व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/ मजबूरी का नाम ईमानदारी September 7, 2011 / December 6, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव पता नहीं इस देश से भ्रष्टाचार कब जाएगा। बाबा रामदेव से लेकर अन्ना हजारे ही नहीं अब तो हमारे मुसद्दी लाल तक इस समस्या से परेशान हैं। और सरकार है कि जो भी इस मुद्दे के खिलाफ आवाज उठाता है वह उसे ही भ्रष्टाचारी बताने में लग जाती है। बाबा-तो-बाबा] दूध के […] Read more » ईमानदारी
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/ शक के शौकीन September 7, 2011 / December 6, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव मुझे शक है कि मैं दिन-ब-दिन शक का शौकीन होता जा रहा हूं। पहले शायद ऐसा नहीं था मगर फिर सोचता हूं तो शक होता है कि कहीं ऐसा तो नहीं था कि शक का शौक मुझे बचपन से ही हो और मैंने इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया हो। अब तो […] Read more »
कविता आर. सिंह की कविता / कविता का अन्त September 6, 2011 / December 6, 2011 by आर. सिंह | 3 Comments on आर. सिंह की कविता / कविता का अन्त मेरी बेटी, कहती है मुझसे. डैडी लिखते तो हैं आप. एक तरह से अच्छा ही लिखते हैं. भाषा पर पकड भी अच्छी है आपकी. पर, पर क्या मेरी बेटी? साफ साफ कहो मुझसे. क्या कमी दिखती है तुमको मेरे लेखन में? डैडी, निराशा झलकती आपकी रचनाओं में. निराश नजर आते हैं आपके पात्र. लगता है […] Read more »
कविता शिक्षक दिवस पर विशेष कविता / स्वयं का कर फिर तू संधान September 5, 2011 / December 6, 2011 by डॉ. अरुण कुमार दवे | 1 Comment on शिक्षक दिवस पर विशेष कविता / स्वयं का कर फिर तू संधान डॉ. अरुण कुमार दवे हे जनमन के नायक , राष्ट्र के उन्नायक आपको शत शत नमन | आप देश और समाज की तरक्की के एकमात्र आधार है| आपकी महिमा अपरंपार है| हे गुरुवर ! हे आचार्य ! हे शिक्षक प्रवर! आप अपनी गरिमा को पुनर्प्रतिष्ठत करें ; माँ भारती की झोली सुख-समृद्धि से भरें| […] Read more » Teachers Day शिक्षक दिवस
व्यंग्य व्यंग्य/ कांग्रेस और गांधी जी की बकरी September 4, 2011 / December 6, 2011 by जगमोहन ठाकन | 1 Comment on व्यंग्य/ कांग्रेस और गांधी जी की बकरी जग मोहन ठाकन महात्मा गांधी ने जो भी आंदोलन किये , अहिंसा व शांति के बलबुते पर कामयाबी पाई । गांधी जी की नीतियों व सिद्धान्तों पर चलने का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी गांधीवादी रास्ते से पाई हुई स्वसता का रसास्वादन मजे से बैठ कर करती रही है। कांग्रेस ने ऐसा पाठ पढ़ लिया है […] Read more »
कविता पिक्चर अभी बाकी है…..(कविता) August 31, 2011 / December 6, 2011 by मुकेश चन्द्र मिश्र | 3 Comments on पिक्चर अभी बाकी है…..(कविता) जनतंत्र की है जीत, मगर फिर भी सम्भलना । सरकार बदल देगी, इसे हार में वरना ।। गफलत अगर हुयी, तो पछताना पड़ेगा । इस भ्रष्टतंत्र को, सिर झुकाना पड़ेगा ।। तुडवाया था इन्होने ही, पिछला भी अनशन । पर देते रहे फिर भी, बारह दिन तक टेंशन ।। सड़कों पर देखी भीड़, […] Read more » Anna Hazare
