राजनीति समाज गोमांस पर अनावश्यक विवाद October 18, 2015 by विजय कुमार | 1 Comment on गोमांस पर अनावश्यक विवाद हमारा प्रिय भारत देश महान है; पर यहां का मीडिया उससे भी अधिक महान है। जिस समाचार से उनकी प्रसिद्धि बढ़े और विज्ञापन से उनकी झोली भरे, उसे वे सिर पर उठा लेते हैं। यदि खबर दिल्ली के आसपास की हो, तो फिर कहना ही क्या ? याद कीजिये दिल्ली का निर्भया कांड, नौएडा का […] Read more » Featured गोमांस गोमांस पर अनावश्यक विवाद
समाज हर समर्थ आदमी अपने से कमजोर का सहायक बने October 16, 2015 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग – पुराने जमाने की बात है। एक राजा था। उसे अपने विशाल साम्राज्य और धन-संपत्ति पर बहुत अभिमान था। एक दिन एक साधु उसके पास आया। उसने राजा को देखकर ही भांप लिया कि वह धन और सत्ता के मद में चूर है, लेकिन अंदर से खोखला है। राजा ने साधु से पूछा, […] Read more » हर समर्थ आदमी अपने से कमजोर का सहायक बने
राजनीति समाज समाज से सबक लें साहित्यकार October 14, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भः- दादरी-बिसहड़ा-कांड के बाद सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल प्रमोद भार्गव दादरी के बिसहाड़-कांड के घटनाक्रम में सामने आई असहिष्णुता को जिस दायित्व बोध और शालीन व्यवहार से गांव के ग्रामीणों ने पाटने का काम किया है,उसने सिद्ध कर दिया है कि भारत का मूल स्वरूप बहुलतावादी है। हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है तो इसलिए,क्योंकि बहुसंख्यक […] Read more » Featured समाज से सबक लें साहित्यकार
विविधा समाज जनजातीय संस्कृति पर छाया संकट October 14, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment शैलेन्द्र सिन्हा 9 अगस्त विश्व आदिवासी पुरे दुनिंया में मनाया जा रहा है।लेकिन झारखंड में आदिवासियों की जनसंख्या में लगातार ह्नास परिलक्षित हो रहा है,उनका राजनीतिक,सामाजिक व आर्थिक विकास धीमा हो गया है।आदिवासियों की जनसंख्या के कम होने से जनजातीय संस्कृति पर संकट आ गया है। झारखंड के आदिवासी की अस्मिता खतरे में […] Read more » decreasing population of adiwasi in Jharkhand Featured जनजातीय संस्कृति जनजातीय संस्कृति पर छाया संकट
समाज साहित्य रामराज्य – एक आदर्श राजविहीन राज्य October 12, 2015 by सुरेन्द्र नाथ गुप्ता | 2 Comments on रामराज्य – एक आदर्श राजविहीन राज्य सुरेन्द्र नाथ गुप्त राम राज्य की कल्पना सर्वप्रथम महाराज मनु ने की थी जब मनु-शतरूपा ने तप करके भगवान से वर मांगा था कि तुम्हारे समान पुत्र हो। मनु-शतरूपा निसंतान नहीं थे, उनके दो पुत्र उत्तानपाद व प्रियव्रत और एक पुत्री देवहूती थी, फिर भी भगवान से पुत्र मांगा और वह भी बिल्कुल उन्ही के […] Read more » Featured रामराज्य
जन-जागरण समाज सूचना का अधिकार व सामाजिक परिवर्तन October 12, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment आदिमकालीन मानव शनैः शनैः सभ्यता की ओर अग्रसर हुआ .भाषा व लिपि का अविष्कार होने के पश्चात् मानव समाज ने अनुशासन की आवश्यकता पूर्ति के लिये नियमों एवं रीति – रिवाजों की स्थापना की .उस समय मानव ने महसूस कर लिया था कि जंगल का कानून मानव समाज के हित में नहीं है .विश्व की […] Read more » Featured सामाजिक परिवर्तन सूचना का अधिकार
राजनीति समाज भारतीय दर्शन, इतिहास,पुराण ,मिथ या वाङ्ग्मय- सभी में गौ माँस का निषेध है ! October 12, 2015 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment बिहार विधान सभा चुनाव् प्रचार में व्यस्त सभी पूँजीवादी पार्टियों का ‘अभद्र’ नेतत्व लगभग अपनी नंगई पर उत्तर आया । खेद की बात है कि बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के बदजुबान नेताओं के ‘बंदरिया नाच ‘ पर उनके अंध समर्थक तमाशबीनों की तरह फोकट में तालियाँ बजाते रहे । इन दम्भी और असत्याचरणी नेताओं का […] Read more » Featured इतिहास गौ माँस का निषेध पुराण भारतीय दर्शन मिथ या वाङ्ग्मय- सभी में गौ माँस का निषेध है !
