साहित्य कहो कौन्तेय (महाभारत पर आधारित उपन्यास) July 25, 2011 / December 8, 2011 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on कहो कौन्तेय (महाभारत पर आधारित उपन्यास) विपिन किशोर सिन्हा मूलत: बिहार के रहनेवाले व पेशे से उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी में अधिशासी अभियंता विपिन किशोर सिन्हा जी ने पौराणिक आख्यानों पर कई उपन्यास लिखकर विमर्श किया है। ‘कहो कौन्तेय’ उनका पहला उपन्यास है। इसकी प्रशंसा पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. भैरो सिंह शेखावत ने भी की थी। संजय प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित इस […] Read more » Kaho Kauntey कहो कौन्तेय
राजनीति साहित्य ममता बनर्जी में माकपा की आवाजें July 25, 2011 / December 8, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment जगदीश्वर चतुर्वेदी ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनने के बाद आमलोगों को लग रहा था कि राज्य सरकार की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव आएगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि वे लगातार उसी मार्ग पर चल रही हैं जिसे माकपा ने वाम शासन में बनाया था। प्रत्येक क्षेत्र में ममता और उनके दल के […] Read more » Mamta Benarji बुद्धदेव भट्टाचार्य ममता बनर्जी हिंदी
पुस्तक समीक्षा राजनीति “हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] – राजीव रंजन प्रसाद July 24, 2011 / December 8, 2011 by राजीव रंजन प्रसाद | 15 Comments on “हेलो बस्तर” [राहुल पंडिता की पुस्तक पर एक विमर्श] – राजीव रंजन प्रसाद माओवादियों ने बस्तर को आग के हवाले कर दिया है, जिसकी तपिश में भोले-भाले आदिवासी झुलस रहे हैं। माओवादी भले ही इन क्षेत्रों के विकास की बात करते हों लेकिन उनके पास विकास का वैकल्पिक मॉडल नहीं है, उलटे वे शिक्षण संस्थानों और सड़कों को बम से उड़ाकर बस्तर के विकास मार्ग को अवरूद्ध करते […] Read more » hello bastar आदिवासी बस्तर माओवाद राहुल पंडिता हेलो बस्तर
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/ मेट्रों में आत्मा का सफर July 24, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य-व्यंग्य/ मेट्रों में आत्मा का सफर पंडित सुरेश नीरव सब शरीर धरे के दंड हैं। इसलिए जब भी किसी स्वर्गीय का भेजे में खयाल आता है तब-तब मैं हाइली इन्फलेमेबल ईर्ष्या से भर जाता हूं। सोचता हूं कितनी मस्ती में घूमती हैं ये आत्माएं। जिंदगी का असली मजा तो दुनिया में ये आत्माएं ही उठाती हैं। न गर्मी की चिपचिप न […] Read more » vyangya हास्य-व्यंग्य
आलोचना हिन्दी बुर्जुआ के सांस्कृतिक खेल July 24, 2011 / December 8, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on हिन्दी बुर्जुआ के सांस्कृतिक खेल जगदीश्वर चतुर्वेदी हिन्दी बुर्जुआवर्ग का हिन्दीभाषा और साहित्य से तीन-तेरह का संबंध है। हिन्दीभाषी बुर्जुआवर्ग में आत्मत्याग की भावना कम है। उसमें दौलत,शानो-शौकत और सामाजिक हैसियत का अहंकार है। वह प्रत्येक काम के लिए दूसरों पर निर्भर है।दूसरों के अनुकरण में गर्व महसूस करता है। दूसरों के अनुग्रह को सम्मान समझता है।वाक्चातुर्य से भाव-विह्वल हो […] Read more » cultural सांस्कृतिक