राजनीति लेख अन्ना ने दिया बहनजी-बुखारी को सिमरन व इक़रा से जवाब ! August 29, 2011 / December 6, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 2 Comments on अन्ना ने दिया बहनजी-बुखारी को सिमरन व इक़रा से जवाब ! इक़बाल हिंदुस्तानी आखि़रकार नेताओं की शतरंजी चालों से 12 दिन तक मौत और ज़िंदगी के बीच झूलते रहने के बाद अन्ना ने अपना अनशन दलित बच्ची सिमरन और मुस्लिम बच्ची इक़रा के हाथां जूस पीकर अपनी तीनों मांगे मनवाकर तोड़कर भी ख़त्म नहीं किया, बल्कि फिलहाल स्थगित किया है। अनशन उन्होंने आगे भी जारी रखने […] Read more » Anna Hazare Mayawati इमाम बुखारी राइट टू रिकाल राइट टू रिजेक्ट
साहित्य कहो कौन्तेय-२२ August 29, 2011 / December 6, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा (व्रत भंग और अर्जुन का वन गमन) खाण्डवप्रस्थ के रूप में हमें हस्तिनापुर राज्य का आधा भाग प्राप्त हुआ जिसमें पठारों और अनुर्वर भूमि की बहुलता थी। श्रीकृष्ण के निर्देश पर हमने इसे स्वीकार किया। एक शुभ मुहूर्त्त में महर्षि व्यास ने स्वयं धरती नाप कर शास्त्रविधि से भूमिपूजन संपन्न कराया। श्रीकृष्ण […] Read more » Draupadi Krishna कहो कौन्तेय व्रत भंग और अर्जुन का वन गमन
कविता अभिषेक पुरोहित की कविता August 29, 2011 / December 7, 2011 by अभिषेक पुरोहित | 5 Comments on अभिषेक पुरोहित की कविता क्या जीवन! यंत्रवत चलते रहना ??? भौतिकी में दिन भर खपना, रात्रि में करना उसका चिंतन !! नश्वर-नष्ट होने वाली वस्तु के पीछे घूमते जाना यूं ही उम्र भर | अंत समय में कहना, गर्व से छोड़ा मैंने पीछे अपने, बंगा पुत्र-परिवार || जीवंत-चैतन्य खोजता जड़ को, महामाया के चक्र, पिसना है जीवन ? या […] Read more »
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/भ्रष्टाचार से लड़ने में कमजोरी बहुत आ जाती है August 28, 2011 / December 7, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य-व्यंग्य/भ्रष्टाचार से लड़ने में कमजोरी बहुत आ जाती है पंडित सुरेश नीरव भ्रष्टाचार से लड़ने में कमजोरी बहुत आ जाती है। इसीलिए तो हमारे राजनेता भ्रष्टाचार से बच निकलने में ही भलाई समझते हैं और पिछले 64 साल से इससे बचते ही नहीं चले आ रहे हैं बल्कि उससे दोस्ती का रिश्ता बनाकर उसे फलने और खुद के फूलने का मौका निकालते रहे हैं। […] Read more » भ्रष्टाचार
कविता कविता / जनलोकपाल बिल August 27, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment पाला है हमने अब भी ये आज़ार किसलिए गद्दीनशीन अब भी हैं गद्दार किसलिए लगता है मुझको दाल में है काला कुछ जरूर डरती है लोकपाल से सरकार किसलिए ये लूटमार, रेप, घूस, कत्ल, घोटाले है संविधान इस कदर बीमार किसलिए खाते हैं कसम लाएंगे जनलोकपाल बिल हमको मिला है वोट का अधिकार किसलिए अब […] Read more » Janlokpal जनलोकपाल
कविता अन्ना जी अनशन तोड़ो August 27, 2011 / December 7, 2011 by मुकेश चन्द्र मिश्र | 1 Comment on अन्ना जी अनशन तोड़ो अन्ना जी अनशन तोड़ो अब नहीं देर हो जाएगी । अगर हुआ कुछ तुम्हे तो भारत में बर्बादी आएगी ।। अलख जगाई है जो तुमने आगे उसे बढाना है । मर जाएँ या मिट जाएँ जन लोकपाल बिल लाना है ।। चमड़ी मोटी बहुत हो गयी है काले अंग्रेजों की । इनको दिखलानी है ताकत […] Read more » Anna Hazare अन्ना हजारे कविता