लेख समाज युवा पीढी नही देश का भविष्य बिगड़ रहा है ? October 13, 2011 / December 5, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 8 Comments on युवा पीढी नही देश का भविष्य बिगड़ रहा है ? आज हमारी युवा पीढी को न जाने क्या हो रहा है माँ बाप और टीचरों की जरा जरा सी बातो और डाट फटकार पर खुदकुशी और मारपीट की खबरें बहुत तेजी से सुनने को मिल रही हैं। अभी पिछले दिनों ही एक छात्र की करतूत ने गुरू शिष्य परंपरा को ही कलंकित कर के रख […] Read more » Country Future Young Generation देश का भविष्य युवा पीढी
समाज वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के कारण, समस्याएं एवं समाधान October 12, 2011 / December 5, 2011 by डॉ.रमेश प्रसाद द्विवेदी | 4 Comments on वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के कारण, समस्याएं एवं समाधान डां. रमेष प्रसाद द्विवेदी इतिहास इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्राचीन काल में वृद्धों की सिथति अत्यंत उन्नत एवं सम्मानीय रही हैं। उन्हें समाज एवं परिवार में अलग वर्चस्व था। परिवार की समस्त बागडोर उनके हाथों हुआ करती थी। परिवार को कोर्इ फैसला उनकी सलाह व मसविरे के आधार पर होता था। उन्हीं […] Read more » difficulties of old people वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं
समाज मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना October 11, 2011 / December 5, 2011 by निर्मल रानी | 2 Comments on मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना निर्मल रानी भारत वर्ष में सर्वधर्म संभाव व सांप्रदायिक सौहार्द्र जैसी बुनियादी प्रकृति को उजागर करने वाले अल्लामा इकबाल की यह पंक्तियां-मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना-हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदोस्तां हमारा, गत 6 अक्तूबर को हरियाणा के बराड़ा कस्बे में साक्षात रूप से चरितार्थ होते देखी गर्इं। यह अवसर था विश्व के […] Read more » मजहब
समाज आधुनिकता बनाम परिवार September 29, 2011 / December 6, 2011 by गंगानन्द झा | Leave a Comment परिवार की हमारी पारम्परिक अवधारणा और संरचना को आधुनिकता के ज्वार के कारण काफी तनाव का सामना करना पड रहा है । मनुष्य एक ही साथ व्यक्ति तथा समूह के अवयव की सत्ता रखा करता है । हमारी परम्परा में परिवार के सदस्य अपने को प्रथमतः परिवार के अवयव के रूप में पाया करते थे,यह […] Read more » modernism आधुनिकता बनाम परिवार
समाज विद्यालय विकास में अध्यापक का विशेष योगदान September 24, 2011 / December 6, 2011 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment वर्त्तमान में विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है | जो कि जन प्रतिनिधियों व अभिभावकों की सुगमता को ध्यान में रखकर विकास खंड के क्षेत्रीय विद्यालयों में कराया जा रहा है | जिनमे मुझे दिनांक – 19/09/2011 से 21/09/2011 तक प्रथम पाली में प्रशिक्षक श्री दिनेश सिंह राना जी […] Read more » School School Development अध्यापक विद्यालय
समाज युवाओं का काल बन रही हैं सुपरबाइक! September 22, 2011 / December 6, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on युवाओं का काल बन रही हैं सुपरबाइक! हमारी कि्रकेट टीम के पूर्व कप्तान मौ0 अज़हरूददीन ने शायद सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जो स्पोर्ट बाइक वह अपने बेटे अयाज़ुददीन को र्इद के तोहफे के तौर पर खुश करने को दे रहे हैं वही सुपर बाइक उनके बेटे की जान की दुश्मन बनकर उनके लिये गम का पहाड़ बन जायेगी। सुपर […] Read more » Eqbal Hindustani SuperBike इक़बाल हिंदुस्तानी युवाओं का काल सुपरबाइक
