समाज नाम का काम October 3, 2015 by शंकर शरण | Leave a Comment शंकर शरण हाल में नई दिल्ली में ‘औरंगजेब रोड’ का नाम बदलने पर प्रसिद्ध अंगेजी पत्रकार करन थापर ने लेख लिखकर कड़ा प्रतिवाद किया। उन के तर्क विचारणीय, चाहे आश्चर्यजनक हैं, जो प्रकारांतर दिखाते हैं कि लंबे समय से चले आ रहे गलत या जबरिया नामकरण किस तरह हमारी मानसिकता बिगाड़ देते हैं। थापर ने […] Read more » Featured
समाज मनु बेन की डायरी October 3, 2015 / October 3, 2015 by शंकर शरण | 4 Comments on मनु बेन की डायरी शंकर शरण दो वर्ष पहले मनु बेन की डायरी प्रकाश में आई। मनु बेन महात्मा गाँधी के अंतिम वर्षों की निकट सहयोगी थीं। इस डायरी से उन कई बिन्दुओं पर प्रकाश पड़ता है, जो अभी तक कुछ धुँधलके में थीं। इस से महात्मा गाँधी की प्राकृतिक चिकित्सा, निजी जीवन या कथित ब्रह्मचर्य प्रयोग संबंधी विवादास्पद […] Read more » Featured मनु बेन की डायरी
राजनीति समाज किसान आत्महत्याओं का अर्थशास्त्र October 3, 2015 by संजय पराते | Leave a Comment भूख से होने वाली मौतें और किसान आत्महत्याएं कभी भी सत्ताधारी पार्टी और शासक वर्ग के लिए चिंता का विषय नहीं बनती, क्योंकि इससे धनकुबेरों के मुनाफों पर कोई चोट नहीं पहुंचती.लेकिन वे हमेशा इस परिघटना के एक राजनैतिक मुद्दा बनने से जरूर डरते हैं, क्योंकि इससे उनके वोट बैंक को नुकसान पहुंचता है.इसलिए उनकी […] Read more » Featured किसान आत्महत्या किसान आत्महत्याओं का अर्थशास्त्र-
राजनीति समाज समसामयिक संदर्भ में भगत सिंह के विचार September 27, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेन्द्र चौहान भगत सिंह को भारत के सभी विचारों वाले लोग बहुत श्रद्धा और सम्मान से याद करते हैं। वे उन्हें देश पर कुर्बान होने वाले एक जज़बाती हीरो और उनके बलिदान को याद करके उनके आगे विनत होते हैं। वे उन्हें देवत्व प्रदान कर तुष्ट हो जाते हैं और अपने कर्तव्य की इतिश्री मान […] Read more » Featured भगत सिंह भगत सिंह के विचार समसामयिक संदर्भ में भगत सिंह के विचार
आर्थिकी विधि-कानून समाज आर्थिक आधार पर आरक्षण से परहेज क्यों ? September 27, 2015 by पियूष द्विवेदी 'भारत' | 1 Comment on आर्थिक आधार पर आरक्षण से परहेज क्यों ? पीयूष द्विवेदी आरक्षण तो इस देश में हमेशा से ही बहस, विवाद और राजनीति का विषय रहा है । पर फ़िलहाल कुछ समय से ये विषय ठण्डा पड़ा था जिसे गुजरात में हार्दिक पटेल के नेतृत्व में पटेल आरक्षण की मांग को लेकर उठे विवाद ने एकबार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया । […] Read more » Featured आर्थिक आधार पर आरक्षण आर्थिक आधार पर आरक्षण से परहेज
राजनीति समाज ये बेचारे जाति के मारे September 26, 2015 by वीरेंदर परिहार | 3 Comments on ये बेचारे जाति के मारे बीरेन्द्र सिंह परिहार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघंचालक ने आरक्षण के संबंध में पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि एक समिति बनाई जानी चाहिए जो यह तय करे कि किन लोगों को और कितनों दिनों तक आरक्षण की आवश्यकता है । उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी समिति में राजनीतिज्ञों […] Read more » Featured
