आलोचना वरिष्ट होने की बीमारी May 25, 2011 / December 12, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 1 Comment on वरिष्ट होने की बीमारी बडे होने का अहसास इन्सान को जरूर होना चाहिये किन्तु लोग बडा कहे तब ही आदमी का बडप्पन अच्छा लगता है खुद अपने मुॅह मिॅया मिटठू बनने से सिर्फ जग हसॉई के सिवा कुछ नही मिलता। आज कल हमारे शहर में अर्जी फर्जी कवि, शायर, और कुछ पत्रकार इस रोग से पीड़ित होने के कारण […] Read more » Old वरिष्ट होने की बीमारी
गजल इतनी बेरूखी कभी अच्छी नहीं May 23, 2011 / December 12, 2011 by सत्येन्द्र गुप्ता | Leave a Comment इतनी बेरूखी कभी अच्छी नहीं ज्यादा दीवानगी भी अच्छी नहीं। फासला जरूरी चाहिए बीच में इतनी दिल्लगी भी अच्छी नहीं। मेहमान नवाजी अच्छी लगती है सदा बेत्क्लुफ्फी भी अच्छी नहीं। कहते हैं प्यार अँधा होता है मगर आँखों की बेलिहाज़ी भी अच्छी नहीं। हर बात का एक दस्तूर होता है प्यार में खुदगर्जी भी अच्छी […] Read more »
कविता बहुत याद आती है माँ…… May 23, 2011 / December 12, 2011 by तरुण राज गोस्वामी | Leave a Comment पथरीलेँ रास्तोँ पर जीवन के, घाव जलते हैँ जब तन मन के, बहुत याद आती है माँ।। याद आती है मेरे लिये आँखोँ मेँ कटती उसकी रातेँ, याद आती है हर कदम पर मुझे समझाती उसकी बातेँ, मेरी गलतियोँ पर मुझको डाँटती फिर दुलारती, मेरी बिखरी फैली चीजोँ को ध्यान से संभालती, अपने हाथोँ […] Read more » Maa
कविता मैं उजला ललित उजाला हूँ! May 23, 2011 / December 12, 2011 by ललित कुमार कुचालिया | Leave a Comment मैं उजला ललित उजाला हूँ! मैं हूँ तो फिर अंधकार नहीं है! तेरे मन के तम से लड़ता हूँ तेरी राहें उजागर करता हूँ आओ मुझे बाहों में भर लो! मुझ सा कोई प्यार नहीं है मैं हूँ तो फिर अंधकार नहीं है! तेरे रोम-रोम में भर जाता हूँ तेरे दर्द को […] Read more » Lalit उजला उजाला ललित
व्यंग्य व्यंग्य/एक चुटकी रज कण मुझे भी प्लीज! May 23, 2011 / December 12, 2011 by अशोक गौतम | Leave a Comment अशोक गौतम अव्वल दर्जे के चरित्रहीन होने के चलते कल मेरे अजीज ने मुझे अपनी दिली तमन्ना बताते हुए कहा, ‘हे मित्र! मेरा जन्म पुन: हो और गलती से मुझे का सरकारी कर्मचारी का चोला मिले तो मैं इसी विभाग में इसी पद को प्राप्त होऊं ताकि रिश्वत लेने के लिए नए सिरे से मन […] Read more »
कहानी मिसेज बेरी May 22, 2011 / December 12, 2011 by आर. सिंह | 1 Comment on मिसेज बेरी मिसेज बेरी को आज फिर घर से निकलने में देर हो गयी थी.उनकी कोशिश तो यही रहती थी कि वह इसके पहले वाली बस पकड लें.उसके दो लाभ थे.एक तो वे समय पर आफिस पहुँच जाती थी,दूसरे उस बस में उनके मनपसंद की जगह मिल जाती थी,क्योंकि वह बस उनके घर से कुछ ही पहले […] Read more » मिसेज बेरी