समाज ये कैसी अंधभक्ति ? September 18, 2011 / December 6, 2011 by राजकुमार साहू | 2 Comments on ये कैसी अंधभक्ति ? राजकुमार साहू हर बरस यह बात सामने आती है कि प्रतिमाओं के विसर्जन तथा श्रद्धा में लोग कहीं न कहीं, अंधभक्ति में दिखाई देते हैं और अन्य लोगों को होने वाली दिक्कतों तथा प्रकृति को होने वाले नुकसान से उन्हें कोई लेना-देना नहीं होता। अभी कुछ दिनों पहले जब गणेश प्रतिमाएं विराजित हुईं, उसके बाद […] Read more » blind faith अंधभक्ति
समाज वाम मोर्चे की प्रासंगिकता बरकरार है.. September 17, 2011 / December 6, 2011 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment श्रीराम तिवारी विगत अप्रैल-मई -२०११ में सम्पन्न पांच राज्यों के विधान सभा चुनाओं में राजनीतिक पार्टियों को बड़ा विसंगतिपूर्ण जनादेश प्राप्त हुआ है.बंगाल में ३५ साल तक लोकप्रिय रहे , पूंजीवादी संसार को हैरान करने वाले,साम्प्रदायिक कट्टरवादियों को नकेल डालने वाले,,भारत समेत तमाम दुनिया के मेहनत कश सर्वहारा वर्ग को आशान्वित करने वाले ’वाम मोर्चा’,को […] Read more » Communist वाम मोर्चे
समाज आर्थिक सहभागिता में ग्रामीण महिलाओं का योगदान September 16, 2011 / December 6, 2011 by डॉ.रमेश प्रसाद द्विवेदी | Leave a Comment डॉ. रमेष प्रसाद द्विवेदी प्रस्तावना: भारतीय समाज एक कृषि प्रधान समाज है जिसमें कृषक हस्तशिल्प में संलग्न कारीगर तथा द्वितीयक या निम्न सेवाओं में संलग्न व्यक्ति इस अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख अंग है। इन तीनों वर्गों में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। कृषि हस्तशिल्प से सम्बन्धित वस्तुओं के उत्पादन एवं विक्रय में महिलाओं ने […] Read more » Village ladies आर्थिक सहभागिता ग्रामीण महिलाओं का योगदान
समाज खून के रिश्ते क्यों हो रहे हैं खून के प्यासे? September 15, 2011 / December 6, 2011 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी मेरठ से ख़बर आई है कि वहां माल रोड पर एक आदमी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर अपने दो मासूम बेटांे और पत्नी को काट डाला। अपने ही बच्चो का गले रेतते हुए इस ज़ालिम बाप को ज़रा भी तरस नहीं आया। पुलिस ने इस दर्दनाक हत्याकांड मंे बिना जांच के ही […] Read more » blood relation खून के प्यासे खून के रिश्ते
समाज कब तक विस्फोट बर्दाश्त करेंगे हम September 15, 2011 / December 6, 2011 by पंकज चतुर्वेदी | Leave a Comment पंकज चतुर्वेदी दिल्ली हाई-कोर्ट के प्रवेश द्वार पर सात सितम्बर को हुए धमाके की गूंज जनता को तो सुनायी पड़ गयी पर जिम्मेदार शायद इस से अनजान है |इस धमाके के तार जिम्मेदारों की सभा पर हुए हमले के ,जिम्मेदार अफजल गूरू से जुड जाने के कारण ममला फिर दिल्ली से कश्मीर पहुँच गया है […] Read more » Delhi High Court Delhi High Court BOMB BLAST दिल्ली हाई-कोर्ट
समाज जब तक दुनिया में असमानता रहेगी -वामपंथ तब तक अमर रहेगा.{भाग-१} September 14, 2011 / December 6, 2011 by श्रीराम तिवारी | 5 Comments on जब तक दुनिया में असमानता रहेगी -वामपंथ तब तक अमर रहेगा.{भाग-१} श्रीराम तिवारी भारतीय दार्शनिक परम्परा में कार्य-कारण का सिद्धांत सारे प्रबुद्ध संसार में न केवल प्रसिद्ध है बल्कि उस पर वैज्ञानिक भौतिकवाद की मुहर भी अब से १५० साल पहले तब लग चुकी थी जब जर्मन दार्शनिकों और खास तौर से मेक्समूलर ,कार्ल मार्क्स और एंगेल्स ने इस भारतीय वेदान्त प्रणीत दर्शन को अपने एतिहासिक […] Read more » inequality वामपंथ