समाज क्यों गुम हो रहा है जीवन का संगीत? July 4, 2016 / July 4, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग जीवन का तब तक कोई मतलब नहीं होता जब तक इसे जीने वाला इसके लिये अर्थ न चुन ले। मानव जीवन का मूल्य तभी बढ़ता है जब आप जीवन को समझते हैं, जीवन के प्रति आपका सकारात्मक नजरिया होता है। क्लियरवाॅटर ने कहा भी है कि हरेक पल आप नया जन्म […] Read more » क्यों गुम हो रहा है जीवन का संगीत? गुम हो रहा है जीवन का संगीत
शख्सियत समाज हटेगा,गुमनामी बाबा के रहस्य से पर्दा ! July 2, 2016 / July 2, 2016 by संजय सक्सेना | Leave a Comment संजय सक्सेना हिन्दुस्तानी हुकूमतें चाहें तो किसी भी राज से पर्दा उठ सकता है और न चाहें तो जनता सिर पटक कर मर जाये,लेकिन किसी को कुछ पता नहीं चलता है। अगर ऐसा न होता तो फैजाबाद के गुमनामी बाबा (जिनके बार में आम धारणा यही है कि गुमनामी बाबा ही नेताजी सुभाष चन्द्र बोस […] Read more » Featured Gumnami Baba subhash chandra bose was subhash chandra bose the gumnami baba गुमनामी बाबा
आर्थिकी समाज उद्योग जगत में शीर्ष पर पहुँचती भारतीय महिलायें July 2, 2016 by पुष्पेन्द्र दीक्षित | Leave a Comment भारत ऐसा देश है जहां स्त्रियों को देवी का दर्जा दिया गया है । वैदिक काल के मनु महाराज ने कहा है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता अर्थात जहां नारियों की पूजा होती है ,वहाँ देवता निवास करते हैं । युग चाहे कोई भी रहा हो वैदिक काल से आधुनिक काल तक भारतीय […] Read more » Featured Indian women on the top indian women reaching on the top in business world successful women in banking sectors top Indian women उद्योग जगत भारतीय महिलायें शीर्ष पर पहुँचती भारतीय महिलायें
समाज ईद है मानव से मानव के मिलन का त्यौहार July 1, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग भारतवर्ष की ख्याति जहां यहां के साम्प्रदायिक सौहार्द एवं आपसी सद्भावना के कारण है वहीं यहां के पर्व-त्यौहारों की धर्म-समन्वय एवं एकता के कारण भी है। इन त्योहारों में इस देश की सांस्कृतिक विविधता झलकती है। यहां बहुत-सी कौमें एवं जातियां अपने-अपने पर्व-त्योहारों तथा रीति-रिवाजों के साथ आगे बढ़ी हैं। प्रत्येक पर्व-त्यौहार […] Read more » ईद मानव से मानव के मिलन का त्यौहार
समाज वेदाज्ञा के अनुसार पारिवारिक व्यवहार का स्वरूप July 1, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य चार वेद सब सत्य विद्याओं की पुस्तकें हैं। यह पुस्तकें मनुष्यों द्वारा रचित व लिखित न होकर अपौरुषेय हैं। इन ग्रन्थों में निहित ज्ञान को मनुष्यों को देने वाला परम पिता परमेश्वर ही है। सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर ने अपने पुत्र व पुत्रियों के तुल्य जीवों पर दया कर उन्हें कर्तव्याकर्तव्य […] Read more » पारिवारिक व्यवहार का स्वरूप
समाज वैदिक परिवार सुखी व श्रेष्ठ परिवार July 1, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य आदर्श परिवार और सन्तान सृष्टि के आरम्भ से ही मनुष्य समाज की प्राथमिक आवश्यकता रही है। हमें लगता है कि ईश्वर ने वेदों का जो ज्ञान दिया है उसमें इस बात को भी ध्यान रखा गया है और इसके सभी समाधान वेद में निहित है, ऐसा मानने के पर्याप्त आधार हैं। सभी […] Read more » वैदिक परिवार सुखी व श्रेष्ठ परिवार