व्यंग्य मकान मालिक तो भगवान होता है July 23, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on मकान मालिक तो भगवान होता है पंडित सुरेश नीरव एक दौर वह भी था जब स्वर्ग में रहनेवाले देवता फालतू समय में फटाफट भारत में अवतार ले लिया करते थे। उनके लिए स्वर्ग से भारत आना एक फन-लविंग पिकनिक हुआ करती थी। क्योंकि उस वक्त आज की तरह मकान और खासकर किराये के मकान की समस्या नहीं हुआ करती थी। भगवान […] Read more » God भगवान मकान मालिक
कविता बच्चों का पन्ना सोनपरी और मुस्कान July 22, 2011 / December 8, 2011 by रहीम खान | 1 Comment on सोनपरी और मुस्कान दूर कहीं एक गाँव में रहती थी ‘ मुस्कान ‘ , माँ की थी वो राजदुलारी , और पिता की थी वो जान ! चिडियां-सी चहकती , फूलों-सी महकती , चेहरे पे उसके सदा रहती थी मुस्कान ! दादी से अपनी वो सुनती थी परियों की कहानियां ! नेकी और ईमानदारी का पाठ सिखाती थी […] Read more » सोनपरी और मुस्कान
साहित्य रोमिला थापर का महमूद July 22, 2011 / December 8, 2011 by शंकर शरण | 14 Comments on रोमिला थापर का महमूद शंकर शरण यह सन् 1980 की बात है। तब डॉ. कर्ण सिंह श्रीमती इंदिरा गाँधी के कैबिनेट मंत्री थे। उन्होंने अपने मित्र रोमेश थापर से एक दिन शिकायत की कि उनकी बहन रोमिला थापर “अपने इतिहासलेखन से भारत को नष्ट कर रही हैं”। इस पर उन की रोमेश से तीखी तकरार हो गई। यह प्रत्यक्षदर्शी […] Read more » Mahmood महमूद रोमिला थापर
साहित्य अंग्रेजी हकूमत का काल बन गये थे मंगल पांडे July 21, 2011 / December 8, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on अंग्रेजी हकूमत का काल बन गये थे मंगल पांडे 19 जुलाई मंगल पांडे जयन्ती पर खासः शादाब ज़फ़र॔,शादाब’’ आज मंगलवार है, और उस महान देश भक्त की आज जयन्ती भी है जिसे हम सब लोग मंगल पांडे के नाम से जानते है। 19 जुलाई 1827 को नगवा (बलिया) में जन्मे मंगल पांडे ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह का जो कदम उठाया था […] Read more » Mangal Pandey अंग्रेजी हकूमत काल मंगल पांडे
लेख शिव स्वयं सावन हैं July 21, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment समग्र किसान चेतना का प्रतीक है- शिव पंडित सुरेश नीरव सावन का महीना। चैत्र मास से शुरू होनेवाले भारतीय कैलेंडर का पांचवा महीना। पांच यानि सृष्टि के पंचभूत का प्रतीक। तो फिर क्यों न हो भूताधिपति महादेव को प्रिय यह पांचवां महीना। जो स्वयं जल की तरह तरल और भोले हैं। जिनके माथे पर चंद्रमा […] Read more » Shiv शिव सावन
व्यंग्य व्यंग्य : इस देश का यारों क्या कहना.. July 20, 2011 / December 8, 2011 by विजय कुमार | 1 Comment on व्यंग्य : इस देश का यारों क्या कहना.. विजय कुमार छात्र जीवन से ही मेरी आदत अति प्रातः आठ बजे उठने की है; पर आज सुबह जब कुछ शोर-शराबे के बीच मेरी आंख खुली, तो घड़ी में सात बज रहे थे। आंख मलते हुए मैंने देखा कि मोहल्ले में बड़ी भीड़ थी। कुछ पुलिस वाले भी वहां दिखाई दे रहे थे। मोहल्ले की […] Read more » vyangya व्यंग्य
लेख आज बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस है July 19, 2011 / December 8, 2011 by वीरेन्द्र जैन | Leave a Comment वीरेन्द्र जैन उन्नीस जुलाई वह तिथि है, जिसने वर्ष 1969 में न केवल राजनीति के क्षेत्र में अपितु आर्थिक, सामाजिक क्षेत्र में भी अपने निशान छोड़े है, यह वह दिन था जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने संसद में अपना बहुमत बनाने के लिए वामपंथी दलों से समर्थन प्राप्त करने हेतु 14 […] Read more » Bank Natinalism Day बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस