राजनीति

सकारात्मक राजनीति के लिए राजनीति में आना होगा

वर्तमान लोकसभा चुनावों में तमाम प्रयासों के बाद भी मतदान का प्रतिशत प्रथम एवं द्वितीय चरण में बढ़ता नहीं दिखा। मतदाताओं की इस नकारात्मक या कहें कि उदासीन स्थिति के कारण…

मप्र में मीसा बंदियों के साथ भेदभाव

मध्यप्रदेश में मीसा बंदियों के साथ भेदभाव का मामला सामने आया है। यहां आपातकाल के दौरान मीसा के तहत बंदी बनाए गए लोगों को उनकी पार्टीगत निष्ठा को देखते हुए पेंशन दिया जा रहा है

मप्र में सुषमा स्वराज समेत 198 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला कल

पंद्रहवी लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दौरान मध्य प्रदेश में गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज सहित 198 उम्मीदवारों…

घाघ नेताओं के जमघट में बेबस आयोग – सरिता अरगरे

चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच ” तू डाल – डाल मैं पात- पात” का खेल दिन ब दिन तेज़ होता जा रहा है । राजनीतिक दलों की गतिविधियों पर चुनाव आयोग कड़ी निगाह रख रहा है…

नौकरशाहों सियासत में बढ़ता दखल – सरिता अरगरे

नौकरशाही का सफ़र तय करते हुए राजनीति की डगर पर बढ़ने वालों की फ़ेहरिस्त में डॉक्टर भागीरथ प्रसाद का नाम भी जुड़ गया है । इंदौर के देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय के कुलपति रहे डॉ…

राजनीतिक पार्टियां के चंदे का फंडा – अफरोज आलम ‘साहिल’

हमारे देश में जितनी भी राजनीतिक पार्टियां हैं, उन्हें अपना जनसेवा और राजनीति का कारोबार चलाने के लिए पैसा चाहिए। और पैसा भी खूब चाहिए। जलसा, सम्मेलन, चुनाव और प्रचार में उड़ते…

इन घटनाओं को अनदेखा न करें राजनैतिक मान्यवर

चिदम्बरम, जिन्दल और अब आडवानी….यह किसी चुनावी कार्यक्रम के लिए तिकड़ी जरूर न हो पर इस तिकड़ी में कुछ न कुछ साम्य अवश्य है। तीनों अपने-अपने चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त हैं…

जेहादी आतंकियों के समान ही खतरनाक हैं साम्यवादी चरमपंथी – गौतम चौधरी

उडीसा में चरम वामपथियों ने नल्को बाक्साईड खादान पर आक्रमण कर 14 औद्योगिक सुरक्षा गार्ड के जवानों को मौत के घाट उतार दिया। बिहार और झारखंड में कम से कम 02 सुरक्षा कर्मियों…

जारी है चुनावी आचार संहिता उल्लंघन का दौर…

पिछले दस वर्षों में भारत में चुनाव लड़ने के तौर-तरीक़ों में काफ़ी अंतर नज़र आ रहा है, चुनाव आयोग उम्मीदवारों और पार्टियों के ख़र्च पर कड़ी नज़र रख रहा है। चुनाव आचार संहिता को भी…

एक समसामयिक राजनीतिक व्यंग्य – दीपक ‘मशाल’

आज की ताज़ा खबर, आज की ताज़ा खबर… ‘कसाब की दाल में नमक ज्यादा’, आज की ताज़ा खबर…चौंकिए मत, क्या मजाक है यार, आप चौंके भी नहीं होंगे क्योंकि हमारी महान मीडिया कुछ समय बाद ऐसी खबरें बनाने लगे तो कोई बड़ी बात नहीं.

जनता के दबाव कांग्रेस ने की उम्मीजनता के दबाव कांग्रेस ने की उम्मीदवारी निरस्तदवारी निरस्त

संभवतः ऐसा पहली बार हुआ है, जब कांग्रेसियों ने अपने घोषित उम्मीदवार की उम्मीदवारी निरस्त कर दी। जगदीस टाइटलर और सज्जन कुमार को राजधानी से उम्मीदवार बनाया था। दिल्ली में सन 1984 के..

‘जरनैलिज्म’ नहीं जर्नलिज्म

यह अघोरपंथी राजनीति का दौर है। या यूं कहें कि अघोरपंथी राजनीति पर भदेस किस्म की प्रतिक्रिया है। अघोरपंथ में सांसारिक बंधनों और लोक मर्यादाओं की परवाह नहीं की जाती। आज राजनीति भी…