राजनीति समाज धर्म के नाम पर युवाओं का ध्रुवीकरण घातक है October 12, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेंद्र चौहान आज हर चुनाव के पहले धर्म के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण किए जाने की कोशिश होती है. लेकिन अब देश में धर्म के नाम पर युवाओं का ध्रुवीकरण किया जा रहा है. राजनीति के गलियारों में चलने वाली साम्प्रदायिकता की ज़हरीली हवा समाज में इस कदर घुल रही है कि इसका प्रभाव […] Read more » Featured धर्म के नाम पर युवाओं का ध्रुवीकरण युवाओं का ध्रुवीकरण
टॉप स्टोरी समाज गोहत्या पर यह कैसी राजनीति? October 10, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ.वेदप्रताप वैदिक गोमांस खाने के शक को लेकर मोहम्मद इखलाक की जो हत्या हुई है, उसकी भर्त्सना पूरे देश ने की है लेकिन फिर भी क्या कारण है कि इस मुद्दे पर देश में बेहद कटु और ओछी बहस चल पड़ी है? सिर्फ नेताओं ही नहीं, बुद्धिजीवियों में भी आरोपों−प्रत्यारोपों की बाढ़-सी आ गई है। […] Read more » गोहत्या गोहत्या पर यह कैसी राजनीति? यह कैसी राजनीति?
जन-जागरण समाज दादरी जैसी घटनाऐं : आत्म मंथन की जरूरत October 10, 2015 by शाहिद नकवी | Leave a Comment दादरी के बिसड़ा गांव में जो हुआ उसने दुनिया को फिर याद दिलाया कि हमारे प्रधानमंत्री चाहे नये भारत की कितनी भी बातें करें , युवा भारत के र्निमाण का सपना दिखायों लेकिन आज भी भारत की आधुनिकता सिर्फ एक कमजोर कड़ी की तरह है , जिसके पीछे छिपा है वही पुराना धार्मिक कट्टरपंथ और […] Read more » Featured आत्म मंथन की जरूरत दादरी जैसी घटनाऐं
राजनीति समाज शोहरत का ‘ शार्टकट ’ : ज़हरीले बोल ? October 10, 2015 by निर्मल रानी | 1 Comment on शोहरत का ‘ शार्टकट ’ : ज़हरीले बोल ? निर्मल रानी भारतवर्ष प्राचीन संस्कृति व सभ्यता वाला एक ऐसा देश है जिसे एक शिष्ट, संस्कारित,मेहमाननवाज़, परोपकारी तथा त्यागी व तपस्वी लोगों के विशाल देश के रूप में जाना जाता है। हमें अपने पूवर्जों से मिले तमाम ध्येय वाक्य जैसे सत्यमेव जयते,बहुजन हिताय बहुजन सुखाए,सत्यम शिवम सुंदरम,सर्वे भवंतु सुखिन:,अहिंसा परमोधर्म: व वसुधैव कुटंबकम आदि इस […] Read more » Featured ज़हरीले बोल ? शोहरत का ‘ शार्टकट ’
टॉप स्टोरी विविधा समाज देश में सभी धर्मों का सम्मान जरूरी October 10, 2015 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिंदुस्थानी विश्व में एक मात्र भारत ही ऐसा देश है जहां के मूल नागरिक किसी भी सम्प्रदाय के व्यक्ति के साथ कोई भेदभाव नहीं करता। यह भारत भूमि का प्रभाव है कि इस भूमि पर अनेक ऐसे महापुरुष पैदा किए, जिसमें जाति सम्प्रदाय को महत्व नही दिया। भारत की मूल अवधारणा को आत्मसात करने […] Read more » Featured देश में सभी धर्मों का सम्मान जरूरी सभी धर्मों का सम्मान