पर्यावरण समाज बचायें जल,सवारें कल June 30, 2016 by पुष्पेन्द्र दीक्षित | Leave a Comment क्षिति,जल,पावक,गगन ,समीरा पांच तत्व से बना शरीरा अर्थात यह शरीर क्षिति (पृथ्वी ),जल ,पावक ,गगन और समीर (हवा ) इन पांच तत्वों से मिलकर बना है और इन पांच तत्वों मे जल एक ऐसा तत्व है ,जिसके बिना धरती पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है । आधुनिक वैज्ञानिकों की मानें तो […] Read more » Featured save humanity save water बचायें जल
समाज क्यों ना भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा भी लगाते? June 30, 2016 by डॉ नीलम महेन्द्रा | 2 Comments on क्यों ना भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा भी लगाते? टाइम्स नाऊ नमक अंग्रेजी न्यूज़ चैनल को दिए ताज़ा साक्षात्कार में माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भ्रष्टाचार से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा ” बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं जो दिखाई नहीं देतीं हैं। कोई इस चीज़ को नहीं समझ सकता कि मैं किस तरह की गंदगी का सामना […] Read more » Featured raise voice against corruption society against corruption भ्रष्टाचार मुक्त भारत भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा
समाज नशे में घुलता युवा भारत June 28, 2016 / June 28, 2016 by पुष्पेन्द्र दीक्षित | Leave a Comment पुष्पेन्द्र दीक्षित वर्तमान समय में भारत सम्पूर्ण विश्व में सबसे युवा आबादी वाला देश है । इसकी 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है । यह बात कहने में भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि भारत इस समय जवानी से लबालब भरा हुआ है ,जो किसी भी देश की प्रगति के लिए […] Read more » Featured young generation becoming alcoholic कोकीन गाजा चरस नशीली दवाइयाँ शराब शराबखोरी हेरोइन
समाज धर्मगुरुओं का व्यावसायी हो जाना! June 28, 2016 / June 28, 2016 by ललित गर्ग | 2 Comments on धर्मगुरुओं का व्यावसायी हो जाना! ललित गर्ग हाल में हमारे देश में अनेक ऐसे धर्मगुरुओं का उभार हुआ है, जिन्होंने धर्म को धन से जोड़ दिया है। वे भारत में सबसे तेज रफ्तार से उपभोक्ता सामान बेच कर लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। उनके प्रशंसकों की संख्या करोड़ों में है जो उन्हें धर्मगुरु से ज्यादा एक व्यावसायिक के रूप […] Read more » Featured धर्म और राजनीति धर्मगुरु धर्मगुरुओं की धन के प्रति बढ़ते आकर्षण व्यावसायी धर्मगुरु
समाज सती प्रथा और पुरातत्व से जुड़े चिह्न June 28, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी ऋषि-मुनियों और अवतारों की भूमि ‘भारत’ एक रहस्यमय देश है। भारत में अस्मत बचाने के लिए सती प्रथा की शुरुआत हुई। सन् ५१०- ११ ई. में लिखित एरण अभिलेख के द्वारा अभिलेखों के माध्यम से पहली बार सती प्रथा की जानकारी मिलती है। इस अभिलेख के कथनानुसर गोपालराजा, जब घमासान युद्ध के […] Read more » Featured सती प्रथा सती प्रथा पुरातत्व से जुड़े चिह्न सती प्रथा से जुड़े चिह्न
समाज अधिकारों की मारामारी में , कर्तव्यों की अनदेखी । June 27, 2016 by सुप्रिया सिंह | Leave a Comment यूपी सरकार ने जब यह आदेश निकाला की अब दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वालों को भी हेलमेट लगाना पङेगा तब उन लोगों ने इस फैसले की तारीफ तो ऐसी की जैसे वे इस तरह सरकारी फैसले कितनी शिद्दत से मानते हो । इस फैसले की तारीफ करने में उन लोगों नें भी देर नहीं की […] Read more » अधिकारों की मारामारी कर्तव्यों की अनदेखी ।