राजनीति व्यंग्य ‘नाली के कीडे’ May 1, 2011 / December 13, 2011 by आर. सिंह | 7 Comments on ‘नाली के कीडे’ बहुतों को इस लेख का शीर्षक देख कर आश्चर्य होगा,पर मेरी अपनी मजबूरी है. मैंने वर्षों पहले एक कविता लिखी थी. उस कविता का भी शीर्षक था,नाली के कीडे.( यह कविता प्रवक्त के दो अप्रैल के अंक में प़्रकाशित हुई हैऔर लेखक के लिये प्रवक्त द्वारा बनाये गये आर्काइव में भी उपलब्ध है). यह करीब […] Read more »
कविता वह May 1, 2011 / December 13, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment जब मैं सोकर उठता हूँ प्रातः तडके. अलार्म की आवाज सुनकर. पहला ध्यान जाता है इस ओर. वह आयेगी या नही? मैं जल्दी जल्दी तैयार होता हूँ, नित्य क्रिया से निपट कर. दाढी बनाकर,चेहरे का साबुन पोंछ कर, देखता हूँ आइने में. पर ध्यान तो वही लगा रहता है, वह आयेगी या नहीं. इसके बाद […] Read more »
लेख तन से लिपटा चीथडा है पेट से पत्थर बधॉ,,,,,, May 1, 2011 / December 13, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 1 Comment on तन से लिपटा चीथडा है पेट से पत्थर बधॉ,,,,,, आज इस कम्प्यूटर युग में मजदूर को मजदूरी के लाले पडे है। ऐसे में 1 मई को मजदूर दिवस मनाये तो कौन मनाये। कल तक बडी बडी मिले थी, कल कारखाने थे, कल कारखानो एंव औधोगिक इकाईयो में मशीनो का शोर मचा रहता था मजदूर इन मशीनो के शोर में मस्त मौला होकर कभी गीत […] Read more » Labor Day मजदूर दिवस
कविता प्रिय अपनी बाहों में भर लो। May 1, 2011 / December 13, 2011 by जगदम्बा प्रसाद गुप्ता ”जगत” | 1 Comment on प्रिय अपनी बाहों में भर लो। विप्रलम्ब तन शीतल मन शीतल कर दो, प्रिय अपनी बाहों में भर लो। ————————————— मंद हवाओं का ये झौंका, आंचल को सहलाता हैं। ————————————— पुष्पों की सुरभित मादकता, तन में आग लगाता है। ————————————— मिलने की उत्कंठा दिल में, धड़कन और ब़ाता है। ————————————— तेरे आने की हर आहट, मन में आस जगाता है। […] Read more »
आलोचना पुलिस टेनिंग स्कूल में सेक्स ट्रेनिंग May 1, 2011 / December 13, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 1 Comment on पुलिस टेनिंग स्कूल में सेक्स ट्रेनिंग महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पुलिस टेनिंग स्कूल में महिला कांस्टेबल यौन शौषण। पुलिस टेनिंग स्कूल में महिला कांस्टेबल यौन उत्पीड़न की इस घटना ने देश भर में तूफान मचाने के साथ साथ उन तमाम घरो में बवाल मचा दिया जिन घरो की बहू बेटिया कोल्हापुर के पुलिस टेनिंग स्कूल में महिला कांस्टेबल की टेनिंग ले […] Read more » Police Traning
कहानी संस्मरणात्मक कहानी : वे दिन April 26, 2011 / December 13, 2011 by आर. सिंह | 3 Comments on संस्मरणात्मक कहानी : वे दिन जिन्दगी के पथ पर चलते हुए बहुत सी एैसी घटनाएं घटित हो जाती हैं जो यादगार ही बनकर नहीं रह जाती,वल्कि हमेशा कुरेदती भी रहती है दिलों दिमाग को.क्या उम्र रही होगी मेरी उस समय?यही तेरह या चौदह वर्ष की.वयःसन्धि के उस मोड पर मन की उमंगें आसमान छूने की तम्मना रखती हैं.आज फिर जब […] Read more » कहानी संस्मरण
