व्यंग्य हास्य-व्यंग्य : टोपी बहादुर – पंडित सुरेश नीरव September 24, 2011 / December 6, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य-व्यंग्य : टोपी बहादुर – पंडित सुरेश नीरव जिन्हें टोपी पहनने का शौक होता है वो टोपी नहीं पहना करते। टोपी पहनानेवाले ऐसे सूरमा अच्छे-अच्छों को टोपी पहना दिया करते हैं। देखिए न अपने गांधीजी ने कभी भूल से भी टोपी नहीं पहनी मगर एक-दो को नहीं पूरे देश को उन्होंने टोपी पहना दी। और उस पर भी जलवा ये कि टोपी कहलाई […] Read more » Hat Man Pandit Suresh Nirav Satire टोपी बहादुर पंडित सुरेश नीरव हास्य-व्यंग्य
कहानी तीन कहानियाँ है जो भारत के भविष्य की नयी इबारत लिखेंगी September 22, 2011 / December 6, 2011 by पूजा शुक्ला | 2 Comments on तीन कहानियाँ है जो भारत के भविष्य की नयी इबारत लिखेंगी इस इबारत की पहली कहानी धृतराष्ट्र के ’कृष्ण’ घिर गए है, जनता पार्टी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने २१ सितम्बर २०११ को सुप्रीम कोर्ट में एक पत्र दिखाया जो २५ मार्च, २०११ को प्रणब दा के वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखा था . उसमे लिखा था कि अगर पूर्व वित्तमंत्री चाहते तो, २क्र स्पेक्ट्रम […] Read more » Future of India
कहानी वह कहानी लेखक बनना चाहता था. September 22, 2011 / December 6, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment देव को बचपन से हीं पुस्तकें पढने का बहुत शौक था.अब तो उसे यह भी याद नहीं है कि कौन कौन सी पुस्तकें पढी उसने उन दिनों.आज वह सोचता है कि न जाने कब और कैसे चाट पडी उन पुस्तकों की. पुस्तकों की चाट ने उसके जीवन में नाटकीयता का समावेश भी कर दिया.अनजाने में […] Read more » R Singh आर सिंह कहानी कहानी लेखक
व्यंग्य चोरों की आउट सोर्सिंग September 17, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव नेताजी के यहां चोरी हो गई। शहरभर में तहलका मच गया। कोई पुलिस व्यस्था को कोस रहा था तो कोई चोर की दिलेरी की दाद दे रहा था। समझ नहीं आ रहा था कि ये मुमकिन हुआ तो हुआ कैसे। कुछ लोग आंख दबाकर इस वाकये पर अपने मुहावरेबाजी के गुप्तज्ञान का […] Read more » चोरों की आउट सोर्सिंग
कविता हुंकार September 17, 2011 / December 6, 2011 by हिमकर श्याम | Leave a Comment हिमकर श्याम जब भी देनी चाही किसी ने आवाज वह हंसा- एक तीखी हंसी यूं देना चाहते हो तुम आवाज किसे ? यूं दे पाओगे कभी आवाज व्यवस्था को क्या ऐसी होती है आवाज बदलाव की यह नहीं है आवाज १२१ करोड़ आवाम की देखना, एक दिन तमाम प्रयासों छटपटाहटों और आक्रोशों के बावजूद […] Read more » हुंकार
कविता कश्मीरी (विस्थापित) कविता September 17, 2011 / December 6, 2011 by कुंदन लाल चौधरी | Leave a Comment बंदिनी देवी हम निराश हो रहे हैं देवी ज्येष्ठा कि हमारी भूमिकाएं उलट गई हैं और अब हमारी बारी है तुम्हारी रक्षा करने की मूर्तिचोरों और मूर्तिभंजकों की दुष्ट योजनाओं को विफल करने की जो हमारी भूमि पर मंडरा रहे हैं। हमने तुम्हारे लिए बाड़ बना दिया है और अब हमें खिड़की-दर्शन से […] Read more » kashmir कश्मीरी (विस्थापित) कविताएं
लेख भावनाएँ September 16, 2011 / December 6, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment जितेन्द्र माथुर मानवीय जीवन का एक अविभाज्य अंग हैं भावनाएँ । भावनाओं के बिना जीवन कैसा ? भावनाएँ ही तो हैं जो कि एक रुखेसूखे और रंगहीन जीवन को रसरंगयुक्त बनाती हैं । एक भावनाविहीन जीवन उपयोगी तो हो सकता है लेकिन उसकी उपयोगिता सीमित ही रहेगी । यदि व्यक्ति भावनाओं से रहित है तो […] Read more » feelings भावनाएँ
आलोचना नपुंसक सरकार को दहलाते बम ब्लास्ट September 16, 2011 / December 6, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे 9/11 के बाद दुनिया के चौधरी अमेरिका पर आज तक कोई आतंकी हमला नहीं हुआ है। दुनिया के चौधरी अमेरिका ने यह साबित कर दिया है कि उसकी सरहद पूरी तरह सुरक्षित है। इतना ही नहीं मुस्लिम देशों पर आक्रमण कर वहां के तानाशाहों की सल्तनत को नेस्तनाबूत भी किया है अमेरिका ने। […] Read more » Congress Party नपुंसक सरकार बम ब्लास्ट
लेख कैसे बनेगा समृद्ध भारत! September 16, 2011 / December 6, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे भारत गणराज्य में न्यायपालिका को सर्वोच्च दर्जा है किन्तु देश की सबसे बड़ी पंचायत द्वारा कानून कायदे बनाए जाते हैं। इनका पालन हो रहा है या नहीं इसके लिए न तो बड़ी पंचायत और ना ही उसमें बैठे पंच और सरपंच ही संजीदा हैं। बच्चों को निशुल्क शिक्षा दिलाने के लिए बनाया गया […] Read more » India कैसे बनेगा समृद्ध भारत समृद्ध भारत
साहित्य कहो कौन्तेय-२७ September 16, 2011 / December 6, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा (हस्तिनापुर की द्यूत-सभा) स्मरण है मुझे महाभारत युद्ध का प्रथम दिवस – दोनों सेनाओं के मध्य में खड़ा हुआ जब मैं मोहग्रस्त हुआ था तो श्रीकृष्ण ने मुझे ’नपुंसक’ कहकर संबोधित किया था। उनके इस सम्बोधन का प्रतिकार मुझे करना चाहिए था – आर्यावर्त के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर को उसी का सारथि नपुंसक […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
लेख दो सदियों से सत्ता का केंद्र बना हुआ है व्हाईट हाउस September 16, 2011 / December 6, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे दुनिया जिसे डरकर सलाम करती है वह है अमेरिका। अमेरिका को यूं ही दुनिया का चौधरी नहीं कहा जाता। अमेरिका जब चाहे जिस देश पर जाकर अपनी सेना से वहां दमन फैला सकता है। जी हां यह सच है। जिसने भी अमेरिका की तरफ आंख तरेरी है। अमेरिका ने उसे नेस्तनाबूत कर दिया […] Read more » White House व्हाईट हाउस
लेख भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की हकीकत – दुनिया गोल है September 15, 2011 / December 6, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा बचपन में गुरुजी ने बताया था कि दुनिया गोल है। इसके प्रमाण में उन्होंने कहा था कि आप एक दिशा विशेष में एक नियत स्थान से अगर चलना प्रारंभ करेंगे, तो चलते-चलते पुनः उसी स्थान पर पहुंच जाएंगे, जहां से आपने यात्रा आरंभ की थी। भारत की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी, कांग्रेस […] Read more » Congress भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का घोषणा-पत्र