व्यंग्य प्रेमचंद आउट !! March 5, 2012 / March 5, 2012 by अशोक गौतम | Leave a Comment अशोक गौतम मेरे पास रहने को कमरा नहीं है। किराए के स्टोर के साथ लगते अपने गुसलखाने को मैंने लेखकीय प्रेम के चलते लेखक गृह बना रखा है ताकि कोर्इ भी भूला सूला लेखक यहां आकर रात बरात चैन से रह सके। मैं वैसे कोशिश करता हूं कि पुराने सुराने लेखक ही यहां आकर रहें […] Read more » satire by AshokGautam प्रेमचंद आउट
कहानी हीरा मंडी March 5, 2012 by राजकुमार सोनी | Leave a Comment राजकुमार सोनी आज बाजार में बहुत चहल-पहल है, गाना बजाना रास्ते भर औरतें सज-संवरकर खड़ी थीं और क्यों न हों, आज पूरा बाजार ग्राहकों से भरा पड़ा था। कजरी बाई का कोठा सबसे ज्यादा गुलजार था, क्योंकि उस बाजार की दो हुस्न परियां उसके कोठे की शान थीं- शानो और मलिका। इस बाजार में बड़े-बड़े […] Read more » हीरा मंडी
व्यंग्य व्यंग्य : शामिल बाजा March 2, 2012 by विजय कुमार | 1 Comment on व्यंग्य : शामिल बाजा विजय कुमार आपका विवाह हो चुका है, तो अच्छी बात है। नहीं हुआ, तो और भी अच्छी बात है; पर आप दस-बीस शादियों में गये जरूर होंगे। नाच-गाने के बिना शादी और बैंड-बाजे के बिना नाच-गाना अधूरा रहता है। बैंड में कई तरह के वाद्य होते हैं, जो समय-समय पर अपने हिस्से का काम करते […] Read more »
कहानी तूफान March 2, 2012 / March 2, 2012 by आर. सिंह | Leave a Comment आर सिंह दो दिनों से लगातार घोषणा हो रही थी कि लॉस एंजेलस में भयंकर तूफ़ान आने की संभावना है.बार बार चेतावनियाँ भी दी जा रही थी.यह भी बताया जा रहा था कि इस तूफ़ान में वायु की गति प्रति घंटे सत्तर मील से अधिक हो सकती है.रश्मि विधिवत अपने नित्य के कार्यों में लगी […] Read more » story by R.Singh
कविता कविता:बोलो बोलो क्या क्या बदलें ?-प्रभुदयाल श्रीवास्तव March 2, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 1 Comment on कविता:बोलो बोलो क्या क्या बदलें ?-प्रभुदयाल श्रीवास्तव बोलो बोलो क्या क्या बदलें हवा और क्या पानी बदलें स्वच्छ चांदनी रातें बदलें या फिर धूप सुहानी बदलें? शीतल मंद पवन कॆ झोंके आंधी के पीछे पछियाते मीठा मीठा गप कर लेते कड़ुआ कड़ुआ थू कर जाते हवा आज बीमार हो गई पानी दवा नहीं बन पाया तूफानों ने हर मौसम को आंसू […] Read more »
आलोचना अरविन्द केजरीवाल जैसे तीस मार-खां लोग सिर्फ बातो के वीर है March 2, 2012 by अरविन्द विद्रोही | 8 Comments on अरविन्द केजरीवाल जैसे तीस मार-खां लोग सिर्फ बातो के वीर है अरविन्द विद्रोही अरविन्द केजरीवाल जैसे लोग सिर्फ बातो के वीर है , धन लेकर ही कार्यक्रम करवाने वाले ये लोग सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओ के संघर्षमयी जीवन को क्या जाने ? अपराधियो को कोई अच्छा नहीं मानता लेकिन जन संघर्षो में दर्ज मुकदमो से कोई अपराधी नहीं होता ,वो तो जन नेता और जन प्रतिनिधि […] Read more » Arvind Kejriwal अरविन्द केजरीवाल
