कांत फसायो ! हम तो कुछ बोलत ही नाहीं, सदा मौन रह जायो ! इसीलिए मनमोहन सिंह से मौन […] Read more » colgate scam
व्यंग्य प्रतियोगितायें आज के संदर्भ में-प्रभुदयाल श्रीवास्तव September 7, 2012 / September 25, 2012 by रतन मणि लाल मिस्टर गड़बड़िया हमारे भूतपूर्व पड़ौसी हैं|भूतपूर्व इसलिये कि वे हमेशा मकान बदलते रहते हैं|जिस प्रकार नेताओं को दल बदलने की बीमारी होती है गड़बड़िया को मकान बदलने की बीमारी है|अपने अपने शौक हैं बदलने के,कुछ कार बदलने में अपनी शान समझते हैं कुछ लोग बाईक बदलकर अपनी भड़ास निकाल लेते हैं|विदेशों में तो साल बदला […] Read more »
गजल अपनी ग़ज़ल समाज का तू आईना बना….. September 4, 2012 / September 4, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on अपनी ग़ज़ल समाज का तू आईना बना….. इक़बाल हिंदुस्तानी वो शख़्स है मक्कार कहूं या ना कहूं मैं, छिपकर करेगा वार कहूं या ना कहूं मैं। रोटी ना अमन चैन पढ़ाई ना दवाई, ग़ायब सी है सरकार कहूं या ना कहूं मैं । जिसने हमारे बीच में दीवार खड़ी की, होगा ही बहिष्कार कहूं या ना कहूं मैं। ताक़त […] Read more » अपनी ग़ज़ल समाज का तू आईना बना.....
कविता शब्दों की कथा September 4, 2012 / September 4, 2012 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment अदभुत थी कथा और कथनीय था कथन सुन रहे थे सभी वहाँ रूचि लेकर. शाखों और पत्तों पर यहाँ वहाँ अटक जाते थे विचार. वातावरण हो रहा था कथामय और चल रहा था साथ साथ कथा के लगभग एकसार.. शब्द थे जो उसमे सभी भीगे भीगे से अपने अर्थों के कपड़ो को चिपकाएँ हुए थे […] Read more » kavita by praveen gugnani