समाज आधुनिकता की चमक और रिश्तों की मर्यादा September 10, 2015 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिंदुस्थानी भारतीय संस्कृति के संवाहकों में जिस प्रकार से पाश्चात्य जीवन शैली की झलक की घुसपैठ हुई है, उससे यह तो सवाल पैदा हुआ है कि हम भारतीय आखिर कौन से मार्ग पर जा रहे हैं ? क्या यह मार्ग भारत की जीवंतता को प्रदर्शित करता है, अगर नहीं तो हम सब जाने अनजाने […] Read more » Featured आधुनिकता की चमक रिश्तों की मर्यादा
जन-जागरण विविधा समाज अगर अल्लाह पैदा करना चाहेगा….. September 9, 2015 by आशीष कुमार ‘अंशु’ | 3 Comments on अगर अल्लाह पैदा करना चाहेगा….. आशीष कुमार ‘अंशु’ वर्ष 2005 में 21 देशों से इस्लामिक विषयों के 40 विद्वान इस्लामाबाद में इकट्ठे हुए. वहां बात होनी थी, मुसलमानों के बीच गर्भ निरोध के सवाल को लेकर. विद्वानों के बीच लंबी चर्चा चलती रही और तीन दिनों के बाद भी सभी 40 विद्वान जनसंख्या नियंत्रण को लेकर एक राय बनाने के […] Read more » Featured
विविधा शख्सियत समाज हिंदी दिवस आधुनिक हिंदी के जनक थे भारतेन्दु September 9, 2015 by हिमकर श्याम | Leave a Comment (जन्म दिवस पर विशेष) हिमकर श्याम हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल का प्रारम्भ ‘भारतेन्दु काल’ से माना जाता है. भारतेन्दु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी के जन्मदाता और भारतीय नवजागरण के अग्रदूत थे. वह बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न साहित्यकार थे. उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी की वह एक साथ कवि, नाटककार, पत्रकार एवं निबंधकार थे. उन्होंने […] Read more » Featured आधुनिक हिंदी के जनक भारतेन्दु
लेख विविधा समाज साहित्य बंद समाज की जटिलता September 9, 2015 / September 9, 2015 by विजय कुमार | Leave a Comment पिछले सप्ताह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व था। कई लोग इस दिन निर्जल उपवास रखते हैं और रात को बारह बजे श्रीकृष्ण जन्म के बाद ही प्रसाद ग्रहण करते हैं। विद्यालयों में छुट्टी रहती है। छोटे बच्चों को इस दिन बालकृष्ण और राधा के रूप में सजाया जाता है। कई जगह बच्चे झांकी भी बनाते […] Read more » Featured
समाज मुस्लिम आबादी की तेज़ बढ़त का कारण मज़हब है? September 7, 2015 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on मुस्लिम आबादी की तेज़ बढ़त का कारण मज़हब है? इक़बाल हिंदुस्तानी शिक्षित और सम्पन्न सभी वर्ग परिवार नियोजन अपनाते रहे हैं! विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया ने मांग की है कि दो से अधिक बच्चे पैदा करने वाले मुस्लिमों को कानून बनाकर सज़ा देनी चाहिये। हालांकि संविधान ऐसा करने की इजाज़त नहीं देता और अगर ऐसा कोई पक्षपात पूर्ण कानून बनाया भी गया तो […] Read more » Featured मुस्लिम आबादी मुस्लिम आबादी की तेज़ बढ़त का कारण
बच्चों का पन्ना समाज मासूम बचपन का शोषण एवं उत्पीडन September 5, 2015 / September 5, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अभी चंद दिन पहले दिल्ली के लगभग सभी अखबारों में यह दुखद खबर छपी कि एक पंद्रह वर्षीय छात्र, शुभम जिंदल जो कृष्णा मॉडल स्कूल में नवीं कक्षा में पढ़ते थे, को उसी के दो सहपाठियों ने लकड़ी के एक मजबूत डंडे से सिर पर लगातार वार करते हुए पहले बुरी तरह घायल क्या और […] Read more » Featured मासूम बचपन का शोषण एवं उत्पीरण