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य / पेट्रोल की कीमत और राष्ट्रीय स्वाभिमान May 21, 2011 / December 12, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य-व्यंग्य / पेट्रोल की कीमत और राष्ट्रीय स्वाभिमान पंडित सुरेश नीरव सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर दुनिया के देशों के सामने अपने इंडिया की नाक ऊंची कर दी। जब भी कभी सरकार को लगता है कि देश की नाक नीची हो रही है वह पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर उसे ऊंचा कर देती है। अपने देश की जनता भी सरकार […] Read more » Inflation पेट्रोल मूल्य वृद्धि महंगाई
पुस्तक समीक्षा जाति- ब्रिटिश कुचेष्टा की शिकार May 20, 2011 / December 13, 2011 by डॉ. मधुसूदन | 11 Comments on जाति- ब्रिटिश कुचेष्टा की शिकार डॉ. मधुसूदन पुस्तक समीक्षा का अनुवाद: एक पुस्तक अकस्मात हाथ लगी, लेखक हैं निकॉलस डर्क। बस, खरीद लीजिए उसे, आप यदि ले सकते हैं तो। नाम है, , ”Castes of Mind: Colonialism and Making of British India” अर्थात ”मानसिक जातियां : उपनिवेशवाद और ब्रिटिश राज का भारत में गठन” और लिखी गयी है, एक इतिहास […] Read more » Castes of Mind
कहानी ये जो अदृश्य है May 19, 2011 / December 13, 2011 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव ऊं भूर्भव: तत्सवितुवरेण्यं भर्गोदेवस्य… ”ओह ! माँ का फिर फोन…” बकुल गुड़गाँव जाने के लिए तैयार होते हुए चहकी। माँ की तीन साल से बरकरार वही चिरंतन चिंता…, ‘उम्र फिसल रही है। पीयूष यदि पसंद है तो उसकी रजामंदी लेकर अंतिम फैसला ले…। अन्यथा वे कहीं और लड़का देखें। साथ ही वे अपनी […] Read more »
कविता कविता/ माँ…तेरी ऊँगली पकड़ के चला… May 19, 2011 / December 13, 2011 by ललित कुमार कुचालिया | 1 Comment on कविता/ माँ…तेरी ऊँगली पकड़ के चला… माँ…तेरी ऊँगली पकड़ कर चला… ममता के आँचल में पला… हँसने से रोने तक तेरे ही पीछे चला बचपन में माँ जब भी मुझे डाटती… में सिसक–सिसक कर घर के किसी कोने में जाकर रोने लगता फिर बड़े ही प्रेम से मुझे बुलाती… कहती, बेटा में तेरे ही फायदे के लिए तुझे […] Read more »
पुस्तक समीक्षा दुनिया में सबसे सहनशील धर्मपंथ -हिंदुत्व May 18, 2011 / December 13, 2011 by विजय सोनी | 21 Comments on दुनिया में सबसे सहनशील धर्मपंथ -हिंदुत्व विजय सोनी भारत में तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी लोगों ने जहाँ हिन्दुओं को और हिंदुत्व को हिन्दू आतंकवाद तक का नाम दे दिया है वहीँ ये जानना भी आवश्यक है की “व्हाट इस इंडिया ” मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई की भारतीय दर्शन से दुनिया कितनी प्रभावित है ,इस किताब ने दुनिया भर के महान फिलासफर से लेकर […] Read more » What is India?
गजल प्यादे बहुत मिले मगर वज़ीर न मिला May 18, 2011 / December 13, 2011 by सत्येन्द्र गुप्ता | 3 Comments on प्यादे बहुत मिले मगर वज़ीर न मिला प्यादे बहुत मिले मगर वज़ीर न मिला सबकुछ लुटा दे ऐसा दानवीर न मिला। जिसे दरम चाहिए न चाहिए दीनार ऐसा कोई मौला या फकीर न मिला। अपनी फकीरी में ही मस्त रहता हो फिर ऐसा कोई संत कबीर न मिला। प्यार के किस्से सारे पुराने हो चले अब रांझा ढूंढता अपनी हीर न मिला। […] Read more » प्यादे बहुत मिले वज़ीर न मिला