व्यंग्य ड्रामेबाजी छोड़ें, मन से स्वीकारें हिंदी… September 13, 2020 / September 13, 2020 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार ‘नवीन’ रात से सोच रहा था कि आज क्या लिखूं। कंगना-रिया प्रकरण ‘ पानी के बुलबुले’ ज्यों अब शून्यता की ओर हैं। चीन विवाद ‘ जो होगा सो देखा जाएगा’ की सीमा रेखा के पार होने को है। कोरोना ‘तेरा मुझसे पहले का नाता है कोई’ की तरह माहौल में ऐसा रम सा […] Read more » accept Hindi from your heart मन से स्वीकारें हिंदी
राजनीति व्यंग्य भेड़तंत्र September 13, 2020 / September 13, 2020 by वीरेन्द्र परमार | Leave a Comment प्राचीनकाल में चंपतपुर नामक एक राज्य था I जनता की मांग पर वहाँ भेड़तंत्र की स्थापना की गई I भेड़तंत्र अर्थात भेड़ों के लिए भेड़ियानुमा भेड़ों द्वारा संचालित ऐसी शासन – व्यवस्था जिसे भीड़तंत्र, वोटतंत्र और भेड़ियातंत्र भी कहा जाता है I उस तंत्र में वोट की नदी को पारकर लंपट, लफंगा, अपराधी, भ्रष्ट और […] Read more »
व्यंग्य भ्रष्टाचार अमर रहे ….. September 13, 2020 / September 13, 2020 by वीरेन्द्र परमार | Leave a Comment वीरेंद्र परमार आजकल सभी लोग भ्रष्टाचार का उन्मूलन करने के लिए प्राणपण से जुटे हुए हैं I देश की एक सौ तीस करोड़ जनता भ्रष्टाचार का समूल नाश करना चाहती है, लेकिन इसका नाश ही नहीं हो पा रहा है I जिसे देखो वह भ्रष्टाचार के पीछे पड़ा है, उसे मिटाने पर आमादा है I […] Read more » भ्रष्टाचार अमर रहे
व्यंग्य ‘हरामखोर’ मतलब ‘बेईमान नॉटी गर्ल’ …नोट कर लीजिए जनाब September 9, 2020 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment आप भी समझ रहे होंगे, यह कैसी शब्दावली है। ‘हरामखोर’ का मतलब ‘ बेईमान नॉटी’ गर्ल कब से होने लगा है। हमें तो सदा यह गाली के प्रतीकात्मक स्वरूप में ही सुनने को मिला है। नालायक, कामचोर, आलसी, निक्कमा, नमकहराम, मुफ्तखोर,आदि आदि। मां का कहा काम नहीं करते तो मां का सीधा सम्बोधन यही होता […] Read more » फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौट
व्यंग्य हे ! कागदेव: नमस्तुभ्यम September 5, 2020 / September 5, 2020 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल हे ! कलयुग के पितृदेव। हम आपकी श्रेष्ठता को नमन करते हैं। हम समदर्शी सृष्टि का भी अभिनंदन करते हैं जिसने आपको पखवारे भर के लिए श्रेष्ठ माना है। लेकिन आपका सम्मान देख इहलोकवासी पिताम्हों को ईष्र्या होती है। कागदेव आप नाराज […] Read more » Kagadeva कागदेव
व्यंग्य भागदौड़ में कमी नहीं,तुम मानो चाहे ना मानो September 4, 2020 / September 4, 2020 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार’ नवीन’ एक पुरानी कहानी सुनाने का मन कर रहा है। कहानी पुरानी जरूर है पर संदर्भ नया है। शेर से परेशान होकर जंगल के अन्य जीव-जंतुओं ने एक बार सभा की। सभा में सदियों से राजा के पद पर आसीन शेर की कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई। हिरन- खरगोश बोले-ये कैसा राजा है […] Read more » man ki baat like dislike episode तुम मानो चाहे ना मानो प्रधानसेवक जी भागदौड़ में कमी नहीं लाइक-डिसलाइक प्रकरण
