Category: राजनीति

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जीप के बोनट पर फारुक अहमद धर और बचाव में उतरे उमर अब्दुल्ला –

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उमर अब्दुल्ला और उनकी मानवाधिकार ब्रिगेड यह तो चिल्ला रही है कि मेजर गोगोई को , फारुख अहमद धर को जीप के बोनट पर नहीं बिठाना चाहिए था लेकिन यह नहीं बताती कि उस हालत में उसे इसके स्थान पर क्या करना चाहिए था ? स्थल सेनाध्यक्ष जनरल रावत ने बिल्कुल सही प्रश्न उठाया है कि यदि सीमा पर शत्रुओं के मन में और देश के भीतर देश के खिलाफ बन्दूक़ उठा लेने वालों के मन में सेना का भय नहीं रहेगा तो देश का भविष्य ख़तरे में पड़ जाएगा ।

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बाबरी ढांचा का गिरना साजिश कैसे हो गया ?

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1992 विवादित ढंचे के भस्‍मिभूत हो जाने के बाद जिस तरह का फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को सुनाया था, उसमें भी विवादित स्थल के दो हिस्से निर्मोही अखाड़ा और रामलला के ‘मित्र’ को दिए गए और एक हिस्सा मुसलमानों को, दिया गया था जिनका प्रतिनिधित्व उत्तर प्रदेश का सुन्नी सेंट्रल बोर्ड करता है। जब हाईकोर्ट के इस फैसले में यह माना गया है कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार मस्जिद के गुंबद के नीचे की जगह रामलला की जन्मस्थली है, इसलिए वह हिंदुओं को मिलनी चाहिए। एक बड़ा प्रश्‍न यह भी है कि अयोध्‍या के जिस स्‍थान को भारत की बहुसंख्‍यक जनता अपने आराध्‍य श्रीराम का जन्‍म स्‍थल मानती है, वहां उनका भव्‍य मंदिर नहीं होगा तो कहां होगा ?

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पत्थरबाजो! भारत छोड़ो,’ भाग-1

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यह कितने दुख की बात है कि इस देश के सनातन स्वरूप की त्रिवेणी अर्थात सनातन इतिहास, सनातन संस्कृति और सनातन धर्म से प्रेम करने वाले परमदेशभक्त कश्मीरी पंडितों को अपना घरबार छोडक़र अपने ही देश में शरणार्थी बनना पड़े और रोजी रोटी के लिए इधर-उधर भटकना पड़े, जबकि कश्मीर की केसर वाली क्यारी में उग आयी 'नागफनी' (सारे आतंकी संगठन) क्यारी पर अपना अधिकार जमा लें। निश्चित रूप से अब इन 'नागफनियों' के सफाये का समय आ गया है। जिसके लिए सारे देश को एकता के सुर निकालने होंगे, और अपनी सेना के साथ खड़ा होगा।

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पाकिस्तान परस्त मानसिकता और कश्मीर का दर्द

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पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के चलते कश्मीर में जिस प्रकार के हालात बने हुए हैं, उनसे यही कहा जा सकता है कि पाकिस्तान द्वारा इस मुद्दे को हमेशा उलझाए रखने की कवायद करता रहा है। इतना ही नहीं उसका यह खेल अब सारी दुनिया के सामने उजागर हो चुका है। अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश यह तो मानने लगा है कि पाकिस्तान के कारण ही कश्मीर के हालात बिगड़ रहे हैं, लेकिन कश्मीर को लेकर अमेरिका को पाकिस्तान पर जैसी कार्यवाही करना चाहिए, वैसी वह नहीं कर पा रहा है।

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केरल सरकार का असंवैधानिक कृत्य घोर निन्दनीय

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केन्द्र सरकार के नीति का विरोध करना ना तो राज्य के हित में है और ना ही प्रजातंत्र के। जहां वीफ को मर्यादित ढ़ंग से मनाने की छूट है वहीं भारतीय संविधान द्वारा चुनी हुई भारत सरकार को खुली चुनौती देना असंवैधानिक तथा देश विरोधी भी है।इससे ज्यादा तो देश की बहुत बड़ी आवादी की भावनाओं का सम्मान ना करते हुए खुलेआम एसी अनैतिक हरकत करना भी देश विरोधी की श्रेणी में आता है।

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माया के जाल में मायावती

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सवर्ण नेतृत्व को दरकिनार कर दलित और पिछड़ा नेतृत्व तीन दशक पहले इसलिए उभरा था, जिससे लंबे समय तक केंद्र व उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों की सत्ता पर काबिज रही कांग्रेस शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के जो लक्ष्य पूरे नहीं कर पाई थीं, वे पूरे हों। सामंती, बाहूबली और जातिवादी कुच्रक टूटें। किंतु ये लक्ष्य तो पूरे हुए नहीं, उल्टे सामाजिक शैक्षिक और आर्थिक विशमता उत्तोत्तर बढ़ती चली गई। सामाजिक न्याय के पैरोकारों का मकसद धन लेकर टिकट बेचने और आपराधिक पृष्ठभूमि के बाहुबलियों को अपने दल में विलय तक सिमट कर रह गए।

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जन विश्वास की कसौटी पर: मोदी सरकार

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यह पूछा जा सकता है कि मोदी सरकार भी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? इसके उत्तर में निसंदेह कहा जा सकता है कि भारतीय संविधान में कानून के समक्ष जो समानता का अधिकार दिया गया है, उसे मोदी सरकार ने बखूबी कायम किया है। अब यह कहावत बिल्कुल उलट चली है कि कानून गरीबों पर शासन करता है और अमीर कानून पर शासन करता है। इसी का नतीजा है कि बड़े राजनीतिज्ञ जैसे ओम प्रकाश चैटाला, छगन भुजबल जैसे लोग जेल में हैं, तो कई जेल जाने की प्रक्रिया में गुजर रहे हैं।

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