कविता कविता/ हाथी का दांत April 23, 2011 / December 13, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment एक दिन वो मिली रास्ते में अपनी भतीजी के साथ जिसे मैंने पढाई छोड़ते वक्त ‘कृष्णकली’ भेंट की थी. मेरा परिचय उससे उसने दिया ”बेटा ये मेरे साथ पढ़ें हैं”. भतीजी तीन-चार साल की समझ ना पाई कि साथ पढ़े होना कौन सा रिश्ता है. वो पूछ बैठी उससे […] Read more »
साहित्य ‘व्योमकेश दरवेश’ तीन सुंदर प्रसंग- काशी, बकबक और बोलती औरत April 21, 2011 / December 13, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on ‘व्योमकेश दरवेश’ तीन सुंदर प्रसंग- काशी, बकबक और बोलती औरत जगदीश्वर चतुर्वेदी काशी की संस्कृति – विद्वत्ता और कुटिल दबंगई विश्वनाथ त्रिपाठी ने ‘व्योमकेश दरवेश’ में काशी के बारे में लिखा है – ” काशी में विद्वत्ता और कुटिल दबंगई का अद्भुत मेल दिखलाई पड़ता है। कुटिलता,कूटनीति,ओछापन,स्वार्थ -आदि का समावेश विद्बता में हो जाता है। काशी में प्रतिभा के साथ परदुखकातरता, स्वाभिमान और अनंत […] Read more »
कहानी कहानी / रंजन April 19, 2011 / December 13, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment आर. सिंह ‘रंजन मुझे प्यार करता है पापा.’ ‘यह कैसे हो सकता है?’ प्रोफेसर साहब सोंच में पड गये. ‘बेटी तुम पागल तो नही हो गयी हो? ‘नही पापा, उसने स्वयं मुझसे कहा कि वह मुझे प्यार करता है.’ ‘बेटी तुम पढी लिखी हो.एक वैज्ञानिक की बेटी ही नही,तुम स्वयं एक कम्प्युटर साइंटिस्ट हो.तुम एैसा सोच […] Read more »
कविता कविता / स्रष्टा की भूल April 19, 2011 / December 13, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment भगवन, क्यों बनाया तुमने मुझको आदमी ? क्या किया मैंने बनकर आदमी ? क्या क्या सपने देखे थे भगवन ने ? मेरे शैशव काल में. सृष्टि का नियामत था मैं. स्रष्टा का गर्व था मैं. कितने प्रसन्न थे तुम] जिस दिन बनाया था तुमने मुझे. सोचा था तुमने] तुम्हारा ही रूप बनूंगा मैं] प्रशस्त करुंगा […] Read more »
व्यंग्य व्यंग्य-भ्रष्टाचारी द्वीप के बौने April 18, 2011 / December 13, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 2 Comments on व्यंग्य-भ्रष्टाचारी द्वीप के बौने पंडित सुरेश नीरव न जाने कैसी ये हवा चली है कि आजकल वे लोग ज्यादा परेशान रहते हैं जो कि ईमानदारी से काम करना चाहते हैं। और जो न खुद खाते हैं और न किसी को खाने देते हैं। ईमानदारी के जुनून से त्रस्त ऐसे अधिकारियों के सबसे बड़े दुश्मन वे लोग होते हैं, जो […] Read more »
व्यंग्य व्यंग्य – फ्लैटों का आदर्श जुगाड़ April 18, 2011 / April 18, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on व्यंग्य – फ्लैटों का आदर्श जुगाड़ राजकुमार साहू वैसे देश में भ्रष्टाचार का बखेड़ा जहां-तहां छाया हुआ है। हर जुबान की शोभा केवल भ्रष्टाचार ही बढ़ा रहा है। कुछ महीनों पहले जब आदर्श सोसायटी के फ्लैटों का घोटाला उजागर हुआ, उसके बाद एक के बाद एक कई बडे भ्रष्टाचार हुए। जाहिर सी बात है, जब बात बड़ी-बड़ी हो रही हो […] Read more »