व्यंग्य थप्पड़ न लगे इसकी गारंटी नहीं, रुपये चाहे सौ और ले लो.. September 1, 2020 / September 1, 2020 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार ‘ नवीन’ गांव के मुखिया के लड़के को किसी दूसरे बच्चे ने थप्पड़ मार दिया। दूसरा बच्चा भी खाते-पीते घर का था। सो मुखिया की उसे धमकाने की सीधी हिम्मत नहीं हो पाई। मुखिया ने कारण पता किया तो गलती उसी के लड़के की निकली। मुखिया चुप्पी साध गया। इसी बीच उसके किसी […] Read more » थप्पड़
व्यंग्य रात के व्यापारी रात नै ए जा लिए…. September 1, 2020 / September 1, 2020 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार ‘नवीन’ अफसर तो भई अफसर ही होते हैं। उनके मुख से निकला हर वर्ण पत्थर की लकीर की तरह होता है। अब ये उन पर निर्भर है कि वो अपने मातहतों से चाहे मूसे(चूहे) पकड़वाए या उन पर लार टपकाने वाली बिल्ली। कुत्तों की प्रजातियों की गणना करवाये या गधे-घोड़ों की। सांडों की […] Read more » सुराप्रेमियों को गिनने सम्बन्धी पत्र
व्यंग्य अब कुंआरों का ब्याह भी कराएंगे गुरुजन ! August 30, 2020 / August 30, 2020 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार ‘नवीन’ गांव में एक रांडे(कुंआरे) का ब्याह नहीं हो पा रहा था। एक दिन सुबह-सुबह आत्महत्या की सोच रस्सी लेकर वह खेत की ओर निकल पड़ा। रास्ते में रिश्ते में भाभी लगने वाली महिला ने हंसी-ठिठोली के मूड में छेड़ दिया। बोलीं-देवर जी, रस्सी से फांसी खाने का इरादा है क्या। उसने तो […] Read more » कुंआरों का ब्याह
व्यंग्य मुखड़ा देख ले प्राणी जरा दर्पण में August 30, 2020 / August 30, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीवजगत को रचनेवाला विधाता बड़ा जादूगर है। जब विधाता ने रचने का वर्कशाप खोला तो पहले उसने जगत की रचना की। समुद्र से लेकर नदियों तक, टीले से लेकर पहाड़तक और घास से लेकर विशाल वृक्षों का पूरा जाल धरती पर बिछाया। फिर जीव-जन्तुओं की रचना की जिसमें पानी में रहने वाले, जमीन […] Read more » दर्पण
मनोरंजन व्यंग्य सिनेमा बावफ़ा है August 30, 2020 / August 30, 2020 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “अक्ल को तन्कीद से फुर्सत नहीं इश्क पर आमाल की बुनियाद रख” हाल ही में एक फ़िल्म आयी है चमनबहार जिसमें नायक अपनी जीतोड़ मेहनत सी की कमायी गयी अल्प पूंजी पर अपने मन के उदगार लिखते हुए लिखते हुए दस -दस के नोटों पर अपनी प्रेमिका के प्रति अपनी भड़ास निकालते हुए लिखता है […] Read more » बावफ़ा है बिनोद बावफ़ा है
व्यंग्य पूंछ दिखा वनराज को चिढ़ा रहा उत्पाती वानर August 27, 2020 / August 27, 2020 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सामयिक व्यंग्य सुशील कुमार ‘नवीन’ चलिये आज एक नई कहानी सुनाते हैं। जंगल में एक पेड़ पर दो बन्दर रहते थे। शैतान तो दोनों ही थे पर एक ज्यादा था। मित्रवत थे सो एक-दूसरे के सुख-दुख के साझी भी थे। एक दिन पेड़ पर आदतन उछलकूद कर रहे थे। दूर एक पेड़ की छांव में […] Read more » उत्पाती वानर