विविधा समाज शिक्षित बेरोजगारी की भयावह तस्वीर September 25, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव भारत को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बना देने वालों की नींद अब टूटनी चाहिए। जिस युवा जनसंख्या के बूते इक्कीसवीं शताब्दी को भारतीय युवाओं की शताब्दी होने का दंभ भरा जा रहा है,उसे उत्तर-प्रदेश में खड़ी शिक्षित बेरोजगारों की फौज ने आइना दिखा दिया है। जहां विधानसभा सचिवालय में भृत्य के महज 368 पदों […] Read more » Featured बेरोजगारी शिक्षित बेरोजगारी शिक्षित बेरोजगारी की भयावह तस्वीर
राजनीति शख्सियत समाज बाबासाहेब की अंतर्दृष्टि के अनुरूप हैं संघप्रमुख के विचार September 22, 2015 by प्रवीण गुगनानी | 1 Comment on बाबासाहेब की अंतर्दृष्टि के अनुरूप हैं संघप्रमुख के विचार सरसंघचालक जी अर्थात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, प्रमुख मोहन रावजी भागवत के आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार की आवश्यकता व्यक्त करनें से वैचारिक तूफ़ान खड़ा हो गया है. संघप्रमुख ने आरक्षण के औचित्य पर प्रश्न कतई नहीं किया है, यह स्पष्ट है. मीडिया ने जानबूझकर उनसे बीते वर्षों में समय समय पर सार्वजनिक तौर पर उलझानें […] Read more » Featured बाबासाहेब की अंतर्दृष्टि के अनुरूप हैं संघप्रमुख के विचार
समाज कम हो पाएगा स्कूली बस्तों का बोझ? September 20, 2015 by उमेश चतुर्वेदी | Leave a Comment राजनीतिक दल चुनाव मैदान में उतरते हुए ढेर सारे वायदे करते हैं। लेकिन अगर वे चुनाव जीतकर सरकार बना लेते हैं, तो तमाम वायदे भूलने लगते हैं। स्कूली बस्ते से बोझ हटाने का वायदा भी ऐसा ही है। करीब 27 साल से लटकी इस योजना को अब तक किसी सरकार ने गंभीरता से लागू करने […] Read more » Featured
समाज उनकी दुआओं से बरसती हैं रहमतें September 18, 2015 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment पितृपक्ष पर विशेषः संजय द्विवेदी बुर्जुगों की दुआएं और पुरखों की आत्माएं जब आशीष देती हैं तो हमारी जिंदगी में रहमतें बरसने लगती हैं। धरती पर हमारे बुर्जुग और आकाश से हमारे पुरखे हमारी जिंदगी को रौशन करने के लिए दुआ करते हैं। उनकी दुआओं-आशीषों से ही पूरा घर चहकता है। किलकारियों से गूंजता है […] Read more » उनकी दुआओं से बरसती हैं रहमतें
समाज देश की आधी आबादी को कब मिलेगी पूरी आजादी September 18, 2015 / September 18, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment ऋतुपर्ण दवे देश की आधी आबादी का सच बहुत ही दर्दनाक और खौफनाक होता जा रहा है। बात सिर्फ महिला उत्पीड़न ही नहीं उससे भी आगे की है। यौन हिंसा, धमकाना और जान ले लेना बहुत ही आसान सा हो गया है। ऐसा लगता है कि समाज में रहकर भी सुरक्षित नहीं है महिलाएं। रसूख […] Read more » Featured
खेत-खलिहान समाज कृषकों की आत्महत्त्याएं कैसे रुकेगी? September 11, 2015 / September 11, 2015 by डॉ. मधुसूदन | 18 Comments on कृषकों की आत्महत्त्याएं कैसे रुकेगी? डॉ. मधुसूदन (एक) कृषकों की आत्महत्त्याओं को घटाने के लिए। प्रायः ६० करोड की कृषक जनसंख्या, सकल घरेलु उत्पाद का केवल १५ % का योगदान करती है। और उसीपर जीविका चलाती है।विचारक विचार करें।अर्थात, भारत की प्रायः आधी जनसंख्या और, केवल १५% सकल घरेलु उत्पाद? बस? जब वर्षा अनियमित होती है, तब इन का उत्पाद […] Read more » Featured how to stop farmers suicide कृषकों की आत्महत्त्याएं