जन-जागरण विधि-कानून समाज अब समान नागरिक संहिता लागू करने का सही समय September 4, 2015 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment मृत्युंजय दीक्षित आजकल बिहार विधानसभा चुनावों का दौर चल रहा है। बिहार के चुनावों में जातिगत मुददा हावी है इसी बीच केंद्र सरकार ने धर्म आधारित जनगणना के आंकड़ों को बेहद शांत तरीके से जारी कर दिये हैं जिसके बाद जनमानस में एक नयी बहस को भी जन्म दे दिया है। इन आंकड़ों को देखकर […] Read more » समान नागरिक संहिता
शख्सियत समाज भारतीय शिक्षा जगत को नयी दिशा देने वाले – डा. राधाकृष्णन् September 4, 2015 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर विशेषः- मृत्युंजय दीक्षित भारतीय शिक्षा जगत को नई दिशा देने वाले डा. राधाकृष्णन का जन्म दक्षिण मद्रास में लगभग 60 किमी की दूरी पर स्थित तिरूतनी नामक छोटे से कस्बे में 5 सितम्बर सन 1888 ई. को सर्वपल्ली वीरास्वामी के घर पर हुआ था। उनके पिता वीरास्वामी जमींदार की कोर्ट […] Read more » Featured डा. राधाकृष्णन् भारतीय शिक्षा जगत को नयी दिशा देने वाले
जन-जागरण विविधा समाज समाज में संस्कार गढने वाला गुरू समाज में सम्मान को तरसता September 4, 2015 / September 5, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on समाज में संस्कार गढने वाला गुरू समाज में सम्मान को तरसता 5 सितम्बर को एक बार फिर सारा देश भारत के पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली डां. राधाकृष्णन का जन्मदिवस शिक्षक दिवस के रूप में मनाने जा रहा है। महर्षि अरविंद ने शिक्षकों के संबंध में कहा है कि शिक्षक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और […] Read more » Featured
जरूर पढ़ें समाज कामवासना की अमूल्य ऊर्जा September 4, 2015 / September 4, 2015 by डॉ. राजेश कपूर | 49 Comments on कामवासना की अमूल्य ऊर्जा कामवासना की अमूल्य ऊर्जा-१ आधुनिक समाज, चिकित्सकों और वैज्ञानिकों में यह विचार गहरी जड़े जमा चुका है कि शुक्र रक्षा या ब्रह्मचर्य का पालन करना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लियें हानिकारक है। वीर्य रक्षा तथा ब्रह्मचर्य अज्ञानता है, धार्मिक अंधविश्वास है और पिछड़ेपन की बात है। आधुनिकता से इस पिछड़े अंधकार युग के विचारों […] Read more » Featured कामवासना की अमूल्य ऊर्जा
राजनीति समाज अधिकार नहीं ज़रूरत बने आरक्षण व्यवस्था September 3, 2015 / September 3, 2015 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी हमारे देश में नौकरी,पदोन्नति,शिक्षण संस्थाओं में दाख़िला तथा संसदीय निर्वाचन व्यवस्था जैसे और भी कई क्षेत्रों में लागू की गई जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था को लेकर देश में कई बार हालात बेक़ाबू होते देखे गए हैं। कभी आरक्षण के पक्षधर आरक्षण की मांग को लेकर या आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने अथवा इसे लागू […] Read more » Featured अधिकार नहीं ज़रूरत बने आरक्षण व्यवस्था
जन-जागरण समाज मृतक श्राद्ध विषयक भ्रान्तियां: विचार और समाधान September 1, 2015 / September 1, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हिन्दू समाज आज कल अन्धविश्वासों का पर्याय बन गया है। श्राद्ध शब्द को पढ़कर धर्म-कर्म में रूचि न रखने वाला एक अल्प ज्ञानी सामान्य व्यक्ति भी समझता है कि श्राद्ध अवश्य ही श्रद्धा से सम्बन्ध रखता है। जिस प्रकार से देव से देवता शब्द बनता है उसी प्रकार से श्रद्धा से श्राद्ध बनता है। श्रद्धा […] Read more » Featured मृतक श्राद्ध