व्यंग्य व्यंग्य:होली कंट्री और होलीवाटर March 1, 2012 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव वो कितने नासमझ हैं जो कहते हैं कि होली आ रही है। मैं उनसे पूछता हूं कि भैया मेरे होली गई कहां थी जो आ रही है। कौन समझाए इन्हें कि होली तो हमारे प्राणों में है और होली में ही हमारे प्राण हैं। हम सब इस महान होली कंट्री के मासूम […] Read more » satire on Holi होली कंट्री होलीवाटर
कविता कविता:जांच आयोग-प्रभुदयाल श्रीवास्तव March 1, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment बंद कमरे में वक्त भूख की आग में जलती अतड़ियों से जुर्म करवाता है अपराधी को थाने कठघरे वकील गवाह जज दलील सत्य उगलवाती गीता रोती हुई पत्नी सीता मुंशियों और बाबुओं के रास्ते फाँसी के फंदे तक पहुंचाता है धरती का इंसान आकाश में लटक जाता है सफेड पोश भगवान दिन दहाड़े लूटता […] Read more » poems by Prabhudayal Srivastav कविता कवितायें
महत्वपूर्ण लेख व्यंग्य व्यंग्य/ क्या मैं तुम्हें सोनिया गांधी लगता हूं? February 28, 2012 / April 13, 2012 by अम्बा चरण वशिष्ठ | 1 Comment on व्यंग्य/ क्या मैं तुम्हें सोनिया गांधी लगता हूं? अम्बा चरण वशिष्ठ कल मेरी एक पत्रकार से भेंट हो गयी। मुझे कहने लगा कि मैं तुम्हारा साक्षात्कार लेना चाहता हूँ। मैंने कहा, तुझे कोई और नहीं मिला? मैं कौन सा इतना बड़ा नेता हूँ कि तू मेरा साक्षात्कार लेगा? पर वो न माना। कहने लगा देखो, बड़े-बड़े लोग मेरे पीछे पड़े रहते हैं कि […] Read more » सोनिया गांधी
व्यंग्य हमारे उंगल पर आपका अंगूठा February 28, 2012 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on हमारे उंगल पर आपका अंगूठा उंगलबाज.काम मुझे नहीं पता, आपने उंगलबाज का नाम पहले कभी सुना है या नहीं सुना। यह भारतीय मीडिया उद्योग का सबसे अविश्वनीय नाम है। इंडिया टीवी से भी अधिक अविश्वनीय। पंजाब केसरी से भी अधिक अविश्वनीय। डर्टी पिक्चर की सिल्क की तरह, जिसका नाम बदनाम होकर हुआ। हमारी विश्वसनीयता इतनी संदिग्ध है कि हमने दुनिया […] Read more »
आलोचना ममता शर्मा के बयान पर इतना बवाल क्यों? February 27, 2012 / February 27, 2012 by तेजवानी गिरधर | Leave a Comment राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा के बयान पर बवाल हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने थूक कर चाटना ही बेहतर समझा, लिहाजा तुरंत बयान वापस भी ले लिया। ज्ञातव्य है कि ममता ने यह कहा था कि युवतियां युवकों की टिप्पणियों से न डरें, बल्कि सकारात्मक रूप में लें। […] Read more » mamta sharma ममता शर्मा के बयान
पुस्तक समीक्षा ‘क्या खोया क्या पाया’ – एक समीक्षा February 26, 2012 / February 26, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment प्रवक्ता ब्यूरो सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विषयों पर हिन्दी साहित्य में बड़ी संख्या में कई उपन्यास लिखे गए किन्तु विपिन किशोर सिन्हा का अद्यतन उपन्यास ‘क्या खोया क्या पाया’ कई मायनों में उन कथाओं से हटकर है क्योंकि इसमें न केवल कथासार है, सामाजिक विद्रूपताओं का जिक्र है, वैज्ञानिक ताना-बाना और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण है अपितु […] Read more » क्या खोया क्या पाया